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महिला दिवस पर बेहतरीन कविता – Women’s Day Poem In Hindi

विमेंस डे : Women’s Day Poem In Hindi

Women's Day Poem In Hindi - Kavita
Women’s Day Poem In Hindi – Kavita

Women’s Day Poem In Hindi – नारी स्वर्ग से अवतरित एक सुकोमल उपहार है। स्नेह की धारा इसमें इतनी प्रबल है कि उसकी तुलना दुनिया की किसी भी वस्तु से नहीं की जा सकती। नारी की रचना ही कुछ इस ढंग से हुई है कि घर, समाज और संसार को वह आलोकित करती है, दुखों के कांटे हटाकर वह सुख के मार्ग को बनाती है। लेकिन विडम्बना देखिए नारी – सामर्थ पर सवाल हमेशा ही उठते रहे हैं। नारी को जो सम्मान (अवस्था) पुरातन भारतीय संस्कृति में प्राप्त था वह सम्मान वह अवस्था आज भी नारी को नहीं मिल सका है। इसीलिए नारी को सृजन की शक्ति मानकर पूरे विश्व में 8 March को महिलाओं के सम्मान के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस / International Women’s Day मनाया जाता है। महिला दिवस मनाने का उद्देश्य नारी को कुरीतियों की बेड़ियों से निकालकर उसे विकसित – परिष्कृत होने का सुअवसर प्रदान करना है ताकि वह न केवल खुद को सशक्त कर सके बल्कि बेहतर समाज के निर्माण में भरपूर योगदान दे सके। 

वास्तव में इस दिन मिलने वाला सम्मान एवं सराहना महिलाओं के प्रति समाज में एक सकारात्मक सोच विकसित करने वाली होती है। दशकों से महिलाओं का जीवन इससे नव संदेश पाकर प्रेरित होता रहा है। यहाँ प्रस्तुत शचीन्द्र भटनागर की Poems on Women’s Day in Hindi महिला दिवस पर कविता भी नारी जाति के स्नेह, समर्पण, त्याग और बलिदान पर आधारित है। और इसका इस्तेमाल आप महिला दिवस पर सभी महिमामय महिलाओं को प्रेरणा से ओतप्रोत व प्रोत्साहित करने के लिए कर सकते है। इन्हें यहाँ पर खास आपके लिए उपलब्ध करा रही हूँ। उम्मीद करती हूँ आप इसे जरूर सराहेंगे और ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्तों के पास शेयर करेंगे।

नारी तुम नारायणी

नारी! सदा से तुम रही हो विश्व की वरदायिनी,

उत्कृष्टताओं के लिए होगा तुम्हारा जग ऋणी।

तुम प्रेरणा, संवेदना, करुणा, क्षमा की मूर्ति हो,

नर की अनेकों न्यूनताओं की तुम्हीं तो पूर्ति हो,

तुम हो समय की शक्ति, पहचानो स्वयं को देवियो,

शंकर व ज्ञानेश्वर सरीखा त्याग का जीवन जियो,

होगी तुम्हारी शक्ति अपराजेय टो नारायणी।

उत्कृष्टताओं के लिए होगा तुम्हारा जग ऋणी।

अब रूढ़ियों, जड़ क्षुद्रताओं से न अभिशापित रहो,

हो मुक्त सीमित बंधनों से, किंतु मर्यादित रहो,

अब हर दिखावा त्याग कर तुम आत्मबल जाग्रत करो,

इसके लिए नारीत्व की गरिमा न तुम आहत करो,

तुम मात्र काया हो नहीं, तुम हो न रमणी कामिनी।

उत्कृष्टताओं के लिए होगा तुम्हारा जग ऋणी।

यह रूप भोग्या का, खुला अविवेक पूरित अनुकरण,

यह आधुनिकता है नहीं, है आत्मघाती यह चरण,

तुम भगवती, दुर्गा तम्हीं, तुम शक्ति का भंडार हो,

हो रूप, जिससे सौम्यता का हर समय संचार हो,

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तुम ब्रह्मवादिनी बन पूज्या बनी सबकी तरणी,

उत्कृष्टताओं के लिए होगा तुम्हारा जग ऋणी।

दृढ़ आत्मबल की ज्योति भीषण क्रांति की ज्वाला बने,

वह हर कुकर्मी के लिए विकराल वधशाला बने,

उद्धार नारी का स्वयं बढ़कर करेंगी नारियाँ,

अन्यायकारी को बनेंगी ध्वंस की चिनगारियाँ,

यह है सुनिश्चित कल बनेंगी नारियाँ ही अग्रणी।

उत्कृष्टताओं के लिए होगा तुम्हारा जग ऋणी।

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2 thoughts on “महिला दिवस पर बेहतरीन कविता – Women’s Day Poem In Hindi

  1. Happy Women’s Day to every woman who I know … you are my strength and the reason for my happiness.

    एक नारी सशक्त हूँ मैं

    समझो ना कमजोर मुझे तुम
    तन निर्बल पर मन मेरा बलवान है
    ठान लिया जो करने का एक बारी
    वो तीर से निकला जैसे कमान है

    क़दम बढ़ाया आगे जो एक बार
    पीछे मुड़ना फिर संभव नहीं
    कर दे मेरी रूह को विध्वंस
    इस जग में ऐसा कोई डर नहीं

    तेरे पाँव की मैं कोई धूल नहीं
    तेरे सर पर सजा हुआ ना कोई ताज हूँ मैं
    रिश्तों की मजबूर बेड़ियों में क़ैद न होकर
    हर बंधन से आज़ाद हूँ मैं

    चोट दो मेरे आत्म सम्मान को तो
    एक बार को शायद टूट बिखर जाऊँगी
    समेट कर हर कतरा अपना
    लेने अपना प्रतिशोध मैं लौट आऊँगी

    क्यूँ करते हो भेदभाव नर -नारी में
    इच्छाएँ दोनों की ही समान है
    ग़र छूता है आदमी बुलंदियों को
    मेरी परिसीमा भी अनंत आसमान है

    ना टूटूँगी ना मैं झुकूँगी यूँ ही
    मेरा ग़ुरूर मेरा अभिमान है
    सह कर हर इल्ज़ाम जहाँ का
    बस आगे बढ़ना मेरा अरमान है

    नाइंसाफ़ी की बलि चढ़ी हूँ अक्सर
    हक़ की लड़ाई में फिर भी डटी रही
    कोशिश लाख की गिराने की मुझको
    पर मैं अपनी ज़िद्द से हटी नहीं

    ना रोक सकोगे ख़याल मेरे
    ना आवाज़ कभी बंद कर पाओगे
    उठेगा आँचल से मेरे तूफ़ान कभी जब
    मिट्टी में तुम मिल जाओगे

    अवतार बहुत हैं , नाम बहुत हैं
    बेख़ौफ़ गुजरता हुआ वक़्त हूँ मैं
    समझो ना तुम बेबस मुझको
    एक नारी हूँ और सशक्त हूँ मैं !

    निशा टंडन

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