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ऐसे करें, परीक्षा की तैयारी (Exam ki Taiyari)

परीक्षा की तैयारी (Exam ki Taiyari)

एग्जाम की तैयारी (Exam ki Taiyari)
एग्जाम की तैयारी (Exam ki Taiyari)

एग्जाम की तैयारी (Exam ki Taiyari) – एक दिन हमारे स्कूल की दसवीं कक्षा की छात्रा प्रियंका ने हमें बताया कि वह एग्जाम को लेकर बहुत परेशान है। उसके तनाव का प्रमुख कारण उसके माता-पिता हैं। उन्हें प्रियंका से बोर्ड एग्जाम में 90% अंक से अधिक की अपेक्षाएं है, वो भी इसलिए ताकि वे कह सके कि उनकी लड़की कितनी होशियार एवं होनहार है। यह दबाव उसे परीक्षा से पहले ही काफी तनाव से भर दिया है।

प्रियंका को तो मैंने समझा दिया। पर इन अपेक्षाओं के सघन दबाव को न झेल पाने वाले सैकड़ों विद्यार्थी परीक्षा में असफल होने के बाद आत्महत्या जैसे कदम उठाने लगते हैं। तनाव कुछ सीमा तक तो अच्छा होता है, क्योंकि यह परीक्षा के समय पढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इसे यूस्ट्रेस कहते हैं, परंतु डिस्ट्रेस परेशानी का सबब बनता है।

इससे बचने की आवश्यकता है। यह एग्जाम स्ट्रेस आजकल प्राइमरी कक्षा से स्नातक, स्नातकोत्तर के छात्रों तक फैल गया है। परीक्षा से जितना छोटा बालक परेशान होता है, उतना ही स्नातकोत्तर का विद्यार्थी भी परेशान रहता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? हर सेमेस्टर में, हर साल में परीक्षा आयोजित होती है, परंतु इसका भूत है कि उतरने का नाम ही नहीं लेता।

इन सब परेशानियों के समाधान में आजकल काउंसलिंग सेंटर खुल रहे हैं, जहां पर टाइम मैनेजमेंट, राइटिंग स्किल, डाइट प्लान एवं स्टडी पैटर्न को विस्तार से समझाया जाता है और परीक्षा के आतंक को दूर किया जाता है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार परीक्षा के दिनों में तनाव के विभिन्न लक्षण इस प्रकार के होते हैं एकाकीपन, कमरे में बंद हो जाना, भूख एवं नींद में व्यतिक्रम, शरीर दर्द, सिर दर्द, धड़कनों का बढ़ना एवं हाथ कांपना, पसीना आना, जोर-जोर से पढ़ना, स्वयं का ध्यान रखना, आत्म सम्मान में कमी, असहाय, निराशा एवं निकम्मा पन का अनुभव, नकारात्मक विचार आदि।

इसके समाधान में मनोविज्ञान के विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के समय पूरी नींद लेनी चाहिए। सोने में कटौती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सोने से मन मस्तिष्क ताजगी से भर जाते हैं तथा इनकी ग्रहण सिलता बढ़ जाती है, स्मरण शक्ति ठीक रहती है।

पढ़ने के बीच में थोड़ा विराम लेना चाहिए तथा उस दौरान कुछ समय के लिए बाहर घूम लेना चाहिए या अपने परिवार के सदस्यों या मित्रों से बातचीत करना चाहिए। इससे मन बदल जाता है और पूरी ताजगी के साथ फिर से पढ़ाई शुरू की जा सकती है।

लगातार पढ़ाई करने से मन पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है और दबाव ग्रस्त मन में पढ़ाई के प्रति एकाग्रता लाना कठिन होता है। इस दौरान शरीर में एसिडिटी बढ़ने की भी आशंका रहती है। अतः खानपान पर भी ध्यान देना चाहिए।

परीक्षा की अवधि में एंटी एंक्जाइटी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। विश्वास करना चाहिए कि तनाव एक सामान्य घटना है। इससे परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इन दिनों मनपसंद संगीत भी सुना जा सकता है तथा अपने पसंद के टीवी सीरियल भी कुछ समय के लिए देखे जा सकते हैं। परीक्षा के परिणाम की चिंता न करते हुए अतीत में प्राप्त हुई सफलता की सुखद अनुभूति का स्मरण करना चाहिए।

