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सकारात्मक सोच की शक्ति Positive Thinking in Hindi

सकारात्मक सोच की शक्ति और उससे होने वाले फायदे – Power of Positive Thinking in hindi

Positive Thinking in Hindi

Power of Positive Thinking in Hindi
Power of Positive Thinking in Hindi

सकारात्मक सोच बेहद जरुरी है | सकारात्मक सोच से मनुष्य धन, यश, वैभव आदि सभी पा सकता है | जो व्यक्ति हमेशा सकारात्मक सोचते है वे विपरीत परिस्थितियों में भी निराश व हताश नहीं होते अपितु उठ खड़े होते हैं, कमर कस लेते है समस्त बाधाओं को दूर करने के लिए और उनका यही आत्मविश्वास उनको सफल बनाता है | दुनिया के तमाम पुरुषों और महिलाओं के लिए अच्छा व्यवहार और कर्म का आधार सकारात्मक सोच ही रहा है | 

दरअसल हम लोग जैसा सोचते हैं, वैसा ही विचार करते हैं और जैसा विचार करते हैं, वैसा ही हमारा कृत्य हो जाता है। इस संसार में कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह के कार्य को कर सकता है, बस उसे करने का साहस, प्रबल इच्छाशक्ति व दृढ़ विश्वास होना चाहिए। यह प्रबल इच्छाशक्ति, दृढ़ विश्वास ही उसे वह सकारात्मक सोच व आतंरिक प्रेरणा प्रदान करते हैं, जिससे वह अपने मार्ग में आने वाली हर बाधा को दूर करता है। सकारात्मक सोच व्यक्ति को हमेशा सुख और समृद्धि देती है, सकारात्मक सोच ही है जो आपके व्यक्तित्व को नवजीवन देती है।

यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि जो व्यक्ति जितना सकारात्मक एवं अपनी क्षमताओं का सही नियोजन करता है, वह उतना ही प्रसन्नमुख, उत्साही, आत्मविश्वासी, रचनात्मक, दूरदर्शी, चुनौतियों को स्वीकारने वाला और सफल व्यक्ति होता है। ऐसे व्यक्ति पर हर कोई भरोसा करता है। इस सोच के व्यक्ति अनेकों निराश व्यक्तियों के अँधेरे मन में प्रकाश की किरण पहुँचाने का हुनर रखते हैं, यही इसका प्रभाव है।

यह हुनर अपने अन्दर विकसित करने के लिए आपको अपनी सोच को बुद्धिमानी से नियंत्रित करना होगा । इसलिए जब तक आप 100 प्रतिशत अपनी शक्ति सकारात्मक सोच को विकसित करने में नहीं लगा देते तब तक सफलता का परचम फहराना मुश्किल होगा । इस कौशल में जो निपुण है उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है ।

दोस्तों आप भी इस कौशल में निपुण हो सकते है बशर्ते सकारात्मकत सोच को अपनाने के लिए सबसे पहले आपको ऐसे लोगों की संगति करनी चाहिए जिनकी सोच सकारात्मक हो और जो नकारात्मकता से परहेज करते हों; क्योंकि संगति का असर व्यक्ति के ऊपर सबसे पहले होता है। अत: नकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्तियों से दूर ही रहे, उनका साथ कभी नहीं करना चाहिए। अगर आपको अच्छे लोगों का संग – साथ नहीं मिल रहा है तो आप महापुरुषों की जीवनियों, अच्छे साहित्यों को पढ़ना शुरू कर दें। स्वाध्याय करना तो हर व्यक्ति के लिए लाभदायक होता है, क्योंकि इससे नए – नए विचार मिलते हैं और व्यक्ति का ज्ञानतंत्र विकसित होता है। लेकिन याद रखे कि जो भी करे हमेशा ईमानदारी और कुशलता से करे ।

इसके अतिरिक्त आपको भगवान पर भरोसा रखना चाहिए। जिंदगी से निराश होने वाले लोग सबसे पहले भगवान को कोसते हैं और उसे गालियाँ देते हैं; जबकि हकीकत यह है कि भगवान कभी किसी को निराश नहीं करते, वे आपके धैर्य और साहस की परीक्षा लेते हैं, आपको कष्ट में डालकर।

भगवान आपके जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कर देते हैं, जो आपके विकास के लिए सर्वोत्तम होती हैं, लेकिन आपकी नजर में वह परिस्थिति बड़ी भारी विपत्ति होती है। इस विपत्ति को यदि आप सकारात्मक रूप से ले और अपनी क्षमताओं का सदुपयोग करते हुए पार करे तो निश्चित रूप से आप अपने अन्दर छिपी हुई रचनात्मक शक्तियों से अवगत हो सकेंगे।

इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि अपने जीवन की दुखपूर्ण, कष्टपूर्ण अवस्था में आप ने अपने मन के लिए जो अच्छा सोचा या जो लक्ष्य बनाया, उसका आपको सतत स्मरण करते रहना चाहिए। अपनी सुन्दर कल्पना रूपी पौधे को हमेश खाद – पानी देते रहना चाहिए; अन्यथा इसके अभाव में वह मुरझा जायेगा और हमेशा के लिए सूखकर ख़त्म हो जायेगा।

दुःख, कष्ट जीवन के विकास में वरदानस्वरूप होते हैं, इनकी यादें हमारे मन के साथ गहराई से जुड़ीं होती हैं; इन क्षणों में हम परमात्मा के सर्वाधिक निकट होते हैं। इन क्षणों में हमारा चित्त निर्मल होने लगता है और हमारी भावनाओं का भी शीघ्रता से विकास होने लगता है, लेकिन इन क्षणों को जीना आपको आना चाहिए अन्यथा आप निराशा – हताशा के घोर सागर में डूब सकते है।

व्यक्ति के जीवन को निखारने में संघर्षों की आवश्यकता होती है। इन संघर्षों के अभाव में उसकी शक्तियाँ अविकसित रह जाती है। यदि भगवान व्यक्ति के जीवन में ऐसी व्यवस्था कर देता है कि उसका जीवन बिना अवरोधों के सरलतापूर्वक चलता रहे, तो वह पंगु बन जायेगा। संघर्ष व्यक्ति के जीवन – विकास के लिए बहुत जरुरी हैं और इन संघर्षों के पलों से जूझने के लिए सकारात्मक सोच व विवेकशक्ति का होना भी जरुरी है, अन्यथा जिंदगी में आने वाले उतार – चढ़ाव उसे भटका सकते हैं। अत: व्यक्ति को भगवान् पर अटल विश्वास रखते हुए सकारात्मकता को अपनाना चाहिए और अपनी क्षमताओं का सुनियोजन करना चाहिए। 

सकारात्मक विचारों को मन में स्थान दीजिये फिर देखिये आप के लिए सफलता के सारे रास्ते खुल जायेंगे । आप थोडासा सतर्क और सावधान रहें तो अपने सकरात्मक विचारों के प्रभाव से नकारात्मक विचारों को निरस्त कर सकते हैं। हम सफल भी उन्हीं कामों में होते है जिनके पीछे सकारात्मक विचारों की प्रबलता होती है।  

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