How to Write an Essay
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Essay Tips – How to Write an Essay in Hindi {निबन्ध कैसे लिखे}

Effective Tips on Essay Writing in Hindi Fonts | निबंध How to Write – Essay Writing  Skills

How to Write an Essay in hindi
How to Write an Essay in hindi

एक उत्तम निबन्ध कैसे लिखते है ? Simple Tips on Writing an Effective Essay  in Hind

Essay in hindi : निबन्ध रचना अथवा लेख किसी भी परीक्षा का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। साहित्यिक और कलात्मक विषयों में इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। निबन्ध केवल परीक्षा की दृष्टि से ही उपयोगी नहीं होते, बल्कि इससे पढ़ने – लिखने वालों के ज्ञान में अपार वृद्धि होती है, तथा गम्भीर अध्ययन के प्रति रुचि जागृत होती है। ये लेखक के विचारों और भावों का प्रकट रूप है,  और उसके व्यक्तित्व को प्रकाशित करने का अद्वितीय साधन है।

निबन्ध लेखन में भाषा का अत्यधिक महत्व होता है। यह एक कला है। संस्कृत विद्वानों का मत है कि जिस तरह पद्य रचना करना पद्य – लेखन कला की कसौटी है, उसी प्रकार निबन्ध – लेखन कार्य करना, गद्य – लेखन कला की कसौटी है। निबन्ध गद्य की एक महत्वपूर्ण रचना है।

निबन्ध-रचना का शाब्दिक अर्थ व प्रारूप – Essay writing in Hindi

अंग्रेजी शब्द Essay (एस्से) का हिन्दी में निबन्ध, पर्यायवाची है। एस्से फ़्रांसीसी भाषा का शब्द है। विदेशी विद्वानों के मतानुसार सब प्रकार के बंधनों से मुक्त स्वच्छन्द रचना को निबन्ध कहते हैं। निबन्ध बड़े से बड़े और छोटे से छोटे विषय पर लिखा जा सकता है। अंग्रेजी विद्वानों के मतानुसार निबन्ध की कोई सीमा निश्चित नहीं की जा सकती। दो चार पृष्ठों का भी निबन्ध लिखा जा सकता है और अधिक से अधिक पृष्ठों का भी। कुछ विद्वानों का यह भी विचार है कि ‘निबन्ध’ अनियमित और असम्बद्ध रचना को कहते हैं, इस रचना में “मन की उन्मुक्त उड़ान होती है।”

वास्तव में “निबन्ध वह रचना है जिसमें किसी विषय पर कोई लेखक सीमित समय और सीमित शब्दों में अपना क्रमबद्ध विचार व्यक्त करता है।” निबन्ध की पृष्ठ-भूमि में लेखक का व्यक्तित्व होता है, उसके मनोभाव होते हैं। एक ही विषय पर लिखे गये भिन्न – भिन्न लेखकों के विचारों में भिन्नता होना स्वाभाविक ही है इसलिए निबन्ध लेखन में, जितना लेखक के व्यक्तित्व का महत्व होता है, उतना विषय का नहीं। अत्यन्त शुष्क विषय को भी लेखक अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व से चमका देता है।

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अच्छे निबन्ध लेखन के सूत्र

विद्यार्थी चाहे किसी भी स्तर के हो, अच्छे निबन्ध लिखने की आवश्यकता और चाहत हर किसी को होती है। निबन्ध कैसे लिखे और एक बढ़िया निबन्ध लेखन में दक्षता कैसे प्राप्त करें ? इसके लिए कुछ आसान सूत्र (Tips) को आप ध्यान में रखकर, एक अति उत्तम निबन्ध लिखने में दक्षता प्राप्त कर सकते हैं।

एक अच्छा निबन्ध-लेखन में मुख्य दो वस्तुओं की आवश्यकता होती है –

(1) सामग्री,

(2) शैली।

सामग्री निबन्ध लेखन में सामग्री अत्यत्न आवश्यक तत्व है। इस मुख्य तत्व के अभाव में न कोई लेख लिखा जा सकता है और न कोई निबन्ध। सामग्री एकत्र करना कोई साधारण काम नहीं है। इसमें कई बातों के योग की आवश्यकता पड़ती है। हम जिस संसार में रहते हैं, उसकी प्रत्येक वस्तु का सूक्ष्म निरीक्षण करें, उसके विषय में हमें पूरा ज्ञान होना चाहिये। हमें भिन्न – भिन्न स्थानों का पर्यटन करना भी आवश्यक है, क्योंकि बिना देशाटन के हम किसी वस्तु का यथातथ्य वर्णन नहीं कर सकते।