परीक्षा के समय टेंशन फ्री प्रिपरेशन करना चाहिए। आखिर शुरुआत कहां से करें? क्या करें कि परीक्षा की तैयारी भी हो जाए और तनाव भी ना हो इस संदर्भ में सबसे पहली आवश्यकता है परीक्षा की प्रिपरेशन पैटर्न।

विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे पहले दिनचर्या डेली रूटीन बनाना चाहिए। पढ़ाई चाहे प्रातः कालीन जल्दी उठकर करें यार रात में पढ़ें, पर अच्छा हो कि पढ़ने के लिए एक नियत एवं निश्चित समय तय कर लें।

आवश्यक नहीं कि पढ़ाई देर तक जारी रखी जाए और कहा जाए कि हमने 10 घंटा पढ़ा। जरूरी बात यह है कि जब अध्ययन करें तब पूरी एकाग्रता एवं मनोयोग अध्ययन विषय पर केंद्रित होना चाहिए। एकाग्रता पूर्वक कुछ घंटे की पढ़ाई कई घंटों के बराबर होती है।

पढ़ने के लिए पूरे कोर्स को विभाजित कर लेना चाहिए। अंशों में विभाजित करने से पढ़ाई में सुविधा एवं आसानी होती है।

उस विषय की तैयारी सबसे पहले करनी चाहिए, जो सबसे अधिक कठिन जान पड़ता है। समस्या को सदैव नोट कर लेना चाहिए तथा शिक्षक या जानकार सहयोगियों से इसका समाधान ढूंढना चाहिए।

पढ़ाई कठिन तब लगती है, जब किसी विषय की शब्दावली से हम परिचित ना हों तथा उसका स्वरूप (कांसेप्ट) अज्ञात हो। यह दोनों बातें स्पष्ट हो जाने पर जल्दी से याद हो जाता है। फिर इसका दैनिक जीवन में उपयोग एवं प्रयोग विधि पर विचार करना चाहिए। ऐसी पढ़ाई परीक्षा के पश्चात भी स्मृति में बनी रहती है। तथा इसके द्वारा हम दूसरों को भी बड़ी आसानी से समझा सकते हैं।

सिद्धांतों का उदाहरण के माध्यम से अध्ययन करना चाहिए। इस प्रकार पढ़ाई बोझ नहीं बनती है, बल्कि एक मनोरंजक खेल बन जाती है, जिसका परीक्षा अवधि में भी भरपूर आनंद उठाया जा सकता है।

परीक्षा की सफलता के लिए पूरे कोर्स का अध्ययन करना चाहिए तथा जो महत्वपूर्ण विषय है उसकी अधिक तैयारी करें, इससे आत्मविश्वास बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ परीक्षा हाल में प्रश्न-पत्र की तैयारी के लिए भी योजना बनाते हैं, जिसे अपनाने पर सफलता पाई जा सकती है।

3 घंटे के प्रश्न पत्र को पहले ढाई घंटे में हल करना चाहिए। शेष आधे घंटे में छूटे हुए कठिन प्रश्न को हल करना चाहिए तथा अपने प्रश्नों को क्रम से देखना चाहिए कि कहीं कोई प्रश्न छूट तो नहीं गया, अथवा प्रश्न का नंबर गलत तो नहीं हो गया। जैसे प्रश्न 3 का हल उत्तर 4 में करने पर पूरे अंक कट सकती हैं।

प्रश्नों को पूरे ध्यान से पढ़ना चाहिए और वही लिखना चाहिए, जो कहा गया हो। सबसे पहले आसान प्रश्न को हल करना चाहिए। अंत में कठिन प्रश्न को हल करना चाहिए, क्योंकि शुरुआत में ही कठिन प्रश्न को हल करने से मानसिक उलझन एवं समय की बर्बादी दोनों हो सकती हैं।

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सब्जेक्टिव एवं ऑब्जेक्टिव दोनों प्रश्न आए हो तो सबसे पहले सब्जेक्टिव को हल करना चाहिए फिर ऑब्जेक्टिव हल करना चाहिए या फिर अपनी सुविधा अनुसार सरल प्रश्न को सबसे पहले करना चाहिए।

दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न एक साथ पूछे गए हों तो सबसे पहले दीर्घ उत्तरीय प्रश्न करना चाहिए, क्योंकि प्रश्न छूटने की स्थिति में छोटे एवं कम अंक के प्रश्न ही छूटेंगे। वैसे प्रश्न छोड़ना नहीं चाहिए।

लिखावट साफ एवं स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि उसे ठीक-ठीक पढ़ा जा सके। अच्छे अंकों की प्राप्ति के लिए हेडिंग तथा सब हेडिंग डालना तथा उसको मार्कर से मार्क कर लेना चाहिए।

प्रश्न में डाटा, चित्र, रेखांकन की आवश्यकता पड़ने पर उसे अवश्य करना चाहिए। ग्रेजुएट एवं पोस्टग्रेजुएट के विद्यार्थियों को अपने प्रश्न पत्र हल करते समय संदर्भ एवं रिसर्च पेपर का भी उल्लेख करना चाहिए।

परीक्षा केंद्र का 3 घंटा पूरे साल की मेहनत की परीक्षा होती है। अतः इस 3 घंटे का साधक की साधना के समान बड़ी सावधानी से उपयोग करना चाहिए। जो ऐसा कर लेता है, वही सफल होता है, क्योंकि वहां का हर क्षण एवं समय बेशकीमती एवं बहुमूल्य होता है। यह एक ऐसा चेक है, जिसे इन्हीं 3 घंटों में भुनाना पड़ता है। इससे पहले या बाद में इसका कोई मूल्य नहीं रह जाता।

परीक्षा के समय खानपान पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। इन दिनों उपवास एवं डाइटिंग से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे स्मरण शक्ति में कमी आती है तथा चिंता बढ़ती है। हल्का भोजन लेना चाहिए, ताकि पढ़ने एवं सोने में व्यवधान ना पड़े। विशेषतः विटामिन सी एवं बी कांपलेक्स की मात्रा खाने में अवश्य लें। यह याददाश्त बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं।

संतृप्त भोजन, जैसे फास्ट फूड में पिज़्ज़ा बर्गर चाऊमीन मेगी आदि से परहेज करना चाहिए। यह अनेक समस्याओं के साथ कब्ज बढ़ाते हैं, जिससे गैस बनती है और सिर में भारीपन बना रहता है; जबकि परीक्षा के दिनों में सिर हल्का होना चाहिए, ताकि पढ़ने में सुविधा हो।

पानी अधिक से अधिक पिएं। यह शरीर, मन, मस्तिष्क को शीतल एवं उनमें स्फूर्ति बनाए रखता है। मनपसंद जूस भी लिया जा सकता है।

परीक्षा के तनाव को घटाने में माता पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बच्चों को डांटना फटकारना नहीं चाहिए। उन्हें कोई विशेष काम भी ना दें, ताकि वे अपनी पढ़ाई में पूरी तरह से निमग्न रह सकें।

उन्हें उत्साह एवं आगे बढ़ने तथा सफल होने की प्रेरणाप्रद बातें बतानी चाहिए तथा असफलता एवं इसके परिणाम के प्रति हतोत्साहित नहीं करना चाहिए। उन्हें ढाढस दें और बताएं कि परीक्षा का परिणाम चाहे कुछ भी हो, केवल कठोर मेहनत पर ही तुम्हारा अधिकार है, यही करो।

माता-पिता बच्चों की इन घड़ियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं तथा बच्चों की सफलता में उन्हें ऐसा करना भी चाहिए

परीक्षा के तनाव को दूर करने के लिए सकारात्मक सोच, कड़ी मेहनत, समय का सदुपयोग, खानपान, रहन-सहन में संयम तथा एकाग्रतापूर्वक अध्ययन करना चाहिए। उससे न केवल परीक्षा का तनाव एवं आतंक ही समाप्त होता है, वरन सफलता भी मिलती है, जिससे आत्मविश्वास ऊंचा होता है। विद्यार्थी राष्ट्र की धरोहर है। राष्ट्र के विकास एवं प्रगति के लिए आत्मविश्वास एवं चरित्रनिष्ठ युवाओं की आवश्यकता है, जो अनगिनत परीक्षा से गुजर कर ही कसौटी में खरे उतरते हैं।

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Babita Singh
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