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एड्स की जानकारी। एड्स कैसे होता है। What is AIDS in Hindi – KhayalRakhe.com

एड्स कैसे होता है – What is AIDS in Hindi ?

एड्स क्या है ? Aids in Hindi, एड्स का सही मायनों में अर्थ क्या है ? एड्स फैलता कैसे है ? क्या यह सिर्फ लैंगिक संबंधो के द्वारा फैलता है या इसके फैलने के दुसरे कारण भी होते है। Aids Kaise Hota Hai इस सारे सवालों का जबाब आइये जाने –

Aids in Hindi
Aids in Hindi

What is aids in Hindi : ‘एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएन्सी सिंड्रोम’ एड्स का संक्षिप्त नाम है। यह एक असाध्य बीमारी है, जिसे पिछली सदी के अस्सी के दशक के पूर्व कोई भी नहीं जानता था। इस बीमारी का आभास सर्वप्रथम 1981 ई. में अमेरिका में हुआ, जब पाँच समलिंगी पुरुषों में इस अनोखी बीमारी के लक्षण पाए गए।

यद्यपि इसका आरंभ अमेरिका में हुआ, परंतु इसकी जानकारी के लगभग आठ वर्ष पश्चात्, 1989 ई. में ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ की एक गणना के अनुसार 1,40,000 से भी अधिक लोग इस बीमारी के शिकार पाए गए। 1997 ई. में यह संख्या बढ़कर 1,5,44,067 हो गई।

आज केवल भारत में ही लगभग पचास लाख से भी अधिक एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति निवास कर रहे हैं। जिस रफ्तार से इसके जीवाणुओं से भारत में लोग बाधित हो रहे हैं यह निकट भविष्य में हमारी सभ्यता के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है । इस समय यदि एड्स से बचने के लिए सामाजिक व पारिवारिक स्तर पर खुलकर चर्चा नहीं की गई तो आगे इस बीमारी की स्थिति बेहद चिंताजनक हालत में पहुँच चुकी होगी।

इस लेख को लिखने के पीछे भी यही मंतव्य निहित है कि उन सभी बारीकियों व दोषों को आपके सामने प्रस्तुत कर संकू जिससे एड्स के रोगी सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं। यह लेख एक प्रयास है उस अभियान का हिस्सा बनने का जो विश्व एड्स दिवस के तौर पर पूरी दुनिया में हर साल 1 दिसंबर को मनाया जाता है।

विश्व एड्स दिवस का उद्देश्य इस महामारी से लोगों को बचाना है और यही मकसद इस लेख का है कि उचित सुझाव व उपाय आप तक इस लेख के माध्यम से पहुंचा संकू जिससे अधिक से अधिक लोग पढ़कर लाभ उठा सकें। अगर मैं एड्स संबंधी थोड़ी सी भी जागरूकता लाने में सफल हुयी और कुछ लोगों को भी इस महामारी के संक्रमण से बचा सकी तो अपने आप को धन्य समझूंगी कि मैं आप के काम आ सकी। इसलिए सबसे पहले ये जानना बेहद जरुरी है कि एड्स क्या है ?

एड्स क्या है What is AIDS in Hindi?

एड्स वास्तविक रूप से किसी एक बीमारी का नाम नहीं है अपितु यह अनेक प्रकार के रोगों का समूह है जो विशिष्ट जीवाणुओं के द्वारा मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करने से उत्पन्न होती है। यह आवश्यक नहीं कि ‘एच.आई.वी.’ से ग्रसित सभी मनुष्य एड्स के रोगी हैं। इस जीवाणु से ग्रसित लोगों में ‘एड्स’ को पूर्णत: विकसित होने में 7 से 10 वर्ष तक लग सकते हैं।  

एचआईवी का अर्थ (Meaning of HIV in Hindi)

एड्स एक विषाणु के कारण फैलने वाला रोग है। इस विषाणु का नाम है एच आई वी यानि ह्यूमन इम्यूनोडिफिशियेंसी वायरस। आपने सम्भवतः एच आई वी शब्द को कही पढ़ा या सुना भी होगा। इसका अर्थ है कि एंटीबॉडी परिक्षण में उस व्यक्ति को एच आई वी से संक्रमित पाया गया लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं कि उसे एड्स है। लेकिन प्रभावित व्यक्ति के शरीर के भीतर ये एच आई वी वायरस छ: महीने और अधिकतम  15 साल तक निष्क्रिय अवस्था में रहने की ताकत रखता है। इस दौरान इस बात की पूरी संभावना होती है कि उसके शरीर में एड्स होने का कोई लक्षण प्रकट नहीं होता है। ज्यादातर इस दौरान एड्स के लक्षण सुप्तावस्था में ही रहता है। लेकिन ऐसे लोग दूसरों को संक्रमित कर सकते है।

