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पर्यावरण संरक्षण पर दो उत्कृष्ट कविता (Environment Poem in Hindi)

पर्यावरण पर बेहतरीन कविता (Environment Poem in Hindi)

Environment protection (Environment Poem in Hindi) भगवान ने हमें हरे – भरे पर्यावरण का साथ आशीर्वाद दिया है, यदि हम यह आशीर्वाद खो देंगे तो हम एक स्वथ्य जीवन खो देंगे | बीते कुछ दशक की बात करें तो पर्यावरण की स्थिति बेहद नाजुक हुई है | विकास के दौड़ में हमनें पर्यावरण की अनदेखी की है | काफी नुकसान पहुंचाया है | परिणाम स्वरूप ग्लोबल वार्मिंग, एसिड बारिश, ओजोन परत की कमी, वायु और जल का प्रदूषित होना एक दुखद पहलू बनकर सामने आया हैं | वैश्विक जलवायु परिवर्तन जैव विविधता का नुकसान एक बड़ी समस्या बन चूका है |

विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा आयोजन है जो वैश्विक स्तर पर मुहीम चलाकर काम करता है | इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र संघ तथा पर्यावरणप्रेमियों द्वारा प्रकृति के मूल्यों को बताया जाता हैं लेकिन प्राकृतिक मूल्यों को समझना भी जरुरी हैं | अगर आप पर्यावरण की देखभाल और प्यार करते हैं तो नीचे पर्यावरण पर बेहतरीन कविता दिया हुआ है, ये पर्यावरण कविता आपको पर्यावरण को स्वच्छ और शांत रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। उम्मीद हैं आप जरुर प्रेरित होंगे | यह सच हैं कि तस्वीर एक दिन में नहीं बदलेगी लेकिन जब नई तस्वीर सामने आयेगी, तो निश्चित ही आपको वातावरण पर गर्व होगा |

पर्यावरण संरक्षण पर कविता संकल्प पर्यावरण संरक्षण का” – Hindi Poem on ‘Sankalp Paryavaran Sanrakshan Ka’ 

रत्न प्रसविनी हैं वसुधा,

यह हमको सब कुछ देती है |

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माँ जैसी ममता को देकर,

अपने बच्चों को सेती है ||

भौतिकवादी जीवन में,

हमनें जगती को भुला दिया |

कर रहें प्रकृति से छेड़छाड़,

हम ने सबको है रुला दिया ||

हो गयी प्रदूषित वायु आज,

हम स्वच्छ हवा को तरस रहे |

वृक्षों के कटने के कारण,

अब बादल भी न बरस रहे ||

वृक्ष काट – काटकर हम ने,

माँ धरती को विरान कर डाला |

बनते अपने में होशियार,

अपने ही घर में डाका डाला ||

बहुत हो गया बन्द करो अब,

धरती पर अत्याचारों को |

संस्कृति का सम्मान न करते,

भूले शिष्टाचार को ||

आओ हम सब संकल्प ले,

धरती को हरा – भरा बनायेगे |

वृक्षारोपण का पुनीत कार्य कर,

पर्यावरण को शुद्ध बनायेगे ||

आगे आने वाली पीढ़ी को,

रोगों से मुक्ति करेगे हम |

दे शुद्ध भोजन, जल, वायु आदि,

धरती को स्वर्ग बनायेगे ||

जन – जन को करके जागरूक,

जन – जन  से वृक्ष लगवायेगे |

चला – चला अभियान यही,

बसुधा को हरा बनायेगे ||

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जब देखेगे हरी भरी जगती को,

तब पूर्वज भी खुश हो जायेंगे |

कभी कभी ही नहीं सदा हम,

पर्यावरण दिवस मनायेगे ||

हरे भरे खूब पेड़ लगाओ,

धरती का सौंदर्य बढाओ |

एक बरस में एक बार ना,

5 जून हर रोज मनाओ ||

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पर्यावरण पर एक नम्र निवेदन कविता / पोएम – Environment Poem in Hindi

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Paryavaran par kavita in hindi
Paryavaran par kavita in hindi

न नहर पाटो, न तालाब पाटो,

बस जीवन के खातिर न वृक्ष काटो।

ताल तलैया जल भर लेते,

प्यासों की प्यास, स्वयं हर लेते।

सुधा सम नीर अमित बांटो,

न नहर पाटो, न तालाब पाटो,

स्नान करते राम रहीम रमेश,

रजनी भी गोते लगाये।

क्षय करे जो भी इन्हें, तुम उन सब को डाटो,

न नहर पाटो, न तालाब पाटो,

नहर का पानी बड़ी दूर तक जाये,

गेहूं चना और धान उगाये।

फिर गेंहू से सरसों अलग छाटों,

न नहर पाटो, न तालाब पाटो,

फल और फूल वृक्ष हमें देते,

औषधियों से रोग हर लेते।

लाख कुल मुदित हँसे,

न नहर पाटो, न तालाब पाटो,

स्वच्छ हवा हम इनसे पाते,

जीवन जीने योग्य बनाते

दूर होवे प्रदूषण जो करे आटो,

न नहर पाटो, न तालाब पाटो |

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