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वायुमंडल के भाग एवं संघटन – Atmosphere Layers in hindi

पृथ्वी में वायुमंडल की परतें – Different Layers of Earth Atmosphere in Hindi

Atmosphere Layers in hindi - Vayu Mandal
Atmosphere Layers in hindi – Vayu Mandal

Atmosphere Layers in hindi – हमारी पृथ्वी चारों ओर से वायु की घनी चादर से घिरी हुई है, जिसे वायुमंडल कहते हैं। पृथ्वी पर सभी जीव जीवित रहने के लिए वायुमंडल पर निर्भर हैं। यह हमें साँस लेने के लिए वायु प्रदान करता है एवं सूर्य की किरणों के हानिकारक प्रभाव से हमारी रक्षा करता है। यदि सुरक्षा की यह चादर न हो तो हम दिन के समय सूर्य की गर्मी से तप्त होकर जल सकते है एवं रात के समय ठंड से जम सकते हैं। अत: यह वह वायुराशि है जिसने पृथ्वी के तापमान को रहने योग्य बनाया है।

वायुमंडल का संघटन

क्या आप जानते हैं कि जिस वायु का उपयोग हम साँस लेने के लिए करते हैं, वास्तव में वह अनेक गैसों का मिश्रण होती है? नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन ऐसी दो गैसें हैं, जिनसे वायुमंडल का बड़ा भाग बना है। कार्बन डाइऑक्साइड, हीलियम, ओजोन, आर्गान एवं हाइड्रोजन कम मात्रा में पाई जाती हैं। इन गैसों के अलावा धूल के छोटे-छोटे कण भी हवा में मौजूद होते है।

नाइट्रोजन वायु में सर्वाधिक पाई जाने वाली गैस है। जब हम साँस लेते हैं तब फेफड़ों में कुछ नाइट्रोजन भी ले जाते हैं और फिर उसे बाहर निकाल देते हैं। परंतु पौधों को अपने जीवन के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। वे सीधे वायु से नाइट्रोजन नहीं ले पाते। मृदा तथा कुछ पौधों की जड़ों में रहने वाले जीवाणु वायु से नाइट्रोजन लेकर इसका स्वरूप बदल देते हैं,जिससे पौधे इसका प्रयोग कर सकें।

ऑक्सीजन वायु में प्रचुरता से मिलने वाली दूसरी गैस है। मनुष्य तथा पशु साँस लेने में वायु से ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं। हरे पादप, प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार वायु में ऑक्सीजन की मात्रा समान बनी रहती है। यदि हम वृक्ष काटते हैं तो यह संतुलन बिगड़ जाता है।

कार्बन डाइऑक्साइड अन्य महत्वपूर्ण गैस है। हरे पादप अपने भोजन के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड का प्रयोग करते हैं और ऑक्सीजन वापस देते हैं। मनुष्य और पशु कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालते हैं। मनुष्यों तथा पशुओं द्वारा बाहर छोड़ी जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा पादपों द्वारा प्रयोग की जाने वाली गैस के बराबर होती है, जिससे यह संतुलन बना रहता है। परंतु यह संतुलन कोयला तथा खनिज तेल आदि ईंधनों के जलाने से गड़बड़ा जाता है। वे वायुमंडल में प्रतिवर्ष करोड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ोत्तरी करते हैं। परिणामस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ा हुआ आयतन पृथ्वी पर मौसम तथा जलवायु को प्रभावित करता है।

वायुमंडल की संरचना (Structure of Atmosphere)

हमारा वायुमंडल पाँच परतों में विभाजित है, जो पृथ्वी की सतह से आरंभ होती हैं। ये हैं – 

क्षोभमंडल,

समतापमंडल,

मध्यमंडल,

बाह्य वायुमंडल एवं 

बहिर्मंडल

क्षोभमंडल (Troposphere) – वायुमंडल के सबसे निचली संस्तर को क्षोभ मंडल कहते हैं। यह परत वायुमंडल की सबसे महत्वपूर्ण परत है। इसकी औसत ऊँचाई 13 किलोमीटर है। हम इसी मंडल में मौजूद वायु में साँस लेते हैं। मौसम की लगभग सभी घटनाएँ जैसे – वर्षा, कुहरा एवं ओलावर्षण इसी परत के अन्दर होती हैं।

समतापमंडल (Stratosphere) समताप मंडल क्षोभमंडल के ऊपर स्थित है। यह लगभग 50 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला है। यह परत बादलों एवं मौसम संबंधी घटनाओं से लगभग मुक्त होती है। इसके फलस्वरूप यहाँ की परिस्थितियाँ हवाई जहाज उड़ाने के लिए आदर्श होती है। समताप मंडल की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें ओज़ोन गैस की परत होती है। यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक गैसों से हमारी रक्षा करती है।

मध्यमंडल (Mesosphere) 50 किमी० से 80 किमी० की ऊँचाई वाला भाग मध्य मंडल कहा जाता है। यह वायुमंडल की तीसरी परत है। यह समताप मंडल के ठीक ऊपर होती है। अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाले उल्का पिंड इस परत में आने पर जल जाते हैं।

बाह्य वायुमंडल: बाह्य वायुमंडल में बढ़ती ऊँचाई के साथ तापमान अत्यधिक तीव्रता से बढ़ता है आयन मंडल इस परत का एक भाग है। यह 80 से 400 किलोमीटर तक फैला है। रेडियो संचार के लिए इस परत का उपयोग होता है। वास्तव में पृथ्वी से प्रसारित रेडियो तरंगें इस परत द्वारा पुनः पृथ्वी पर परावर्तित कर दी जाती हैं।

बहिर्मंडल (Exosphere) सामान्यतः वायु मंडल की सबसे ऊपरी परत को बहिर्मंडल के नाम से जाना जाता है। यह वायु की पतली परत होती है। हल्की गैस जैसे – हीलियम एवं हाइड्रोजन यहीं से अन्तरिक्ष में तैरता हैं। 

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Babita Singh
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3 thoughts on “वायुमंडल के भाग एवं संघटन – Atmosphere Layers in hindi

  1. इस समय हमारे वातावरण मे कार्बन डाई आक्साइड ,नाइट्रोजन आक्साइड, कलोरोफ्लोरो कार्बन ,मेथेन की मात्रा कितना है । क्योकि ये गैस ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण है।

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