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एड्स का अर्थ (Meaning of AIDS in Hindi)

एड्स ‘एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशियेंसी सिन्ड्रोम का संक्षिप्त नाम है। एक्वायर्ड अर्थात आप इससे संक्रमित हो सकते है; इम्यून डिफिशियेंसी अर्थात बीमारी से लड़ने वाले शरीर के प्रतिरक्षी तंत्र का कमजोर होना और सिन्ड्रोम का अर्थ एक साथ ढेर सारी स्वास्थ्य समस्याएं जो मिलकर किसी बड़ी बीमारी को जन्म देती हैं।

अमरीका स्थित सेन्टर फॉर डिजीज कन्ट्रोल (CDC) के अनुसार एच आई वी संक्रमित वे सभी व्यक्ति जिनके रक्त में CD4 टी कोशिकाओं की संख्या 200/मिली से कम होती है, एड्स पीड़ित की श्रेणी में आते हैं।

Aids Kaise Hota Hai – एच आई वी और एड्स कैसे होता है ?

एड्स एक ऐसी बीमारी है जो न तो वायुजनित है और न ही आम संपर्क से फैलती है बल्कि रक्त, सीमेन और स्तनपान जैसे तरल पदार्थों के जरिए फैलती है और अधिकतर घातक सिद्ध होती है। एड्स का विषाणु कभी एक व्यक्ति में नहीं रुकता है। एड्स संक्रमित व्यक्ति के रक्त या सीमेन के सम्पर्क में आने वाला व्यक्ति को भी एड्स हो सकता हैं। अब तक एड्स फैलने के जो मूल कारण सामने आये है उनमें एड्स इसी प्रकार फैलता है।

एच आई वी एड्स के प्रसार में मुख्य रूप से सहायक तरल पदार्थों के नाम इस प्रकार है –

–> रक्त

–> सीमेन

–> माँ का दूध

–> रक्त युक्त उतक

एच आई वी/एड्स को लेकर इंटरनेट पर और समाज में अनेक भ्रमित कर देने वाली जानकारियां व्याप्त है। यहां तक की टेलीविजन और समाचार पत्रों में आने वाले विज्ञापन भी अत्यंत भ्रामक होते हैं और रोग का सही रूप नहीं दर्शाते है । वास्तव में एच आई वी केवल रक्त वीर्य और स्तनपान से ही फैलने वाली बीमारी है और इसलिए रक्ताधान, लैंगिक संबंधो आदि के द्वारा इसके वायरस एक व्यक्ति के रक्त या वीर्य के दूसरे व्यक्ति के रक्त या वीर्य के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।

 मनुष्यों में ‘एच. आई. वी.’ अथवा ‘एड्स’ कुछ प्रमुख कारणों से ही फैलता है।

  • लैंगिक संबंध द्वारा

एच. आई. वी. मुख्यतः असुरक्षित यौन संबंधो से फैलता हैं। किसी भी युग्म का एक सदस्य यदि ‘एच. आई. वी.’ बाधित है तो यौन संबंधो द्वारा दूसरा सदस्य भी बाधित हो सकता है। एड्स का संचरण पुरुष से पुरुष में हो सकता है, पुरुष से स्त्री में हो सकता है और कुछ कम हद तक स्त्रियों से पुरुष में हो सकता है। जो स्त्री या पुरुष पहले से ही यौन रोगों से पीड़ित होते हैं उनमें तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है।

  • इंजेक्शन और गोदना

‘एच. आई. वी.’ जीवाणुओं से ग्रसित सुई के द्वारा भी फैलता है । आजकल बहुत सारे अनाड़ी और झोलाछाप चिकित्सक जो बिना साफ की गई सुइयाँ प्रयोग करते हैं।  संक्रमण के एक अन्य खतरे का स्रोत बन रहा है। इनके द्वारा संक्रमित व्यक्ति को लगाई गयी इंजेक्शन की सुईयों का उपयोग स्वस्थ्य व्यक्ति पर धडल्ले से किया रहा है जिससे एच आई वी का विषाणु स्वस्थ्य  व्यक्ति को भी संक्रमित कर दे रहा है। आज दुनिया भर में ड्रग्स लेने वाले लोग अधिक तीव्रता से एड्स के शिकार हो रहे हैं क्योंकि इनके द्वारा संक्रमित इंजेक्शन का उपयोग तीव्रता से हो रहा है। संक्रमित उपकरणों का गोदने के लिए उपयोग भी एच आई वी के संक्रमण में सहायक कारक होता है। 

  • रक्ताधान

रक्त संचारण विधि भी एड्स प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि किसी सामान्य व्यक्ति को एड्स रोग से ग्रसित रोगी का संक्रमित रक्त या ऐसे रक्त के उत्पाद, रक्त संचारण विधि से दिए जाएं तो वह व्यक्ति एड्स का शिकार हो सकता हैं। वर्तमान समय में विभिन्न प्रकार के रोगियों में रक्त संचारण की आवश्यकता होती हैं अत: इस कार्य के लिए यदि एड्स से ग्रसित व्यक्ति का रक्त उपयोग में आ जाता है तो वे इस खतरनाक रोग के शिकार हो जाते है।

  • माँ से बच्चे में

बाधित स्त्रियों के गर्भ से होने वाली संतान में भी इस रोग के लक्षण हो सकते है । दूसरे शब्दों में कहे तो यह संक्रमण गर्भावस्था के दौरान, जन्म के समय या बच्चे को दुग्धपान कराने के समय संचारित हो सकता। यह प्रक्रिया वर्टिकल ट्रांसमिशन कहलाती है। लेकिन गर्भवती महिला अगर किसी प्रशिक्षित डॉक्टर से प्रसव कराती है तो शिशु को एड्स होने के खतरे से बचाया जा सकता है।

एड्स फैलने का सबसे बड़ा एवं अहम कारण है इस बीमारी को रोकने के लिए कोई साधन उपलब्ध न होना है। लिहाजा विश्व के अनेक देशों में एड्स के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एड्स का इस प्रकार का प्रसार न केवल पीड़ित एवं उसके परिवारजनों के लिए एक विकट एवं गंभीर समस्या है बल्कि सम्पूर्ण समाज के लिए घातक है। लेकिन समाज में सभी को जीने का अधिकार है । इसलिए एड्स रोगी को हेय की दृष्टि से न देखे बल्कि उन्हें मानवीय संवेदना दे क्योंकि एड्स इन चीजों से तो बिलकुल नहीं फैलता –  

एड्स इनसे नहीं फैलता

-> इसके संक्रमण मूत्र, मल, वमन, पसीना में मौजूद नहीं होते है और न ही यह फ्लू या जुखाम-खांसी की तरह खांसने, छींकने से फैलता है और न ही किसी अन्य वाहक मच्छरों द्वारा फैलता है।

-> किसी एड्स रोगी के निकट बैठने से भी नहीं होता है ।

-> एड्स रोगी के साथ हाथ मिलाने, खाने, या उसकी चीजें उपयोग करने से एड्स नहीं होता है।

-> एड्स रोगी द्वारा प्रयोग किए टेलिफोन, मोबाइल आदि का उपयोग करने से भी एड्स के विषाणु नहीं फैलता है।

-> किसी एड्स रोगी की परिचर्चा करने से भी एड्स नहीं फैलता है ।

-> एड्स रोगी से गले मिलने से भी नहीं फैलता है ।

-> मानव शरीर के बाहर एच आई वी ज्यादा देर तक जीवित नहीं रहता । उच्च ताप, शुष्कावस्था या डिटर्जेंट के संपर्क में आने से यह मर जाता है ।  

वास्तव में देखा जाए तो एड्स लोगों की जीवन शैली में आए व्यापक परिवर्तन का नतीजा लगता है। संभवतया तेजी से हो रहा शहरीकरण, प्राचीन पारिवारिक मूल्यों का अवमूल्यन, स्वच्छंद यौनाचार और समलैंगिकता, अंगो और रक्त का बढ़ता अनैतिक व्यापार, अनाड़ी डॉक्टरो तथा नशेड़ियों के द्वारा संक्रमित इंजेक्शन का उपयोग आदि घटनाएँ न केवल मानव में विषाणु के प्रसार के लिए उत्तरदायी हो रही है बल्कि इस बीमारी को महामारी की तरफ धकेल रही है।

एड्स से कैसे बचे 

इस बीमारी लड़ने के लिए रोगी को लम्बे समय तक उचित देखभाल और सहारे की जरूरत होती है जो उसे अपने परिवार से मिलना चाहिए लेकिन भारत में एड्स के प्रति समाज की प्रतिक्रिया बेहद चिंताजनक है। जैसे ही एड्स प्रभावित रोगी की बीमारी सामने आती है वैसे ही ढेरों सामाजिक समस्याएं अपने आप ही उठ खड़ी होती है। इस बीमारी की सही जानकारी के अभाव और अज्ञानता के कारण इसे छूत की बीमारी समझकर अधिकांश परिवार एड्स पीड़ित को बेसहारा मरने के लिए छोड़ देते हैं। 

फ़िलहाल  इस बीमारी की रोकथाम  का अब तक एक ही सबसे कारगर उपाय है एड्स संबंधी जागरूकता। जागरूक रहकर ही एड्स से बचा रहा जा सकता है। यह एक लाइलाज बीमारी है। एड्स के उपचार के लिए कुछ इलाज है भी, तो वह बेहद मंहगा है और भारत में उपलब्ध नहीं है ।

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