Hindi Post Nibandh Aur Bhashan

राष्ट्रीय युवा दिवस पर निबंध (National Youth Day Essay In Hindi)

राष्ट्रीय युवा दिवस पर निबंध (National Youth Day Essay In Hindi)

National Youth Day Essay In Hindi - Nibandh
National Youth Day Essay In Hindi – Nibandh

राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day Essay 2024) – स्वामी विवेकानंद प्रत्येक आदर्शनिष्ठ युवा के प्रेरणा स्रोत हैं। उनका प्रत्येक शब्द युवा पीढ़ी के लिए ध्वनित हुआ है। संभवतः इसीलिए स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस 12 जनवरी को भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उनकी जयंती को भारत सरकार द्वारा 1984 में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई। इस प्रकार वर्ष 1985 से नेशनल यूथ डे मनाने का सिलसिला शुरू हुआ। आइये विस्तार से जानते हैं कि इस राष्ट्रीय युवा दिवस पर देश की रीढ़ माने जाने वाली युवा पीढ़ी के लिए क्या है स्वामी विवेकानंद का खास संदेश?

यदि हम अपनी चिंतन शक्ति तथा दृष्टि को थोड़ी सूक्ष्मता के साथ गहन करें, तो हमें सहज ही स्पष्ट हो जाएगा कि स्वामी जी के विचारों ने सदा ही भारत देश के युवाओं के हृदय में बोध के तार झंकृत किए हैं। श्री अरविंद घोष, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू ये सभी अपनी युवावस्था में स्वामीजी की वैचारिक-आध्यात्मिक चेतना से प्रेरित-प्रभावित रहे हैं।

स्थिति आज भी वही है। प्रत्येक आदर्श-निष्ठ युवा के प्रेरणास्रोत और कोई नहीं स्वामी विवेकानंद हैं। वे भारतीय युवा प्रेरणा के प्रतीक पुरुष या यूथ आइकन हैं। उनका सुन्दर मुख हमें आकर्षित भी करता है और प्रेरित भी। उनका सिंह के समान साहस व निर्भय भाव, उनकी आँखों में ज्ञान कि गहराई के साथ प्राणी मात्र के लिए करुणा का सागर लहराता हुआ दिखाई देता है। उनके हृदय से उत्पन्न हुए स्वरों को जो आज विविध पुस्तकों के पृष्ठों में अंकित है, यदि हम पढ़े तो हमें ऐसा अनुभव होता है मानो स्वामी विवेकानंद अपनी मन की बात, अपने हृदय कि पीड़ा हमारे सामने रख रहें हैं। उनकी वाणी से ऐसा लगता है कि उनके हृदय में भारत देश की युवा पीढ़ी के प्रति असीम प्रेम है और दृढ़ विश्वास भी। युवा पीढ़ी के लिए उनका स्नेह और विश्वास ही नवयुवकों के लिए प्रेरक शक्ति का कार्य करता है। नवयुवको पर उनकी बातों का प्रभाव विद्युत तरंगो के समान पड़ता है। 

आज जब कोई युवक अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु परिश्रम करता है और यदि वह असफल हो जाता है तो उसका मन टूट जाता है, हताशा का अंधकार उसे घेर लेता है, फिर व्यक्ति या तो आत्महत्या का निर्णय ले लेता है अथवा फिर समझौतावादी बन जाता है। ऐसे में युवकों के लिए स्वामी विवेकानंद आशावादी तथा संघर्ष के स्वरों में एक मधुर गीत के समान कुछ पंक्तियाँ अपने एक भाषण में इस प्रकार कहते हैं- ‘असफलता तो जीवन का सौंदर्य है। यदि तुम हजार बार भी असफल हो तो एक बार फिर से सफल होने का प्रयत्न करो।’

युवकों के प्रति अपनी इस वाणी से घोर निराशा के अंधकार में भी आशा की किरण के साथ वह उन्हें जीवन संग्राम में डटकर संघर्ष करने की ओर प्रेरित करते हैं। और यदि सूक्ष्म दृष्टि से देखें तो उनका ही जीवन सौंदर्यमय हैं, जिनके जीवन में निरंतर संघर्ष है। मानव जीवन का संग्राम एक ऐसा युद्ध है, जो हथियार से नहीं जीता जा सकता। वह तो मनुष्य के भीतर छुपी शक्ति को प्रकट करके ही जीता जा सकता है। 

