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बिन पानी सब सून, “जल ही जीवन है” – Essay on Jal Hi Jeevan hai…-TakeCare.com

पानी (जल) का महत्व पर निबंध “जल ही जीवन है” (Jal hi jeevan hai short essay in hindi for class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 )

Essay on Jal Hi Jeevan hai
Essay on Jal Hi Jeevan hai

जल है तो कल है – Essay on Jal Hi Jeevan hai in Hindi

Jal Hi Jeevan hai – दोस्तों हाल ही में मैंने ये खबर पढ़ी और सुनी भी कि जिन जलाशयों के सहारे हमारी सरकार लोगों को पीने का पानी मुहैया करा रही हैं, वे सब सूख रहे हैं। इससे तो वर्तमान में जो जल संकट है, वह और भी खतरनाक हो सकता है। क्योंकि हवा, भोजन के बाद मानव जीवन के लिए जल अति आवश्यक पदार्थ है। भोजन के बिना मनुष्य एक महीने या कुछ और अधिक दिनों तक जीवित रह सकता है, परन्तु जल के बिना नहीं। अत: जल ही जीवन है। यह कहावत सत्य है।

इस धरती पर सबसे बहुमूल्य रत्न जल है जो प्रकृति के द्वारा मानवता के लिए अनमोल उपहार है, जल की वजह से ही इस धरती पर जीवन संभव है । जल के बिना जीवन की कल्पना भी मुश्किल है या यूं कहें कि यही पृथ्वी पर सम्पूर्ण जीव एवं वनस्पति जगत के जीवन का आधार है । इसलिए हम सभी को जल का महत्व या उपयोगिता को जानना और समझना चाहिए और उसके संरक्षण का प्रयास करना चाहिए।

ईश्वर ने प्रकृति के रूप में प्राणियों को इतनी उदारता दी है कि वह जल के शुद्धिकरण में सहायता करती है व अपने स्वरूप से जल को शुद्ध करके हमें प्रदान करती है। व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए शुद्ध जल ही उपयोगी है। अशुद्ध जल का सेवन करने से कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती है।

पीने के अतिरिक्त हम लोगों को प्रतिदिन दैनिक कार्यों नहाने, कपड़ा धोने, घर की साफ सफाई, बागवानी, रसोईघर आदि के लिए भी जल की आवश्यकता होती है। यदि घर में एक दिन भी नगरपालिका जल न आए तो चारों ओर हाहाकार मच जाता है। हमें अपने दैनिक कार्यों को करने में अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ जाता है। जल का महत्व व उपयोगिता के कारण ही आज की आधुनिक दुनिया में बढ़ती जनसंख्या के साथ जल की खपत बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

पर अफसोस आज ये तो सभी जानते और मानते हैं, कि जल ही जीवन है और बिना पानी सब कुछ शून्य है। फिर भी लोग दिन – रात बेमतलब इस बहुमूल्य संपदा को नष्ट करने में लगे हुए है। इसको सही ढंग से कैसे और कितना खर्च करना हैं, इसे दरकिनार कर देते हैं।

हम सब अभी जिस जल संकट का सामना कर रहें हैं उसके कई कारण हैं, और सबसे प्रमुख जिम्मेदार कारण जो है वह है, पूरे मानव विरादरी की बड़ी गलती है । इसने पानी की कीमत कभी नहीं पहचानी, और तो और जितना इसे मिला उससे कही ज्यादा बर्बाद कर दिया । इतनी बर्बादी कि ताल, तलैया, नदिया और नल तक सूख गए । इसी कारण नागरिक अपने शुद्ध जल के जन्मसिद्ध मूलाधिकार से भी वंचित होता जा रहा है। गर्मियों में जल का संकट और भी बढ़ जाता है।

यदि विशेषज्ञों की माने तो आगे भूजल को प्रदूषित होने से रोका जाये तो इस संकट से बचा जा सकता है। इसके लिए जनता में गहन इच्छा शक्ति की आवश्यकता है। सभ्य, स्वस्थ्य और गरिमामय जीवन के लिए भी साफ व शुद्ध पेयजल आवश्यक है । हालही में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रस्तुत की गई एक रिपोर्ट में यह पाया गया है कि दुनियाभर में 85 प्रतिशत से ज्यादा बीमारियों का मुख्य कारण सुरक्षित पेयजल का अभाव लोगों को बीमार बनाने की श्रृंखला को जन्म दे रहा है ।

