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राष्ट्रीय युवा दिवस पर भाषण – Speech On National Youth Day In Hindi

राष्ट्रीय युवा दिवस पर भाषण – Speech On National Youth Day In Hindi

Speech On National Youth Day In Hindi
Speech On National Youth Day In Hindi

Speech On National Youth Day In Hindi – सबसे पहले यहाँ उपस्थित सभी भाई बहनों को मेरा नमस्कार ! जैसा कि आप सब को ज्ञात है आज हम सब यहाँ राष्ट्रीय युवा दिवस को मनाने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं। इस दिवस के प्रेरणास्रोत और कोई नहीं स्वामी विवेकानंद जी हैं।

शिव के अवतार स्वामी विवेकानंद एक भास्वर सत्ता हैं, जो एक सुनिर्दिष्ट प्रायोजन के लिए दूसरे एक उच्चतर मंडल से इस मर्त्यभूमि पर अवतरित हुए थे। वे कालजयी हैं और कालजयी हैं उनकी वाणी। उनकी आग्नेय वाणी में इतनी ऊर्जा भरी है कि राख की ढेरी में दावानल पैदा कर दे, मुर्दे में जीवन का संचार कर दें। अंधकार में भटकते, भरमते युवाओं में आशा का नूतन संचार कर दे।

इतिहास साक्षी है कि आजादी के पहले से ही युवा इनके व्यक्तित्व एवं विचार दोनों से जीवन की दिशा तलाशते हैं और उनको मिलती हैं। श्री अरविंद घोष, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू ये सभी अपनी युवावस्था में स्वामीजी की वैचारिक-आध्यात्मिक चेतना से प्रेरित-प्रभावित रहे हैं।

स्थिति आज भी वही है। प्रत्येक आदर्शनिष्ठ युवा के प्रेरणास्रोत और कोई नहीं स्वामी विवेकानंद हैं। उनका सुन्दर मुख हमें आकर्षित भी करता है और प्रेरित भी। उनका सिंह के समान साहस व निर्भय भाव, उनकी आँखों में ज्ञान की गहराई के साथ प्राणी मात्र के लिए करुणा का सागर लहराता हुआ दिखाई देता है। इसलिए तो उनके जन्मदिवस 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि भारत देश का युवा उनकी वैचारिक-आध्यात्मिक चेतना से प्रेरित-प्रभावित हो सके।

कहते हैं कि यौवन जीवन की सर्वाधिक मादक अवस्था होती है। वहीं सम्पूर्ण राष्ट्र का भविष्य इस अवस्था को भोग रहें युवाओं के मजबूत एवं सुदृढ़ कंधों पर ही टिका होता है। परन्तु क्या हो अगर जिन कंधे पर देश के भविष्य का भार है वे कंधे ही झुक जाएँ अर्थात गुमराह हो जाएँ।

यक़ीनन देश का रसातल में जाना निश्चित है। पर दुर्भाग्य से आजकल ऐसा ही हो रहा है। आधुनिकता के नाम पर हमारी युवा पीढ़ी ऐसे संसार में लिप्त हो चुकी हैं जहाँ नशा, मौज और मस्ती के सिवाय कुछ नहीं। महँगे किन्तु घटिया मनोरंजन के साधन भी मात्र फूहड़ और उत्तेजक सोच को बढ़ावा देने वाले होते जा रहे हैं।

इस क्रम में पश्चिमी संस्कृति का आकर्षण भी कुछ कम नहीं है। मॉडल बनने के नाम पर युवा पीढ़ी आँख मूँद कर पश्चिमी संस्कृति को आदर्श मानकर अपनाती जा रही है। मैं ये नहीं कहती कि किसी दूसरी संस्कृति से कुछ ग्रहण करना गलत है, किन्तु अपनी संस्कृति को हीन मानकर दूसरी संस्कृति की विकृतियों को अपनाना नादानी है।

