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प्रेग्नेंट होने के लिए आइडियल या नॉर्मल वेट कितना होना चाहिए – Pregnancy ke liye Vajan In Hindi

प्रेग्नेंट होने के लिए आइडियल या नॉर्मल वेट कितना होना चाहिए – Pregnancy ke liye Vajan In Hindi In Hindi

Pregnancy ke liye Vajan In Hindi
Pregnancy ke liye Vajan In Hindi

गर्भधारण के समय आदर्श वजन कितना होना चाहिए (Pregnancy ke liye ideal weight kitna hona chahiye)

बढ़ता weight किसे नहीं डराता ? बदलती lifestyle के कारण वजन की समस्या खासतौर पर महिलाओं को बड़ी तेजी से अपना शिकार बना रही है. अधिकांश महिलाएं तो इस तथ्य से भी अनजान होती हैं कि weight का pregnancy पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है.

Pregnancy को प्रभावित करने वाले कई कारणों में बढ़ता weight भी एक महत्वपूर्ण कारक है. इसीलिए आज मै आपसे ‘प्रेगनेंसी के लिए आदर्श वेट’ के बारे में वजनदार तथ्यों की चर्चा करूगीं.

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प्रेगनेंसी के दौरान वजन की समस्या 

स्वस्थ माँ बनने तथा स्वस्थ शिशु को जन्म देने के लिए आप पहले से ही इतनी सजग और सतर्क है, यह एक खुशनुमा फैसला है. गर्भधारण के समय वजन का काफी महत्व होता है. लेकिन वजन की बात करते ही लोगों के दिमाग में सिर्फ मोटापे का ख्याल आता है.

मोटापा तो कई समस्याओं कारण है लेकिन यह जरूरी नहीं हैं कि सिर्फ अधिक वजन से ही गर्भधारण प्रभावित हो, बल्कि कम वजन से भी गर्भधारण में कई प्रकार की समस्या पैदा हो सकती है. विवाहित महिला के लिए अधिक वजन की समस्या के अलावा कम वजन की समस्या भी गर्भधारण में दिक्कत पैदा कर सकती है। जैसे कि –

Point 1  – > प्रीटर्म बर्थ (निर्धारित समय से पहले बर्थ हो जाने का खतरा).

Point 2  – > बच्चे का वजन सामान्य से कम होना.

Point 3  – > एनीमिया जैसी बीमारियों का हो जाना.

वजन का हार्मोन पर प्रभाव

Point 1  – >  वजन बढ़ने से अंडाणु बनने की प्रक्रिया (ओव्यूलेशन) प्रभावित होती है. इस कारण गर्भधारण की सम्भावना कम हो जाती है.

Point 2  – >  पॉलीसिस्टीक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) नामक समस्या पैदा होती है. इस समस्या में महिलाओं में इंसुलिन का स्तर बढता है. इसके कारण ओव्यूलेशन का घटना, अनियमित माहवारी होना और टेस्टोस्टेंरॉन नामक हार्मोन में वृधि होती है.

Point 3  – >  कम वजन का अर्थ है शरीर में फैट का प्रतिशत कम होना. ओव्यूलेशन और माहवारी के समय पर होने के लिए बांड़ी फैट 22 प्रतिशत अवश्य होना चाहिए.

Point 4  – > कम वजन से मातृत्व को सुखद अनुभूति से वंचित रखने वाला गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है जिसे अंग्रेजी में हेबीच्युअल एबार्शन कहते हैं.

Point 5  – >  अत्यधिक वजन के कारण कई बार आईवीएफ ट्रीटमेंट में भी परेशानी होती है.

मोटापा कई प्रकार से प्रेगनेंसी को प्रभावित कर सकता है. वजन को संतुलित रखकर इस समस्या से बचा जा सकता है.

गर्भधारण के सन्दर्भ में उम्र के अनुसार Ideal weight

आमतौर पर गर्भावस्था के आखिरी दिनों में गर्भवती का वजन 8 – 10 किलोग्राम तक बढ़ जाता है जो कि नार्मल हैं. इसलिए संभव हो तो प्रयास करें कि वजन सामान्य रखें. वैसे सभी महिलाओं की लम्बाई एक समान नहीं होती है फिर भी अगर आप गर्भधारण के लिए वजन को जानने की इच्छुक हैं तो 

लंबाई के अनुसार कितना हो आपका वजन, जानिए इस तरीके से. lambai ke anusar kitna ho aapka vajan, jaanein is tarike se.

गर्भधारण के समय उम्र के अनुसार आदर्श वजन को इस फार्मूले से निकाला जा सकता है। यदि आपकी लंबाई 155 सेमी है तो आपका वजन 55 किलो होना चाहिए.

इस प्रकार वजन को संतुलित रखकर उपर्युक्त समस्याओ से बचा जा सकता है. 22 से 34 वर्ष की उम्र में गर्भधारण की क्षमता बेहतर मानी जाती है. बच्चा प्लान करने के लिए यह उम्र सही होता है.

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Babita Singh
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