निश्चय ही पानी में दिन – रात घुलते जा रहे आर्सेनिक, लौहांस आदि जल को प्रदूषित कर रहा है, जिसे पीने से तमाम तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही है । शुद्ध पेयजल का अभाव हमारे देश में मानव अधिकारों के उल्लंघन की सबसे व्यापक और निष्क्रिय किस्म है ।

अनुमानित बढ़ती जनसंख्या के साथ जल की खपत जिस तरह बढ़ गई है उससे 1.10 अरब नागरिक दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं और अपने शुद्ध जल के जन्मसिद्ध मूलाधिकार से वंचित है । ऐसी स्थिति सरकार तथा पूरे मानव विरादरी के लिए चिंता का विषय है । उल्लेखनीय है कि 29 जुलाई 2010 को संयुक्तराष्ट्र ने भी साफ़ पानी की उपलब्धता को मानव अधिकार घोषित कर चुका है । संयुक्तराष्ट्र के अनुसार स्वच्छ पानी की सुविधा तक पहुंच अब हर व्यक्ति का मूल मानवाधिकार होगा ।

192 देशों की प्रतिनिधित्व वाली इस संस्था ने साफ पानी की उपलब्धता को हमारा मूल अधिकार तो घोषित कर दिया पर क्या हम अपने शुद्ध जल के मूलाधिकार का सही उपयोग कर रहें हैं, शायद नहीं । क्योंकि जल पर जिंदा रहने वाले हम मानव जाति ही इसका दूरूपयोग धडल्ले से कर हैं । नतीजतन पहले तो केवल गर्मियों में जल संकट ज्यादा बढ़ जाता था, पर आज आलम ये है कि पूरे साल जल संकट का खतरा तलवार की भांति हमारे सर के ऊपर लटक रहा है।

उल्लेखनीय है कि जल कभी भी समाप्त न होने वाला मुख्य प्राकृतिक संसाधन हैं परन्तु धरती पर जल की जितनी मात्रा है, उसका एक प्रतिशत ही साफ़ जल है और हमारे उपयोग के लायक है। इसलिए जनता को जल के महत्व को समय रहते ही समझना होगा। पानी से दोस्ती की सार्थक कोशिश करनी होगी ।

इसी लिहाज से प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी ने स्वच्छता अभियान की ही तरह जल संरक्षण के लिए जो जनजागृति का संदेश दिया, वह बेहद सराहनीय और जरुरी है। आईये इससे पहले की हद गुजर जाए हम इस जल संरक्षण मुहीम में शामिल हो जाये । जिस तरह से हम अब सार्वजनिक स्थानों पर गन्दगी फैलाने से कतराते हैं, उसी तरह अब पानी के दुरुपयोग से भी हम सभी को डरना होगा । जीतनी जरुरत हो, उतना ही पानी उपयोग में लाने की अनिवार्यता हमारे जीवन का एक नियम बन जाना चाहिए ।

सभी देशवासियों को मोदी जी के इस नए मिशन में सहयोग के लिए खुलकर आगे आना होगा । सभी को पानी के महत्व को जानना और उसके संरक्षण का प्रयास करना होगा । इससे ये अनुपम सृष्टि बनी रहेगी तथा हमारा कल सुरक्षित होगा। क्योंकि जल है तो ही कल है ।

दुनिया के दूसरे देशों की तरह अगर इस स्रोत को विकसित, संरक्षित कर उपयोगी ढंग से प्रबंध किया जाए, तो भारत के तमाम क्षत्रों में प्रकृति की यह देन सचमुच अनिवर्चनीय सिद्ध हो सकती है। हर कोई यदि जल संरक्षण की आवश्यकता को समझें और जल संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाये तो साफ पानी की कमी को पूरा कर सकते हैं ।

मोदी जी का जल बचाओ अभियान तब तक निर्थक है जब तक इस दिशा में त्वरित कदम उठाते हुए भूजल संसाधनों को बचाने में हम सब एक जुट न हों, परन्तु ये तभी संभव होगा, जब पानी का प्रयोग करते समय बर्बादी कम से कम हो, इसके संरक्षण की पर्याप्त व्यवस्था हो, इनका बहुआयामी व बहुउद्देशीय उपयोग हो, इसके उपयोग के समय पर्यावरण का संतुलन भंग न हो आदि ।

आईये अपनी दिनचर्या में पानी का दुरुपयोग रोकें और भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन को नियंत्रित करने के साथ बारिश के पानी को संरक्षित करें, अन्यथा 2030 तक 40 फीसदी आबादी के पास पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं होगा ।

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