निबन्ध लिखने की प्रमुख बात है कि हमारा भिन्न – भिन्न वस्तुओं पर गम्भीर अध्ययन होना चाहिये और विशेष रूप से उस वस्तु पर जिस पर हमें निबन्ध लिखना है। हमारा शब्द भण्डार विशाल और विस्तृत होना चाहिये। हमें यह देखना चाहिए कि जिस विषय पर हमें निबन्ध लिखना है, उस विषय पर प्रसिद्ध निबन्धकारों के क्या विचार हैं। अध्ययन के लिये हमें उच्च कोटि के लेखकों के ग्रन्थ चुनने चाहिएँ। केवल अध्ययन मात्र से कल्याण नहीं हो सकता। अध्ययन के पश्चात् मनन की परम आवश्यकता है।

जिस विषय को आप लिखना चाहते हैं, उसपर गंभीरतापूर्वक मनन कीजिये और बुद्धि की कसौटी पर कसकर देखिये कि इसमें तथ्य कहाँ है। निबन्ध – लेखन में सर्वाधिक वस्तु अभ्यास है, बिना अभ्यास के निबन्ध लिखना बालू की दिवार उठाना है, प्राय: देखा जाता है कि ऐसे छात्र जिनके पास न विचारों की कमी है न अध्ययन की, परन्तु लिखते समय कभी आकाश को देखते हैं, और कभी पृथ्वी को। वैसे तो संसार के प्रत्येक क्षेत्र में अभ्यास की बहुत आवश्यकता है, परन्तु निबन्ध – लेखन में विशेष रूप से, क्योंकि इसमें तो बिना अभ्यास के लेखक एक पग भी आगे नहीं बढ़ पाता।

शैली शैली का अर्थ है ‘किसी काम को करने का तरीका’ । निबन्ध लिखने में एक विशेष तरीका की आवश्यकता होती है। निबन्ध लिखने में सुन्दर – सुन्दर सार्थक शब्दों का प्रयोग करना चाहिए, वाक्य व्यवस्थित और सुसंगठित होने चाहियें। इसके साथ – साथ वाक्य छोटे हों और सरल हों। भाषा में रोचकता और प्रवाह लाने के लिए बीच – बीच में लोकोक्तियों, मुहावरों तथा अलंकारों का प्रयोग होना चाहिए। तद्भव शब्दों के स्थान पर यदि तत्सम शब्दों का प्रयोग किया जाये तो और भी अच्छा है। अन्य भाषाओँ के शब्दों को भी, जो हिन्दी में प्रचलित हों, प्रयोग में लाना चाहिए, इसमें भाषा की सुबोधता में वृद्धि होगी। कहने का तात्पर्य यह है कि निबन्ध की शैली सरल, शुद्ध, सुबोध और प्रभावोत्पादक होनी चाहिये।

निबन्ध के भाग – एक अच्छे निबन्ध के 3 महत्वपूर्ण भाग होते हैं :

1- आरम्भ (भूमिका)

2- मध्य (विषय वस्तु)

3- अंत या अवसान (उपसंहार)

इस भाग में विषय से परिचय कराना चाहिए। विषय का अर्थ, उस का व्यवहारिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय परिवेश, दैनिक जीवन से उनका सम्बन्ध आदि का वर्णन इस अंश में करें।

निबन्ध का आरम्भ आकर्षक और प्रभावोत्पादक भी होना चाहिए, जिससे पाठक के ह्रदय में रुचि और उत्सुकता उत्पन्न हो सके। निबन्ध की प्रस्तावना का विषय के मध्य और अन्तर में गहन सम्बन्ध रहता है। प्रस्तावना संक्षिप्त होनी चाहिये, परन्तु सारगर्भित निबन्ध का प्रारम्भ आप, विषय से सम्बन्धित किसी कवि की उक्ति से; विषय की परिभाषा से, आवश्यकता या महत्व प्रदर्शित करते हुए अथवा विषय की वर्तमान अवस्था और महत्व दिखाते हुए कर सकते हैं।

मध्य अंश में विषय का मूलसार वर्णित होता है। इस अंश में विषय से सम्बन्धित विभिन्न तथ्यों का वर्णन करना चाहिए। निश्चित रूप-रेखाओं द्वारा विषय का पूर्ण विवेचन करना चाहिए। अनावश्यक और अप्रमाणिक बातों को निबन्ध में स्थान नहीं देना चाहिये। इससे निबन्ध की क्लेवर वृद्धि तो हो जाती है, परन्तु विषय की नीरसता आने का भय बना रहता है।

इसे निष्कर्ष भी कहा जाता है | अवसान में समस्त निबन्ध का सारांश निहित होता है। निबन्ध की समाप्ति इस प्रकार करनी चाहिये; जिससे पाठक को यह प्रतीत न हो कि यह एकदम कैसे हो गया अर्थात विषय को शनैः-शनैः अवासानोन्मुख करना चाहिये। निबन्ध अपने में पूर्ण स्वाभाविक और प्रभावशाली होना चाहिये, जिससे पाठक की उसके विषय में समस्त जिज्ञासायें स्वत: शान्त हो जाएँ।

निबन्धों के प्रकार – मुख्य रूप से निबन्ध पाँच प्रकार के होते हैं –

1- वर्णनात्मक निबन्ध

2- विवरणात्मक निबन्ध

3- विचारात्मक निबन्ध

4- भावनात्मक निबन्ध और

5- कल्पनात्मक निबन्ध

वर्णनात्मक निबन्ध इन निबन्धों में वस्तु विशेष का सजीव वर्णन किया जाता है। पाठकों का वर्णन के द्वारा ही वस्तु का दर्शन कराने का प्रयत्न किया जाता है। इस प्रकार के निबन्धों में प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों प्रकार की वस्तुओं का समावेश होता है। इस प्रकार के निबन्ध लेखन में सूक्ष्म निरीक्षण-शक्ति तथा कुशल कल्पना की आवश्यकता होती है।

विवरणात्मक निबन्ध इन निबन्धों में बीती हुई घटनाओं, युद्ध कथाओं, जीवनियों, पौराणिक वृत्तान्तों आदि के दर्शन होते हैं। इस प्रकार के निबन्धों में क्रमबद्धता की ओर अधिक ध्यान देना चाहिए। जो घटना पहले हुई हो उसका वर्णन पहले जो घटना के मध्य में हुई हो, उसका वर्णन मध्य में और जो घटना अन्त में हुई हो, उसका वर्णन अन्त में करना चाहिये। इस प्रकार के निबन्धों में इतिहास की सी नीरसता नहीं आनी चाहिये। विवरण सरल और आकर्षक हो जिससे पाठकों की रुचि निबन्ध पढ़ने में ज्यों की त्यों बनी रहे।

विचारात्मक निबन्ध इन निबन्धों में विचार अथवा बुद्धि तत्व का आधिक्य रहता है। इनमें प्राय: आकारविहीन समस्यायें आती हैं – तर्क व्याख्या आदि का समावेश होता है। इनमें लेखक किसी विषय पर अपनी सम्मति प्रकट करता है और अपने तर्कों एवम् दृष्टान्तों से उसे प्रमाणित करता है।

विचारात्मक निबन्ध लिखने के लिये विषय सम्बन्धी यथोचित ज्ञान और लिखने की योग्यता अत्यन्त आवश्यक है। गम्भीर अध्ययन और चिन्तन के अभाव में विचारात्मक निबन्ध नहीं लिखे जा सकते। ऐसे निबन्धों की भाषा स्वत: कुछ कठिन और गूढ़ हो जाती है। फिर भी लेखक को भाषा में प्रभावोत्पादकता के साथ सरलता लाने का प्रयत्न करना चाहिये।

भावनात्मक निबन्ध यह विचारात्मक निबन्ध का ही एक रूप है जिसमें मनोयोग तर्क और युक्ति से आगे बढ़ जाते हैं | इस प्रकार के निबन्ध सोचने के लिए प्रेरित न कर कुछ करने को प्रवृत्त करते हैं | इनका विषय कुछ भी हो सकता है | इन निबन्धों में निबन्ध-लेखक भावों में डूबकर अपनी रचना करता है।

कल्पनात्मक निबन्ध इस प्रकार के निबन्ध यथार्थ के धरातल पर कम और कल्पना की उडान के स्तर पर अधिक लिखे जाते हैं। बहुत बार निबन्ध का विषय ही कल्पनात्मक होता है।

आशा है कि उपरिलिखित बातें छात्रों को निबन्ध लिखने में सहायक सिद्ध होंगी।

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उपरोक्त उपयोगी लेख हमें साक्षी जी ने भेजा है | साक्षी जी CRDPG College, Gorakhpur की होनहार छात्रा है और इनका अध्ययन-अध्यापन  में  विशेष रूचि है |

I am thankful to Shakshi ji for sharing this useful post for readers of khayalrakhe.com

 

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