स्वामी जी को पूरा विश्वास था कि विश्व की पश्चिम भौतिकता की अपेक्षा भारतीय आध्यात्मिक निधि की कहीं अधिक आवश्यकता है। और उनका दृढ़ विश्वास पश्चिमी सभ्यता की चमक-दमक और तड़क-भड़क से कभी नहीं डगमगाया, न ही इस कारण उनमें कभी क्षणभर को कोई हीन भावना आई।

इसमें कोई संदेह नहीं कि उनके साहस और निष्ठा की शक्ति ने ही पश्चिम के सहस्रों लोगों को भारत और उसकी सभ्यता के प्रति प्रेम करने के लिए प्रेरित किया। उनके पाश्चात्य देश के कार्य ने भारत को स्वाभिमान, गौरव जीने का प्रायोजन दिया था। भारत में उनके कार्य और उनके भारतीय जन-समूह के प्रति अटूट प्रेम के द्वारा स्वामीजी ने हमें राष्ट्रीय जनजागरण तथा मानवता को जगाने का व्रत दिया।

आइए हम उनका अनुगमन करें, इस वैभवपूर्ण भारत भूमि का फिर से कायाकल्प करने का काम करें। उनका जन्मदिवस इस संकल्प को ग्रहण करने के लिए सही अवसर है। आइए प्राचीन देश के कायाकल्प के लिए युवाओं की ओर अपेक्षा से देखने वाले उस महान देशभक्त संत के स्वप्न साकार करने के लिए हम अपनी समस्त शक्तियां एकत्रित कर लें। उनके जन्म दिवस के अवसर पर आइए ! हममें से प्रत्येक स्वयं से पूछे क्या मैं उनके अपेक्षित लाखों युवाओं में से एक हूँ? !

वास्तव में युवावस्था अति संवेदनशील अवस्था होती है। यही अवस्था है, जिसमें व्यक्ति अपना भाग्य स्वयं निर्मित कर अपना समग्र विकास करता है। कम-से-कम समय में अधिक-से-अधिक धन जुटाने एवं समाज में अपनी अलग छवि बनाकर सम्मान पाने की महत्वाकांक्षा युवाओं में चरमोत्कर्ष पर पहुँच जाती है।

इतना ही नहीं वैधेयिक तृष्णा की अंधी दौड़ युवाओं को ऐसे मोड़ पर भी लाकर खड़ा कर देती है, जहाँ से व्यक्तित्व विकास के सारे मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। हमको यह तथ्य हर हालत में स्वीकार करना होगा कि युवा वर्ग की वास्तविक समस्या स्वयं अपने से संबंधित है। बाहर तथा समाज से कम। अतः युवा वर्ग स्वामी विवेकानंद की निम्नलिखित 5 बातों पर यदि अमल करें तो वे दिग्भ्रमित होने से स्वयं को बचा सकते हैं-

१- सर्वप्रथम युवा ये सुनिश्चित कर लें कि उन्हें हर काम अपने विवेक से करना है।

२- स्वार्थ सिद्धि करने वाले राजनेताओं को वे अपना आदर कदापि न माने तथा उनसे दूर रहे।

३- पश्चिमी सभ्यताओं और महत्वाकांक्षाओ को अपने ऊपर हावी न होने दें।

४- युवा वर्ग यह जान ले कि मेहनत, ईमानदारी, संयम और लगन से ही स्वर्णिम भविष्य रचा जा सकता है।

५- इसलिए देश के भावी कर्णधार रूप में अपने को तैयार करना तथा विकसित करना आपका कर्तव्य बनता है। यदि आपके प्रमाद के कारण देश का पतन होगा, तो फिर देश व समाज को संभालने वाले व्यक्ति कहाँ से आएँगे?

अत: हे युवाओं उठो, जागो स्वयं जाकर औरो को जगाओ। अपने नर जन्म को सफल करो।” यही समय की मांग है और यही वक्त का तकाजा है।

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Babita Singh
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