ध्यान रहे जब मनुष्य के भीतर शक्ति का संचार होता है तो वह अपनी सभी असफलताओं को सफलता में परिवर्तित कर लेता है। उस शक्ति के अभाव में मृत हुआ जीवन पुन: जीवित हो जीवन के संघर्ष को उतर पड़ता है। आत्मशक्ति से भरा व्यक्ति असफलता को धूल के समान झटककर फेंक देता है और सिंह गर्जन कर नि:स्वार्थ बन अपने जीवन को विस्तारित करता है।

‘यह ध्रुव सत्य है कि शक्ति ही जीवन है। शक्ति ही अनंत सुख है, चिरंतर और शाश्वत जीवन है और दुर्बलता मृत्यु है। दुर्बल व्यक्ति के लिए न तो इस जगत में और न ही किसी दूसरे लोक में कोई स्थान है। दुर्बलता हमें सभी प्रकार की गुलामी की ओर ले जाती है। दुर्बलता शारीरिक व मानसिक रूप से निरंतर तनाव का कारण है। दुर्बलता मानव की देह ही नहीं, चेतना की भी मृत्यु है। इसीलिए मैं कहता हूँ कि दुर्बलों एवं कायरों की आवश्यकता नहीं है। मुझे चाहिए ऐसे नवयुवक, जिनके स्नायु लोहे के बने हों और मांसपेशियां फौलाद की बनी हों तथा जिनकी वृत्ति लोभ और स्वार्थ की सीमाओं के बाहर हो।’

तुम्हारे हृदय में सबके लिए दर्द हो, गरीब, मूर्ख, पददलित मनुष्यों के दुख को तुम अनुभव करो। संवेदना से तुम्हारे हृदय का स्पंदन बढ़ जाये, मस्तिष्क चकराने लगे, तुम्हें ऐसा प्रतीत हो कि तुम पागल तो नहीं हो रहे हो, फिर ईश्वर के चरणों में अपना हृदय खोल दो, तभी शक्ति, सहायता और अदम्य उत्साह तुम्हें मिल जाएगा। आज मैं तुम्हें भी अपने जीवन का मूलमंत्र बताता हूँ, वह यह है कि “प्रयत्न करते रहो, जब तुम्हें अपने चारों ओर अंधकार-ही-अंधकार दिखता हो, तब भी मैं कहता हूँ कि प्रयत्न करते रहो। किसी भी परिस्थिति में तुम हारो मत, बस प्रयत्न करते रहो। तुम्हें तुम्हारा लक्ष्य ही मिलेगा। इसमें तनिक भी संदेह नहीं।”

“यदि तुम मेरी बात सुनो तो तुम्हे अब पहले अपनी कोठरी का बंद दरवाजा खुला रखना होगा। अपने मन को आग्रह, दुराग्रह हठाग्रह आदि से मुक्त रखना होगा। अपने मन में श्रेष्ठ चिंतन को सदा स्थान देना होगा। अपनी क्षमता एवं शक्ति को व्यर्थ नष्ट करने एवं सदैव निरर्थक बकवास करने के स्थान पर बड़ों का सम्मान, ईर्ष्याहीनता, अथक लगन और अटूट आत्मविश्वास को बढ़ाने में लगाना होगा। आज्ञा देने की क्षमता प्राप्त करने के पहले प्रत्येक व्यक्ति को आज्ञा पालन करना सीखना होगा। इन दुर्गुणों के त्याग के बाद ही हम एकजुट एवं संगठित हो सकेंगे। यह हमेशा संगठन का मंत्र है।” प्रत्येक मनुष्य एवं प्रत्येक राष्ट्र को महान बनाने के लिए तीन बातें आवश्यक हैं-

१- सदाचार की शक्ति में विश्वास।
२- ईर्ष्या और संदेह का परित्याग।
३- जो सतत करने के लिए यत्नवान हों या जो कर रहे हों, उनकी सहायता करना।”

“केवल वही व्यक्ति सबकी अपेक्षा उत्तम रूप से कार्य करता है जो पूर्णतः निस्वार्थी है, जिसे न तो धन की लालसा है, न कीर्ति की और न किसी अन्य वस्तु की ही। मनुष्य जब ऐसा करने में समर्थ हो जाता है तो वह भी एक बुद्ध के स्तर का बन जाता है और उसके भीतर ऐसी शक्ति प्रकट होती है, जो संसार की अवस्था को संपूर्ण रूप से परिवर्तित कर सकती है, लेकिन इसके लिए तुम पहले से ही बड़ी-बड़ी योजनाएं न बनाओ, धीरे-धीरे कार्य प्रारंभ करो, जिस जमीन पर खड़े हो, उसे अच्छी तरह से पकड़कर क्रमश: ऊँचे चढ़ने का प्रयत्न करो। एकाएक मंजिल को पाने का प्रयास मत करो। हमारे इन्हीं महान कार्यों पर भारत का भविष्य निर्भर है। अतः यदि भारत को महान बनाना है तो उसका भविष्य उज्ज्वल करना है तो इसके लिए आवश्यकता है संगठन की, शक्तिसंग्रह की और बिखरी हुई इच्छाशक्ति को एकत्र कर उसमें समन्वय लाने की। इसलिए तुम सब लोग एकमत हो जाओ, सब लोग एक ही विचार के बन जाओ।”

