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भारत में महिलाओं की स्थिति पर निबंध : Status of Women in India in Hindi 

भारत में महिलाओं की स्थिति पर निबंध : Status of Women in India in Hindi Language

आज की चेतना ‘नारी’ सृष्टि के लिये ईश्वर का एक अनुपम उपहार है, और जो प्रेम एवं ममता, त्याग एवं सहिष्णुता की देवी है | उसमें अन्याय को भस्म करने की अद्भुत शक्ति है | नारी की प्रकृति बड़ी अनोखी एवं बेजोड़ मानी जाती है | इसमें अनगिनत तत्व एक साथ समाए होते हैं | हरेक तत्व की अपनी खास विशेषता होती है | महाकवि जयशंकर प्रसाद ने भी कहा है – “ नारी तुम केवल श्रद्दा हो |” वस्तुत: सद्मार्ग पर चलने वाली सदैव श्रद्द्येय नारी ही है |

Women in India in Hindi
Women in India in Hindi

इतने गुण होने के बावजूद भी “भारत में महिलाओं की स्थिति” हर युग में एक समान नहीं रही हैं | कभी नारी बेचारी बना दी गई तो कभी पुरुषों का अन्याय सहना ही उसका भाग्य बन गया | लेकिन जब भी भारतीय नारी को मौका दिया गया उसने यह बता दिया कि नारी न हारी है और न ही बेचारी है | सच तो यह है कि संकल्प कर लेने वाली हर नारी पुरुष पर भी भारी है |

यह सच है कि प्रकृति की सबसे शानदार और मजबूत रचना नारी ही है फिर भी युगों के साथ भारत में महिलाओं की स्थिति बदलती रही हैं और आज का यही सबसे चर्चित विषय है |

Bharat Me Striyon Ki Dasha in Hindi – प्राचीन भारत में नारी की स्थिति

प्राचीन भारत में महिलाओं का स्थान काफी महत्वपूर्ण था | नारी को शक्ति का सघन पुंज माना जाता था और अपने शक्तियों के कारण ही वेदों और उपनिषदों के काल में स्त्रियों का आदर और सम्मान देवी के समान किया जाता था | उनको पूजा जाता था | ऐसी मान्यता थी कि जहां स्त्रियों की पूजा की जाती है वहां सभी प्रकार के देवी – देवता निवास करते है |

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नारी को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त थी और परिवार में उनका पद अत्यंत प्रतिष्ठापूर्ण था | उस समय नारी का पूर्ण वर्चस्व था | व्यापार, व्यावसाय और शिक्षा जैसे पुरुष एकाधिकार के क्षेत्र में हर तरह से उनका प्रवेश था | नारी की शक्ति प्राचीन भारत में हर रूप में प्रकट होती थी |

यह तो प्राचीन भारत के पैमाने पर महिलाओं की स्थिति का दर्पण था | यदि इस सन्दर्भ में देखा जाएं तो मध्यकालीन युग आते – आते महिलाओं की दशा न केवल निराशाजनक थी वरन भयावह भी कही जा सकती है |

मध्यकाल में भारतीय महिलाओं की निराशाजनक की स्थिति

मध्यकालीन भारतीय समाज की बदलती हुई परिस्तिथियों में न केवल समाज का ढ़ाचा बदला अपितु नारी की उलझनों को भी बढ़ाया | उसकी जीवन पद्धति, उसके जीवन मूल्य, उसकी मनस्थिति को तीव्रता से बदल डाला |

मध्यकाल में समाज की घृणित विचारधारा ने नारी के सारे अधिकार छीन लिए | जो नारियां प्राचीन काल में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती थी, मध्यकाल में उन्हें केवल घर की चारदीवारी तक ही सिमित कर दिया गया |

इस काल में एक कन्या का शिशु के रूप में जन्म लेना और बढ़ना अत्यंत त्रासदीपूर्ण था क्योंकि इस काल के हालात कुछ ऐसे थे कि नारी के कोमल, सुन्दर और खिलखिलाहट से भरे जीवन को नष्ट कर देने वाला अज्ञात शत्रु कहा किस मोड़ पर मिल जाये ये ज्ञात नहीं होता था | मध्यकालीन भारत में एक स्त्री का कदम – कदम पर होने वाला शोषण एक भयानक सच्चाई थी | इससे बचने के लिए पर्दाप्रथा ने जन्म लिया जो की उस समय की आवश्यकता थी | और बाल विवाह प्रथा भी इसी तरह की कुरूति की उपज थी |

नारी की इस दयनीय और असहाय दशा से क्षुब्द होकर राष्ट्रकवि मथ्लिशरण गुप्त ने इस अवस्था का चित्रण अपनी अग्रलिखित पंक्तियों में किया है –

अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी |

आंचल में है दूध और आंखों में पानी ||

नारी  की वर्तमान स्थिति

वर्तमान स्थिति में नारी ने जो साहस का परिचय दिया है, वह आश्चर्यजनक है | आज नारी की भागीदारी के बिना कोई भी काम पूर्ण नहीं माना जा रहा है | आज के समय में आई. पी. एस. अधिकारी डॉक्टर, वकील, जज, राजनीतिज्ञ सभी कार्यालयों एवं दफ्तरों में नारियां पदासीन हैं | भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नारियों ने बढ़ – चढ़ कर हिस्सा लिया | आधुनिक युग में नारियों को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त हैं |

समाज के हर क्षेत्र में उसका परोक्ष – अपरोक्ष रूप से प्रवेश हो चुका है | आज तो कई ऐसे प्रतिष्ठान एवं संस्थाएँ हैं, जिन्हें केवल नारी संचालित करती है या ये कहे कि स्वतंत्रत भारत में आज नारी के लिए प्रगति के सभी अवसर खुले हुए हैं |

वर्तमान नारी की सफलता के आँकड़ो का वर्णन करें तो शायद उसे समेट पाना सम्भव नहीं होगा, परंतु उसका विश्लेषण करने पर पता चलता है कि वर्तमान काल में नारियों की स्थिति सुधारने के पीछे समय – समय पर अनेक महापुरुषों एवं राजनीतिज्ञों द्वारा हर संभव किया गया प्रयास है |

राजा राम मोहन राय ने सती प्रथा को कानून द्वारा बंद कराया | महर्षि दयानन्द ने बाल विवाह पर रोक लगवायी तथा पुरुषों की भांति महिलाओं को भी एक समान अधिकार दिए जाने पर बल दिया | गाँधी जी ने भी स्त्रियों की दशा को सुधारने के लिए जीवन भर कार्य किये |

महिला उत्थान के लिए अनेक प्रकार के कानून एवं उत्तराधिकार नियम लागू किये गये हैं जिसमें शारदा एक्ट मुख्य है | इस नियम के द्वारा स्त्रियों की दशा को सुधारने का हर सम्भव प्रयास दिया गया है | उन्हें पुरुषों समान स्वतंत्रता प्रदान की गयी है, आज वे भी पुरुषों के भांति कहीं भी जा सकती हैं, घूम सकती हैं, बैठ सकती हैं तथा अपनी योग्यतानुसार किसी भी पद पर कार्य कर सकती हैं | पिता की संपत्ति में पुत्रों की भांति पुत्रियों को भी संपत्ति में समान रूप से हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार हैं |

वर्तमान में नारी उत्थान के लिए सरकारी प्रयास

वर्तमान समय में महिलाओं की प्रगति एवं उत्थान के लिए सरकार अनेक प्रकार से प्रयत्न कर रही है | आज की स्त्रियां घर में केवल गृहिणी न रहकर अनेक प्रकार के कार्य कर रही हैं | वह घर के सीमित कार्यों को छोड़कर समाज सेवा में अपना ध्यान केन्द्रित कर रही है | सरकार द्वारा महिला उत्थान के लिए अनेक संस्थान एवं आयोग स्थापित किए गए है जिसमें नारियां अपनी शिकायतों को रखकर अपना खोया हुआ अधिकार एवं प्राप्त कर सकती है |

आधुनिक युग में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में स्त्रियों ने पदापर्ण कर लिया है | वह बाल मनोविज्ञान, पाकशास्त्र, घरेलू चिकित्सा, छायांकन, शरीर विज्ञान तथा गृहशिल्प के अतिरिक्त ललित कलाओं चित्रकला, नृत्य, संगीत आदि में भी अपनी विशेषता प्रदर्शित कर रही है | इस प्रकार कहा जा सकता है स्त्रियां देश का भाग्य बदलने में अत्याधिक उपयोगी सिद्ध हो रही है | आज की नारी के संदर्भ में जयशंकर प्रसाद के महाकाव्य कामायनी की इन पंक्तियों में उद्धत किया जा सकता है –

नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नभ या ताल में

पियूष स्त्रोत सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में |

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3 thoughts on “भारत में महिलाओं की स्थिति पर निबंध : Status of Women in India in Hindi ”

  1. पुरातन काल से अभी तक नारी की दशा का वर्णन करते हुए उसे भविष्य की दिशा देता सार्थक लेख

  2. बबिता जी, महिलाओं की स्थिती पर सभी क्षेत्रों का समावेश करते हुए बहुत ही अच्छा निबंध लिखा हैं आपने। बधाई।

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