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नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर निबंध – Essay on rights and responsibilities of citizens in Hindi

नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर निबंध – Rights And Duties of Indian citizens in Hindi

Essay on rights and responsibilities in Hindi
Essay on rights and responsibilities in Hindi

भारत के नागरिकों के अधिकार, जिम्मेदारी एवं कर्तव्य पर निबंध – Essay on Rights, Responsibilities & Duties of Citizens in Hindi

Essay on rights and responsibilities in Hindi  : अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू है – दोनों मूल्यवान धरोहर है | किसी भी एक के अभाव में दूसरा नहीं चल सकता | अधिकार और और कर्तव्यों का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है | इसलिए हर देश का संविधान अपने देश के प्रत्येक नागरिक को कुछ अधिकार प्रदान करता है। वास्तव में बिना अधिकारों के नागरिक जीवन का कोई विशेष महत्व नहीं।  ये अधिकार दो प्रकार के हैं – सामाजिक तथा राजनैतिक।

सामाजिक अधिकार : भारतीय नागरिक के मूल अधिकार {Fundamental Rights in Hindi}

सामाजिक अधिकारों में सबसे प्रमुख अधिकार मनुष्य को जीवित रहने का अधिकार है। शासन की ओर से प्रत्येक नागरिक को इस प्रकार की सुविधा प्राप्त हो, जिससे वह निर्भीक और निश्चिन्त होकर अपना जीवन-यापन कर सके। 

जीवन के साथ-साथ दूसरा सामाजिक अधिकार सम्पत्ति का है।  यदि किसी मनुष्य ने न्यायोचित रीति से धनोपार्जन किया हो या किसी प्रकार की सम्पत्ति एकत्रित की हो, तो उससे वह सम्पत्ति छीनी नहीं जा सकती।  यदि कोई व्यक्ति इस संपत्ति को छीनने या चुराने का प्रयत्न करेगा तो राज्य की ओर से उसे दण्ड मिलेगा।

तीसरा सामाजिक अधिकार सामुदायिक जीवन का अधिकार है, उसे विवाह आदि की स्वतंत्रता का अधिकार है।

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चौथा धर्म सम्बन्धी अधिकार है।  धर्म पालन में उसे पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है।  इसके अतिरिक्त उसे काम करने का अधिकार प्राप्त है, यदि कोई व्यक्ति बेकार है, तो शासन का कर्तव्य है कि उसको उसकी विद्या और बुद्धि के अनुसार कार्य प्रदान करे।

स्वतंत्र देशों में विचार स्वातन्त्रय तथा उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत बड़ा अधिकार समझी जाती है। भारतीय संविधान अपने प्रत्येक नागरिक को विचार और भाषा की स्वतंत्रता प्रदान करता है क्योंकि मनुष्य की यह स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वह केवल दूसरों की ही बात सुनना नहीं चाहता, अपितु अपनी भी दूसरों को सुनाना चाहता है। परन्तु इस भाषण स्वातन्त्रय पर इतना प्रतिबन्ध अवश्य होता है कि कोई व्यक्ति ऐसे विचार प्रकट न करे, जो दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हों, या उस भाषण से समाज में साम्प्रदायिक द्वेष फैलता हो।

राजनीतिक अधिकार : भारतीय नागरिक के मूल राजनीतिक अधिकार {Fundamental Rights in Hindi}

नागरिक के राजनैतिक अधिकारों में, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, उसे मताधिकार प्राप्त है। वह प्रत्येक सार्वजनिक चुनाव में अपना मत दे सकता हैं। निर्वाचित की शर्तों को पूरा कर लेने पर उसे निर्वाचित होने का भी अधिकार प्राप्त है।  वह अपनी योग्यतानुसार अपने को राज्य के ऊँचे से ऊँचे पद पर सुशोभित कर सकता है।  उसे आवेदन करने का भी अधिकार प्राप्त है।

यदि सरकारी कर्मचारी अपने कर्तव्य का यथोचित पालन नहीं करते, तो वह उनके विरुद्ध आवेदन कर सकता है।  बाढ़, महामारी, दुर्भिक्ष आदि के कष्टों के साथ जनता द्वारा अपने विचारों का समर्थन प्राप्त कर सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि जो देश जितना उन्नत और समृद्ध होता है, उसके नागरिकों को उतने ही अधिकार प्राप्त होते हैं।

Essay on rights and responsibilities in Hindi
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मौलिक कर्तव्य : भारतीय नागरिक के मूल कर्तव्य (Fundamental Duties in Hindi)

जहाँ नागरिकों के मूल्यवान मौलिक अधिकार होते हैं, वहाँ उनके कुछ कर्तव्य भी होते हैं। वास्तव में कर्तव्य पालन से ही अधिकारों का जन्म होता है | इसलिए जहाँ नागरिकों को अधिकार के उपभोग में प्रसन्नता होती है,  वहाँ उन्हें कर्तव्य पालन का भी पूर्ण ध्यान रखना चाहिए।

दरअसल अधिकारों का संसार बड़ा मधुर होता है, वे बड़े सुन्दर और आकर्षक होते हैं, परन्तु अधिकारों की शोभा कर्तव्य – पालन से है। अधिकार प्राप्त करके जो अपने कर्तव्य का पालन नहीं करता, उससे अधिकार छीन लिए जाते हैं।  नागरिक जीवन के अधिकारों के साथ – साथ कर्तव्य भी लगे हुए हैं। अधिकारों के बदले हमें समाज के प्रति कर्तव्य करने पड़ते हैं। बिना कर्तव्य के नागरिक के अधिकार सुरक्षित नहीं रह सकते।

हमारे मौलिक कर्तव्य एवं जिम्मेदारी

हमारा सर्वश्रेष्ठ कर्तव्य राष्ट्र-भक्त रहना है। जो शासन हमारी सुख समृद्धि के लिए निरन्तर प्रयत्नशील है,  उसकी रक्षा के लिए हमें सदैव सन्नद्ध रहना चाहिये।

हमारा यह कर्तव्य है कि हम हर कीमत पर देश में अशान्ति और अव्यवस्था न फैलने दें। राज्य हमारी उन्नति के लिए जो कुछ करता है, उन कार्यों के लिए धन की आवश्यकता होती है। हमें राज्य द्वारा लगाये गये करों को प्रसन्नतापूर्वक देना चाहिए,  जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति बिगड़ने न पाये।

कानून की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उसे ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जिससे सरकार के कानूनों का उल्लंघन होता हो। समाज के कल्याण के लिए वैधानिक नियमों का पूर्ण रूप से पालन करना परम आवश्यक है।

नागरिक का जीवन केवल अपने लिए ही नहीं है, अपितु अपने परिवार, अपने नगर, अपने देश तथा मानवता की रक्षा के लिए भी है। उसे सदैव यह ध्यान रखना चाहिए कि उससे कोई ऐसा काम न हो, जिससे दूसरों को कष्ट पहुँचे। देश की रक्षा के लिए उसे तन, मन, धन से सरकार की सहायता करनी चाहिए। जिस देश की धूलि में लेट-लेट के हम बड़े हुए, जिसके अन्न, जल और वायु से हमारा पोषण हुआ है,  उसकी रक्षा करना हमारा परम-धर्म है।

शासन-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए श्रेष्ठ नागरिकों को सदैव सरकार की सहायता करनी चाहिए।  प्रत्येक देश में भले और बुरे सभी प्रकार के व्यक्ति रहते हैं। जहाँ सज्जन होते हैं, वहाँ समाज विरोधी तत्व भी होते हैं। इनका दमन करना यद्यपि पुलिस और सरकार का काम है, लेकिन अकेली पुलिस तब तक अपना कार्य सफलतापूर्वक नहीं कर सकती, जब तक उसे नागरिकों का पूरा सहयोग प्राप्त न हो। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि चोरो, आतंकवादियों तथा इसी प्रकार के अन्य अपराधियों का पता लगाने में सरकार की पूर्ण रूप से सहायता करें।

अब हमारा देश स्वतंत्र है।  इसकी शासन-सत्ता हमारे ही हाथों में है। देश का उत्थान-पतन हमारे ही कार्यों पर निर्भर है। कही ऐसा न हो कि हमारी यह स्वतंत्रता उच्छृंखलता  का रूप धारण कर ले, हमें सदैव इस बात का ध्यान रखना चाहिए। स्वतंत्रता के साथ-साथ हमें बहुत से उत्तरदायित्व भी मिले हैं, जिन्हें सत्यता के साथ निभाना हमारा परम धर्म हैं।

हमें अपनी विभिन्न दलबन्दियों में बिखरी हुई शक्ति को संगठित करके देश के कल्याण में लगना चाहिए। अभी हमारे देश में पर्याप्त शिक्षा का अभाव है, इसलिए योग्य नागरिकों का अभाव है। परन्तु धीरे – धीरे यह कमी भी दूर होती जा रही है। 

ध्यान रखिए कि जो नागरिकों के कर्तव्य हैं, वे ही राज्य के अधिकार हैं और जो नागरिकों के अधिकार हैं वे ही राज्य के कर्तव्य हैं। अत: राज्य और नागरिक दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। इसलिए दोनों को ही अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, तभी भारतवर्ष में जनतंत्र और भी अधिक सफल हो सकेगा। जनतंत्र की सुरक्षा और नागरिकों के अधिकारों के प्रति सरकार यथेष्ट सजग एवं जागरूक है। नागरिकों को भी अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। 

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