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छोटे प्रेरक प्रसंग – चार लघु शिक्षाप्रद प्रेरक कहानियाँ – Short Story in Hindi

चार शिक्षाप्रद प्रेरक कहानियां – 4 Motivational Short Stories in Hindi

आशा का दीपक अच्छी प्रेरक कहानी – Short Story in Hindi 

प्रेरक हिन्दी कहानी : एक कमरे में चार दीपक जल रहे थे और वहां के परिवेश में एक शान्ति छाई हुई थी शान्ति भी ऐसी थी कि उनकी मंद स्वर में की जाने वाली बात को भी आसानी से सुना जा सकता था |

पहले दीपक ने दुखी स्वर में कहा – “मैं शान्ति हूँ, मुझे कोई बनाए नहीं रखना चाहता है | मुझे बुझ जाना चाहिए |” और इतना कहने के पश्चात, दीपक बुझ गई |

दूसरे दीपक ने कहा – “मैं विश्वास हूँ, अधिकांश लोग मुझे लम्बे समय तक कायम नहीं रख सकते हैं, फिर मेरे जलते रहने का क्या प्रयोजन है ?” इतने में हवा का एक झोका आया और उसकी लौ को बुझा दिया |

तीसरे दीपक ने निराश भरे स्वर में कहा – “मैं ज्ञान हूँ, मुझमे अब जलने की ताकत ही नहीं बची है ” क्योंकि कुछ लोग मेरे महत्व को नहीं समझते, इसलिए मुझे बुझ जाना चाहिए | निराशा की इन क्षणों में बिना एक पल की प्रतीक्षा के वह भी बुझ गई | तभी एक बालक उस कमरे में प्रवेश किया और उसने देख तीन दीपक नहीं जल रहे है |

उसने पुछा कि – तुम तीनों क्यों नहीं जल रहे हो जबकि तुम्हें तो आखिरी क्षण तक जलकर प्रकाश देना चाहिए | इतना कहकर वह बालक रोने लगा |

चौथा दीपक जो अभी तक जल रहा था उसने बालक का रोना देखकर कहा – “ मेरे जलते रहने पर तुम्हे रोने की कोई जरुरत नहीं है, क्योंकि मैं आशा का दीपक हूँ |” बालक की आँखों में चमक लौट आयी | उसने आशादीप से पुनः शेष तीनों दीपों को जला दिया |

Moral of The Story – ‘आशा’ वह दीपक है जिससे शान्ति, विश्वास और ज्ञान को पुनर्जीवित कर सकता है | हमारे जीवन में आशा की किरण बनी रहनी चाहिए | इसके बल पर हम सम्पूर्ण मानवता के लिए आशादीप बन सकते हैं | मानवता पर ही संसार की आधारशिला है |

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दोस्ती पर छोटी कहानी – Short Story in Hindi 

यह कहानी तीन फ्रेंड की है | ज्ञान, धन और विश्वास | तीनों बहुत अच्छे दोस्त थे | तीनों में प्यार भी बहुत था | एक बार जब तीनों को अलग होना पड़ा | तीनों ने एक दूसरे से सवाल किया कि हम कहाँ मिलेंगे |

ज्ञान ने कहा – मैं मंदिर, मस्जिद और विद्द्यालय में मिलूँगा |

धन ने कहा – मैं अमीरों के पास मिलूँगा |

विश्वास कुछ नहीं बोला | वह चुपचाप था | जब दोनों मित्रों ने उस से चुप रहने का कारण पूछा तो विश्वास ने रोते हुए कहा – मैं जो एक बार चला गया तो फिर मिल नहीं सकता हूँ |

Moral of The Story in Hindi – हमें विश्वास को हमेशा बनाकर रखना चाहिए |

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प्रेरक प्रसंग कहानी “संस्कार” 

लगभग दस साल का एक बालक राधा का गेट बेल बजा रहा था | राधा ने बाहर आकर पूछा क्या है क्यों बेल बजा रहे हो ?

बालक बोला – आंटी जी क्या मैं आपका गार्डन साफ कर दूँ ?

राधा – नहीं हमे साफ नहीं कराना |

फिर हाथ जोड़कर दयनीय स्वर में वह बालक बोला : आंटी प्लीज साफ करवा लीजिए, मैं बहुत अच्छे से साफ करता हूँ |

उसकी बात सुनकर राधा द्रवित हो उठी और उस बच्चे को गार्डन साफ करने के बदले कितना पैसा लेगा जब पूछा तो वह बालक बोला आंटी जी पैसा नहीं चाहिए | आप मुझे बस खाना दे देना |

राधा को लगा कि बच्चा बहुत भूखा है इसलिए खाना मांग रहा होगा | मैं इसे पहले कुछ खाना दे देती हूँ और थोड़ी देर में राधा खाना लेकर आयी और बोली लड़के पहले तू खाना खा ले फिर काम करना |

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बच्चा बोला – नहीं आंटी जी पहले मैं काम खत्म कर लूँ फिर आप खाना दे देना |

ठीक है कहकर राधा अपने काम में मशगूल हो गई |

एक घंटे में उस लड़के ने अपना काम निपटा लिया और आंटी को दिखाकर के बोला, देखिए आंटी अच्छी सफाई हुई है |

राधा उसके बढ़िया काम को देखकर अत्यधिक प्रसन्न हुई | उसके काम से खुश होकर राधा तुरंत भीतर से खाना लेकर आयी और उसे लड़के को दिया |

बालक ने जेब से एक थैला निकला और खाने को उस थैले में रख लिया | ये देख राधा को आश्चर्य हुआ और बोली तुम्हे तो भूख लगी थी न तो फिर ये खाना पैक क्यों कर लिया, तू खाना यही खा ले और जरुरत होगी तो और भी दूंगी |

बालक बोला – नहीं आंटी मेरी बीमार माँ घर पर है | सरकारी अस्पताल से दवा तो मिल गयी है, पर डॉ. साहब ने कहा है कि दवा खाली पेट नहीं खाना है |

राधा उस बाल की बात सुनकर भावुक हो गयी बस उसकी आँखों से आंसू निकलने वाला था | उसने उस मासूम बालक को खुद अपने हाथों से खाना खिलाया और उसकी माँ के लिए ताजी गर्म रोटियाँ बनाई | बालक के साथ उसके माँ के पास गयी और कही – बहन आप बहुत अमीर हो जो ‘दौलत’ आप ने अपने बेटे को दी है वो हम अपने बच्चों को नहीं दे पाए | आप धन्य है आपका बच्चा बड़ा ही ‘खुद्दार’ है |

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Babita Singh
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