Hindi Post Nibandh Nibandh Aur Bhashan

हमारा प्यारा भारतवर्ष पर निबंध – My lovely India Essay in Hindi

मेरा भारत पर निबंध  – Essay on Hamara Pyaara Bharat / India in Hindi

India Essay in Hindi : हमारा प्यारा भारत बहुत पुराना तथा विशाल है | आज से कई शताब्दियों पूर्व पूरा विश्व भारतवर्ष का आधिपत्य मानता था और यह देश विद्या और कला का निवास स्थल था |

इतिहास से जितना ज्ञात है उसके अनुसार भारत देश की सत्ता दस हजार वर्ष पुरानी है |  “आर्यावर्त्त” भारत का प्राचीन नाम है | आर्यो के नाम पर ही भारत  ‘आर्यावर्त्त’ कहलाया  | कुछ इतिहासकारों का मानना है कि आर्य बाहर से आये थे किन्तु कुछ इतिहासकार यही कहते है कि आर्यो की यही भूमि है | महाकवि जयशंकर प्रसाद कवि होने के साथ – साथ इतिहासवेत्ता भी थे, उन्होंने भी यही कहा है – “कहीं से हम आए थे नहीं,  हमारी जन्मभूमि है यही ” | आर्य सुसंस्कृत, सभ्य एवं बड़े ज्ञानवान थे |

यहाँ का वीर, पराक्रमी, प्रजा का प्रिय शासक चक्रवर्ती सम्राट कहलाता था | इस देश का नाम भारत भी एक ऐसे ही पराक्रमी राजा के नाम पर ही पड़ा है | दरअसल प्राचीनकाल में यहाँ के अत्यंत प्रतापी राजा दुष्यंत का विवाह कण्व ऋषि की पुत्री शकुंतला से हुआ | उनसे उनका एक पुत्र हुआ जिसका नाम भरत रखा गया | भरत बचपन से ही निर्भीक एवं अत्यंत साहसी थे | समय आने पर वह एक पराक्रमी, न्यायप्रिय एवं चक्रवर्ती सम्राट के रूप में सुप्रसिद्द हुए और कालांतर में भरत के नाम पर ही इस भू – भाग का नाम भारतवर्ष पड़ा |

India in Hindi
India in Hindi

भारत की संस्कृति सबसे ज्यादा पवित्र और महान है | यहाँ की प्राचीनतम संस्कृति मोहन – जोदड़ो  तथा हडप्पा मानी जाती है और मानव सभ्यता का विकास सबसे पहले यही से ही माना जाता है | अपनी सांस्कृतिक विशेषता के कारण संसार के अनेक देशों में भारत एक अनूठा देश माना जाता है |

Loading...

हमारा भारत “धरती माँ” को भी सबसे प्यारा है, तब ही तो माता “धरती” ने एक साथ इस भू भाग को सर्वसम्पदा, ‘सुसंस्कृति’ प्रारम्भ से ही प्रदान की है | भौगोलिक दृष्टि से भी यह एक अनोखा देश है |

इसके उत्तरी छोर पर स्थित हिमालय की पर्वतमालाएं मानो शीश पर सजा हीरे – सा चमकता ताज हो जो भारत देश के मस्तक को अत्यधिक सुशोभित करता है तथा दक्षिण का मौजूद समुद्री तट अपने शीतल जल से भारत माँ के ही पैर पखारता है | यहाँ उपजाऊ समतल मैदान है | मध्य में गंगा, ब्रह्मपुत्र, यमुना नदी है | यहाँ अरावली पर्वत श्रेणियाँ, विध्यांचल तथा सतपुडा के जंगल मौजूद है | इस दुनिया में सूर्य की प्रथम किरणें अगर कही सबसे पहले अभिवादन करती है तो वह हमारा प्यारा भारतवर्ष ही हैं | इस प्रकार हमारा प्यारा भारत प्राकृतिक विविधताओं से भरा पड़ा है |

भारत की धरती पर केवल सूर्य का आलोक ही पहली बार नहीं फैला, ज्ञान का आलोक फैलाने वाले चारो वेद भी इसी धरती पर लिखे गये और जिस का महत्व आज तक संसार स्वीकार करता है |

रामायण, गीता, पुराण और वेदों से समूचे विश्व को ज्ञान से आलोकित करने वाला हमारा प्यारा भारत देश एक कृषि प्रधान देश है यहाँ की बहुसंख्यक जनसंख्या कृषि पर ही निर्भर करती है यहाँ की धरती हर प्रकार की खनिज सम्पदा, हर प्रकार के फल – फूल से सदा संपन्न रही |

खाद्यान्न के मामले में भारत प्राचीन काल से ही आत्मनिर्भर रहा है | भारत की इसी सम्पन्नता ने अन्य भू – भाग के लोगों को आकर्षित किया जिसके कारण दूसरी संस्कृतियों के लोगों ने भी यहाँ आना प्रारम्भ किया और सदा से उदार ह्रदय भारतवासियों ने उन्हें अपना लिया | इस प्रकार भारत रंग – विरंगी संस्कृतियों के इन्द्रधनुषी सौंदर्य से पूर्ण विविधता में एकता को प्रतिष्ठित करने वाला विश्वप्रसिद्ध देश बन गया |

अपने भीतर ऋतओं की विशिष्टता समाए भारत हर प्रकार की जलवायु प्रदान करता है | हमारे देश की मुख्य ऋतुएं बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत तथा शिशिर है | हर ऋतु की समयावधि दो मास की होती है | इन ऋतुओं में प्रकृति अपना खेल खेलती रहती है | कभी यहाँ भयंकर गर्मी पड़ती है तो कभी अत्यधिक सर्दी पड़ती है जो लोगों को गर्म कपड़े और आग से छुटकारा नहीं पाने देती है जबकि कभी वर्षा से बाढ़ की स्थिति भी बनी होती है तो वही कुछ भू – भाग ऐसा भी है जहां पशु – पक्षी पानी के लिए तरस जाते हैं | इस तरह से हमारे भारत में प्राकृतिक विभिन्नतायें भी देखने को मिलती है |

“वसुधैव कुटुम्बकम्मे” की भावना से ओतप्रोत हमारे भारत देश की आत्मा आज भी उदारता, मानवता एवं भव्यता का सम्मान करती है | हमारा भारत ही वह पवित्र भूमि है जहां त्याग और बलिदान के अनेक दृष्टांत मौजूद हैं | मर्यादा पुरुषोत्तम राम का त्याग, त्याग और अहिंसा का संदेश देने वाले महावीर स्वामी एवं महात्मा बुद्ध की अमर वाणी, कृष्ण का ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का संदेश कभी भुलाया नहीं जा सकता और यही भारत की शक्ति है | दया, धर्म, सदाचार, त्याग, अहिंसा आदि भारतीय संस्कृति के प्रमुख गुण रहे हैं | यही कारण है कि महाबली सिकंदर भी भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक शक्ति के आगे झुक गया था और उसने तहेदिल से भारत को नमन किया |

बड़े – बड़े वैज्ञानिक, कलाकार, साहित्यकार, साहित्य सेवी, महान सम्राट एवं राजनीतिज्ञों ने समय – समय पर इस धरती पर जन्म लेकर, अपनी प्रतिभा एवं योग्यता से भारत को गरिमा प्रदान की है | अनन्त महान गाथाओं एवं महान विभूतियो की गरिमा से युक्त भारत – भूमि सदा वंदनीय है | विवेकानंद जैसे अध्यात्मिक गुरु एवं देशभक्त ने कहा है – “भारत मेरे बचपन का हिंडोला, यौवन का आनन्दलोक और बुढ़ापे का बैकुंठ है |”

लेकिन आज के भारत पर जब हम दृष्टिपात करते हैं तो एक ओर सुरसा के मुख के समान समस्याएँ मुँह बाए खड़ी हैं तो दूसरी ओर भारत में हो रही प्रगति को भी बहुत बड़ी उपलब्धि माना जायेगा |

आजादी के समय भारत में सुई तक नहीं बनती थी किन्तु आज उपग्रह का भी सफल निर्माण हो रहा है | यदि विशेष रूप से पिछली तीन शताब्दियों में भारतियों के चरित्र को भ्रष्ट करने का सोची – समझी योजना के तहत प्रयास न किया गया होता तो भारत के विकास की गति कई गुना और तीव्र होती | निश्चय ही यह भूल हमारे उन नेताओं से हुई है जिन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए तो अथक परिश्रम किया किन्तु अन्दर ही अन्दर सड़ते जा रहे घावों और गिरते जा रहे चरित्र की ओर इतना ध्यान नहीं दिया जितना अपेक्षित था | फिर भी यह मानना पड़ेगा कि निरन्तर प्रगति – पथ पर हमारा प्यारा भारतवर्ष अग्रसर है |

जब 26 जनवरी, 1950 को हमारा देश सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतान्त्रिक गणराज्य बना तब से लेकर अब तक भारत विकासोन्मुख अवश्य हैं | विज्ञान के क्षेत्र में हम निरंतर प्रगति कर रहें हैं | और सर्वाधिक गौरव की बात तो यह है कि हिंदी हमारी राजभाषा है और जो भारत के राष्ट्रभाषा का सम्मान पाती है | सारनाथ में स्थित अशोक स्तंभ के सिंह हमारा राष्ट्रीय चिन्ह है | तिरंगा हमारा राष्ट्रीय ध्वज है | “जन – गण – मन” राष्ट्रीय गान तथा “वंदेमातरम्” राष्ट्रीय गीत है | ‘मोर’ राष्ट्रीय पक्षी तथा ‘बाघ’ राष्ट्रीय पशु है |

कुल मिलाकर कहें तो आज हमारा प्यारा भारतवर्ष एक प्रजातांत्रिक राष्ट्र की सभी सफल मान्यताओं पर खरा उतर रहा है | हमारे भारत में आर्थिक स्तर पर सुदृढ़, मजबूत भारत निर्माण के अथक प्रयास जारी हैं | आज विश्वमंच पर एक उभरती हुई ताकत के रूप में हमारा देश पेश हो रहा है | सचमुच एक मजबूत और स्थायी बदलाव की ओर लगातार हमारा भारत अग्रसर है |

ऐसे में एक भरतवासी होने के लिहाज से हमें अपने देश पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि वह देश हमेशा फलता फूलता है जहां लोग अपने देश को जान से भी प्यारा मानते हैं और गर्व महसूस करते है |

Essay on India in Hindiके इस लेख के साथ हम चाहते है कि हमारे  Facebook Page को भी पसंद करे | और हाँ यदि future posts सीधे अपने inbox में पाना चाहते है तो इसके लिए आप हमारी email subscription भी ले सकते है जो बिलकुल मुफ्त है |

Loading...
Copy

CLICK HERE : Amazon Today's Deal of the Day - जल्दी करे मौका कहीं छूट न जाए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *