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चंदा एवं सूरज की कहानी – Chanda Mama Story in Hindi

चंदा मामा की कहानी – Chanda Mama Story In Hindi 

बहुत पुरानी बात है. चाँद और सूरज अपनी माँ के दो लाड़ले बेटे थे. चाँद छोटा था और सूरज बड़ा. लेकिन दोनों के स्वभाव में जमीन-आसमान का अन्तर था. चाँद एकदम ठंडे मिजाज का था, उसे कभी गुस्सा नहीं आता था. उसकी वाणी इतनी मीठी थी कि मानो शहद ही घोल रखा हो. वह अपनी माँ की जी-जान से सेवा करता था.

दूसरा भाई सूरज एकदम तुनकमिजाज था. वह छोटी-छोटी सी बात पर उग्र हो जाता. उसकी आदत ही क्रोध वाली थी. माँ उसे कई बार समझाती, पर वह अक्कड़ कहां मानने वाला था? चाँद बड़े भाई को बहुत प्यार करता था, पर सूरज उससे भी हमेशा खफा रहता. चाँद उसे हमेशा कहता, ‘भैया! गुस्सा करना अच्छे लोगों का काम नहीं है.’ लेकिन सूरज पर कब असर पड़ने वाला था. वह चाँद की इन बेकार की बातों पर इतना खफा होता कि कई बार चाँद के मनाने पर वह उसकी पिटाई भी कर देता था. चाँद इतना कहकर ही चुप हो जाता था कि, ‘भाई, अति हर चीज की बुरी होती है. कभी न कभी उसका दंड तो भुगतना ही पड़ता है.’

एक बार की बात है. शरद पूर्णिमा का दिन था. शीतल-शीतल सा मौसम था. इस शीतल से मौसम में भी न जाने क्या हुआ कि चाँद-सूरज की माँ की पीठ में जोर की खुजली उठी. इतनी तेज खुजली कि कितना भी खुजला लो पर कम न हो रही थी. इतने में सूरज उधर से गुजरा. माँ ने प्रेम से बुलाया, ‘बेटा-बेटा सूरज, मेरी पीठ में तेजी से खुजली हो रही है, जरा आकर खुजला दे रे!’

सूरज जला भुना तो था ही, वह जाकर बड़े-बड़े कांटों वाली एक झाड़ी ले आया और लगा मां की पीठ खुजलाने. मां की पीठ लहू से लथपथ हो गई. वह दर्द से कराहती रही. सूरज को अपनी करनी पर पश्चाताप होना तो दूर, वह तो मन ही मन मजा लेता रहा.

सूरज के इस तरह के व्यवहार से बहुत दुखी हुई. दुखियारी मां ने उसे रोते-रोते कहा, ‘सूरज! तूने मेरे साथ अच्छा नहीं किया. जा! अपनी इस करतूत के कारण तू सदैव जलता-बलता ही रहेगा. तुझे कभी भी शांति न मिले.’ इतना सुनना था कि सूरज पैर पटकता चला गया.

थोड़ी देर बाद चांद वहां आया. माँ की हालत देककर उसकी आंखों में आंसू आ गए. वह तुरंत माँ की पीठ पर मरहम लगाने लगा. धीरे-धीरे माँ को होश आने लगा. चाँद की सेवा से माँ बहुत प्रसन्न थीं. उसने ठंडी आह भरकर बेटे को आशीर्वाद दिया, ‘बेटा, तू सदा ही शीतल-शीतल रह, अपनी ठंडी किरणों से सदा प्राणियों को सुख देते रहना. खासकर शरद पूर्णिमा के दिन तेरी विशेष शोभा होगी. इस रात तुम्हारी किरणों का प्रकाश सेहत के लिए लाभप्रद होगा.

फिर क्या था, माँ के श्राप से सूरज उसी दिन से जमकर तपने लगा. वह आज भी सदैव जलता-बलता, उग्र और अशांत ही रहता है. दूसरी ओर चाँद शीतलता बरसाने लगा है. आज भी माँ के आशीर्वाद से वह शीतल और मनोरम है और सबकी आंखों और शरीर को शांति पहुंचा रहा है, विशेषकर शरदपूर्णिमा के दिन.

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Babita Singh
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