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स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन एवं सुविचार | Swami Vivekananda Thoughts In Hindi – Swami Vivekananda Ke Vichar

स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन एवं सुविचार – Quotes Suvichar & Thought of Swami Vivekananda on Inspiration & Success for Students in Hindi

Hindi Thoughts of Swami Vivekananda
Hindi Thoughts of Swami Vivekananda

स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध महान अनमोल विचार, वचन, उद्धरण (Quotes) एवं सुविचार – Best Inspirational Quotes & Thoughts of Swami Vivekananda in Hindi

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“ जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है।”

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“उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो।”

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“ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है!”

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“कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है। अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।”

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“किसी की निंदा ना करें: अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।”

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“अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है।”

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“एक शब्द में, यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो।”

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“उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये।”

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“उस व्यक्ति ने अमरत्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता।”

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“हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं। विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।”

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“जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते।”

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“सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।”

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“विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।”

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“इस दुनिया में सभी भेद-भाव किसी स्तर के हैं, ना कि प्रकार के, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य है।”

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“हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा, और परमात्मा उसमे बसेंगे।”

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“बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप है।”

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“भगवान् की एक परम प्रिय के रूप में पूजा की जानी चाहिए, इस या अगले जीवन की सभी चीजों से बढ़कर।”

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“यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।”

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“एक विचार लो. उस विचार को अपना जीवन बना लो ; उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो. यही सफल होने का तरीका है।”

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“मैं उस भगवान या धर्म को नहीं मानता जो विधवाओं के आँसू न पोंछ सकता है और अनाथों के मुँह में न ही एक टुकड़ा रोटी पहुँचा सकता है। किसी के धर्म-सिद्धांत कितने ही ऊँचे और उसका दर्शन कितना ही सुगठित क्यों न हो, जब तक वह कुछ ग्रंथों और मतों तक सीमित है, मैं उसे नहीं मानता। हमारी आँखें सामने हैं, पीछे नहीं।”

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“संसार जब तारीफ करने लगता है, तब एक अत्यंत कायर भी बहादुर बन जाता है। समाज के समर्थन तथा प्रशंसा से एक मूर्ख भी वीरोचित कार्य कर सकता है। परंतु अपने आस-पास के लोगों की निंदा स्तुति की बिलकुल परवाह न करते हुए सर्वदा सत्कार्य में लगे रहना वास्तव में सबसे बड़ा त्याग है।”

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“शक्ति और विश्वास के साथ लगे रहो। सत्यनिष्ठा, पवित्र और निर्मल रहो तथा आपस में न लड़ो। हमारी जाति का रोग ईर्ष्या ही हैं।”

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“जब हमें यह ज्ञात हो जाएगा कि संसार कुत्ते की टेढ़ी दुम की तरह हैं और कभी भी सीधा नहीं हो सकता, तब हम दुराग्रही नहीं होंगे।”

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“संसार का इतिहास उन थोड़े व्यक्तियों का इतिहास है, जिन में आत्मविश्वास था। यह विश्वास अन्त:स्थिति देवत्व को जगाकर प्रकट कर देता है। तब व्यक्ति कुछ भी कर सकता है, सर्व-समर्थ हो जाता है। असफलता तभी होती है जब तुम अन्त:स्थिति इस अमोघ शक्ति को अभिव्यक्त करने का पूर्ण प्रयत्न नहीं करते।”

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“लोग कहते है – इस पर विश्वास करो, उस पर विश्वास करो; मैं कहता हूँ – पहले अपने आप पर विश्वास करो। सब शक्ति तुम में है – इसकी धारणा करो और इस शक्ति को जगाओ – कहो हम सब कुछ कर सकते है।”

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“पहले अपनी स्त्रियों को शिक्षा दो और उन्हें उनकी स्थिति पर छोड़ दो, तब वे तुमसे बताएँगी कि उनके लिए क्या सुधार आवश्यक हैं। उनके मामले में बोलने वाले तुम कौन हो ?”

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“कभी ‘नहीं’ मत कहना, यह न कहना कि ‘मै नहीं कर सकता’, क्योंकि तुम अनन्तस्वरुप हो। तुम्हारे स्वरूप की तुलना में देश-काल भी कुछ नहीं है। तुम सबकुछ कर सकते हो, तुम सर्वशक्तिमान हो।”

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“उठो, जागो और जब तक तुम अपने अंतिम ध्येय तक नहीं पहुँच जाते तब तक चैन न लो।”

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“सफलता प्राप्त करने के लिए अटल धैर्य और दृढ़ इच्छा चाहिए। धीर और वीर व्यक्ति कहता है, “मैं समुद्र पी जाउँगा, मेरी इच्छा से पर्वत टुकड़े टुकड़े हो जाएँगे।” इस प्रकार का साहस और इच्छा रखो, कड़ा परिश्रम करो, तुम अपने उद्देश्य में निश्चित सफल हो जाओगे।”

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“एक आउंस काम बीस हजार टन बड़बोलेपन के बराबर है।”

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“प्रत्येक सफल मनुष्य के स्वभाव में कही-न-कही एक विशाल ईमानदारी और सच्चाई छिपी रहती है, और उसी के कारण उसे जीवन में इतनी सफलता मिलती है। वह सम्पूर्ण रूप से स्वार्थहीन होता तो उसकी सफलता वैसी ही महान होती, जैसी बुद्ध या ईसा की।”

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“यदि तुम नेता बनना चाहते हो तो सबके दास बनो। यह सच्चा रहस्य है। यदि तुम्हारें वचन कठोर भी होंगे, तब भी तुम्हारा प्रेम स्वत: जान पड़ेगा। मनुष्य प्रेम को पहचानता है, चाहे वह किसी भी भाषा में प्रकट हो।”

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“एक शब्द में, यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो।”

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खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है ।”

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“खाने में, पहनने में, या लेटने में, गाने में, या खेलने में, मौज में, या बीमारी में, हमेशा उच्चतम स्तर का नैतिक साहस दिखाओ। तुम अगर ऐसे आदर्श की नींव पर अपना चरित्र निर्माण कर सको, तो हजारों दूसरे लोग तुम्हारे पीछे-पीछे चलने लगेंगे।”

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“करुणावश दूसरों की भलाई करना अवश्य अच्छा हैं, पर ‘शिवज्ञान’ से ‘जीवसेवा’ सब से उत्तम है।”

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“उपहास, विरोध और स्वीकृति हर बड़े काम को इन तीन अवस्थाओं से गुजरना होता हैं।”

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“यदि तुम हजार बार भी असफल हो तो एक बार फिर सफल होने का प्रयत्न करों। असफलता तो जीवन का सौन्दर्य है।”

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”“प्रयत्न करते रहो, जब तुम्हें अपने चारों ओर अंधकार-ही-अंधकार दिखता हो, तब भी मैं कहता हूँ कि प्रयत्न करते रहो। तुम्हें तुम्हारा लक्ष्य ही मिलेगा।”

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“शक्ति ही जीवन है और दुर्बलता ही मृत्यु है। शक्ति अनंत सुख है, चिरंतन और शाश्वत जीवन है। यह अटल सत्य हैं।”

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“यदि मैं एक मिट्टी के ढ़ेले को पूर्णतया जान लूँ, तो सारी मिट्टी को जान लूँगा। यह है सिद्धांतों का ज्ञान, लेकिन उनका समायोजन अलग – अलग होता है। जब तुम स्वयं को जान लोगे, तो सब कुछ जान लोगे।”

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“एक पक्ष कहता है, विचार जड़ वस्तु से उत्पन्न होता है, दूसरा पक्ष कहता है, जड़ वस्तु विचार से। दोनों कथन गलत हैं। जड़ वस्तु और विचार, दोनों का सह – अस्तित्व है | वह कोई तीसरी ही वस्तु है, जिससे विचार और जड़ वस्तु दोनों उत्पन्न होते है।”

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“स्वतंत्रता का निश्चय ही यह अर्थ नहीं है कि जब मैं और आप किसी की सम्पत्ति को हड़पना चाहें तो हमें ऐसा करने से रोका न जाय।”

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“वह धर्म नहीं है जो धर्म ह्रदय में शक्ति का संचार नहीं करता।”

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“ईश्वर के सम्बन्ध में हमारी धारणा हमारी अपनी प्रतिच्छाया है।”

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“प्रत्येक विकास के पहले एक अंतर भाव रहता है, प्रत्येक व्यक्त दशा के पहले उसकी अव्यक्त दशा रहती है। मनुष्य इस श्रृंखला की एक कड़ी है।”

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“मनुष्य की आत्मा कार्यकरण नियम से परे होने के कारण सम्मिश्रण नहीं है, किसी कारण का परिणाम नहीं है, अतएव वह नित्य मुक्त है और नियम के भीतर जो कुछ सीमित है उस सब का शासनकर्ता है। चूंकि वह सम्मिश्रण नहीं है इसलिए उसकी मृत्यु कभी न होगी। जब आत्मा की मृत्यु नहीं हो सकती तो उसका जन्म भी नहीं हो सकता क्योंकि जीवन और मृत्यु एक ही वस्तु की दो विभिन्न अभिव्यक्तियां है। अतएव आत्मा जन्म और मृत्यु से परे है।”

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“जगत यथार्थ और आभास का, निश्चय और भ्रम का, अपरिभाषेय मिश्रण है।”

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“मनुष्य का अंतिम ध्येय सुख नहीं वरन ज्ञान है, क्योंकि सुख और आनंद का तो एक – न – एक दिन अंत हो ही जाता है, अत: यह मान लेना कि सुख ही परम लक्ष्य है, मनुष्य की भारी भूल है !”

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“सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।”

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 “आप सबके सामने जो संसार में उत्पन्न हुए हैं, भले ही हाथ जोड़ते फिरे, पर आपकी सहायता कौन करने आवेगा ? अपनी सहायता आप करो।”

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“हम जितने शान्तचित्त होंगे और हमारे स्नायु जितने संतुलित रहेंगे, हम जितने ही अधिक प्रेम-सम्पन्न होंगे – हमारा कार्य भी उतना ही अधिक उत्तम होगा।”

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“हमें अनन्त शक्ति, अनन्त उत्साह, अनन्त साहस तथा अनन्त धैर्य चाहिए। केवल तभी महान कार्य सम्पन्न होंगे।”

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 “तुम विश्व से अलग हो, जब तुम अपने आप को शरीर समझते हो, तुम अनंत अग्नि के एक स्फुलिंग हो, जब तुम अपने आप को जीव समझते हो, तभी तुम विश्व हो , जब तुम अपने आप को आत्मस्वरूप मानते हो।”

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“तुम बच्चे को सिखा नहीं सकते जैसे की तुम पौधे को उगा नहीं सकते। जो कुछ तुम कर सकते हो, वह केवल नकारात्मक पक्ष में है – तुम केवल सहायता दे सकते हो। वह तो एक आतंरिक अभिव्यंजना है, वह अपना स्वभाव स्वयं विकसित करता है – तुम केवल बाधाओं को दूर कर सकते हो।”

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 “भय दुर्बलता का चिन्ह है।”

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“महान कर्म महान त्याग से ही सम्पन्न हो सकते है।”

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 “जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी।”

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“हर किसी को अपने भीतर से ही विकास करना होता है। इसे कोई सीखा नहीं सकता, कोई अध्यात्मिक नहीं बना सकता। जो कोई सिखाने वाला है वह अंतरात्मा ही है।”

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“आलसी होने पर कुछ भी आसान नहीं होता लेकिन जब आप व्यस्त होते है तो सबकुछ आसान लगता है।”

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“बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं ।”

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“एक विचार ले; उसी विचार को अपना जीवन बनाओ – उसी का चिन्तन करो, उसी का स्वप्न देखो और उसी में जीवन बिताओ। तुम्हारा मस्तिष्क, स्नायु, शरीर के सर्वांग उसी विचार से पूर्ण रहें। दूसरे समस्त विचारों को त्याग दो। यही सिद्ध होने का उपाय है; और इसी प्रकार महान आध्यात्मिक व्यक्तित्व उत्पन्न हुए हैं।”

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“मंदिर में भोग लगाना पुण्य नहीं पाप है, जब पडोसी भूखा मरता है।”

स्वामी विवेकानंद

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 “ज्ञान प्राप्त करों, ज्ञान से ही अंधकार नाश होगा।”

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“ज्यों ज्यों काल बीतता है, सत्य की जड़ दृढ़ होती जाती है।”

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“शरीरिक, बौद्धिक और अध्यात्मिक रूप से जो कुछ भी कमजोर बनाता है उसे जहर की तरह त्याग दो।”

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Babita Singh
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