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महिला दिवस पर भाषण – Women’s Day Speech In Hindi

Women’s Day Speech in Hindi

International Women's Day In Hindi
International Women’s Day In Hindi

यह महिला दिवस भाषण, महिलाओं के महत्व, आवश्यकता और उनका सम्मान करने के लिए करने के लिए प्रेरित करेगा। तो चलिए इस महिला दिवस पर भाषण को पढ़ना शुरू करते हैं जो हमनें खास आप के लिए महिला के सम्मान में बोलने के लिए लिखा हैं।

Long and Short Speech on Women’s Day in Hindi for International Women’s Day 2020, and All Women’s programs

इस सभागार में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथि और प्यारे साथियों को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देती/देता हूँ। जैसा कि ज्ञात है कि इक्कीसवीं सदी नारी सदी है। उन्हें इस सदी में यथोचित पद और सम्मान दिए जा रहे है जिसकी वे हमेशा से हकदार रही है। इस मुकाम तक पहुँचने के लिए महिलाओं ने अपने संघर्ष में एक लंबा रास्ता तय किया है, लेकिन अभी भी कवर करने के लिए एक लंबी दूरी बाकी है जो समाज में जागरूकता लाकर सम्भव है।

समाज के विकास में महिलाओं की सच्ची महत्ता और अधिकार के बारे में जनजागरूकता लाने हेतु ही हर साल महिला दिवस जैसे कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाये जाते है। इस दिन पर महिलाओं की सुरक्षा, विकास एवं सशक्तिकरण के लिए सर्वोच्च प्राथमिकताएँ तय किए जाते हैं और विश्वभर में लागू किए जाते है । 

महिला दिन इसलिए और भी ज्यादा खास हो जाता है क्योंकि इस दिन के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए समाज के विकास के प्रत्येक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण एवं प्रशंसनीय भूमिका निभाने वाली महिलाओं को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया जाता है उन्हें सराहा जाता है। महिला दिवस पर इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन से महिलाओं के उत्थान की दिशा में तेजी से कार्य करने में बड़ी मदद मिलती है।

इस बात में संदेह की तनिक भी गुंजाइश नहीं है इस दिन मिलने वाला सम्मान एवं सराहना जहां महिलाओं के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने वाली होती है वहीं हर नारी को अपने साहस और हौसलों के बल से तमाम सामाजिक चुनौतियों का सामना कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरणा भी मिलती है।

तुलनात्मक रूप से तो महिलाओं को प्रेरित करने के लिए किसी ख़ास दिन की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए लेकिन देश व दुनिया में जो परम्परा रही है उसमें महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम महत्वपूर्ण माना जाता हैअगर हम गहराई से झांककर देखें तो महिला हो या पुरुष दोनों में सबकुछ करने की अपार क्षमता छिपी हुई है और दोनों ही आसमान छू सकते है तो आखिर क्यों क्षमता रहित समझकर नारी को सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता से वंचित होना पड़ता है।

इतिहास गवाह है कि नारी ने हमेशा से परिवार संचालन का उत्तरदायित्व सम्भालते हुए समाज निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है । वहीं भारतीय संस्कृति में स्त्री का दर्जा पुरुष की अपेक्षा कहीं अधिक सम्माननीय माना गया है । हमारे आदि-ग्रंथों में नारी को गुरुतर मानते हुए यहाँ तक घोषित किया गया है – यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते रमंते तत्र देवता । अर्थात जहाँ नारियों की पूजा की जाती है वहां देवता निवास करते है अथवा गृहणी गृहमित्याहू न गृह गृहमुक्यते ।

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि “एक राष्ट्र हमेशा ही अपने यहाँ की महिलाओं से सशक्त बनता है, वह माँ, बहन और पत्नी की भूमिकाओं में अपने नागरिकों का पालन पोषण करती है और तब जाकर यह सशक्त नागरिक, एक सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाते है।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कथन दर्शाता है कि देवीयता प्राप्त नारी कभी माँ के रूप में तो कभी बेटी के रूप में ईश्वर का दिया एक अमूल्य धन है जो बिना परिश्रम लिए अत्यंत आत्मीयता से सभी परिवार जनों की सेवा करती है और जिसने जमीन से आसमान तक हर क्षेत्र में अपना परचम लहराया है। बावजूद इसके समाज में आज भी कुछ लोग ऐसे है जो महिलाओं को अबला नारी कहते है और मानसिक व शारीरिक रूप से उसका दोहन करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाते है।

प्रसिद्द लेखिका तसलीमा नसरीन ने लिखा है कि – “वास्तव में स्त्रियाँ जन्म से अबला नहीं होती, उन्हें अबला बनाया जाता है।” पेशे से एक डॉक्टर तसलीमा नसरीन ने उदाहरण के रूप में इस तथ्य की ब्याख्या की है – “जन्म के समय एक ‘स्त्री शिशु’ की जीवनी शक्ति का एक ‘पुरुष शिशु’ की अपेक्षा अधिक प्रबल होती है, लेकिन समाज अपनी परम्पराओं और रीति – रिवाजों एवं जीवन मूल्यों के द्वारा महिला को “सबला” से “अबला” बनाता है।”

इसका मतलब है की व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रकृति लिंग का भेदभाव नहीं करती है। इसलिए आज आवश्यकता इस बात की है कि हमें महिलाओं का सशक्तिकरण करने के लिए महिलाओं को एहसास दिलाना होगा कि उनमें अपार शक्ति है, उनको अपनी आंतरिक शक्ति को जगाना होगा। क्योंकि जिस प्रकार एक पक्षी के लिए केवल एक पंख के सहारे उड़ना संभव नहीं है, वैसे ही किसी राष्ट्र की प्रगति केवल शिक्षित पुरुषों के सहारे नहीं हो सकता है।

राष्ट्र की प्रगति व सामाजिक स्वतंत्रता में शिक्षित महिलाओं की भूमिका उनती ही अहम् है जितना की पुरुषों की और इतिहास इस बात का प्रमाण है कि जब नारी ने आगे बढ़कर अपनी बात सही तरीके से रखी है, समाज और राष्ट्र ने उसे पूरा सम्मान दिया है और आज की नारी भी अपने भीतर की शक्ति को सही दिशा निर्देश दे रही है यही कारण है कि वर्तमान में महिलाओं की प्रस्थिति एवं उनके अधिकारों में वृद्धि स्पष्ट देखी जा सकती है।

आज समाज में लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से भी लोगों की सोच में बहुत भारी बदलाव आया है। अधिकारिक तौर पर भी अब नारी को पुरुष से कमतर नहीं आका जाता। यही कारण है कि महिलाएं पहले से अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर हुई है। जीवन के हर क्षेत्र में वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मजबूती से खड़ी हैं और आत्मबल, आत्मविश्वास एवं स्वावलंबन से अपनी सभी जिम्मेदारी निभाती है।

वर्तमान में महिला को अबला नारी मानना गलत है। आज की नारी पढ लिखकर स्वतंत्र है अपने अधिकारों के प्रति सजग भी है। आज की नारी स्वयं अपना निर्णय लेती है। आज की नारी ‘शक्ति’ का सघन पुंज है। यह शक्ति जिस रूप में प्रकट होती है, वह उसी रूप में परिलक्षित होती है।

आज की नारी जब अपने अबोध एवं नवजात बालक को स्तनपान कराती है तो वह वात्सल्य एवं ममता का साकार रूप होती है। जब वह अपने केंद्र पर खड़ी होकर हुंकार भरती है तो वह दुर्गा एवं कालीरुपा बन जाती है, फिर उसकी दृढ़ता एवं साहस के सामने कोई नहीं टिकता है। जब नारी अपनी सुकोमल सम्वेदनाओं के संग विचरती है तो सृष्टि में सौंदर्य की एक नई आभा, एक दिव्य प्रकाश बिखर जाता है।

वर्तमान स्थिति में नारी ने जो साहस का परिचय दिया है, वह आश्चयर्यजनक है। आज नारी की भागीदारी के बिना कोई भी काम पूर्ण नहीं माना जा रहा है। समाज के हर क्षेत्र में उसका परोक्ष – अपरोक्ष रूप से प्रवेश हो चुका है।

आज तो कई ऐसे प्रतिष्ठान एवं संस्थाएँ हैं, जिन्हें केवल नारी संचालित करती है। हालांकि यहां तक का सफर तय करने के लिए महिलाओं को काफी मुश्किलों एवं संघर्षों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए अभी मिलों लम्बा सफर तय करना है, जो कंटकपूर्ण एवं दुर्गम है लेकिन अब महिलाएं हर क्षेत्र में आने लगी है।

आज की नारी जाग्रत एवं सक्रिय हो चुकी है। वह अपनी शक्तियों को पहचानने लगी है जिससे आधुनिक नारी का वर्चस्व बढ़ा है। व्यापार और व्यवसाय जैसे पुरुष एकाधिकार के क्षेत्र में जिस प्रकार उसने कदम रखा है और जिस सूझ – बूझ एवं कुशलता का परिचय दिया है, वह अद्भुत है। बाजार में नारियों की भागीदारी बढ़ती जा रही है। तकनीकी एवं इंजीनियरिंग जैसे पेचीदा विषयों में उसका दखल देखते ही बनता है।

किसी ज़माने में अबला समझी जाने वाली नारी को मात्र भोग एवं संतान उत्पत्ति का जरिया समझा जाता था। उन्हें घर की चारदीवारी में रहना पड़ता था और ऐसे में नारी की उपलब्धियों को इतिहास के पन्नों में ढूढ़ना पड़ता है। जिन औरतों को घरेलू कार्यों में समेट दिया गया था, वह अपनी इस चारदीवारी को तोड़कर बाहर निकली है और अपना दायित्व स्फूर्ति से निभाते हुए सबको हैरान कर दिया है। इक्कीसवीं सदी नारी के जीवन में सुखद संभावनाएँ लेकर आई है। नारी अपनी शक्ति को पहचानने लगी है वह अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हुई है।

लेकिन यहाँ हम इस कटु सत्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि महिलाओं को आज भी पुरुषों की तुलना में कम मजदूरी मिलती है । यही नहीं सूदूर गांवों में उनका शारीरिक शोषण भी आम बात है । इसका भी काफी हद तक समाधान हो सकता है अगर महिलायें खुद आगे बढ़कर आये ।

महिला दिवस की सफलता की पहली शर्त जहाँ मूलत: महिलाओं के सर्वोतोमुखी विकास में निहित है, वही दूसरी शर्त के बतौर हमें यह कहने में भी लेशमात्र हिचक नहीं है कि पुरुष मानसिकता में आमूलचूक बदलाव आए और वह इस वास्तविकता को जाने कि घर के कामकाज के साथ जब महिलाये अन्य महत्वपूर्ण और चुनौती भरे क्षेत्रों में भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है, तो फिर महिलाओं की क्षमता पर सवाल और बवाल क्यों ?

अधिकांश परंपरागत लोगों को अब भी लगता है कि महिलाओं को घर के कामों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए और कार्य के लिए कदम नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि ये उनका कार्य क्षेत्र नहीं है । उनको ये ज्ञात होना चाहिए कि महिलाओं को आज भी समान क्षमता प्राप्त है, वे भरोसेमंद और मूल्यवान हैं ।

महिला दिवस इन महान महिलाओं के व्यक्तिव एवं कृतित्व के बारे में प्रत्येक व्यक्ति को याद दिलाने और विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा अन्य स्थानों में इसके महत्व को बताने का सबसे मजबूत बुनियादी तरीकों में से एक है । वास्तव में महिलाओं के लिए यह एक खास दिन है, जहां वे सम्मानित और सराहनीय होती हैं । ये एक ऐसी घटना जो एक राजनीतिक संबंध के रूप में शुरू हुई है, जो वर्षों से विकसित हुई है और अब महिलाओं को सम्मान देने के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर हमें इन्हें फूल, ग्रीटिंग कार्ड और ज्यादातर क्षेत्रों में उपहार देकर सम्मानित करने के साथ एक बेहतर दुनिया का निर्माण करने का प्रयास करना चाहिए जहां पुरुष और महिला सामंजस्यपूर्ण, हिंसा और भेदभाव से मुक्त रहते हैं ।

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Friends! ये essay & speech on International Women’s Day in Hindi खासतौर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के सम्मान में बोलने के लिए लिखा गया है और उम्मीद है कि आपको ये लेख  बेहद पसंद आया होगा | अगर ऐसा है तो देर किस बात की फटाफट इसे Facebook Page share करें ताकि दूसरे भी इसका लाभ उठा सके और हाँ हमारा free email subscription जरुर ले ताकि मैं अपने future posts सीधे आपके inbox में भेज सकूं |

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