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(Prerak Kahani) बच्चो की 4 प्रेरक प्रेरणादायक कहानियाँ – Bacho ki Kahaniya..-KhayalRakhe.com

(Prerak Kahani) बच्चो की 4 प्रेरक प्रेरणादायक कहानियाँ – Very Inspirational & Motivational Short Stories With Moral in Hindi

Prerak Kahani in hindi
Prerak Kahani in hindi

चार छोटे शिक्षाप्रद प्रेरक प्रसंग – 4 Short Shikshaprad Prerak Prasang in Hindi

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प्रेरक कहानी 1 – ‘संगत का फल’

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एक पेड़ पर एक कौआ और एक तोता रहते थे। एक बार उन्हें पता चला कि सागर तट पर गरुड़ भगवान पधार रहे हैं। सभी [पक्षी दर्शन करने वहां जाने लगे। दोनों ने सोचा, क्यों न हम सबसे पहले जाकर गरुड़ भगवान के दर्शन कर लें। जब सवेरे दोनों ने उड़ान भरी तो वे जल्दी ही सभी पक्षियों से आगे निकल गए।

उड़ते – उड़ते अचानक कौवे की नजर एक व्यक्ति पर पड़ी, जो की अपने सर पर एक दही का मटका लिए बाजार जा रहा था। कौआ उस दही वाले मटके पर जाकर बैठ गया और अपनी चोंच में दही भरकर फिर उड़ने लगा। लेकिन उसको दही का स्वाद चढ़ गया इसलिए अब वह बार बार उस मटके से दही निकालकर खाने की प्रक्रिया को दुहराने लगा। इस पर तोते ने कौवे को ऐसा न करने की कई बार हिदायत दी, पर कौआ न माना। इसी बीच किसान को कौवे की चोरी का पता चल गया। उसने कौवे को पकड़ने की कोशिश की, पर नाकाम रहने पर उसने कौवे को सबक सिखाना का मन बनाया। और अपना दही रास्ते पर रख कर वह किसान एक पेड़ के पीछे छिप गया।

कौवे को जब मटके के आसपास कोई नहीं दिखा, तो वह फिर चोंच में दही भरकर पेड़ की डाल पर बैठकर खाने लगा। कौआ बड़ा होशियार था। जैसे ही किसान ने कौवे को निशाना बनाकर पत्थर मारा वह उड़ गया। पर जो पत्थर कौवे को मारने के लिए फेंका था वह तोता को जा लगा। तोता पत्थर की चोट से जमीन पर गिर पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई।

संगत का फल कहानी से सीख Moral of Story on Sangat Ka Phal : इस शिक्षाप्रद कहानी से सीख मिलती है कि हमें सदैव अपनी संगत अच्छी रखनी चाहिए |

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प्रेरक कहानी 2 – ‘अहंकार’

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सुन्दर घने वन में खड़े एक वृक्ष के साथ लिपटी एक लता धीरे – धीरे वृक्ष के बराबर ऊँची हो गई। वृक्ष का आश्रय पाकर उसने भी फलना – फूलना आरंभ कर दिया। यह सब देखकर वृक्ष अहंकार से भर उठा। उसे लगने लगा कि यदि वह नहीं होता तो लता का अस्तित्व ही न होता।

एक दिन वृक्ष ने उस लता से धमकाते हुए बोला – “सुन! चुपचाप जो मैं कहता हूँ उसे किया कर, वरना धक्के मारकर तुझको भगा दूँगा।” तभी उस रास्ते पर आ रहे दो पथिक वृक्ष की खूबसूरती देखकर रूक गये। एक पथिक अपने दूसरे साथी पथिक से कह रहा था कि – भाई! ये वृक्ष तो अत्यंत सुन्दर लग रहा है, इस पर जो सुंदर बेल पुष्पित हो रही है उसकी वजह से तो ये और भी सुंदर लग रहा है । इसे देख कर तो मेरी बड़ी इच्छा हो रही है की इसके नीचे बैठकर कुछ देर विश्राम करू।

वृक्ष उनकी बातें सुनकर बड़ा लज्जित हुआ। उसे इस बात का एहसास हो गया कि उस का महत्व लता के साथ है उसके बिना नहीं।

अहंकार की कहानी से सीख Moral Of Ahankar Ki Kahani : इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि साथ साथ रहने से ही सबकी प्रगति होती है। मनुष्य को कभी अपने ऊपर अहंकार नहीं करना चाहिए |

