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जल ही जीवन है

जल ही जीवन है पर निबन्ध

Essay on Jal Hi Jeevan hai
Essay on Jal Hi Jeevan hai

Jal Hi Jeevan hai Essay in Hindi – दोस्तों! जिंदा रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी चीजो में पहले हवा है पानी है और फिर भोजन है। यहाँ हवा पर चर्चा करना फिजूल हैं क्योंकि हवा के बिना कुछ घंटे में ही हम भगवान को प्यारे हो जाएंगे। रही बात भोजन की तो एक इंसान भोजन के बिना तीन सप्ताह से अधिक समय तक जी सकता है, लेकिन पानी की एक अलग ही कहानी है। एक व्यक्ति को बिना पानी के अधिकतम समय एक सप्ताह लगता है। यह अनुमान निश्चित रूप से कठिन परिस्थितियों में कम होगा, जैसे कि उमस भरी गर्मी। यहाँ हम सिर्फ नॉर्मल इंसान की बात कर रहे हैं न की विज्ञान के परे उन लोगों की जो पहले साधू, महात्मा, और योगी अवस्था में हजारों वर्ष तक जीवित रहे हैं।

अत: जल, जीव-सृष्टि का आधार है। जहाँ जल है वहाँ जीवन है। वैज्ञानिक भी मानते हैं जीवन के अस्तित्व को बनाएं रखने के लिए प्रकृति प्रदत्त दूसरा अति आवश्यक चीज जल है। जल के बिना मनुष्य, प्राणी, वनस्पति किसी का जीवन संभव नहीं है। यही कारण है कि प्रकृति ने जल का साथ हमें आशीर्वाद स्वरूप दिया है। ऐसे जीवनाधार जल को यदि हम खो देंगे तो हम एक स्वथ्य जीवन खो देंगे। लेकिन खेद का विषय है कि भौतिक सुविधाओं की अन्धी दौड़ में फँसा मनुष्य इस मूल्यवान वस्तु को दुर्लभ बनाए दे रहा है।

बीते कुछ दशक की बात करें तो जल की स्थिति बेहद नाजुक हुई है। विकास के दौड़ में हमनें जल की बड़ी बर्बादी की है। उसका काफी दुरुपयोग किया  है। परिणाम स्वरूप जल का प्रदूषित होना और साफ पानी की कमी एक दुखद पहलू बनकर सामने आया हैं। लिहाजा जल संरक्षण आज के समय में बेहद जरूरी हो गया है। इस समस्या की गंभीरता से लोगों को आगाह करने के लिए भारत सहित दुनियाभर में 22 मार्च को जल दिवस के रूप मनाया जाता है।

विश्व जल दिवस (World Water Day) जल संरक्षण की दिशा में एक बहुत बड़ा आयोजन है जो वैश्विक स्तर पर मुहीम चलाकर काम करता है। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र संघ तथा जल प्रेमियों द्वारा जल के मूल्यों को बताया जाता हैं लेकिन वास्तव में जल के महत्व को समझना जरुरी हैं।

आज की आधुनिक दुनिया में बढ़ती जनसंख्या के साथ जल की खपत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। खबर ये भी है कि प्रदूषण के कारण दिनोंदिन पानी जहरीला होता जा रहा है। इसी कारण नागरिक अपने शुद्ध जल के जन्मसिद्ध मूलाधिकार से भी वंचित हो रहा है। गर्मियों में जल का संकट और भी बढ़ जाता है। यदि विशेषज्ञों की माने तो आगे भूजल को प्रदूषित होने से रोका जाये तो इस संकट से बचा जा सकता है। इसके लिए जनता में गहन इच्छा शक्ति की आवश्यकता है।

जल संसाधन का विकास हमारी और हमारे देश की पहली जरूरत है और यह तो केवल तभी संभव है जब जीवन में परिवर्तन की धारा प्रवाहित हो। “सबको जल, शुद्ध जल।” देश के हर नागरिक का सर्वप्रथम अधिकार है। और उन्हें यह अधिकार दिलाने के लिए हमारी सरकार नि:सन्देह अतुलनीय प्रयास कर रही हैं। उनके इस प्रयास को तेज करने के लिए हमारा योगदान आवश्यक ही नहीं अनिवार्य हो गया है। जीना है तो जल को बचाना होगा। उसका सही और नियंत्रित उपयोग करना होगा। 

ईश्वर ने प्रकृति के रूप में प्राणियों को इतनी उदारता दी है कि वह जल के शुद्धिकरण में सहायता करती है व अपने स्वरूप से जल को शुद्ध करके हमें प्रदान करती है। व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए शुद्ध जल ही उपयोगी है। अशुद्ध जल का सेवन करने से कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती है। परन्तु अफसोस  की बात है आज ये तो सभी जानते और मानते हैं, कि जल ही जीवन है और बिना पानी सब कुछ शून्य है। फिर भी लोग दिन – रात बेमतलब इस बहुमूल्य संपदा को नष्ट करने में लगे हुए है। इसको सही ढंग से कैसे और कितना खर्च करना हैं, इसे दरकिनार कर देते हैं।

हम सब अभी जिस जल संकट का सामना कर रहें हैं उसके कई कारण हैं, और सबसे प्रमुख जिम्मेदार कारण जो है वह है, पूरे मानव विरादरी की बड़ी गलती है । जिसने पानी की कीमत कभी नहीं पहचानी, और तो और जितना मिला उससे कही ज्यादा बर्बाद कर दिया । इतनी बर्बादी कि ताल, तलैया, नदिया और नल नाले तक सूख गए । इसी कारण नागरिक अपने शुद्ध जल के जन्मसिद्ध मूलाधिकार से भी वंचित होता जा रहा है। गर्मियों में जल का संकट और भी बढ़ जाता है।

सभ्य, स्वस्थ्य और गरिमामय जीवन के लिए भी साफ व शुद्ध पेयजल आवश्यक है । हालही में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रस्तुत की गई एक रिपोर्ट में यह पाया गया है कि दुनियाभर में 85 प्रतिशत से ज्यादा बीमारियों का मुख्य कारण सुरक्षित पेयजल का अभाव लोगों को बीमार बनाने की श्रृंखला को जन्म दे रहा है ।

निश्चय ही पानी में दिन – रात घुलते जा रहे आर्सेनिक, लौहांस आदि जल को प्रदूषित कर रहा है, जिसे पीने से तमाम तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही है । शुद्ध पेयजल का अभाव हमारे देश में मानव अधिकारों के उल्लंघन की सबसे व्यापक और निष्क्रिय किस्म है ।

अनुमानित बढ़ती जनसंख्या के साथ जल की खपत जिस तरह बढ़ गई है उससे 1.10 अरब नागरिक दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं और अपने शुद्ध जल के जन्मसिद्ध मूलाधिकार से वंचित है । ऐसी स्थिति सरकार तथा पूरे मानव विरादरी के लिए चिंता का विषय है । उल्लेखनीय है कि 29 जुलाई 2010 को संयुक्तराष्ट्र ने भी साफ़ पानी की उपलब्धता को मानव अधिकार घोषित कर चुका है । संयुक्तराष्ट्र के अनुसार स्वच्छ पानी की सुविधा तक पहुंच अब हर व्यक्ति का मूल मानवाधिकार होगा ।

192 देशों की प्रतिनिधित्व वाली इस संस्था ने साफ पानी की उपलब्धता को हमारा मूल अधिकार तो घोषित कर दिया पर क्या हम अपने शुद्ध जल के मूलाधिकार का सही उपयोग कर रहें हैं, शायद नहीं । क्योंकि जल पर जिंदा रहने वाले हम मानव जाति ही इसका दूरूपयोग धडल्ले से कर हैं । नतीजतन पहले तो केवल गर्मियों में जल संकट ज्यादा बढ़ जाता था, पर आज आलम ये है कि पूरे साल जल संकट का खतरा तलवार की भांति हमारे सर के ऊपर लटक रहा है।

उल्लेखनीय है कि जल कभी भी समाप्त न होने वाला मुख्य प्राकृतिक संसाधन हैं परन्तु धरती पर जल की जितनी मात्रा है, उसका एक प्रतिशत ही साफ़ जल है और हमारे उपयोग के लायक है। इसलिए जनता को जल के महत्व को समय रहते ही समझना होगा। पानी से दोस्ती की सार्थक कोशिश करनी होगी ।

इसी लिहाज से प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी ने स्वच्छता अभियान की ही तरह जल संरक्षण के लिए जो जनजागृति का संदेश दिया, वह बेहद सराहनीय और जरुरी है। आईये इससे पहले की हद गुजर जाए हम इस जल संरक्षण मुहीम में शामिल हो जाये । जिस तरह से हम अब सार्वजनिक स्थानों पर गन्दगी फैलाने से कतराते हैं, उसी तरह अब पानी के दुरुपयोग से भी हम सभी को डरना होगा । जीतनी जरुरत हो, उतना ही पानी उपयोग में लाने की अनिवार्यता हमारे जीवन का एक नियम बन जाना चाहिए ।

सभी देशवासियों को मोदी जी के इस नए मिशन में सहयोग के लिए खुलकर आगे आना होगा । सभी को पानी के महत्व को जानना और उसके संरक्षण का प्रयास करना होगा । इससे ये अनुपम सृष्टि बनी रहेगी तथा हमारा कल सुरक्षित होगा। क्योंकि जल है तो ही कल है ।

दुनिया के दूसरे देशों की तरह अगर इस स्रोत को विकसित, संरक्षित कर उपयोगी ढंग से प्रबंध किया जाए, तो भारत के तमाम क्षत्रों में प्रकृति की यह देन सचमुच अनिवर्चनीय सिद्ध हो सकती है। हर कोई यदि जल संरक्षण की आवश्यकता को समझें और जल संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाये तो साफ पानी की कमी को पूरा कर सकते हैं ।

मोदी जी का जल बचाओ अभियान तब तक निर्थक है जब तक इस दिशा में त्वरित कदम उठाते हुए भूजल संसाधनों को बचाने में हम सब एक जुट न हों, परन्तु ये तभी संभव होगा, जब पानी का प्रयोग करते समय बर्बादी कम से कम हो, इसके संरक्षण की पर्याप्त व्यवस्था हो, इनका बहुआयामी व बहुउद्देशीय उपयोग हो, इसके उपयोग के समय पर्यावरण का संतुलन भंग न हो आदि ।

आईये अपनी दिनचर्या में पानी का दुरुपयोग रोकें और भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन को नियंत्रित करने के साथ बारिश के पानी को संरक्षित करें, अन्यथा 2030 तक 40 फीसदी आबादी के पास पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं होगा । जल ही जीवन है जब तक मनुष्य इस बात को नहीं समझेगा, इस जल प्रदूषण से मुक्ति संभव नहीं हैं

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Babita Singh
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