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15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर जोशीला भाषण – Best Independence Day Speech in Hindi

स्कूल छात्रों के लिए 15 अगस्त (भारत स्वतंत्रता दिवस) पर लघु निबंध, भाषण और कविता

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण (देशभक्ति) – Best Inspirational Independence Day Speech that you can speak in your school and college

Speech on Independence Day in hindi
Speech on Independence Day in hindi

स्वतंत्रता दिवस पर जोरदार भाषण – Independence Day (15 August) Speech in Hindi

Independence Day Speech in Hindi – स्वतंत्रता दिवस भारत के लिए वह मौका था, जब आजादी की चाहत ने अचानक ही पूरे देश को एकजुट कर दिया | 15 अगस्त पर भाषण उस ऐतिहासिक आंदोलन की 72 जयंती पर उपलब्ध करा रही हूँ – Independence Day Speech | यह जोरदार भाषण (Best Independence Day Speech) उन तमाम वीरों के बलिदान को नमन करने के लिए और उन देश-भक्तों को सच्ची श्रद्धांजलि देने के ध्येय से लिखा गया हैं | इसे स्कूल जाने वाले छोटे, बड़े विद्यार्थी, स्कूल और कॉलेज अध्यापक, प्रिंसिपल सभी आसानी से बोल सकते हैं | 

Speech on Independence Day – 15 August स्वतंत्रता दिवस 

वंदेमातरम् ! इस सभागार में सभी उपस्थित गणमान्य अथिति, अध्यापकों और प्यारे भाई – बहनों को मेरा नमस्कार। जैसा की आप सब को ज्ञात है आज हम सब भारत के एक महान राष्ट्रीय अवसर स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्र और उन लाखों देशभक्तों को नमन करने के लिए एकत्रित हुए है जिन्होंने स्वत्रंता के लिए अपनी जान तक देश पर न्योछावर कर दी | हमारे लिए यह परम गौरव की बात है ऐसे राष्ट्रीय पर्व सचमुच हमें याद दिलाते हैं कि हम सब विश्व के सबसे बड़े प्रजातंत्र देश में एक है और स्वाधीन है | वास्तव में स्वतंत्रता दिवस हम सभी के लिए एक विशिष्ट दिन हैं, जो हमें याद दिलाता है कि परतंत्रता के दिनों में हम भारतवासियों ने अनेक कष्ट देखे थे | 

यह धारणा अपने में नितान्त सत्य है कि स्वतंत्रता मनुष्य को बड़े सौभाग्य से प्राप्त होता है | विश्व का इतिहास ऐसे असंख्य उज्ज्वल उदाहरणों से भरा पड़ा है, जिनमें लोगों ने अपने देश की स्वाधीनता की रक्षा के लिए हँसते – हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिये | अंग्रेजों के शासनकाल में 1857 में भारत के लाखों वीरों ने अपने देश को स्वतंत्रत कराने के लिए, जिस वीरता का परिचय दिया, वह भारत के इतिहास में अद्वितीय है, उस स्वतंत्रता संग्राम का परिणाम यह हुआ कि देश-भक्तों के भीतर आजादी के लिए एक ज्वाला भड़क उठी, जिसने ब्रिटिश सरकार को नेस्तनाबूद कर दिया |

‘भारत छोड़ों के नारे के साथ 1942 में एक बार फिर अगस्त क्रांति ने जोर पकड़ा और इस आंदोलन में हर तबके के लोगों ने हिस्सा लिया | ‘अगस्त क्रांति’ का नतीजा था कि अंग्रेजों को 15 अगस्त 1947 को भारत छोड़कर जाना पड़ा | जब हमारा प्यारा देश अंग्रेजों की पराधीनता से वर्षों बाद मुक्त हुआ था तो भारत माता ने आजादी के वातावरण में सांस ली थी |

स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष को और उस संघर्ष में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले देशभक्तों को भूलाया नहीं जा सकता | लेकिन तब से लेकर सन 1947 तक भारत को स्वतंत्रत कराने के लिए अनन्त माताओं की गोद से लाल, अनन्त पत्नियों के सौभाग्य सिन्दूर और अनन्त बहनों के भाई स्वतंत्रता की बलिवेदी पर चढ़कर अमरगति को प्राप्त हुए | परिवार के परिवार स्वतंत्रता की लड़ाई के पवित्र यज्ञ की अग्नि में भस्मसात् हो गये | क्रांतिकारियों के घरों में दिन दहाड़े आग लगाई गई | उनके परिवार के व्यक्तियों को भूखा मारा गया, उनकी माँ, बहनों की लज्जा लुटी गई |

अंग्रेज अपनी प्रभुता की रक्षा के लिए, जो कुछ कर सकते थे, उन्होंने सबकुछ किया | पर भारतीय वीरों ने भी पैर पीछे नहीं हटाये, हँसते – हंसते फाँसी के तख्ते पर झूले, वायसराय की कौंसिल में बम फेंका और स्वतंत्रता की लौ जलायें रखा | शायद इसी को लक्ष्य करके शायर इकबाल ने लिखा था – सारी दुनिया सदियों तक हमारी दुश्मन रही, परन्तु फिर भी “कुछ बात है कि हस्ती मिटटी नहीं हमारी |”

देशभक्ति की भावना वस्तुतः बहुत कुछ हमारे चारों ओर लिपटे वायुमंडल की तरह है | जिस स्वाधीनता को प्राप्त करने के लिए भारतमाता के अनेक सपूतों ने अपना बलिदान दिया उसमें गांधीजी के सत्य और अहिंसा का सिद्धांत ने  जान डाल दी | गांधीजी ने सत्य और अहिंसा को अपना शस्त्र इसलिए बनाया क्योंकि वे जानते थे कि हम हथियारों के बल पर अंग्रेजों पर विजय नहीं प्राप्त कर सकते | बात – बात में सत्याग्रह करना, अनशन करना, शान्तिपूर्वक जुलूस निकालना, स्वयं किसी के ऊपर वार न करना और इसके विपरीत अंग्रेजों द्वारा किये जा रहे अत्याचारों को सहना गांधीजी की लड़ाई का सबसे बड़ा शस्त्र था |

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स्वतंत्रता आन्दोलन के बलिदानियों की सूची बहुत लम्बी है | लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जो इतिहास के पृष्ठों पर सुनहरे अक्षरों में लिख दिए गये हैं | जिनमें झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब, मंगल पाण्डे आदि को हमेशा ही याद किया जाएगा | उन्होंने स्वतंत्रता के यज्ञ की ज्वाला में अपने तन, मन, धन की आहुति देकर, उस ज्वाला को तब तक प्रज्जवलित रखा जब तक भारत आजाद नहीं हुआ | उसी ज्वाला ने भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, जतिनदास, नेताजी, लाला लाजपत राय आदि न जाने कितने स्वतंत्रता सेनानी एवं देशभक्तों की आहुति ली | पर एक प्रसिद्ध कहावत हैं कि बदलाव को रोका नहीं जा सकता | एक संकल्प सहित बदलाव भारतीय जनमानस में भी आया | जिस दासता की श्रृंखलाओं से भारतीय जनता के हाथ और पैर लड़खड़ाने लगे थे, दिगभ्रान्ति से जनता पथ विहीन थी, उसमें शनै: – शनै:  आत्म – बोध हुआ, जन जागृति हुई। देश के विचारकों, लेखकों, साहित्यकारों एवं राजनैतिक मस्तिष्कों से जनता को अग्रसर होने का सम्बल मिला | भारत के शक्तिशाली अतीत का तथा अपने पूर्वजों के वैभव का स्मरण कर सन 1947 में अन्तिम जोर लगाया गया, धीरे – धीरे अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिली, कई बार धोखे दिये, परन्तु भारतवासी अपने पूर्ण स्वतंत्रता – प्राप्ति के निश्चित ध्येय से विचलित न हुए |

सत्य और अहिंसा के शस्त्र के सामने अंग्रेजों की कठोर यातना प्रकम्पित हो उठी | फिर क्या था गाड़ी कीचड़ से बाहर थी, शत्रु स्तम्भित थे, मित्रों में उत्साह था क्योंकि लम्बी जद्दोजहद के बाद कितने ही स्वतंत्रता सेनानियों के आत्म बलिदान के बाद अंततः 15 August 1947, को हमें स्वतंत्रता प्राप्त हो गयी। 90 वर्ष की साधना फलवती हुई और अंग्रेजों ने यहाँ से जाने का निश्चय कर लिया | और इसलिए यह हम सब के लिए एक सुनहरा दिन है, जो इतिहास के पन्नों में सदा के लिए उल्लिखित हो चुका है |

15 अगस्त को आजादी पाने का दिन से लेकर हर वर्ष हम इसे पूर्ण उल्लास एवं हर्ष के साथ मनाते हैं। प्रत्येक वर्ष 15 August पर हमारे प्रधानमंत्री जी दिल्ली के लाल किले से तिरंगा फहराने के बाद स्वन्त्रता दिवस पर भाषण देते है तथा इस दिन हम अपनी स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की दृढ प्रतिज्ञा लेते है | 

नि:संदेह 15 August की अर्धरात्रि को शताब्दियों की खोई स्वतंत्रता भारत को पुनः प्राप्त हो गई थी, अपने देश को स्वाधीन देख कर हर भारतवासी का मन खिल उठा था | सारे देश में स्वतंत्रता की लहर दौड़ गई थी | भक्त जनता ने मंदिरों में भगवान की प्रर्थना की, घर – घर में दीप जलाये गये, विद्यालयों में मिष्ठान वितरण हुआ और रात्रि की सहस्त्रों  दीपों की ज्योति जगमगा उठी | यह दिन अब एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है | इस दिन सारे देश में सार्वजनिक अवकाश होता है | 

सच ही है कि स्वतंत्रता किसी भी व्यक्ति के लिए या देश के लिए बहुत बड़ा वरदान ही होती है | लेकिन ध्यान रहे कि स्वतंत्रता का दीपक सदैव जलाए रखना है | आज आजादी के चलते ही विश्व में हमारा आदर – सत्कार है | स्वाधीनता का तात्पर्य है, जो व्यक्ति किसी नियंत्रण अथवा बंधन के बिना अपनी इच्छानुसार काम करने का अधिकार रखता है, वह स्वतंत्रत या स्वाधीन कहलाया जाता है। किन्तु इस स्वाधीनता या स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि हम समाज और देश द्वारा बनाये गये नियमों का उलंघन करे। स्वतंत्रता का अर्थ है “जिओ और जीने दो।”

हर देश, हर समाज के लिए स्वाधीनता अत्यंत मूल्यवान है। स्वाधीनता मानव को विकास के सभी अवसर प्रदान करती है। वह स्वाधीन रहकर अपनी योग्यता का विकास कर सता है। स्वाधीनता से कला, साहित्य और संस्कृति का विकास तथा अंग – उत्साह, हर्ष – आनन्द, चेता स्फूर्ति आदि का अनुभव होता है।

स्वाधीनता के अभाव में कोई भी व्यक्ति उन्नति नहीं कर सकता। जब व्यक्ति स्वयं उन्नति नहीं कर सकेगा तो देश की उन्नति भी सम्भव नहीं। इसलिए किसी भी देश की उन्नति और समृद्धि के लिए उसका स्वतंत्र होना आवश्यक है। स्वतंत्रता से जहाँ आत्म – सम्मान की भावना वेगवती होती है, वही देशभक्ति की भावना विकसित होती है। स्वतंत्रता मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसी अधिकार को प्राप्त करने के लिए अंग्रेजो से भारत को स्वतंत्रत कराने के लिए हमारे देश के अनेक महापुरुषों ने अपनी प्राणों की बलि दे दी।

इस प्रकार हमें स्वतंत्रता के महत्व को समझना चाहिए | आपसी प्रेम, भाईचारा तथा सौहार्द की भावना को अपने दिल में जगह देनी चाहिए | हमें आज एक अच्छे नागरिक होने के साथ – साथ देश के प्रति समर्पण की भावना तथा देशभक्ति के जज्बे को कायम रखना चाहिए | तभी सही मायने में इस पर्व की सार्थकता सिद्ध होगी | गोपाल सिंह नेपाली की कुछ पंक्तियाँ उद्धृत करना यहाँ उपयुक्त होगा –

स्कूल के छात्रों के लिए 15 अगस्त (भारतीय स्वतंत्रता दिवस) पर कविता

“घोर अंधकार हो, चल रही बहार हो,

आज द्वार – द्वार पर यह दिया बुझे नहीं |

यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है |

शक्ति का दिया हुआ, शक्ति को दिया हुआ,

भक्ति से दिया हुआ, यह स्वतंत्रता दिया,

रुक रही न नाव हो, जोर का बहाव हो,

आज गंग धार पर यह दिया बुझे नहीं,

यह स्वदेश का दिया प्राण के समान है |

यह अतीत कल्पना, यह विनीत प्रार्थना,

यह पुनीत भावना, यह अनन्त साधना,

शांति हो, अशांति हो, युद्ध संधि क्रांति हो,

तीर पर, कछार पर, यह दिया बुझे नहीं,

देश पर, समाज पर, ज्योति का वितान है |”

तो इस स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय के सम्मानीय नागरिको आप अपने परिवार के साथ आएं और भारतीय स्वतंत्रता दिवस के उत्सव का आनंद ले |

आशा है कि आप भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर इस निबंध को पसंद करेंगे, आप इसे अपने मित्रों और परिवार के सदस्य के साथ साझा कर सकते हैं ताकि वे अपने देश के लघु इतिहास के बारे में भी जान सकें।

स्वतंत्रता दिवस स्पीच – 15 August Independence Day Speech in Hindi के इस प्रेरणादायी लेख के साथ हम चाहते है कि हमारे  Facebook Page को भी पसंद करे | और हाँ यदि future posts सीधे अपने inbox में पाना चाहते है तो इसके लिए आप हमारी email subscription भी ले सकते है जो बिलकुल मुफ्त है |

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