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प्रेरक कहानी 3 – ‘जिंदगी का कड़वा सच’

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एक कसबे में एक अंधा भिखारी रहता था। ठीक से न खाने – पीने की वजह से उसका बूढा शरीर सुखकर कांटा हो गया था। बेचारा रास्ते के एक ओर बैठकर गिड़गिड़ाते हुए भीख मांगा करता था।

एक लड़का रोजाना उस रास्ते से निकलता था। भिखारी को देखकर उसे बड़ा बुरा लगता था। वह सोचता था कि वह भीख क्यों मांगता है ? जीने से उसे मोह क्यों है ? एक दिन वह भिखारी के पास गया और बोला, “बाबा, तुम्हारी ऐसी हालत हो गई है फिर भी तुम जीना चाहते हो ? तुम भीख मांगते हो, मगर ईश्वर से यह प्रार्थना क्यों नहीं करते कि वह तुम्हें अपने पास बुला ले ?”

भिखारी ने जबाब दिया, “भैया, तुम जो कह रहे हो, वही बात मेरे मन में भी उठती है। मैं भगवान से बराबर प्रार्थना करता हूँ, मगर वह मेरी सुनता ही नहीं। शायद वह चाहता है कि मैं इस धरती पर रहूं, जिससे दुनिया के लोग मुझे देखें और समझे कि एक दिन मैं भी उनकी ही तरह था, लेकिन वह दिन भी आ सकता है, जबकि वे मेरी तरह हो सकते हैं। इसलिए किसी को घमंड नहीं करना चाहिए।” लड़का भिखारी की और देखता रह गया।

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प्रेरक कहानी 4 – ‘चतुर चिड़िया’

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एक दिन की बात है एक चिड़िया आकाश में अपनी उड़ान भर रही होती है। रास्ते में उसे गरुड़ मिल जाता है। गरुड़ उस चिड़िया को खाने को दौड़ता है। चिड़िया उससे अपनी जान की भीख मांगती है। लेकिन गरुड़ उसपर रहम करने को तैयार नहीं होता। तब चिड़िया उसे बताती है कि मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं और उनके लालन पालन के लिए मेरा जीवित रहना जरूरी है। तब गरुड़ इस पर चिड़िया के सामने एक शर्त रखता है कि मेरे साथ दौड़ लगाओ और अगर तुमने मुझे हरा दिया तो मैं तुम्हारी जान बख्श दूंगा और तुम्हें यहां से जाने दूंगा।

गरुड़ इस बात को जानता था कि चिड़िया का उसे दौड़ में हराना असंभव है। इसलिए उसके सामने इतनी कठिन शर्त रख देता है। चिड़िया के पास इस दौड़ के लिए हां करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता। लेकिन चिड़िया को इस बात का अंदाजा था कि गरुड़ को दौड़ में हराना नामुमकिन है लेकिन फिर बी वह इस दौड़ के लिए हां कर देती है। पर वह गरुड़ से कहती है कि जब तक ये दौड़ ख़त्म नहीं होता वह उसे नहीं मरेगा। गरुड़ इस बात पर राजी हो जाता है।

दौड़ शुरू होती है चिड़िया फट से जाकर गरुड़ के सिर पर बैठ जाती है और जैसे ही गरुड़ दौड़ के आखिरी स्थान पर पहुंचता है चिड़िया फट से उड़ कर लाइन के पार पहुंच जाती ही और जीत जाती है। गरुड़ उसकी चतुरता से प्रसन्न हो जाता है और उसको जिंदा छोड़ देता है। चिड़िया तुरंत ही वहां से उड़ जाती है और अपने रास्ते चल देती है।

कहानी से सीख : इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में हालातों पर रोना नहीं चाहिए बल्कि समझदारी और चतुरता के साथ मुसीबत का सामना करना चाहिए। विरोधी या कार्य आपकी क्षमता से ज्यादा मजबूत हो तो इसका मतलब यह नहीं कि आप पहले से ही हार मान कर बैठ जाएं बल्कि समझदारी और धैर्य से बैठ कर समस्या का समाधान ढूढ़ना चाहिए। अपने ऊपर विश्वास रखना चाहिए कि हम किसी भी हालत में जीत सकते है ।

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Also Read : 

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