यदि भारत के युवा ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय ‘ के मंत्र को जीवन का अंग बना लेंगे तो किसी की सामर्थ्य नहीं की उनकी राह को कोई रोक सके। पर इसके लिए “आवश्यकता है वीर्यवान, तेजस्वी, श्रद्धा संपन्न और दृढ़ विश्वासी, निष्कपट युवकों की। जो सच्चे हृदय से राष्ट्रनिर्माण का व्रत ले सकें तथा उसे ही अपना एकमात्र कर्तव्य समझें। जो साहसी हो, पुरुषार्थी, क्षात्रवीर्य से संपन्न हों। जो नाम, यश अथवा अन्य तुक्ष्य विषयों के प्रति आकर्षित ना हो, स्वार्थहीन हो तथा आत्मविश्वासी हो तथा जो क्षमता प्रिय और ईर्ष्या से मुक्त हो। लोहे की नसें और फौलाद के स्नायु, जिनके भीतर ऐसे मन वास करता हो, जो कि वज्र के समान पदार्थ का बना हो। ऐसे सौ मिल जाएँ तो संसार का कायाकल्प हो जाएगा।”

यह एक सुखद और आशा से भरा हुआ संयोग ही है कि भारत में जीतनी भारी संख्या में युवा मौजूद हैं उतनी संख्या में विश्व के किसी देश में नहीं हैं। अगर अभी भी देश के करोड़ों युवा स्वामी विवेकानंद के इस सन्देश की गहराई और महत्ता को ठीक से समझकर इस पर अमल करने की ठान ले तो वे बहुत जल्दी ‘मेरा भारत महान’ के नारे को वास्तविक रूप में सही सिद्ध कर सकते हैं। तो आइये, साथ-साथ कार्य कर अपने गंतव्य तक पहुँचे। उनकी आवाज हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है, उठो ! जागो ! लक्ष्य प्राप्ति तक रुकों मत ! ओ ! युवा भारत।

युयुवा हृदय-सम्राट स्वामी विवेकानंद के 100 सर्वश्रेष्ठ सुविचार: Click Here
युवा जीवन के पुरोधा युगाचार्य स्वामी विवेकानंद जी के उद्धरण: Click Here
विश्वप्रसिद्ध संयासी स्वामी विवेकानंद के जीवन संदेश: Click Here
स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरक प्रेरणादायक प्रसंग: Click Here
युवा जीवन के स्रोत स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय: Click Here

आशा करती हूँ कि ये National Youth Day Essay in Hindi छोटे और बड़े सभी के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। गर आपको हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो इसमें निरंतरता बनाये रखने में आप का सहयोग एवं उत्साहवर्धन अत्यंत आवश्यक है। आशा है कि आप हमारे इस प्रयास में सहयोगी होंगे साथ ही अपनी प्रतिक्रियाओं और सुझाओं से हमें अवगत अवश्य करायेंगे ताकि आपके बहुमूल्य सुझाओं के आधार पर इन कोट्स और संदेश को और अधिक सारगर्भित और उपयोगी बनाया जा सके।

अगर आपके पास इससे संबंधित कोई सुझाव हो तो वो भी आमंत्रित हैं। आप अपने सुझाव को इस लिंक Facebook Page के जरिये भी हमसे साझा कर सकते है. और हाँ हमारा free email subscription जरुर ले ताकि मैं अपने future posts सीधे आपके inbox में भेज सकूं।

Babita Singh
Hello everyone! Welcome to Khayalrakhe.com. हमारे Blog पर हमेशा उच्च गुणवत्ता वाला पोस्ट लिखा जाता है जो मेरी और मेरी टीम के गहन अध्ययन और विचार के बाद हमारे पाठकों तक पहुँचाता है, जिससे यह Blog कई वर्षों से सभी वर्ग के पाठकों को प्रेरणा दे रहा है लेकिन हमारे लिए इस मुकाम तक पहुँचना कभी आसान नहीं था. इसके पीछे...Read more.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *