Hindi Post Nibandh Nibandh Aur Bhashan

Air Pollution Essay in Hindi (वायु प्रदूषण पर विस्तृत निबंध)

जानिए वायु प्रदूषण कारण, प्रभाव और रोकथाम के उपाय – Essay on Air Pollution in Hindi

Air Pollution in Hindi
Air Pollution in Hindi

वातावरण में एक जटिल, गतिशील प्राकृतिक वायु तंत्र है और पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक चीजों में सबसे अधिक मूल्यवान है | वायु के महत्व का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि मनुष्य बिना भोजन के कुछ हफ्तों, बिना जल के कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है किन्तु वायु के बिना उसका जीवन असंभव है |

मनुष्य दिन भर में जो कुछ लेता है उसका 80% भाग वायु है | मनुष्य प्रतिदिन 22000 बार सांस लेता है | इस तरह हर दिन वह 16 किलोग्राम या 25 गैलन वायु ग्रहण करता है | वायु पृथ्वी के चारों ओर कुछ मील तक की ऊँचाई के क्षेत्र में, गैसों के रूप में ‘वायुमंडल’ (atmosphere) में पाई जाती है | इन गैसों के स्वाभाविक रूप के कारण ही वायुमंडल में संतुलन बना रहता है और वे स्वच्छ बनी रहती है | इस प्रकार प्रकृति ने धरती के कण कण पर शुद्ध वायु उपलब्ध कराई है किन्तु वायु प्रदुषण के जो तत्कालिक प्रभाव परिलक्षित हो रहे है उसमें लालची मानव की अहम् भूमिका है, जो जीवों को और वायुमंडल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है | 

वायु प्रदूषण क्या है ? / What is AirPollution ?

वायुमण्डल में पाई जाने वाली विभिन्न गैसे एक निश्चित मात्रा एवं अनुपात में होती है, जिसमें नाइट्रोजन की मात्रा सर्वाधिक अर्थात 78 % होती है जबकि 21 % ऑक्सीजन तथा 0.03 % कार्बन डाई आक्साइड पाया जाता है तथा शेष 0.97 % हाइड्रोज, हीलियम, आर्गन, निऑन, क्रिप्टान, जेनान, ओजोन एवं जल वाष्प है | वायु में विभिन्न गैसों की उपरोक्त मात्रा उसे संतुलित बनाए रखती है | किन्तु जब वायु के अवयवों में अवांछित तत्व प्रवेश कर जाते हैं तो वायु की गैसों का मौलिक अनुपात तथा संतुलन बिगड़ जाता है, जो मानव जीवन तथा जीवधारियों के लिए घातक होता है | वायु के असंतुलन से उसके दूषित होने की प्रक्रिया ही ‘वायु प्रदूषण ‘ कहलाती है |

दुसरे शब्दों में, प्राकृतिक तथा मानव जनित स्रोतों से उत्पन्न बाहरी तत्वों के वायु में मिश्रण के कारण, वायु की असंतुलित दशा को वायु प्रदुषण कहते है तथा जिन कारको से वायु प्रदूषित होती है, उन्हें वायु प्रदूषक कहते है | इस तरह वायु में जरा सी भी अन्तर आने पर वायु असंतुलित हो जाती है और उसकी गुणवत्ता में ह्रास हो जाता है जो जीव – जंतुओं एवं पादपों के लिए हानिकारक हो जाता  है |

Loading...

वायु प्रदूषण के कारण 

वायु प्रदूषण (Air Pollution) वायुमंडल पर्यावरण का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसका सामान्य रूप से पर्यावरण और जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है | वायु प्प्रदूषण के स्रोत को दो भागों में बाटा जा सकता है – प्राकृतिक स्रोत और मानवीय स्रोत |

प्राकृतिक स्रोत – प्राकृतिक स्रोतों में उत्पन्न वायु को प्रदूषित करने वाले प्रदूषकों को निम्न भागों में विभाजित किया जा सकता है –

1 – ज्वालामुखी के उद्दगार से निकली राख, धुल,धुआं, कार्बन डाई आक्साइड, हैड्रोजन तथा अन्य गैसें |

2 – आंधी, तूफान के समय उड़ती धूल |

3 – वनों में लगी आग से उत्पन्न धुआं एवं  कार्बन डाई आक्साइड |

4 – दलदल एवं अनूपों में अपघटित होने वाले पदार्थों से निकली मीथेन गैस |

5 – बैक्टीरिया से निर्मुक्त  कार्बन डाई आक्साइड |

6 – कवक से उत्पन्न जीवाणु एवं वायरस आदि |r

7 – फूलों के परागण से निर्मुक्त  कार्बन डाई आक्साइड |

8 – धूमकेतु, क्षुद्रग्रह तथा उल्काओं आदि के पृथ्वी से टकराने के कारण उत्पन्न कास्मिक धूल |

मानवीय स्रोत – मानव जनित प्रदूषक हैं –

1 – कार्बन डाई आक्साइड

2 – कार्बन मोनो आक्साइड

3 – सल्फर के आक्साइड

4 – नाइट्रोजन के आक्साइड

5 – क्लोरिन

6 – सीसा

7 – अमोनिया

8 – कैडमियम

9 -बेंजीपाइस

10 – हाईड्रोकार्बन और

11 – धूल |

मानवीय कारणों से उत्पन्न वायु प्रदूषण को निम्न वर्गों में विभाजित किया जा सकता है –

1 – दहन प्रक्रिया द्वारा – (a) घरेलू कार्यों में दहन, (b) वाहनों में दहन और (c) ताप विधुत उर्जा हेतु दहन |

2 – कृषि कार्यों द्वारा

3 – औद्योगिक निर्माणों द्वारा

4 – विलायकों के उपयोग द्वारा

5 – आणविक उर्जा सम्बन्धी परियोजनाओं द्वारा

6 – वायु प्रदूषण के अन्य कारण

जानवरों के शवों द्वारा – भारत में मृत जानवरों की खाल निकालने की परम्परा है | मृत जानवरों को लोग बस्तियों से उठाकर ले जाते हैं तथा खाल निकालकर बचे भाग खुले में छोड़ देते हैं | जब ये शव सड़ते  है तो इनसे दुर्गन्ध निकलती है जो वायु प्रदुषण का कारण बनती हैं |

Loading...

शौचालयों की सफाई नहीं होना – सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत शौचालयों की उचित सफाई नहीं होने से क्षेत्र विशेष के वायु प्रदूषित हो जाते है |

कूड़े – कचरे का सड़ना एवं नालियों की सफाई नहीं होना –  अधिकतर लोग अपने घरों के बाहर सड़क पर अथवा नालियों में कूड़ा – कचरा फेक देते है जो दुर्गन्ध का कारण बनता है और जिससे विभिन्न बीमारियों के विषाणु पनपते है और मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है |

धुम्रपान, धूल, कूड़े – कचरे का जलाया जाना आदि भी वायु प्रदूषण के कारण है |

वायु प्रदूषण (Air Pollution) का व्यापार, मानव व उद्द्योगों पर प्रभाव

Air Pollution in Hindi
Air Pollution in Hindi

प्रदूषित वायु मानव स्वास्थ्य पर बड़ा प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं जिसका परोक्ष प्रभाव कृषि व उद्द्योगों की क्षमता पर पड़ता है जैसा कि निम्न विवरण से स्पष्ट है –

सल्फर डाइऑक्साइड गैस 

वायु प्रदूषण के अंतर्गत सल्फर डाइऑक्साइड गैस  सबसे अधिक हानिकारक होती है, क्योंकि यह वायुमंडल में जल – वाष्प या वर्षा के जल के साथ क्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल बनाती है जो ‘तेजाब वर्षा’ के रूप में फसलों तथा मानव को अत्यधिक हानि पहुँचाती है | इससे मानव को दमा, खाँसी तथा फेफड़ों की बीमारियाँ अधिक होती हैं, जिसका परोक्ष प्रभाव व्यापर व उद्योगों पर पड़ता है |

कार्बन के कण एवं धुआँ

औद्योगिक संयन्त्रों, वाहनों, घरेलू चूल्हा, मानव के मुख से निकलने वाले सिगरेट के धुएँ से कार्बन मोनो ऑक्साइड कार्बन डाईऑक्साइड वायु में मिल जाती है जो स्वास्थ्य के लिए बड़ी हानिकारक होती है | इससे मानव को बहुतायत से फेफड़ों का कैंसर, क्षय तथा दमा आदि रोग होते है |

ऑक्सीजन का विनाश

ऑक्सीजन जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि साँस लेने के लिए सभी जीवों द्वारा इसका उपयोग किया जाता है | किन्तु वायु प्रदूषण के कारण पिछले 100 वर्षों में लगभग 24 लाख टन ऑक्सीजन  गैस वायुमंडल से समाप्त हो चुकी है और उसकी जगह 36 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड गैस ले चुकी है जिसके कारण धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है |

आपदाएँ

वायु के इस प्रदुषण तथा असंतुलन के और भी कई प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न हो रहे हैं, जैसे मौसम में बदलाव, अत्यधिक गर्मी, तेजाबी वर्षा, सूखा, पानी की कमी, बर्फीली चोटियों का पिघलना, फसलों पर बूरा प्रभाव आदि | इन सबका प्रतिकूल प्रभाव व्यापार व उद्योगों पर पड़ता है |

धरती के तापमान में बृद्धि

वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा निरंतर बढ़ने के कारण धरती का तापमान बढ़ रहा है | वैज्ञानिकों के आकलन के अनुसार, विगत 50 वर्षों में पृथ्वी का औसत तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है | यदि तापमान में बृद्धि की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो सन 2050 तक पृथ्वी के तापमान में 4 डिग्री से 5 डिग्री तक की बृद्धि हो जाएगी जबकि पृथ्वी के तापमान में मात्र 3.6 सेल्सियस की ही बृद्धि हो जाये तो आर्कटिक और अंटार्कटिका के विशाल हिमखंड पिघल जायेंगे | जिससे समुन्द्र के जल-स्तर में 10 इंच से 5 फुट तक की बृद्धि हो सकती है | इस स्थिति में सभी समुन्द्र तटीय नगर डूब जायेंगे |

रोगों में बृद्धि

वैसे तो सभी प्रकार के प्रदूषणों के प्रभाव से स्वास्थ्य खराब होता है किन्तु वायु प्रदूषण का प्रभाव क्षेत्र अत्यधिक व्यापक है | वायु प्रदूषण से एक्जीमा, कैंसर, टी.बी, आँखों में सूजन, मुहाँसे, दमा आदि बीमारियाँ होती हैं जिससे श्रमिक की कार्यक्षमता भी घटी है |

विद्द्यार्थियों के लिए अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से वायु प्रदूषण के प्रभाव को निम्न प्रकार से वर्गीकृत कर प्रस्तुत किया जा रहा हैं –  

1 – मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

2 – जीव – जंतुओं पर प्रभाव

3 – पेड़ – पौधों एवं वनस्पतियों पर प्रभाव

4 – जलवायु और मौसम पर प्रभाव

5 – दृश्यता पर प्रभाव

6 – इमारतों पर प्रभाव

7 – अन्य प्रभाव – वायु प्रदूषण के अन्य प्रभाव निम्न हैं –

(A) प्रदूषित वायु में हैड्रोजन सल्फाइड गैस की मात्रा निर्धारित मात्रा से अधिक होती है जिससे चांदी की चमक कम हो जाती है और सीसे से बनी वस्तुएं काली पड़ जाती है |

(B) अम्लीय वायु प्रदूषकों से धातुओं में जंग लग जाती है तथा कपडा कमजोर हो जाता है |

(C) प्रदूषित वायु का प्रभाव इस्पात पर भी पड़ता है | शहरी क्षत्रों में प्रदूषण ज्यादा होने के कारण यहाँ इस्पात ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा घिसता है |

वायु प्रदूषण पर नियन्त्रण व रोकथाम  

1 – कारखानों की चिमनियों की ऊंचाई अधिक होनी चाहिए |

2 – रेल में कोयले अथवा डीजल के इंजनों के स्थान पर बिजली के इंजनों का उपयोग किया जाये |

3 – मोटर वाहनों का रख – रखाव ठीक रखा जाए | कार्बुरेटर की सफाई कर कार्बन मोनो ऑक्साइड का उत्सर्जन कम किया जा सकता है तथा लेड रहित पेट्रोल का ईधन के रूप में उपयोग किया जाये |

4 – पुराने वाहनों के संचालन पर प्रतिबन्ध लगाया जाये क्योंकि उनसे वायु प्रदूषण ज्यादा होता है |

5 – घरों में सौर उर्जा चालक कुकर का उपयोग किया जाये |

6 – यूरो – I और यूरो – II मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाये |

वायु प्रदूषण रोकने के उपाय

वायु प्रदूषण को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय कारगर सिद्ध हो सकते हैं –

वन-रोपण

वैज्ञानिकों का मत है कि, विश्व के हर देश के सम्पूर्ण भू भाग का 33 % हिस्सा यदि वन से घिरा हो तो,  वायु प्रदूषण के द्वारा कोई हानि नहीं होती, क्योंकि वृक्ष प्रदूषित वायु को सतत शुद्ध करता है |

कारखाने

कारखानों की स्थापना आबादी से दूर की जानी चाहिए | उनकी चिमनियों को ऊँचा करके, उनसे निकलने वाले धुए को साफ करने के लिए विशेष फिल्टर का प्रयोग करना चाहिए |

कूड़ा – करकट

गोबर, कूड़ा, कचरा तथा मल को खुले जगह में न डालकर, आबादी से बाहर किसी गड्ढा  में डालना चाहिए, जिससे उसके गन्दे वायु से वायु प्रदूषण न हो |

वाहनों का कम प्रयोग

वायु प्रदूषण के खतरे को देखते हुए वाहनों से उत्पन्न प्रदूषकों पर कानून बनाकर नियंत्रण किया जाये |

जनजागरण

वायु प्रदूषण के संकट के बारे में जनमानस को जागृत किया जाना चाहिए | छात्रों के पाठ्यक्रम में प्रारम्भ से ही पर्यावरण प्रदूषण को एक विषय के रूप में सम्मिलित किया जाना चाहिए |

वायु प्रदूषण की समस्या पर विजय पाने के लिए प्रत्येक देश में शोध केद्र की स्थापना की जानी चाहिए |

संयुक्तराष्ट्र संघ की ओर से 5 जून को मनाए जाने वाले ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर हमें रेडियों, दूरदर्शन तथा अखबारों द्वारा प्रचार करके अनेक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए |

वायु प्रदूषण पर निबंध (Air Pollution Essay in Hindi) के इस निबंध के साथ हम चाहते है कि हमारे  Facebook Page को भी पसंद करे | और हाँ यदि future posts सीधे अपने inbox में पाना चाहते है तो इसके लिए आप हमारी email subscription भी ले सकते है जो बिलकुल मुफ्त है |

Loading...

CLICK HERE : Amazon Today's Deal of the Day - जल्दी करे मौका कहीं छूट न जाए

2 thoughts on “Air Pollution Essay in Hindi (वायु प्रदूषण पर विस्तृत निबंध)”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *