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नारी पर कविता ‘नारी अस्मिता’ Hindi Poem on women “Nari asmita”

नारी अस्मिता पर प्रेरक कविता (Poem on women in Hindi)

महिलाओं की भूमिका हर युग के निर्माण में महत्वपूर्ण होता है लेकिन नारी अस्मिता पर समय समय पर प्रहार होता रहता है | प्रेम शंकर शास्त्री जी की एक ऐसी ही प्रेरक कविता जिसे नारी अस्मिता के परिपेक्ष्य में लिखा गया है और जो भारतीय महिलाओं की सामयिक तस्वीर प्रस्तुत करता है |

Nari asmita’ Hindi Poem

Poem on women in Hindi
Poem on women in Hindi

तस्वीर अब भारत की देखो सब बदली – बदली लगती है |

हिंसा हो रही उस नारी की जो हम सबको ही जनती है |

मर्यादा की बात बताकर मत डयोढ़ी में बंद करो,

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कत्ल करो उस रावण का घटना हरने की होती है |

तस्वीर अब भारत की देखो, सब बदली बदली लगती है |

जीने का अधिकार उसे है अधिकारों के संगम में,

अधिकार छिनते है, जब उस से तब दुर्गा माँ वह बनती है |

तस्वीर अब भारत की देखो, सब बदली – बदली लगती है |

नर इतना अब क्रूर हुआ पशुता भी शरमाती है,

घटना नारी की सुनकर छाती भी फट जाती है |

तस्वीर अब भारत की देखो, सब बदली – बदली लगती है |

नर समझे जगलीला को नारी ही सच्ची साथी है,

अधिकार उसे दे बढ़ने का तब आगे बढ़ पाती है |

तस्वीर अब भारत की देखो, सब बदली – बदली लगती है |

नारी ही घर की लक्ष्मी है अपमानित जब होती है,

लेकर मलवारे हाथों में वह लक्ष्मीबाई बनती है |

तस्वीर अब भारत की देखो, सब बदली – बदली लगती है |

नारी का सम्मान करो मत भारत को बदनाम करो,

अहिंसा सिखलाओं हिंसक को जिससे यह हिंसा होती है |

तस्वीर अब भारत की देखो, सब बदली – बदली लगती है |

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One thought on “नारी पर कविता ‘नारी अस्मिता’ Hindi Poem on women “Nari asmita””

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