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पर्यावरण प्रदूषण पर निबन्ध – Environmental Pollution Essay in Hindi – Khayalrakhe.com

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पर्यावरण प्रदूषण की समस्या, कारण तथा समाधान पर विस्तृत निबन्ध – Essay on Environmental Pollution in Hindi

Environmental Pollution in Hindi
Environmental Pollution in Hindi

Environmental Pollution in Hindi: भूमि, वायु, और जल का वह प्राकृतिक संसार जिसमें लोग, पशु और पौधे रहते हैं, Environment कहलाता है | “Environment” शब्द अंग्रेजी शब्द हैं जो फ्रेंच शब्द ‘Environ’ से बना है | Environ का आशय आस – पास के आवरण से है।

हिंदी भाषा में इसे पर्यावरण कहते है। पर्यावरण दो शब्दों के संयोग से बना है : परि + आवरण | “परि” जो हमारे चारों ओर हैं, और “आवरण” जो हमें चारों ओर से ढके हुए हैं | अत: हम से अलग होने पर भी, जो हमें चारों ओर से घेरे या ढके हुए हैं, उसे पर्यावरण कहते हैं | अर्थात प्रकृति में जो भी चारों ओर परिलक्षित है यथा – वायु, जल, मृदा, पेड़ – पौधें तथा प्राणी आदि सभी पर्यावरण के ही अंग हैं |

पर्यावरण मानव की सभी क्रियाओं पर प्रभाव डालता है | इसलिए कहा जाता है कि मनुष्य अपनी प्राकृतिक परिस्थितियों  की उपज  है | मनुष्य का भोजन, वस्त्र व मकान आदि सब प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार ही होते है, अर्थात् मनुष्य जीवन को पर्यावरण की परिस्थितियाँ व्यापक रूप से प्रभावित करती हैं। पृथ्वी के समस्त प्राणी अपनी बुद्धि व जीवन क्रम को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए ‘सन्तुलित पर्यावरण’ पर निर्भर रहते हैं।

पर्यावरणीय प्रदूषण क्या है पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ तथा परिभाषा – Meaning and definition of Environmental Pollution in Hindi

पर्यावरण प्रदूषण मानवीय क्रियाओं से जल, वायु, एवं मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक विशेषताओं में होने वाला वह अवान्छनीय परिर्वतन है जो मनुष्य, पौधों, अन्य जन्तुओं तथा उनके वातावरण आदि को न केवल हानि पहुँचाता है बल्कि उनके अस्तित्व को भी संकट में डाल देता है।

मानव की विकासात्मक क्रियाओं के परिणामस्वरूप ही प्रकृति के घटकों अथवा उनके तत्वों का सन्तुलन बिगड़ता है और  उससे सम्पूर्ण पर्यावरण में ही उथल-पुथल हो जाती है। इस असन्तुलन से प्रकृति की क्रियाओं में अवरोध उत्पन्न होने लगता है और प्रकृति क्रोधित हो उठती है। 

इसीलिए मार्क्स ने कहा था कि, प्रकृति के प्रति मानव के शत्रुतापूर्ण व्यवहार से ही पर्यावरण का ह्रास होता है। यदि पर्यावरण के साथ सहयोग व संयम का व्यवहार किया जाए तो छोटी – मोटी क्षति को तो प्रकृति स्वयं ही पूरा कर लेती है।”

महात्मा गाँधी ने कहा था कि, प्रकृति हमारी आवश्यकताओं को तो पूरा कर सकती है किन्तु हमारे लालच को नहीं।”

पुनीता सेठी कहती हैं कि, “पर्यावरण की बलि देकर उद्योग – धन्धों का विकास करना, भावी पीढ़ी के विनाश को निमंत्रण देना है |”

बसन्त लाल जैन का कहना है कि, “क्या पर्यावरण और औद्योगीकरण एक दुसरे के विरोधी हैं ? क्या हम पर्यावरण की रक्षा के लिए औद्योगिक विकास की बात करना छोड़ दें ? 

नहीं, आवश्यकता केवल पर्यावरण और औद्योगिक के बीच संतुलन बनाये रखने की है।”

पर्यावरण प्रदूषण के कारण (Causes of Environmental Pollution in Hindi)

पर्यावरण के संसाधन या घटक जितने स्वच्छ व निर्मल होंगे, उतना ही हमारा शरीर तथा मन स्वच्छ तथा स्वस्थ होगा। इसलिए हमारे ऋषि – मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व कहा था कि “प्रकृति हमारी माँ है जो सभी कुछ अपने बच्चों को अर्पण कर देती है।”

चाणक्य ने कहा था कि “राज्य की स्थिरता पर्यावरण की स्वच्छता पर निर्भर करती है।”

औषधि विज्ञान के आदि गुरु चरक ने कहा था कि “स्वस्थ जीवन के लिए शुद्ध वायु, जल तथा मिट्टी आवश्यक कारक हैं।”

महाकवि कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलमतथा मेघदूतजैसे अमर काव्यों में भी मन पर पर्यावरण के प्रभाव को दर्शाया है।

लेकमार्क तथा डार्विन जैसे सुविख्यात वैज्ञानिकों ने भी पर्यावरण को जीवों के विकास में महत्वपूर्ण कारक माना है।

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अत: यदि पर्यावरण या प्राकृतिक वातावरण प्रदूषित होता है तो उसका प्रतिकूल प्रभाव जीव जगत पर निश्चित ही पड़ेगा। आज के भौतिक विचारधारा के कारण अपनी सुख – सुविधा के साधनों में अधिकाधिक वृद्धि की लालसा में मनुष्य मानो पर्यावरण या प्राकृतिक सम्पदाओं की लूट पर उतर आया है। इसी बेदर्द और अविवेकपूर्ण दोहन का परिणाम है ‘पर्यावरण प्रदूषण’।

पर्यावरण-प्रदूषण विज्ञान और प्रोद्योगिकी की देन है, महानगरीय जीवन की सौगात है,विशाल उद्योगों की समृद्धि का बोनस है, मानव को मृत्यु के मुँह में धकेलने की अनचाही चेष्टा है। रोगों को शरीर में प्रवेश करने का मौन निमंत्रण है, और प्राणीमात्र के अमंगल की अप्रत्यक्ष कामना है।

ऑक्सीजन जीवन के लिए अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि श्वसन के लिये सभी जीवों द्वारा इसका उपयोग किया जाता है। किन्तु पर्यावरण-प्रदूषण के कारण पिछले 100 वर्षों में लगभग 24 लाख टन ऑक्सीजन वायुमण्डल से समाप्त हो चुकी है और उसकी जगह 36 लाख टन कार्बनडाई-ऑक्साइड गैस ले चुकी है जिसके कारण तामपान बढ़ रहा है।

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जून 1988 में 48 देशों के 300 वैज्ञानिकों ने टोरेन्टो सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण के विषय पर विचार – विमर्श किया तथा पर्यावरण के प्रदूषण और बदलाव के विषय में विश्व को चेतावनी देते हुए कहा कि “पर्यावरण-प्रदूषण से मौसम का बदलाव, अत्यधिक गर्मी, सूखा, पानी की कमी, बर्फीली चोटियों का पिघलना, समुद्र का जलस्तर ऊँचा उठना जिससे समुद्र तट के पास बसे शहरों में बाढ़ आना आदि खतरे उत्पन्न होंगे जिनका प्रभाव फसलों पर बुरा होगा तथा शारीरिक विकार व रोगों में बृद्धि होगी और वह मानव-जीवन की विनाश-लीला का प्रारम्भ होगा।”

सत्य भी है यदि सांस लेने को शुद्ध हवा न मिले, पीने को स्वच्छ जल न मिले, उसका भोजन ही प्रदूषित हो जाये तो सारा आर्थिक विकास और औद्योगिक प्रगति किस काम की।

अत: हमें यह अवश्य सुनिश्चित करना होगा कि विकास कार्यों से पर्यावरण सन्तुलन को क्षति न पहुँचे, क्योंकि इस प्रकार की क्षति से न केवल विकास की गति अवरुद्ध होगी, बल्कि भोजन, वस्त्र ईंधन, चारे और आश्रय के लिये पर्यावरण पर निर्भर रहने वाले प्राणियों की गरीबी व अभावों में और अधिक बृद्धि  होगी।

मानव-जाति ने प्रकृति पर पिछले दौर में जो अत्याचार किये हैं, अब प्रकृति ने भी बड़े बेरहमी से उनका बदला लेना शुरू कर दिया है। भारत का भोपाल गैस काण्ड तथा रूस का चेर्नोबिल गैस काण्ड इसके भयावह उदाहरण है।

निश्चय ही, “हवा, पानी और मिट्टी में दिन-रात घुलते जा रहे प्रदूषण के जहर ने आज विश्व को उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ से आगे तबाही के सिवा कुछ नहीं है।”

अफसोस की बात है, प्रकृति की तुलना में पर्यावरण प्रदूषण का कारण मनुष्य द्वारा वस्तुओ के प्रयोग के बाद फेंक देने की प्रवृत्ति और मनुष्य की बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण उनकी आवश्यकता में वृद्धि है। दूसरे शब्दों में प्रदूषण वे सभी पदार्थ और उर्जा हैं, जो प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से मनुष्य के स्वास्थ्य और उसके संसाधनों को अत्यंत हानि पहुँचाते हैं।  इस प्रकार प्रदूषण, मनुष्य की ही वांछित गतिविधियों का अवांछनीय प्रभाव है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार – Kinds of Environmental Pollution in Hindi

मानव को आज जिस प्रकार के प्रदूषण के संकट का सामना करना पड़ रहा है, उनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं –

(1) जल प्रदूषण (Water Pollution)

(2) वायु प्रदूषण (Air Pollution)

(३) मृदा प्रदूषण (Soil Pollution)

(4) ध्वनि प्रदूषण (Sound Pollution)

(5) रेडियोधर्मी प्रदूषण (Radio-active Pollution)

(6) खाद्य प्रदूषण (Food Pollution)

वायु प्रदूषण सबसे अधिक व्यापक व हानिकारक है। वायु-मण्डल में विभिन्न गैसों की मात्रा लगभग निश्चित रहती है और अधिकांशत: ऑक्सीजन और नाइट्रोजन ही होती है। श्वसन, अपघटन और सक्रिय ज्वालामुखियों से उत्पन्न गैसों के अतिरिक्त विषैले गैसों की सर्वाधिक मात्रा यदि कही से उत्पन्न होती हैं तो वह मनुष्य के कार्यकलापों से उत्पन्न होती है। इनमें सर्वाधिक योगदान लकड़ी, कोयले, खनिज तेल तथा कार्बनिक पदार्थों के ज्वलन का रहता है।

औद्योगिक संस्थानों से निकलने वाली सल्फर-डाई-आक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड गैसें वायुमंडल में पहुँचकर पुनः वर्षा के जल के साथ घुलकर पृथ्वी पर पहुँचती हैं और गन्धक का अम्ल बनाती हैं, जो प्राणियों और अन्य पदार्थों को काफी हानि पहुँचाता है।

नाइट्रोजन आक्साइड जल से मिलकर अम्लीय स्थिति उत्पन्न करती है। इसका सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रदूषण प्रभाव स्माग के रूप में होता है।  स्माग धुँआ और कोहरे के मिलने से बनता है।  इससे कम ताप वाले प्रदेशों के प्राणियों को काफी क्षति पहुँचती है। 

वायु प्रदूषकों में क्लोराइड का भी प्रमुख स्थान हैं।  ये गैसीय पदार्थ एल्युमिनियम के कारखानों में सर्वाधिक मात्रा में पाये जाते हैं। पौधों पर इसका प्रभाव पत्तियों को नष्ट करने के रूप में होता है। इसके अतिरिक्त भूसे और चारे के साथ जली हुई पत्तियाँ पशुओं के पेट में पहुँचने पर अत्यंत घातक सिद्ध होती हैं। इसके साथ ही कीटनाशक, शाकनाशक, जीवनाशक, रसायनों निकल टाइटेनियम, बेरिलियम, टिन, आर्सेनिक, पारा, सीमा आदि के कार्बनिक यौगिकों के कण भी वायु में रहते हैं।  इनका घातक प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ता है। सामान्य प्रभाव एलर्जी उत्पन्न करता है, जिसका कोई विशेष उपचार नहीं हो पाता।  अन्य प्रभावों में फेफड़ों के रोग अधिक पाये जाते हैं।

मनुष्य, पौधों और प्राणियों को रोग से बचाने के लिए और हानिकारक जीवों के विनाश के लिए अनेकानेक रसायनों का प्रयोग कर रहा है। उद्योगों में भी असंख्य रसायनों के प्रयोग में वृद्धि हो रही है, जो तत्व कभी पर्यावरण में विद्यमान नहीं थे, ऐसे सैकड़ो रसायन मनुष्य प्रति वर्ष संश्लेषित कर रहा है। विगत दशकों में डी. डी. टी. और इसके समान अन्य रसायनों का विकास और विस्तार तेजी से हुआ है और शीघ्र ही इसके घातक परिणाम भी हमारे सामने आ गये हैं।

जल सभी प्राणियों के जीवन के लिए एक अनिवार्य वस्तु है। पेड़ – पौधे भी आवश्यक पोषक तत्व जल से ही घुली अवस्था में ग्रहण करते हैं। जल में अनेक कार्बनिक, अकार्बनिक पदार्थ,  खनिज तत्व व गैसें घुली होती हैं। यदि इन तत्वों की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है तो जल हानिकारक हो जाता है और उसे हम प्रदूषित जल कहते हैं। 

जल प्रदूषण अनेक प्रकार से हो सकता है। पीने योग्य जल का प्रदूषण रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु,  विषाणु, कल-कारखानों से निकले हुए वर्जित पदार्थ, कीट नाशक पदार्थ व रासायनिक खाद से हो सकता है। ऐसे जल के उपयोग से पीलिया, आँतों के रोग व अन्य संक्रामक रोग हो जाते हैं।  दिल्ली, कानपुर, वाराणसी आदि महानगरों में भारी मात्रा में गंदे पदार्थ नदियों के पानी में प्रवाहित किये जाते हैं जिससे इन नदियों का जल प्रदूषित होकर हानिकारक बनता जा रहा है।

महानगरों में अनेक प्रकार के वाहन, लाउडस्पीकर, बाजे एवं औद्योगिक संस्थानों की मशीनों के शोर ने खतरनाक ध्वनी प्रदूषण  को जन्म दिया है। ध्वनी प्रदूषण से न केवल मनुष्य की श्रवणशक्ति का ह्रास होता है, वरन उसके मस्तिष्क पर भी इसका घातक प्रभाव पड़ता है।  परमाणु शक्ति उत्पादन व नाभकीय विखंडन ने वायु, जल व ध्वनि तीनों प्रदूषणों को काफी विस्तार दिया है।  इसके घातक परिणाम न केवल वर्तमान प्राणियों को, वरन उसकी भावी पीढ़ियों को भी भुगतने पड़ेंगे।

इस प्रकार हम देखते हैं कि आधुनिक युग में प्रदूषण की समस्या अत्यधिक भयंकर रूप धारण करती जा रही है। यदि इस समस्या का निराकरण समय रहते न किया गया, तो एक दिन ऐसा आयेगा, जबकि प्रदूषण की समस्या सम्पूर्ण मानव जाति को निगल जायेगी।  अत: प्रदूषण से बचने के लिए निम्नलिखित उपायों पर अमल करना अत्यावश्यक है –

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या के निराकरण के उपाय (Measures to solve pollution problems

1- वृक्षारोपण का कार्यक्रम तेजी से चलाया जाय और भारी संख्या में नये वृक्ष लगाये जायें।

2- वनों के विनाश पर रोक लगायी जाय।

3- बस्ती व नगर के समस्त वर्जित पदार्थों के निष्कासन के लिए सुदूर स्थान पर समुचित व्यवस्था की जाय।

4- बस्ती व नगर में स्वच्छता व सफाई की ओर विशेष ध्यान दिया जाय।

5- पेय जल की शुद्धता की ओर विशेष ध्यान दिया जाय।

6- परमाणु विस्फोटों (अहमदाबाद) पर पूर्णत: नियंत्रण लगाया जाय।

हमारे देश में सरकार ने प्रदूषण की समस्या के निराकरण के लिए अनेक उपाय किये हैं।  केन्द्रीय जन स्वास्थ्य इंजीनियरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने जल व वायु प्रदूषण को रोकने के लिए अनेक बहुमूल्य सुझाव दिये हैं, जिन पर तेजी के साथ अमल भी किया जा रहा है।  कारखानों एवं खानों में प्रदूषण रोकने के उपायों की खोज में औद्योगिक विष विज्ञान संस्थान (लखनऊ) और राष्ट्रीय संस्थान (अहमदाबाद) विशेष रूप से प्रयत्नशील हैं।

सरकार भारत ने सभी राज्य सरकारों को स्पष्ट कड़े निर्देश दिये हैं कि प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों में ट्रीटमेंट प्लान्ट लगवाये जायें।  प्रदेश सरकारों ने प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्यवाही करते हुए एक मास के भीतर ट्रीटमेंट प्लान्ट लगाने के निर्देश दिये हैं। अगर एक माह के भीतर ट्रीटमेंट प्लान्ट नहीं लगाये गये तो अगली कार्यवाही में उन पर जुर्माना किया जायेगा।

केन्द्र सरकार के प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड ने प्रारम्भ में ही ऐसी फैक्ट्रियों की लिस्ट जो प्रदूषण फैला रही हैं, मंगाली थी। इस प्रकार हम देखते हैं कि भारत सरकार देश में प्रदूषण रोकने के लिए युद्ध-स्तर पर प्रयत्नशील है।

वैज्ञानिकों का मत हैं कि गंगाजल में भी कैंसर पैदा करने वाले तत्व पाये गये हैं। उनका विचार है कि नरौरा परमाणु बिजली घर चालू हो जाने के बाद गंगा में रेडियोंधर्मिता का खतरा बढ़ गया है। गंगा एक्शन प्लान के अंतर्गत कार्य करने वाले वैज्ञानिक इन सम्भावित खतरों के प्रति सतर्क हैं और वे गंगाजल की रेडियोंधर्मिता का पता लगा रहे हैं।

गंगा सफाई योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय जीव विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, वनस्पति, रसायन विभाग के विभागों सहित इंजीनियरिंग कॉलेज के अनेक वैज्ञानिक अपने-अपने विषयों पर शोध कार्य कर रहे हैं।

इतना होने के बावजूद भी प्रदूषण की समस्या दिन-प्रतिदिन गम्भीर, जटिल और विश्वव्यापी होती जा रही है।  यद्यपि विश्व के सभी देश प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत हैं, फिर भी औद्योगिक विकास, नागरीकरण, वनों का विनाश और जनसंख्या में अतिशय वृद्धि होने के कारण यह समस्या निरन्तर गम्भीर होती जा रही है। 

संयुक्तराष्ट्र संघ की अनेक संस्थाओं जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व पर्यावरण संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय वन्य संरक्षण संस्थान ने प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए अनेक उपाय किये हैं, तथापि अभी तक आशाजनक परिणाम सामने नहीं आये हैं और निकट भविष्य में भी प्रदूषण की समस्या के निराकरण और पर्यावरण की शुद्धता के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

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We are thankful to Upma ji for sending such useful essay on Environmental Pollution. Upma ji is a software engineer and currently working in TCS Lucknow office.

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