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रक्तदान महादान – Speech on Blood Donation In Hindi

 रक्तदान का महत्व, फायदे एवं नुकसान…

Speech on Blood Donation In Hindi - Essay
Speech on Blood Donation In Hindi – Essay

दोस्तों! आपने संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘चरक संहिता’ का नाम अवश्य सुना होगा। यह महान ग्रंथ महर्षि चरक द्वारा रचित है। इस ग्रंथ में स्वास्थ्य के विषय में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। आज भी चिकित्सक इस ग्रन्थ को अपने ज्ञान में बृद्धि के लिए पढ़ते है। चरक संहिता में यह लिखा है कि स्वास्थै: नागरिकै: देश: अपि उन्नीयते। मतलब, स्वस्थ नागरिकों से देश उन्नति करता है। परंतु इसके विपरीत शरीर अस्वस्थ होने पर देश तो का क्या हम स्वयं की भी उन्नति नहीं कर सकते हैं।

अब एक सीधा सा सवाल है कि शरीर स्वस्थ और सशक्त कैसे रहे? तो आप सब भलीभांति जानते है कि समाज को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अनेक साधन और उपाय हैं। उनमें से कुछ सरकारी या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित हैं, तो कुछ का संचालन व्यक्तिगत रूप से निजी स्तर पर हो रहा है। लेकिन जो सबसे प्रमुख साधन या उपाय है उसके बारे में शायद आप सबमें से कोई नहीं जानता! दुख और चिंता की बात यह है कि कोई उस आवश्यक उपाय को जानना भी नहीं चाहता! कोई एकाध जानता भी है तो उसकी तरफ से एकदम लापरवाह बना हुआ है। वह उपाय है- स्वैच्छिक रक्तदान!

शरीर को सही रखने के लिए दवाइयां और इंजेक्शन तो कहीं-भी मिल जाएंगे, लेकिन किसी दुर्घटना के कारण जो रक्त शरीर से निकल जाता है उसकी पूर्ति केवल मेरा-आपका, हर मनुष्य का रक्त ही कर सकता है। रक्त बनाने की कोई फैक्ट्री नहीं, वह किसी वनस्पति-उद्यान या पहाड़ की तलहटी में पैदा नहीं होता। उसका एक-ही स्रोत है, एक ही उत्पादन-केंद्र है- हमारा शरीर।

कई बीमारियों में ऑपरेशन के समय ताजे खून की जरूरत पड़ती है। कुछ बीमारियों में तो रोगी के शरीर का पहले वाला पूरा रक्त निकाल कर नया ताजा रक्त डालना पड़ता है। युद्ध में घायल हमारे सैनिकों को, किसी दुर्घटना या अन्य भीषण बीमारी के दौरान हमें, आपको यह हमारे-आपके किसी भी प्रियजन को रक्त की आवश्यकता पड़ सकती है। इतना रक्त आएगा कहां से? हमारे अपने, स्वस्थ लोगों के ही शरीर से ही न !

आप में से बहुत से लोग बड़े विद्वान और ज्ञानी होंगे। उन्हें दुनिया भर की जानकारी होगी। लेकिन यह जानकारी नहीं होगी कि प्रकृति ने हमारे शरीर में नियमित रूप से, निश्चित समय तक निश्चित मात्रा में अपने-आप रक्त-निर्माण की व्यवस्था की हुई है। कुछ समय बाद, आवश्यकता या अनुपात से अधिक रक्त शरीर में जमा होने से कोई बीमारी भी हो सकती है। इसलिए अपने-आप ही स्वेच्छा-पूर्वक थोड़ा सा रक्तदान करके हम ना केवल किसी इंसान को मरने से बचा सकते हैं बल्कि स्वयं को भी स्वस्थ बनाए रख सकते हैं।

आप महान बनने या कहलाने के लिए खूब धन दान करते हैं। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा बनाने के लिए श्रम-दान करते हैं, परंतु यह दान किसी को कुछ देर का सुख दे सकते हैं। जबकि रक्त का दान किसी को नया जीवन दे सकता है। ध्यान रहे रक्त का कोई विकल्प नहीं है। रक्त की कमी को केवल रक्तदान के द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। इसलिए आप में से जो भी अट्ठारह से साठ वर्ष के बीच की उम्र के हैं, स्वस्थ हैं, जिन्हें दमा, कैंसर या रक्तचाप की बीमारी नहीं, वे हर 3 या 6 महीने बाद स्वैच्छिक रक्तदान की आदत डालें। उनका सबसे बड़ा सत्कर्म, पुण्य और यज्ञ होगा! 

गौरतलब है कि खून की कमी के कारण भारत में हर साल हजारों लोगों की जानें चली जाती हैं। देश को खून की सख्त जरूरत है और चिंता की बात यह है कि इस दिशा में हमारे सरकार द्वारा भी कोई खास कदम उठाए नहीं जा रहे हैं। एक यूनिट रक्तदान, बचा सकता है चार लोगों की जान। आपको पता होना चाहिए कि अगर आप एक यूनिट blood donate करते हैं तो उससे 4 जिंदगी बचाई जा सकती हैं। एक यूनिट में 350 मिलीग्राम खून लिया जाता है। जिससे एक यूनिट प्लेटलेट्स, एक यूनिट प्लाज्मा, एक यूनिट आरबीसी और एक यूनिट क्रायो मिलता है। ये चार अलग लोगों की जान बचाने में मदद कर सकता है।

दरअसल इस जानकारी के माध्यम से मैं यह बताना चाहती हूँ कि रक्तदान महादान माना जाता है। जबकि हमारे अंदर बहुत खून है। अगर हम थोड़ा सा खून दान कर दिए तो इसमें क्या बिगड़ जाएगा। जिन लोगों को रक्त की जरुरत है या फिर उसकी इमरजेंसी है तो वह लोग रक्त शिविर से रक्त खरीद सकते हैं। इसलिए जो लोग स्वस्थ हैं वह अपना रक्तदान अच्छे तरीके से करें जिससे आपको पुण्य मिलेगा। और दूसरे लोगों की जिंदगियां बचेंगें।

रक्तदान की आवश्यकता एवं अहमियत को समझते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विश्व स्तर पर रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए और इसके प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए अनेक कदम उठाएं हैं जिनमें से एक World Blood Donor Day भी है। World Health Organization ने वर्ष 1997 में 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली थी। WHO ने वर्ष 1997 में यह लक्ष्य रखा कि विश्व के प्रमुख 124 देश Voluntary blood donation को ही बढ़ावा दें। रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए विश्व रक्त दाता दिवस प्रति वर्ष अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 14 जून को मनाया जाता है।

अब यह प्रश्न आपके मन में उठ रहा होगा कि रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 14 जून का दिन ही क्यों चुना। तो आपको बता दें कि 14 जून 1868 को कार्ल लेण्डस्टाइनर का जन्म हुआ था, जो एक विख्यात ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और भौतिकीविद थे। उन्हीं की याद में 14 जून को blood donation को बढ़ावा देने के लिए World Blood Donor Day मनाया जाता है। कार्ल लेण्डस्टाइनर ने रक्त में अग्गुल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर रक्त को अलग-अलग रक्त समूहों (Blood groups) – ए, बी, ओ में वर्गीकरण कर चिकित्सा विज्ञान में अहम योगदान दिया था। इन्हें वर्ष 1930 में शरीर विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था।

आशा है आपको रक्तदान की अहमियत समझ में आ गयी होगी। फिर भी मैं चाहूंगी कि सभी सामाजिक संगठनों, सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया के माध्यम से रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता रहना चाहिए। केवल 14 जून को ही नहीं बल्कि रक्तदान के लिए हर माह जन जागरूकता अभियान शुरू किया जाना चाहिए। क्योंकि लोगों में विशेष रूप से महिलाओं में एक भ्रम है कि मासिक धर्म के कारण उनके शरीर में तो वैसे ही खून की कमी हो जाती है। जबकि मासिक धर्म से रक्तदान का कोई संबंध नहीं है।

गर्भवती महिला भी रक्तदान कर सकती हैं बशर्ते आपको रक्तदान करने से पहले आयरन चेक कराने के लिए कुछ समय इंतज़ार करने की आवश्यकता होगी। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन नाको (NACO) के अनुसार प्रेग्नेंसी के मामले में 12 महीने तो अबॉर्शन के मामले में यह समय सीमा 6 महीने की है।

रक्तदान को लेकर इस तरह की कई और भी अफवाह जनता में प्रसारित है जैसे  टैटू बनवाने और अंग छिदवाने वाले रक्त दान नहीं कर सकते हैं तो आपको बता दूँ कि टैटू बनवाने और अंग छिदवाने वाले लोगों पर रक्त दान करने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है लेकिन उन्हें थोड़े इंतज़ार की ज़रूरत होती है विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन्स के अनुसार, टैटू बनवाने के 6 महीने के बाद और अंग छिदवाने के 12 घंटे बाद रक्तदान कर सकते हैं।

इसी तरह की एक यह भी धारणा है कि किसी बीमारी से ग्रसित व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकते हैं। हाँ नहीं कर सकते है। खासकर वो लोग जो एचआईवी (एड्स वायरस), हेपेटाइटिस, सिफलिस, तपेदिक के लिए सकारात्मक हैं। रक्तदान करने से 14 दिन पहले ही आपका किसी भी तरह के संक्रमण से मुक्त होना ज़रूरी है और अगर आप कोई ख़ास दवाईयां ले रहे हैं तो रक्तदान करने के सात दिन पहले दवाईयों का कोर्स पूरा करना बेहद ज़रूरी होता है।

कुछ लोग तो रक्तदान करने से इसलिए कतराते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके खुद के शरीर में खून की कमी हो जाएगी। सच पूछिए तो ऐसा कुछ भी नहीं होता है। एक औसत वयस्क शरीर में लगभग पांच लीटर ख़ून होता है। हालांकि यह शरीर के वज़न पर भी निर्भर करता है। वहीं रक्तदान के दौरान लगभग 450 मिलीलीटर ख़ून आपके शरीर से निकाला जाता है और सेहतमंद व्यक्ति इतना रक्त 24 से 48 घंटों में फिर से बना लेता है।

एक रिसर्च में इस बात का भी खुलासा किया गया था कि नियमित रूप से रक्तदान करने वालों में कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है। जब कोई नियमित तौर पर ब्लड डोनेट करता है तो उसके शरीर में ताजा खून बनने की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है। ब्लड डोनेट करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है जिससे इंसान लंबे समय तक स्वस्थ रहता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि रक्तदान से दिल की सेहत में सुधार भी सुधार होता है। रक्तदान कार्बन डाइऑक्‍साइड को शरीर से बाहर निकाल देता है जिससे कि शरीर स्वस्थ रहता है। 

तो अगर आप पूर्ण रूप से सेहतमंद हैं। आप की उम्र 18 से 65 के बिच है तथा वज़न कम से कम 50 किलो और ज़्यादा से ज़्यादा 160 किलो है और आपको HIV, Hepatitis B या C में से कोई भी रोग नहीं हैं तो आप रक्तदान कर सकते हैं। लेकिन सर्दी, फ्लू, गले में खराश, सर्दी-खराश, पेट में कीड़े में से कोई भी एक दिक्कत है तो आप रक्तदान न करें। रक्त दान करने के लिए न्यूनतम हीमोग्लोबिन स्तर को भी पूरा करना जरूरी होता है। इसके लिए दान स्थल पर टेस्ट किया जाता है।

मित्रों! रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता तो इसका महत्व समझें और इस पुण्य काम में अपना सहयोग दें। समय बीतते यह शरीर विकारों से युक्त हो जाता है। इसका सौंदर्य भी कुछ निश्चित समय के लिए ही होता है। जहाँ तक हो सके शरीर से आगे सोच कर इस संसार में आने के उद्देश्य (मोक्ष) को प्राप्त करने की ओर कदम बढ़ाएँ और अपने इस मानव जीवन को सफल बनाने के लक्ष्य में सफलता प्राप्त करें।

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Babita Singh
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