Mahashivratri Vrat Katha ka rahasya
Hindi Post Vrat-Tyohar

महा शिवरात्रि व्रत 2019 – Mahashivaratri Vrat Vidhi 2019 in hindi…-Khayalrakhe.com

महा शिवरात्रि की संक्षिप्त सरल व्रत विधि एवं पूजा विधि – Mahashivaratri Vrat Vidhi & Pooja Vidhi in Hindi 

Mahashivaratri Vrat Vidhi in Hindi, Maha Shivaratri 2019 in India in Hindi, Long and Short Essay on Maha Shivaratri of India in Hindi, Maha Shivaratri Pooja Vidhi in Hindi, Maha Shivaratri 2019

5th March Maha Shivaratri 2019 in Hindi । महा शिवरात्रि की पूजा विधि 2019 और 5 मार्च के लिए ‘महा शिवरात्रि पर निबन्ध 2019 हिंदी में’ –

Mahashivratri Vrat & pooja Vidhi in hindi
Mahashivratri Vrat & pooja Vidhi in hindi

Mahashivaratri Vrat Vidhi in Hindi – महा शिवरात्रि व्रत पूजा का संक्षिप्त व सरल नियम

5th March Maha Shivaratri 2019 in Hindi । महा शिवरात्रि की पूजा विधि 2019 और 5 मार्च के लिए ‘महा शिवरात्रि पर निबन्ध 2019 हिंदी में’- नमस्कार, महाशिवरात्रि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शंकर और उनकी अर्धांगिनी पार्वती के विवाहोत्सव की याद में मनाया जाने वाला  एक महापर्व है. भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए इस article में घर पर ही महाशिवरात्रि पूजन की अत्यंत आसान विधि और कथा बतायी जा रही हैं . यह पूजन विधि जितनी आसान है उससे कही अधिक फलदायी है अगर इस विधि को आप ध्यान से पढे और इसी के अनुसार पूजा करे तो आप की हर एक मनोकामना भोलेनाथ अवश्य पूरी करेंगे… शंकर भगवान होते ही है दयालु. ये अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करते है और सदा धन और आशीषों की अपार वर्षा करते हैं . इसलिए इसे मंगलकारी भगवान शिव से मिलन की रात्रि का पर्व के साथ भारत देश के एक महान व प्रेरक पर्व के रूप में भी जाना जाता है .

इस साल यानि 2019 के मार्च महीने के दूसरे हफ्ते के पहले सोमवार को महाशिवरात्रि का त्योहार है. निशीथ काल पूजा मुहूर्त 24:08:03 से 24:57:24 तक है और महाशिवरात्रि पारण मुहूर्त 06:43:48 से 15:29:15 तक 5th, मार्च को है .

महाशिवरात्रि के उपवास का महत्व 

शिवरात्रि के उपवास, अनुष्ठान में दो तत्वों का समावेश है. प्रथम वह है, जो उपवास के शब्द में ध्वनित होता है, आहारनिवृत्तिरूपवास: यानि कि आहार से निवृत्ति अथवा निराहार रहना ही उपवास है. यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि आहार का मतलब केवल भोजन नहीं. शास्त्रकार कहते हैं, अहियवे मनसा बुद्धया इन्द्रियैर्वा इति आहार: – मन, बुद्धि अथवा इंद्रियों के द्वारा जो बाहर से भीतर आहृत – संगृहित होता है, उसी का नाम आहार है.

इस प्रकार निराहार रहने का मतलब यह हुआ कि हम न केवल भोजन का त्याग करें, बल्कि, कल्पना, भावना और विचारों से भी संसारिकता को भी छोड़ दें. सांसारिक विषय – वासना या प्रपंच के किसी भी स्पन्दन को अपनी अंतर्चेतना में प्रवेश न करने दें.

उपवास का दूसरा तत्व उसके धातुमूलक अर्थ से ध्वनित होता है. यह अर्थ है अपने अराध्य के समीप होना और यह समीपता हमें प्रभु के स्वरुप – चिंतन से ही मिल सकती है. भगवान् महाकाल के दिव्यस्वरूप के रहस्य पर ध्यान करने से मिल सकती है.

इस तरह महाशिवरात्रि में किए जाने वाले उपवास की सार्थकता तभी है, जब हम शरीर, मन, बुद्धि से किसी बाहरी और संसारी तत्व को न ग्रहण करते हुए प्रतिफल – प्रतिक्षण भगवान् महाकाल की महिमा का चिंतन करें.

Mahashivaratri Pooja Vidhi in Hindi – महा शिवरात्रि की संक्षिप्त सरल पूजा विधि

महाशिवरात्रि की पूजा प्रातः – काल से आरम्भ कर रात्रि जागरण तक करना चाहिए. आपका पूरा दिन शिव आराधना में बितना चाहिए.  

इस दिन सुबह सबसे पहले स्नानादि करे. उसके पश्चात शिवलिंग की पूजा – अर्चना करें और पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लें. व्रत के दौरान केवल गंगाजल और दुग्धाहार ही ग्रहण करें. चिंतन या पूजन के समय शुद्ध आसन पर बैठकर पहले आचमन करें. उसके बाद यज्ञोपवित धारण कर शरीर शुद्ध करें. तत्पश्चात आसन की शुद्धि करें. पूजा की सामग्री (बिल्वपत्र, अक्षत, नैवेद्ध, धूप, दीप, फल, फूल, पंचामृत, घी, वस्त्र) को यथास्थान रखकर रक्षादीप प्रज्ज्वलित करें.

उसके बाद स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:, स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदा:, स्वस्ति स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु इस स्वस्ति मंत्र का पाठ करें .

इसके बाद महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प कर भगवान गणेश और माता गौरी का स्मरण कर पूजन करें. फिर नन्दीश्वर, वीरभद्र, कार्तिकेय एवं सर्प का लघु पूजन करे.

इसके पश्चात् बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि शिवलिंग पर चढ़ाकर विधि विधान से पूजन करें. तत्पश्चात धुप दीप जलाये और आरती करे. पूजा संपन्न होने के पश्चात् दान जरुर दे. दान में फल, पान – नारियल रखें.

इसके बाद क्षमा याचना करें : आह्वानं ना जानामि, ना जानामि त्वार्चनम् पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यताम परमेश्वर: 

रात्रि भर जागरण करें. इस दिन जागरण करने का विशेष महत्व है. ईशान संहिता में इसकी महत्ता का उल्लेख इस प्रकार किया गया है –

शिवरात्रि व्रतं नाम सर्वपाप प्रणाशनम |

आचाण्डाल मनुष्याणां भुक्ति मुक्ति प्रदायकं ||

रुडाष्ट्रा – ध्यायी, शिवपुराण, शिवमहिम्मरस्त्रोत आदि का पाठ करें. इस दिन रुडाभिषेक करना बहुत फलदायक होता है. महाशिवरात्रि के दूसरें दिन प्रातः 108 आहुतियां त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धितम मंत्र का जाप करें तत्पश्चात ब्राम्हणों को भोजन कराएं फिर स्वयं भोजन करें.

महाशिवरात्रि कथा का प्रसंग 

जब देवताओं और असुरों के सहयोग से समुन्द्र मंथन् हो रहा था उस मंथन से 14 रत्न प्राप्त हुए. उन रत्नों में से एक हलाहल भी था. हलाहल की गर्मी से सभी देव – दानव त्रस्त होने लगे. कोई भी उसे पीने के लिए तैयार नहीं था. तब शिव जी ने लोक – कल्याण की भावना से उस हलाहल का पान किया. इसीलिए भगवान शिव को महादेव भी कहा जाता है. जब महादेव ने हलाहल को अपने कंठ के पास रख लिया तो उनका कंठ नीला हो गया. अत: भगवान शिव शंकर को नीलकंठ भी कहते है.

महाशिवरात्रि कथा का रहस्य 

एक बार शिव जी पार्वतीजी के साथ कैलाश पर्वत पर बैठे हुए थे. पार्वती जी को विचारमग्न देखकर शिवजी ने प्रश्न किया कि आप क्या सोच रही है ? तब पार्वतीजी ने कहा “क्या कोई ऐसा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत व पूजन विधि है जिसको करने से मृत्युलोक के प्राणी आपके धाम को सहज ही प्राप्त कर सके ?” इसी सिलसिले में शिव जी ने उन्हें यह महाशिवरात्रि व्रत की पवित्र कथा सुनाई –

महाशिवरात्रि व्रत कथा का प्रसंग – प्रत्याना नामक स्थान पर एक शिकारी रहता था. वह जीवों को मारकर या जीवित बेचकर अपने कुटुम्ब का भरण – पोषण करता था. उसने नगर के एक साहूकार से कुछ धन उधार लिया था. लेकिन उचित समय पर धन न लौटा सकने के कारण साहूकार ने शिकारी को एक शिव मठ में कैद कर दिया. संयोग से उस दिन फाल्गुन मास की त्रयोदशी थी. उस दिन वहाँ रातभर शिव जी की पूजा – अर्चना तथा महाशिवरात्रि की कथा हो रही थी. शिकारी ध्यानमग्र होकर व्रत कथा सुनता रहा.  दुसरें दिन चतुर्दशी था. उस दिन भी शिकारी ने कथा को सुना. संध्या होने पर साहूकार ने शिकारी को अपने पास बुलाया और इस शर्त पर छोड़ दिया कि वह उसके पैसे जल्द से जल्द लौटा देगा.

रात काफी हो चली थी और शिकारी ने पुरे दिन से कुछ नहीं खाया – पीया था. लेकिन वह अपनी दिनचर्या की भांति शिकार पर निकल पड़ा. उसने नदी के तीर पर बैठकर शिकार करने के बारे में सोचा क्योंकि वहां रात्रि में जानवर पानी पीने के लिए आते थे. उसने नदी के किनारे एक बेलपत्र के पेड़ पर अपनी मचान बनाई. उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था जो कि विल्वपत्रों से ढका हुआ था जिसके कारण शिकारी की नजर शिवलिंग पर नहीं पड़ी. पेड़ पर छिपकर शिकार करने के लिए पड़ाव बनाते वक्त उसने जो टहनियां तोड़ी, संयोग से वे शिवलिंग पर गिरि.  भूख – प्यास से व्याकुल तो वह पहले से ही था. इससे जाने अनजाने उसने पूजा भी कर ली और महाशिवरात्रि व्रत भी कर लिया.

एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भवती हिरणी नदी पर पानी पीने के लिए पहुंची. शिकारी ने जैसे ही धनुष पर तीर चढ़ाकर प्रत्यंचा खींची, हिरणी कातर स्वर में गुहार करने लगी कि ‘मैं  गर्भवती हूँ और जल्द ही प्रसव करूंगी. तुम मेरे साथ – साथ मेरे बच्चें की हत्या मत करों. मुझें थोड़ा वक्त दो, मैं बच्चें को जन्म देकर तुम्हारें समकक्ष खुद ही प्रस्तुत हो जाऊँगी.’ शिकारी ने अपनी प्रत्यंचा ढ़ीली कर दी और हिरणी वहाँ से चली गई.

दूसरें पहर रात्रि बीत जाने पर एक दूसरी हिरणी आई. शिकारी उसे देखकर बहुत प्रसन्न हुआ और जैसे ही हिरणी नदी के समीप पहुंची उसने एक बार फिर धनुष पर बाड़ चढ़ाया. उसे देख हिरणी विनम्रतापूर्वक निवेदन करने लगी | ‘मेरा विवाह अभी – अभी हुआ है और मैं अपने पति के पास नहीं गई हूँ. मैं एक कामातुर हिरणी हूँ. मुझें अभी अभी जाने दीजिए. अपने प्रिय से मिलकर मैं स्वयं ही आ जाऊँगी.’ शिकारी ने उसे भी छोड़ दिया. लेकिन शिकारी को अब चिंता होने लगी. रात्रि के दो पहर बीत चुके थे लेकिन उसे अभी तक कोई जानवर नहीं मिल पाया था.

तीसरे पहर में फिर एक हिरणी अपने बच्चे के साथ आई. इस बार शिकारी ने धनुष पर बाड़ चढ़ाने में तनिक भी देर नहीं लगाई. हिरणी प्रार्थना करने लगी “ हे शिकारी ! मेरे बच्चे अभी बहुत छोटे है. मुझें अभी जाने दीजिए. मैं इन बच्चों को इनके पिता को सौप कर स्वयं ही आपके पास आ जाऊँगी.” हिरणी का दीन स्वर सुन कर शिकारी ने उसे भी जाने दिया.

Loading...

चौथे पहर बीतने को था. शिकारी अपने मन में ठान लिया इस बार जो भी आए वह उसे छोड़ेगा नहीं. कुछ ही देर बाद एक हृष्ट – पुष्ट हिरण आया. बिना किसी विलम्ब के शिकारी ने अपनी प्रत्यंचा हिरण पर तान दी. यह देख हिरण विनीत स्वर में बोला “हे पारधी ! क्या आपने मुझसे पूर्व आने वाली तीनों हिरनियों व उनके छोटे – छोटे बच्चों को मार डाला है ? अगर ऐसा है तो मुझें भी मारने में विलम्ब ना करों. अगर मैं जीवित रहा तो भी उनके वियोग में मर जाऊंगा. मैं उनका पति हूँ. अगर तुमने उनकी हत्या नहीं की है तो मुझें भी कुछ क्षण का जीवन दान में दे दो. मैं उन्हें सकुशल देखकर तुम्हारें समकक्ष स्वयं प्रस्तुत हो जाऊंगा.”

हिरण की बात सुनकर शिकारी ने दया कर के उसे भी छोड़ दिया. सुबह जब शिकारी पेड़ से निचे उतरने लगा तो कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर और गिर गए. इस पुरे घटनाक्रम से शिकारी का ह्रदय एकदम पवित्र और निर्मल हो गया. भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से उसका ह्रदय इतना कोमल हो गया कि वह अपने पुराने कर्मो को याद करके पछताने लगा. तब तक हिरण और तीनों हिरणी अपने वचन के अनुसार वहां आ गए. उन्हें अपने वचन का पालन करते देख उसका ह्रदय कोमलता से भर उठा और वह फूट फूट कर रोने लगा. भगवान शंकर ने यह देखकर सभी को मोक्ष प्रदान कर दिया.

इस तरह महाशिवरात्रि व्रत कथा की गाथा और महिमा निराली है.  मोक्ष की भावना से ही भक्त इस महाशिवरात्रि व्रत को रखते है. पुराणों और शास्त्रों के अनुसार जो मनुष्य महाशिवरात्रि व्रत कथा को सुनता है और विधि विधान से व्रत रखता है उसे आनंद और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा – Story Behind Mahashivratri in Hindi

महाशिवरात्रि के बारे में शास्त्रों में कहा गया है कि एक बार कैलास शिखर पर माता पार्वती ने भोलेनाथ से पूछा –

कर्मणा केन भगवन् व्रतेन तपसायि वा |

धर्मार्थ काममोक्षणां हेस्तुस्त्वं परितुष्यति ||

हे भगवन ! धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के हेतु तुम्हीं हो. साधकों की साधना से संतुष्ट हो, तुम्ही इन्हें प्रदान करते हो. अतएव ये जानने की इच्छा होती है कि किस कर्म या किस प्रकार की तपस्या से तुम प्रसन्न होते हो ? इसके उत्तर में प्रभु ने कहा –

फाल्गुने कृष्ण पक्षे या तिथि: स्याच्चतुर्दशी |

तस्यो या तामसी रात्रि: सोच्यते शिवरात्रिका ||

तत्रोपवासं कुर्वाण: प्रसादयति मां ध्रुवं |

तुष्यामी न तथा पुष्पैर्यथा तत्रोपवासत: ||

महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. चतुर्दशी तिथि को आश्रय कर जिस अंधकारमयी रजनी का उदय होता है, उसी को शिवरात्रि कहते हैं. उस दिन जो उपवास करता है, वह निश्चय ही मुझें संतुष्ट करता है. उस दिन उपवास करने से जैसा प्रसन्न होता हूँ, वैसा स्नान, वस्त्र, धूप और पुष्प के अर्पण से भी नहीं होता.

महाशिवरात्रि व्रत का महत्व : What is The Importance of Mahashivratri ?

महाशिवरात्रि के पुण्य क्षणों में सम्पूर्ण रीति से उपवास करते हुए महेश्वर महाकाल का पूजन भक्तों को उनका मनोवांछित फल देने वाला है. यह अपनी आत्मा को पुनीत करने का महाव्रत है. साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

ऐसी मान्यता है कि इस रात उर्जा की एक शक्तिशाली प्राकृतिक लहर बहती है. इसे भौतिक और अध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है इसलिए इस रात जागरण का विशेष महत्व है. जो लोग स्वेच्छा से सायुज्यता के लिए इस व्रत को करते हैं, वे निश्चय रूप से स्वर्ग को प्राप्त होते है.

महा शिवरात्रि की पूजा 2019 – Mahashivaratri Pooja Vidhi & Vrat Vidhi 2019 के इस भक्तिमय लेख के साथ हम चाहते है कि आप हमारे Facebook Page को जरुर like करे और  इस post को share करे. और हाँ हमारा free email subscription जरुर ले ताकि मैं अपने future posts सीधे आपके inbox में भेज सकूं.

Loading...
Copy

4 thoughts on “महा शिवरात्रि व्रत 2019 – Mahashivaratri Vrat Vidhi 2019 in hindi…-Khayalrakhe.com”

  1. बहुत सुंदर है आज आपके बताए गए ज्ञान से कृत कृत्य हूं
    बहुत बहुत आभार

  2. बबिता जी,
    महाशिवरात्रि पर बहुत ही अच्छा लेख है । भगवान शिव सम्बन्धी अनेक जानकारी प्राप्त हुई ।

  3. अच्छी जानकारी महाशिवरातिृय पर
    “हर हर महादेव ”
    बढ़िया पोस्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *