अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
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आधुनिक भारतीय नारी के तेजी से बढ़ते कदम – Essay on Women’s Day in Hindi

महिला के महत्व पर विशेष भाषण : Essay & Speech on International Women’s Day in Hindi

International Women’s Day in Hindi
International Women’s Day in Hindi

इस सभागार में उपस्थित सभी महामहिमों और मेरे दोस्तों को शुभ प्रभात | जैसा कि आज हम सब इस मंच पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के उपलक्ष्य में एकत्रित हुए है | यह दिवस दशकों से नारी को सृजन की शक्ति मानकर पूरे विश्व में 8 मार्च को महिलाओं के सम्मान के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है | इतिहास के पन्ने पलटकर देखे तो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पीछे की गाथा नारी सामर्थ्य को सम्मानित करने को बहुत प्रेरित करती है और यह दिन हर नारी के लिए कितना महत्वपूर्ण दिन है ये जनजागरूकता लाती है |

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास Women’s Day in Hindi 

सबसे पहले महिला दिवस की ठोस पहल अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वाहन पर 28 फरवरी 1909 में किया गया था और उस समय इस उत्सव के मनाए जाने के पीछे महिलाओं को वोट देने का अधिकार हासिल करना था, क्योंकि तत्कालीन परिस्थियों में अधिकांश देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था | यह अधिकार दिलाने के उद्देश्य से उन्हें 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में महिला दिवस को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया |

इस उत्सव की महत्ता तब और बढ़ गई जब रूस की महिलाओं ने 1997 में रोटी और कपड़े के लिए वहां की सरकार के खिलाफ़ आन्दोलन छेड़ दिया | जब यह आन्दोलन शुरू हुआ था तो उस समय वहां जुलियन कैलेण्डर के मुताबिक रविवार 23 फ़रवरी का दिन था जबकि दुनिया के बाकि के देशों में ग्रेगेरियन कैलेण्डर का प्रयोग किया जाता था जिसके अनुसार 8 मार्च का दिन था | कहना अतिशयोक्ति न होगा कि इस आन्दोलन ने महिलाओं की प्रतिभा व सामर्थ्य को मजबूती देने के क्रम में वैश्विक स्तर पर इंटरनेशनल विमेंस डे जैसे आन्दोल्लास एवं हर्षोल्लास के पर्व की परिणित की |

तब से हर साल 8 मार्च को विश्व मंच पर प्रत्येक महिला के सम्मान में महिला दिवस का उत्सव मनाने की व्यवस्था के परिणाम स्वरुप दुनिया की आधी आबादी को समुचित भागीदारी मिलने से निःसंदेह जनतंत्र को एक नयी ताकत और नयी दिशा मिली है | विश्व के इतिहास में सम्भवत: महिला विमर्श का यह पहली सशक्त वैश्विक दशक था | हमारे लिए यह परम गौरव की बात है, इस प्रकार के उत्सव सचमुच हमें याद दिलाते है कि “इक्कीसवीं सदी है नारी सदी | इस सदी में महिला की स्थिति समाज में न केवल सम्मानजनक होगी वरन वे अपने वर्चस्व को भी स्थापित करेंगी |”

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नारीयों ने सदियों से भारी विरोध और विपरीत परिस्थियों का सामना करते हुए न केवल अपनी गरिमा की रक्षा की बल्कि अपने परिवार, समाज और राष्ट्र को भी एक नई पहचान दी है | महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आने लगी है | आज की नारी अब जाग्रत और सक्रिय हो चुकी है |

युगदृष्टा स्वामी विवेकानंद ने ठीक कहा है –

“नारी जब अपने ऊपर थोपी हुई बेड़ियों एवं कड़ियों को तोड़ने लगेगी तो विश्व की कोई शक्ति उसे नहीं रोक पायेगी |”

सच में इस सदी के एक दसक में नारी जिस तरह सशक्त हो रही है, उससे समाज परिचित है, लेकिन मूढ़ मान्यताएँ उसके विकास में बाधक बनती हैं | इसके बावजूद महिलाओं ने अपने जीवन के कठिन अवरोधों को पार कर विभिन्न क्षेत्रों में उन्नति के शिखरों को छुआ है |

आधुनिक भारतीय नारियों ने भी सशक्तिकरण की ओर अपने कदम बढ़ाने शुरू कर दिए है तानिजतन इनकी प्रतिभा व सामर्थ्य को अब सभी स्वीकार कर रहे हैं और यथोचित पद उन्हें दिए जा रहे हैं, जिसकी वे हमेशा से हकदार रही हैं | इसका उदाहरण भारतीय मूल की पारित शाह है जिन्हें अमेरिकी वाणिज्य विभाग में सार्वजनिक मामलों का उपनिदेशक नियुक्त किया गया है | सुप्रीम कोर्ट में पहली बार एक साथ दो महिला न्यायाधीश बनाई गई |

International Women’s Day in Hindi
International Women’s Day in Hindi

खेल जगत में भी भारतीय मूल की महिलाएं आशचर्यजनक रूप से अपना कीर्तिमान स्थापित करके दुनिया को चकित कर रही है | मेरी कॉम, गीता फोगाट, पीवी सिंधु, सानिया मिर्जा, सायना नेहवाल, साक्षी मालिक, मिताली राज आदि जैसी महिलाएँ खेल जगत की गौरवपूर्ण पहचान है तो प्रियंका चोपड़ा, एश्वर्याराय, सुष्मिता सेन, लारा दत्ता, मानुषी छिल्लर आदि महिलाओं ने सौन्दर्य प्रतियोगिता जीतकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रौशन किया |

प्रथम आइपीएस अधिकारी किरण वेदी ने कठोर प्रशासकीय दायित्वों का सकुशल निर्वहन करके, मदर टरेसा ने अनाथों को गले लगा करके, इंदिरा प्रियदर्शनी ने देश को कुशल नेतृत्व प्रदान करके तो कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स ने आकाश की उचाईयों को छूकर नारी सामर्थ्य का अभिनव परिचय प्रस्तुत किया जो सभी के लिए आदर्श स्वरुप है |

इसमें अब कोई दो राय नहीं कि महिलाएं सम्मान के लिए अपनी सामर्थ्य को पहचानने लगी हैं और अपनी क्षमताओं का भरपूर उपयोग कर रही हैं, इस कारण वे सफलता के ऐसे कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं, जिनके बारे में कभी सोचा नहीं गया था |

आज भारत के कोने – कोने में रहने वाली महिलाओं के अंदर छिपी हुई प्रतिभाएं उभर – उभर कर समाज के सामने आ रही है और समाज भी उनकी महत्ता को स्वीकारने के लिए विवश हो रहा है | लेकिन यहाँ हम इस कटु सत्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि महिलाओं को आज भी पुरुषों की तुलना में कम मजदूरी मिलती है | यही नहीं सूदूर गांवों में उनका शारीरिक शोषण भी आम बात है | इसका भी काफी हद तक समाधान हो सकता है अगर महिलायें खुद आगे बढ़कर आये | महिला दिवस की सफलता की पहली शर्त जहाँ मूलत: महिलाओं के सर्वोतोमुखी विकास में निहित है, वही दूसरी शर्त के बतौर हमें यह कहने में भी लेशमात्र हिचक नहीं है कि पुरुष मानसिकता में आमूलचूक बदलाव आए और वह इस वास्तविकता को जाने कि घर के कामकाज के साथ जब महिलाये अन्य महत्वपूर्ण और चुनौती भरे क्षेत्रों में भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है, तो फिर महिलाओं की क्षमता पर सवाल और बवाल क्यों ?

अधिकांश परंपरागत लोगों को अब भी लगता है कि महिलाओं को घर के कामों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए और कार्य के लिए कदम नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि ये उनका कार्य क्षेत्र नहीं है | उनको ये ज्ञात होना चाहिए कि महिलाओं को आज भी समान क्षमता प्राप्त है, वे भरोसेमंद और मूल्यवान हैं | आज की महिलाएं अपनी ताकत और क्षमताओं का लोहा हर क्षेत्र में मनवा रही हैं और समाज और विश्व में फलस्वरूप योगदान करने के लिए बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं | उनमें अपरिमित शक्ति और क्षमताएँ विद्यमान है और सबसे बड़ी बात स्त्री सृजन की शक्ति है | इस दृष्टि से भी महिलाओं का सशक्तीकरण बहुत जरूरी है क्योंकि उन समाजों का अच्छी तरह से विकास होता है जहां महिलाओं को समान सम्मान दिया जाता है और इन्हें मजबूर नहीं किया जाता है।

महिला दिवस इन महान महिलाओं के व्यक्तिव एवं कृतित्व के बारे में प्रत्येक व्यक्ति को याद दिलाने और विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा अन्य स्थानों में इसके महत्व को बताने का सबसे मजबूत बुनियादी तरीकों में से एक है | वास्तव में महिलाओं के लिए यह एक खास दिन है, जहां वे सम्मानित और सराहनीय होती हैं |

ये एक ऐसी घटना जो एक राजनीतिक संबंध के रूप में शुरू हुई है, जो वर्षों से विकसित हुई है और अब महिलाओं को सम्मान देने के रूप में मनाई जा रही है | इस अवसर पर हमें इन्हें फूल, ग्रीटिंग कार्ड और ज्यादातर क्षेत्रों में उपहार देकर सम्मानित करने के साथ एक बेहतर दुनिया का निर्माण करने का प्रयास करना चाहिए जहां पुरुष और महिला सामंजस्यपूर्ण, हिंसा और भेदभाव से मुक्त रहते हैं |

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4 thoughts on “आधुनिक भारतीय नारी के तेजी से बढ़ते कदम – Essay on Women’s Day in Hindi”

  1. Read your post, find it really useful and informative on this Women’s Day. Happy Women’s Day to all women who have played a great role to make our life easier as a mom, a wife, a sister.

  2. Good Post महिलाओं का सशक्तिकरण बहुत ज़रूरी है ,आपने सही लिखा है बबिता जी ,जिस देश व समाज मे महिलाओं को समान सम्मान दिया जाता है ,वह समाज अच्छी तरह विकास करता है,पोस्ट के लिए धन्यवाद बबिता जी,

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