Mahashivratri Vrat Katha ka rahasya
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महाशिवरात्रि 2018 : Mahashivratri Pooja & Vrat Vidhi in Hindi

महाशिवरात्रि व्रत के नियम और महातम्य Mahashivratri Pooja & Vrat Vidhi in Hindi

मंगलकारी शिव से मिलन की रात्रि का पर्व

Maha shivratri in hindi
Mahashivratri in hindi

महाशिवरात्रि भारत देश का महान व प्रेरक पर्व है | इसका उद्देश्य हमारी चेतना जाग्रत करना है | देवाधिदेव महादेव की उपासना, व्रत एवं संकल्प के द्वारा आत्मबोध को पाना है |

महाशिवरात्रि बोधोत्सव है | आत्मचिंतन एवं आत्मनिरीक्षण का सुअवसर है | जीवन में श्रेष्ठ मंगलकारी व्रतों, संकल्पों तथा विचारों को दुहराने व अपनाने की महाशिवरात्रि प्रेरणा देती है | इसमें उपवास और उपासना करने वालों पर देवाधिदेव महाकाल की कृपा बरसती है | भगवान भूतभावन उस पर प्रसन्न होते हैं | सदाशिव – महामृत्युंजय उसका कल्याण करते हैं |

महाशिवरात्रि 2018 पूजा का अवसर : इस साल 13 फ़रवरी को मध्यरात्रि में 11 बजकर 35 मिनट से चतुर्थी तिथि लग रही है | जबकि 14 फरवरी को पूरे दिन और रात 12 बजकर 47 मिनट तक चतुर्दशी तिथि है | इसलिए इस बार महाशिवरात्रि 13 फ़रवरी और 14 फरवरी दो दिन मनाई जा रही है | जिन शहरों में 13 तारीख को निशीथ काल अधिक समय तक है वहां शास्त्रानुसार 13 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी और जहाँ स्थानीय रात्रिमान के अनुसार निशीथकाल अगले दिन रात 12 बजकर 47 मिनट पर समाप्त हो रहा है वहाँ 14 फरवरी को महाशिवरात्रि व्रत पूजा किया जा सकता है |

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पौराणिक कथा : What is The Story Behind Mahashivratri ?

महाशिवरात्रि के बारे में शास्त्रों में कहा गया है कि एक बार कैलास शिखर पर माता पार्वती ने भोलेनाथ से पूछा –

कर्मणा केन भगवन् व्रतेन तपसायि वा |

धर्मार्थ काममोक्षणां हेस्तुस्त्वं परितुष्यति ||

हे भगवन ! धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के हेतु तुम्हीं हो | साधकों की साधना से संतुष्ट हो, तुम्ही इन्हें प्रदान करते हो | अतएव ये जानने की इच्छा होती है कि किस कर्म या किस प्रकार की तपस्या से तुम प्रसन्न होते हो ? इसके उत्तर में प्रभु ने कहा –

फाल्गुने कृष्ण पक्षे या तिथि: स्याच्चतुर्दशी |

तस्यो या तामसी रात्रि: सोच्यते शिवरात्रिका ||

तत्रोपवासं कुर्वाण: प्रसादयति मां ध्रुवं |

तुष्यामी न तथा पुष्पैर्यथा तत्रोपवासत: ||

महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है | चतुर्दशी तिथि को आश्रय कर जिस अंधकारमयी रजनी का उदय होता है, उसी को शिवरात्रि कहते हैं | उस दिन जो उपवास करता है, वह निश्चय ही मुझें संतुष्ट करता है | उस दिन उपवास करने से जैसा प्रसन्न होता हूँ, वैसा स्नान, वस्त्र, धूप और पुष्प के अर्पण से भी नहीं होता |

महाशिवरात्रि में उपवास और पूजन करने की सरलतम विधि

शिवरात्रि के उपवास, अनुष्ठान में दो तत्वों का समावेश है | प्रथम वह है, जो उपवास के शब्द में ध्वनित होता है, आहारनिवृत्तिरूपवास: यानि कि आहार से निवृत्ति अथवा निराहार रहना ही उपवास है | यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि आहार का मतलब केवल भोजन नहीं | शास्त्रकार कहते हैं, अहियवे मनसा बुद्धया इन्द्रियैर्वा इति आहार: – मन, बुद्धि अथवा इंद्रियों के द्वारा जो बाहर से भीतर आहृत – संगृहित होता है, उसी का नाम आहार है |

इस निराहार रहने का मतलब यह हुआ कि हम न केवल भोजन का त्याग करें, बल्कि, कल्पना, भावना और विचारों से भी संसारिकता को भी छोड़ दें | सांसारिक विषय – वासना या प्रपंच के किसी भी स्पन्दन को अपनी अंतर्चेतना में प्रवेश न करने दें |

उपवास का दूसरा तत्व उसके धातुमूलक अर्थ से ध्वनित होता है | यह अर्थ है अपने अराध्य के समीप होना और यह समीपता हमें प्रभु के स्वरुप – चिंतन से ही मिल सकती है | भगवान् महाकाल के दिव्यस्वरूप के रहस्य पर ध्यान करने से मिल सकती है |

इस तरह महाशिवरात्रि में किए जाने वाले उपवास की सार्थकता तभी है, जब हम शरीर, मन, बुद्धि से किसी बाहरी और संसारी तत्व को न ग्रहण करते हुए प्रतिफल – प्रतिक्षण भगवान् महाकाल की महिमा का चिंतन करें |

चिंतन या पूजन के समय शुद्ध आसन पर बैठकर पहले आचमन करें | उसके बाद यज्ञोपवित धारण कर शरीर शुद्ध करें | तत्पश्चात आसन की शुद्धि करें | पूजा की सामग्री (बिल्वपत्र, अक्षत, नैवेद्ध, धूप, दीप, फल, फूल, पंचामृत, घी, वस्त्र) को यथास्थान रखकर रक्षादीप प्रज्ज्वलित करें |

उसके बाद स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:, स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदा:, स्वस्ति स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु इस स्वस्ति मंत्र का पाठ करें |

इसके बाद महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प कर भगवान गणेश और माता गौरी का स्मरण कर पूजन करें | फिर नन्दीश्वर, वीरभद्र, कार्तिकेय एवं सर्प का लघु पूजन करे |

इसके पश्चात् बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि शिवलिंग पर चढ़ाकर विधि विधान से पूजन करें | इसके बाद धुप दीप जलाये और आरती करे | पूजा संपन्न होने के पश्चात् दान जरुर दे | दान में फल, पान – नारियल रखें |

इसके बाद क्षमा याचना करें : आह्वानं ना जानामि, ना जानामि त्वार्चनम् पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यताम परमेश्वर: |

महाशिवरात्रि व्रत का महत्व : What is The Importance of Mahashivratri ?

महाशिवरात्रि के पुण्य क्षणों में सम्पूर्ण रीति से उपवास करते हुए महेश्वर महाकाल का पूजन भक्तों को उनका मनोवांछित फल देने वाला है | यह अपनी आत्मा को पुनीत करने का महाव्रत है | साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है |

ऐसी मान्यता है कि इस रात उर्जा की एक शक्तिशाली प्राकृतिक लहर बहती है | इसे भौतिक और अध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है इसलिए इस रात जागरण का विशेष महत्व है | जो लोग स्वेच्छा से सायुज्यता के लिए इस व्रत को करते हैं, वे निश्चय रूप से स्वर्ग को प्राप्त होते है |

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3 thoughts on “महाशिवरात्रि 2018 : Mahashivratri Pooja & Vrat Vidhi in Hindi”

  1. बबिता जी,
    महाशिवरात्रि पर बहुत ही अच्छा लेख है । भगवान शिव सम्बन्धी अनेक जानकारी प्राप्त हुई ।

  2. अच्छी जानकारी महाशिवरातिृय पर
    “हर हर महादेव ”
    बढ़िया पोस्ट

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