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गर्भावस्था के दौरान ध्यान रखने वाली बातें एवं सावधानीयां – Precautions During Pregnancy In Hindi

गर्भावस्था में सावधानीयां  – Precautions or care during pregnancy In Hindi

Pregnancy Precautions In Hindiक्या आप जानतें  हैं कि महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कितनी समस्या और तकलीफ़ उठाती हैं। इनमें से कई समस्याएँ और तकलीफ़ें महिलाओं और उनके बच्चों की जान ले लेती है या उन्हें गंभीर रूप से कमज़ोर कर देती हैं । हालांकि आज के मेडिकल साइंस ने गर्भपात और मृत्युदर पर बहुत कुछ अंकुश पा लिया है। लेकिन कुछ मामलों में विशेष देखभाल और सावधानियों की जरूरत पड़ती ही है।

गर्भावस्था के दौरान ये सावधानियां बरत कर न सिर्फ महिला अपने होने वाले शिशु को स्वस्थ पैदा कर सकती है, बल्कि गर्भावस्था के दौरान तथा प्रसव के बाद भी स्वयं भी स्वस्थ और सुन्दर बनी रह सकती है। इन छोटी बड़ी अमल में लाई गई सावधानियों से गर्भावस्था पर बहुत सकरात्मक असर पड़ता है। यह सावधानियां खाने पीने की चीजों से लेकर अलग-अलग गतिविधयों में हो सकती है।

अगर आप माँ बनने जा रही है और आप चाहती है कि अपनी प्रेगनेंसी को बिना किसी हडचन के शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहकर पूरी तरह से एन्जॉय कर सके, तो आपको कुछ खास सावधानियों का पालन करना होगा। खासतौर पर प्रेगनेंसी के आखिरी आठवें और नौवे महीने में, जब गर्भावस्था की सावधानियों की मांग अपने चरम पर होती है। 

वैसे गर्भावस्था के हर महीने में विशेष सावधानी की जरुरत होती है पर गर्भाधारण के शुरूआती तीन महीने गर्भवती के लिए बहुत अधिक मायने रखते है। अगर गर्भवस्था के इस समय में महिला अपना खास ख्याल रखें और बाकि के छह महीनों में सावधानी से रहें तो वह खुद स्वस्थ रहकर एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। यहाँ पर उपलब्ध कुछ जरुरी सावधानी या बातों का ख्याल रखकर गर्भावस्था की हर समस्या से आप बच सकती है।

Precautions During Pregnancy In Hindi – Garbhavastha Me Savdhaniya

गर्भावस्था में गर्भवती के शरीर में हर बीतते दिन के साथ सबसे अधिक बदलाव होता है जो की शरीर के हार्मोन में हो रहा बदलाव के कारण होता हैं, ये परिवर्तन गर्भवती के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी प्रभावित करते है। गर्भवती को गंभीर बीमारी डायबीटीज, हाई ब्लडप्रेशर आदि समस्याएं भी हो जाती है। गर्भावस्था से जुड़े इन खतरों को बहुत कम किया जा सकता है अगर महिला गर्भवती होने से पहले पूरी तरह स्वस्थ और तंदुरुस्त हो, अगर वह गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से अपने स्वास्थ्य की जाँच कराए और अगर वह डॉक्टर, नर्स या दाई जैसे प्रशिक्षित प्रसव सहायक की उपस्थिति में प्रसव कराए । बच्चे के जन्म के बाद 12 घंटे के दौरान और फिर छह सप्ताह बाद भी महिला के स्वास्थ्य की जाँच कराई जानी चाहिए । 

–> व्यायाम का असली उद्देश्य शरीर के पेशियों और स्नायुओं को क्रियाशील और लचीला बनाना होता है। वास्तव में व्यायाम से गर्भवती की पेशियां अपेक्षाकृत अधिक लचीली हो जाती है। इससे प्रसव बड़ी आसानी से और कष्ट रहित होता है। गर्भावस्था में कष्ट रहित प्रसव के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करना बहुत जरुरी है। 

गर्भावस्था में व्यायाम के सम्बन्ध में निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए –

–> व्यायाम इतना ही करे, जिससे ज्यादा थकावट न महसूस हो।

–> इस अवस्था में  wolking, swiming, सायकलिंग और प्रीनेटल एक्सरसाइज करनी चाहिए और आपकी हार्ट रेट 140 के अंदर होनी चाहिए। 16 सप्ताह की प्रेगनेंसी के बाद पीठ के बल लेटने वाला एक्सरसाइज न करें। इस बात का विशेष ध्यान रखे कि गर्भावस्था में कोई खतरनाक व्यायाम या कार्य नहीं करना चाहिए जिसमें शक्ति से अधिक जोर लगाना पड़े। इस अवस्था में बहुत ज्यादा वजन न उठाने का रहस्य यही है कि, इतना भारी बोझ नहीं उठाना चाहिए जिसमें अतिरिक्त जोर लगाना पड़े।

–> कूदने वाले व्यायाम गर्भावस्था के दौरान बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे गर्भाशय पर झटका पहुंचता है।

–> इस अवस्था में कोई भी एक्सरसाइज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरुर ले।

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–> प्रकृति का यह नियम है कि गर्भ का बच्चा अपनी वृद्धि और विकास के लिए माता के शरीर से खाने का पूरा हिस्सा लेता है। यदि माता के शरीर के भोजन से उसे कोई पोषक तत्व प्राप्त नहीं होता है तो भी बच्चा अपनी माँ के शरीर से उसे छीन लेता है। यही वजह है कि गर्भकाल के अंतिम दिनों में प्रत्येक माँ शारीरिक रूप से क्षीण हो जाती है। इस कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती का भोजन यथासंभव पोषणपूर्ण होना चाहिए।

–> दिन में चार बार विटामिन और मिनरल से भरपूर फल व सब्जियां खाएं।

–> चार बार गेहूं की ब्रेड, अनाज या वे चीजे जो उर्जा प्रदान करें, खाएं।

–> चार बार दूध या दूध से बने पदार्थ लें, इससे शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं आएगी।

–> तीन बार प्रोटीनयुक्त आहार, जैसे मीट, फिश, अंडा, नट्स और मटर लें।

अच्छा आहार लेने से बच्चा भी स्वस्थ होता है। अधिकतर फिजीशियन का मानना है कि आयरन के अतिरिक्त सभी आवश्यक तत्व हमें अपने भोजन से प्राप्त हो सकते है।

–> गर्भधारण के बाद और खासकर गर्भावस्था के आखिरी दिनों में शरीर में आयरन की ज्यादा जरुरत होती है। इस तरह आयरन सप्लीमेंट से लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण होता है। सामान्य डाइट में पूरी तरह से हर आवश्यक तत्वों की पूर्ति होना मुश्किल हो जाता है। भोजन पर ही बच्चा भी निर्भर करता है। ऐसे में गर्भवती स्त्री के एनीमिया (खून कम होना) होने का खतरा रहता है। ऐसी हालत में वह किसी भी इन्फेक्शन से लड़ने में असमर्थ हो सकती है।

इसी तरह डिलीवरी के समय भी उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आयरन सप्लीमेंट लेने से इन स्थितियों से निपटा जा सकता है । फिर भी अपने डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही आयरन की सप्लीमेंट लें तो बेहतर होगा ।

–> अक्सर गर्भवती महिला को आचार और आइसक्रीम खाने का मन अधिक करता है । ऐसा कहा जाता है कि ऐसा स्त्री के गर्भ में होने वाले बच्चे के मांग के कारण होता है । बच्चे को पोषण की आवश्यकता  होती है और उसकी जरुरत के अनुसार माँ का शरीर भोजन को सोखकर अलग – अलग  तरीके से मेटाबोलाइज करता है । इस तरह के परिवर्तन से ही बच्चे का सामान्य विकास होता है । बाद में इसकी पूर्ति बच्चा माँ के दूध से से करता है ।

–> गर्भावस्था में ज्यादा कॉफ़ी पीना आप और आप के बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है । यदि कॉफी पीने की इच्छा हो तो लाइट कॉफी पीये । हाल ही में हुआ एक अध्ययन  के अनुसार दिन में 5 से 6 कप कॉफ़ी पीने वालों में गर्भपात होने की सम्भावना बढ़ जाती है । इसलिए बेहतर होगा कि कॉफ़ी पीना बंद कर दें या उसकी मात्रा कम कर दें  ।

–> मोर्निंग सिकनेस होना गर्भवती महिलाओं को  लिए सामान्य है लेकिन आपको ये परेशानी नहीं होती है तो आप बहुत भाग्यशाली है । इसमें डरने या घबराने की कोई बात नहीं है । समय – समय पर डॉक्टर से चेकअप कराए और एहतियात जरुर बरतें ।

–> मॉर्निंग सिकनेस की वजह से ये सब परेशानियाँ आम बात हैं । पहले तीन महीने के दौरान बच्चे बहुत छोटे होते है जिससे उसे बहुत कम कैलोरी की आवश्यकता होती है जो आपके भोजन के द्वारा उसे आसानी से प्राप्त हो जाता है । इसलिए कोई फिक्र की बात नहीं है, लेकिन फिर भी अपने भोजन पर ध्यान दें और अपना वजन बढाएं, ताकि आगे के समय के लिए अपने आप को तैयार कर सकें ।

–> गर्भावस्था में स्त्री से यौन संबंध बनाना चाहिए अथवा नहीं ? इस विषय में आधुनिक मत के विशेषज्ञों का कथन है कि संभोग किया जा सकता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। इससे गर्भिणी को कोई हानि नहीं होती है बशर्ते कि उसे किसी तरह की परेशानी, जैसे ब्लीडिंग या प्रीटर्म कांट्रेक्शन न हो । सामान्य रूप से गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित यौन संबंध बनाने में जो सावधानी बरतनी चाहिए वह इस प्रकार है –

–> उन दिनों में संभोग नहीं करना चाहिए जो स्त्री के मासिक धर्म होने की सामान्य तारीख होती है।

–> यौन संबंध बनाने के दौरान ब्लीडिंग हो तो भी संभोग नहीं करना चाहिए।

–> आठवे महीने में और इसके पश्चात् यौन संबंध नहीं बनाना चाहिए।

–> शिशु के जन्म की सम्भावित तिथि का पता लगाने के लिए पिछले महीने हुए पीरियड्स के पहले दिन में 9 माह और सात दिन जोड़ दें। यही शिशु जन्म का ड्यू डेट होगा ।

->गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं को कई तरह की शारीरिक तकलीफें हो सकती है । इसलिए सभी परिवारों को इन तकलीफों की चेतावनी देने वाले लक्षणों की पहचान होनी चाहिए । उन्हें पैसे और दूसरे साधनों की पहले से तैयारी रखनी चाहिए ताकि गर्भवती महिला को तकलीफ होने पर तुरंत प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की मदद दी जा सके । 

->सभी गर्भवती महिलाओं को पूरी गर्भावस्था के दौरान विशेष पौष्टिक आहार के साथ साथ सामान्य से अधिक आराम की जरूरत होती है । 

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-> डॉक्टर, नर्स या प्रशिक्षित दाई जैसे प्रशिक्षित प्रसव सहायक को हर गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार महिला की जाँच करनी चाहिए और हर प्रसव में सहायता करनी चाहिए । 

-> धूम्रपान, शराब, नशीले पदार्थोँ का सेवन, जहर और प्रदूषण फ़ैलाने वाले तत्व गर्भवती महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से नुकसान पहुंचाते है । 

-> अनेक परिवारों में महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट जैसे शारीरिक अत्याचार स्वास्थ्य की एक गंभीर समस्या है । गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की मारपीट महिला और उसकी कोख़ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए खतरनाक है । 

-> बचपन और किशोरावस्था में अच्छी खुराक पाने वाली, स्वस्थ और पढ़ी लिखी लड़कियों को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान तकलीफें कम होती है । 

-> हर महिला को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए सभी सुविधाएँ पाने का अधिकार है । स्वास्थ्य सुविधा देने वालों को पूरी तकनीकी जानकारी होनी चाहिए और उन्हें महिलाओं का सम्मान करना चाहिए । 

ध्यान देने वाली बातें :

– वजन न बढ़ना, खून की कमी, बहुत थकान या जल्दी – जल्दी साँस फूलना और टांगों , बाँहों या चेहरे पर बहुत अधिक सूजन आना, गंभीर चेतावनी के लक्षण है । 

– अगर गर्भावस्था के दौरान खून आये या पेट में दर्द हो या ऊपर बताए गए चेतावनी का कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत स्वास्थ्य कार्यकर्ता या प्रशिक्षित सहायक से सलाह ली जनि चाहिए । 

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4 thoughts on “गर्भावस्था के दौरान ध्यान रखने वाली बातें एवं सावधानीयां – Precautions During Pregnancy In Hindi”

  1. गर्भावस्था में क्या खबरदारी लेनी है इसके बारेमे बहु अच्छी जानकारी प्राप्त हुई
    धन्यवाद्

  2. I am 3 month pregnant for the first time. Information given here cleared many doubts regarding precautions to be taken during pregnancy. Very useful information. Keep it up.

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