Mahashivratri Vrat Katha ka rahasya
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महाशिवरात्रि व्रत एवं पूजा विधि – Mahashivratri in hindi

महा शिवरात्रि – Mahashivaratri in Hindi 

Mahashivratri Vrat & pooja Vidhi in hindi
Mahashivratri Vrat & pooja Vidhi in hindi

महाशिवरात्रि व्रत का महत्व 

Mahashivratri Puja – महाशिवरात्रि के पुण्य क्षणों में सम्पूर्ण रीति से उपवास करते हुए महेश्वर महाकाल का पूजन भक्तों को उनका मनोवांछित फल देने वाला है। यह अपनी आत्मा को पुनीत करने का महाव्रत है। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

शिवरात्रि के उपवास, अनुष्ठान में दो तत्वों का समावेश है। प्रथम वह है, जो उपवास के शब्द में ध्वनित होता है, आहारनिवृत्तिरूपवास: यानि कि आहार से निवृत्ति अथवा निराहार रहना ही उपवास है। यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि आहार का मतलब केवल भोजन नहीं। शास्त्रकार कहते हैं, अहियवे मनसा बुद्धया इन्द्रियैर्वा इति आहार: – मन, बुद्धि अथवा इंद्रियों के द्वारा जो बाहर से भीतर आहृत – संगृहित होता है, उसी का नाम आहार है।

इस प्रकार निराहार रहने का मतलब यह हुआ कि हम न केवल भोजन का त्याग करें, बल्कि, कल्पना, भावना और विचारों से भी संसारिकता को भी छोड़ दें। सांसारिक विषय – वासना या प्रपंच के किसी भी स्पन्दन को अपनी अंतर्चेतना में प्रवेश न करने दें।

उपवास का दूसरा तत्व उसके धातुमूलक अर्थ से ध्वनित होता है। यह अर्थ है अपने अराध्य के समीप होना और यह समीपता हमें प्रभु के स्वरुप – चिंतन से ही मिल सकती है। भगवान् महाकाल के दिव्यस्वरूप के रहस्य पर ध्यान करने से मिल सकती है।

इस तरह महाशिवरात्रि में किए जाने वाले उपवास की सार्थकता तभी है, जब हम शरीर, मन, बुद्धि से किसी बाहरी और संसारी तत्व को न ग्रहण करते हुए प्रतिफल – प्रतिक्षण भगवान् महाकाल की महिमा का चिंतन करें।

Mahashivaratri Pooja Vidhi in Hindi

महाशिवरात्रि की पूजा प्रातः – काल से आरम्भ कर रात्रि जागरण तक करना चाहिए। आपका पूरा दिन शिव आराधना में बितना चाहिए। इस दिन सुबह सबसे पहले स्नानादि करे. उसके पश्चात शिवलिंग की पूजा – अर्चना करें और पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लें। व्रत के दौरान केवल गंगाजल और दुग्धाहार ही ग्रहण करें। चिंतन या पूजन के समय शुद्ध आसन पर बैठकर पहले आचमन करें। उसके बाद यज्ञोपवित धारण कर शरीर शुद्ध करें। तत्पश्चात आसन की शुद्धि करें. पूजा की सामग्री (बिल्वपत्र, अक्षत, नैवेद्ध, धूप, दीप, फल, फूल, पंचामृत, घी, वस्त्र) को यथास्थान रखकर रक्षादीप प्रज्ज्वलित करें।

उसके बाद स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:, स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदा:, स्वस्ति स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु इस स्वस्ति मंत्र का पाठ करें .

इसके बाद महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प कर भगवान गणेश और माता गौरी का स्मरण कर पूजन करें. फिर नन्दीश्वर, वीरभद्र, कार्तिकेय एवं सर्प का लघु पूजन करे। इसके पश्चात् बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि शिवलिंग पर चढ़ाकर विधि विधान से पूजन करें। तत्पश्चात धुप दीप जलाये और आरती करे। पूजा संपन्न होने के पश्चात् दान जरुर दे. दान में फल, पान – नारियल रखें।

इसके बाद क्षमा याचना करें : आह्वानं ना जानामि, ना जानामि त्वार्चनम् पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यताम परमेश्वर: 

रात्रि भर जागरण करें। इस दिन जागरण करने का विशेष महत्व है. ईशान संहिता में इसकी महत्ता का उल्लेख इस प्रकार किया गया है –

शिवरात्रि व्रतं नाम सर्वपाप प्रणाशनम |

आचाण्डाल मनुष्याणां भुक्ति मुक्ति प्रदायकं ||

रुद्राष्टाध्यायी, शिवपुराण, शिवमहिम्मरस्त्रोत आदि का पाठ करें। इस दिन रुडाभिषेक करना बहुत फलदायक होता है। महाशिवरात्रि के दूसरें दिन प्रातः 108 आहुतियां त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धितम मंत्र का जाप करें तत्पश्चात ब्राम्हणों को भोजन कराएं फिर स्वयं भोजन करें।

महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा

महाशिवरात्रि के बारे में शास्त्रों में कहा गया है कि एक बार कैलास शिखर पर माता पार्वती ने भोलेनाथ से पूछा –

कर्मणा केन भगवन् व्रतेन तपसायि वा |

धर्मार्थ काममोक्षणां हेस्तुस्त्वं परितुष्यति ||

हे भगवन ! धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के हेतु तुम्हीं हो. साधकों की साधना से संतुष्ट हो, तुम्ही इन्हें प्रदान करते हो. अतएव ये जानने की इच्छा होती है कि किस कर्म या किस प्रकार की तपस्या से तुम प्रसन्न होते हो ? इसके उत्तर में प्रभु ने कहा –

फाल्गुने कृष्ण पक्षे या तिथि: स्याच्चतुर्दशी |

तस्यो या तामसी रात्रि: सोच्यते शिवरात्रिका ||

तत्रोपवासं कुर्वाण: प्रसादयति मां ध्रुवं |

तुष्यामी न तथा पुष्पैर्यथा तत्रोपवासत: ||

महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। चतुर्दशी तिथि को आश्रय कर जिस अंधकारमयी रजनी का उदय होता है, उसी को शिवरात्रि कहते हैं। उस दिन जो उपवास करता है, वह निश्चय ही मुझें संतुष्ट करता है. उस दिन उपवास करने से जैसा प्रसन्न होता हूँ, वैसा स्नान, वस्त्र, धूप और पुष्प के अर्पण से भी नहीं होता.

जय महाकाल – Mahakal Status in Hindi

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

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4 thoughts on “महाशिवरात्रि व्रत एवं पूजा विधि – Mahashivratri in hindi”

  1. बहुत सुंदर है आज आपके बताए गए ज्ञान से कृत कृत्य हूं
    बहुत बहुत आभार

  2. बबिता जी,
    महाशिवरात्रि पर बहुत ही अच्छा लेख है । भगवान शिव सम्बन्धी अनेक जानकारी प्राप्त हुई ।

  3. अच्छी जानकारी महाशिवरातिृय पर
    “हर हर महादेव ”
    बढ़िया पोस्ट

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