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स्वामी विवेकानंद के 71 अनमोल विचार/उद्धरण। Swami Vivekananda Quotes in Hindi

71 स्वामी विवेकानंद उद्धरण और अनमोल विचार – Swami Vivekananda Quotes & Thoughts in Hindi

Swami Vivekananda Quotes in Hindi : स्वामी विवेकानंद एक ऐसे युवा सन्यासी थे, जिसने दुनिया को बतलाया कि इस धरती पर एक देश भारत है और जिसकी अपनी एक महान संस्कृति हैं। अमेरिका में हुए धर्म-सम्मेलन को संबोधित करते हुए अपने यह विचार स्वामी विवेकानंद ने व्यक्त किये थे। इस सभा में स्वामी जी ने अपने विचारों की शक्ति के बल पर दुनिया की सोच बदल दी थी। स्वामी विवेकानंद ने केवल उनतालीस वर्ष के अल्प जीवन में अपने विचार और काम की शुद्धता और सरलता से जैसा कर दिखाया, ऐसे सन्यासी द्वारा कहे अनमोल विचार खास आपके लिए इस आर्टिकल में लिखे गये है। मुझे पूर्ण विश्वास हैं कि Swami Vivekananda Quotes in Hindi विवेकानंद के बेस्ट विचार को अपनाकर कोई भी युवा, छात्र या व्यक्ति बुलंदियों को छू सकता है।

Swami Vivekananda Quotes in Hindi
Swami Vivekananda Quotes in Hindi

स्वामी विवेकानंद उद्धरण एवं अनमोल वचन

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“As different streams having different sources all mingle their waters in the sea, so different tendencies, various though they appear, crooked or straight, all lead to God.”

“जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है।”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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“Come up, O lions, and shake off the delusion that you are sheep; you are souls immortal, spirits free, blessed and eternal; ye are not matter, ye are not bodies; matter is your servant, not you the servant of matter.”

“उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो।”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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“All the powers in the universe are already ours. It is we who have put our hands before our eyes and cry that it is dark.”

“ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है!”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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“Never think there is anything impossible for the soul. It is the greatest heresy to think so. If there is sin, this is the only sin; to say that you are weak, or others are weak.”

“कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है। अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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“Condemn none: if you can stretch out a helping hand, do so. If you cannot, fold your hands, bless your brothers, and let them go their own way.”

“किसी की निंदा ना करें: अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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“If money help a man to do good to others, it is of some value; but if not, it is simply a mass of evil, and the sooner it is got rid of, the better.”

“अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है।”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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“In one word, this ideal is that you are divine.”

“एक शब्द में, यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो।”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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“Arise, awake and stop not till the goal is reached.”

“उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये।”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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“That man has reached immortality who is disturbed by nothing material.”

“उस व्यक्ति ने अमरत्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता।”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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“We are what our thoughts have made us; so take care about what you think. Words are secondary. Thoughts live; they travel far.”

“हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं। विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।”

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद

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You cannot believe in God until you believe in yourself.

जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते।

Swami Vivekananda ; स्वामी विवेकानंद

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Truth can be stated in a thousand different ways, yet each one can be true.

सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।

Swami Vivekananda ; स्वामी विवेकानंद

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The world is the great gymnasium where we come to make ourselves strong.

विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।

Swami Vivekananda ; स्वामी विवेकानंद

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All differences in this world are of degree, and not of kind, because oneness is the secret of everything.

इस दुनिया में सभी भेद-भाव किसी स्तर के हैं, ना कि प्रकार के, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य है।

Swami Vivekananda ; स्वामी विवेकानंद

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The more we come out and do good to others, the more our hearts will be purified, and God will be in them.

हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा, और परमात्मा उसमे बसेंगे।

Swami Vivekananda ; स्वामी विवेकानंद

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External nature is only internal nature writ large.

बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप है।

Swami Vivekananda ; स्वामी विवेकानंद

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GOD is to be worshipped as the one beloved, dearer than everything in this and next life.

भगवान् की एक परम प्रिय के रूप में पूजा की जानी चाहिए, इस या अगले जीवन की सभी चीजों से बढ़कर।

Swami Vivekananda ; स्वामी विवेकानंद

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If faith in ourselves had been more extensively taught and practiced, I am sure a very large portion of the evils and miseries that we have would have vanished.

यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।

Swami Vivekananda ; स्वामी विवेकानंद

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Take up one idea. Make that one idea your life ; think of it, dream of it, live on that idea. Let the brain, muscles, nerves, every part of your body, be full of that idea, and just leave every other idea alone. This is the way to success.

एक विचार लो. उस विचार को अपना जीवन बना लो ; उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो. यही सफल होने का तरीका है।

Swami Vivekananda ; स्वामी विवेकानंद

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“मैं उस भगवान या धर्म को नहीं मानता जो विधवाओं के आँसू न पोंछ सकता है और अनाथों के मुँह में न ही एक टुकड़ा रोटी पहुँचा सकता है। किसी के धर्म-सिद्धांत कितने ही ऊँचे और उसका दर्शन कितना ही सुगठित क्यों न हो, जब तक वह कुछ ग्रंथों और मतों तक सीमित है, मैं उसे नहीं मानता। हमारी आँखें सामने हैं, पीछे नहीं।”

स्वामी विवेकानंद

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“संसार जब तारीफ करने लगता है, तब एक अत्यंत कायर भी बहादुर बन जाता है। समाज के समर्थन तथा प्रशंसा से एक मूर्ख भी वीरोचित कार्य कर सकता है। परंतु अपने आस-पास के लोगों की निंदा स्तुति की बिलकुल परवाह न करते हुए सर्वदा सत्कार्य में लगे रहना वास्तव में सबसे बड़ा त्याग है।”

स्वामी विवेकानंद

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शक्ति और विश्वास के साथ लगे रहो। सत्यनिष्ठा, पवित्र और निर्मल रहो तथा आपस में न लड़ो। हमारी जाति का रोग ईर्ष्या ही हैं।

स्वामी विवेकानंद

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जब हमें यह ज्ञात हो जाएगा कि संसार कुत्ते की टेढ़ी दुम की तरह हैं और कभी भी सीधा नहीं हो सकता, तब हम दुराग्रही नहीं होंगे।

स्वामी विवेकानंद

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“संसार का इतिहास उन थोड़े व्यक्तियों का इतिहास है, जिन में आत्मविश्वास था। यह विश्वास अन्त:स्थिति देवत्व को जगाकर प्रकट कर देता है। तब व्यक्ति कुछ भी कर सकता है, सर्व-समर्थ हो जाता है। असफलता तभी होती है जब तुम अन्त:स्थिति इस अमोघ शक्ति को अभिव्यक्त करने का पूर्ण प्रयत्न नहीं करते।”

स्वमी विवेकानंद

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“लोग कहते है – इस पर विश्वास करो, उस पर विश्वास करो; मैं कहता हूँ – पहले अपने आप पर विश्वास करो। सब शक्ति तुम में है – इसकी धारणा करो और इस शक्ति को जगाओ – कहो हम सब कुछ कर सकते है।”

स्वामी विवेकानंद

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पहले अपनी स्त्रियों को शिक्षा दो और उन्हें उनकी स्थिति पर छोड़ दो, तब वे तुमसे बताएँगी कि उनके लिए क्या सुधार आवश्यक हैं। उनके मामले में बोलने वाले तुम कौन हो ?

स्वामी विवेकानंद

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“कभी ‘नहीं’ मत कहना, यह न कहना कि ‘मै नहीं कर सकता’, क्योंकि तुम अनन्तस्वरुप हो। तुम्हारे स्वरूप की तुलना में देश-काल भी कुछ नहीं है। तुम सबकुछ कर सकते हो, तुम सर्वशक्तिमान हो।”

स्वामी विवेकानंद

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“उठो, जागो और जब तक तुम अपने अंतिम ध्येय तक नहीं पहुँच जाते तब तक चैन न लो।”

स्वामी विवेकानंद

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सफलता प्राप्त करने के लिए अटल धैर्य और दृढ़ इच्छा चाहिए। धीर और वीर व्यक्ति कहता है, “मैं समुद्र पी जाउँगा, मेरी इच्छा से पर्वत टुकड़े टुकड़े हो जाएँगे।” इस प्रकार का साहस और इच्छा रखो, कड़ा परिश्रम करो, तुम अपने उद्देश्य में निश्चित सफल हो जाओगे।

स्वामी विवेकानंद

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“एक आउंस काम बीस हजार टन बड़बोलेपन के बराबर है।”

स्वामी विवेकानंद

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“प्रत्येक सफल मनुष्य के स्वभाव में कही-न-कही एक विशाल ईमानदारी और सच्चाई छिपी रहती है, और उसी के कारण उसे जीवन में इतनी सफलता मिलती है। वह सम्पूर्ण रूप से स्वार्थहीन होता तो उसकी सफलता वैसी ही महान होती, जैसी बुद्ध या ईसा की।”

स्वामी विवेकानंद

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“यदि तुम नेता बनना चाहते हो तो सबके दास बनो। यह सच्चा रहस्य है। यदि तुम्हारें वचन कठोर भी होंगे, तब भी तुम्हारा प्रेम स्वत: जान पड़ेगा। मनुष्य प्रेम को पहचानता है, चाहे वह किसी भी भाषा में प्रकट हो।”

स्वामी विवेकानंद

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“एक शब्द में, यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो।”

स्वामी विवेकानंद

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 “खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है

स्वामी विवेकानंद

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खाने में, पहनने में, या लेटने में, गाने में, या खेलने में, मौज में, या बीमारी में, हमेशा उच्चतम स्तर का नैतिक साहस दिखाओ। तुम अगर ऐसे आदर्श की नींव पर अपना चरित्र निर्माण कर सको, तो हजारों दूसरे लोग तुम्हारे पीछे-पीछे चलने लगेंगे।

स्वामी विवेकानंद

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करुणावश दूसरों की भलाई करना अवश्य अच्छा हैं, पर ‘शिवज्ञान’ से ‘जीवसेवा’ सब से उत्तम है।

स्वामी विवेकानंद

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“उपहास, विरोध और स्वीकृति हर बड़े काम को इन तीन अवस्थाओं से गुजरना होता हैं।”

स्वामी विवेकानंद

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“यदि तुम हजार बार भी असफल हो तो एक बार फिर सफल होने का प्रयत्न करों। असफलता तो जीवन का सौन्दर्य है।”

स्वामी विवेकानंद

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“प्रयत्न करते रहो, जब तुम्हें अपने चारों ओर अंधकार-ही-अंधकार दिखता हो, तब भी मैं कहता हूँ कि प्रयत्न करते रहो। तुम्हें तुम्हारा लक्ष्य ही मिलेगा।”

स्वामी विवेकानंद

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शक्ति ही जीवन है और दुर्बलता ही मृत्यु है। शक्ति अनंत सुख है, चिरंतन और शाश्वत जीवन है। यह अटल सत्य हैं।

स्वामी विवेकानंद

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“यदि मैं एक मिट्टी के ढ़ेले को पूर्णतया जान लूँ, तो सारी मिट्टी को जान लूँगा। यह है सिद्धांतों का ज्ञान, लेकिन उनका समायोजन अलग – अलग होता है। जब तुम स्वयं को जान लोगे, तो सब कुछ जान लोगे।”

स्वामी विवेकानंद

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“एक पक्ष कहता है, विचार जड़ वस्तु से उत्पन्न होता है, दूसरा पक्ष कहता है, जड़ वस्तु विचार से। दोनों कथन गलत हैं। जड़ वस्तु और विचार, दोनों का सह – अस्तित्व है | वह कोई तीसरी ही वस्तु है, जिससे विचार और जड़ वस्तु दोनों उत्पन्न होते है।”

स्वामी विवेकानंद

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“स्वतंत्रता का निश्चय ही यह अर्थ नहीं है कि जब मैं और आप किसी की सम्पत्ति को हड़पना चाहें तो हमें ऐसा करने से रोका न जाय।”

स्वामी विवेकानंद

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“वह धर्म नहीं है जो धर्म ह्रदय में शक्ति का संचार नहीं करता।”

स्वामी विवेकानंद

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“ईश्वर के सम्बन्ध में हमारी धारणा हमारी अपनी प्रतिच्छाया है।”

स्वामी विवेकानंद

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“प्रत्येक विकास के पहले एक अंतर भाव रहता है, प्रत्येक व्यक्त दशा के पहले उसकी अव्यक्त दशा रहती है। मनुष्य इस श्रृंखला की एक कड़ी है।”

स्वामी विवेकानंद

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“मनुष्य की आत्मा कार्यकरण नियम से परे होने के कारण सम्मिश्रण नहीं है, किसी कारण का परिणाम नहीं है, अतएव वह नित्य मुक्त है और नियम के भीतर जो कुछ सीमित है उस सब का शासनकर्ता है। चूंकि वह सम्मिश्रण नहीं है इसलिए उसकी मृत्यु कभी न होगी। जब आत्मा की मृत्यु नहीं हो सकती तो उसका जन्म भी नहीं हो सकता क्योंकि जीवन और मृत्यु एक ही वस्तु की दो विभिन्न अभिव्यक्तियां है। अतएव आत्मा जन्म और मृत्यु से परे है।”

स्वामी विवेकानंद

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“जगत यथार्थ और आभास का, निश्चय और भ्रम का, अपरिभाषेय मिश्रण है।”

स्वामी विवेकानंद

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मनुष्य का अंतिम ध्येय सुख नहीं वरन ज्ञान है, क्योंकि सुख और आनंद का तो एक – न – एक दिन अंत हो ही जाता है, अत: यह मान लेना कि सुख ही परम लक्ष्य है, मनुष्य की भारी भूल है !

स्वामी विवेकानंद

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“सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।”

स्वामी विवेकानंद

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“आप सबके सामने जो संसार में उत्पन्न हुए हैं, भले ही हाथ जोड़ते फिरे, पर आपकी सहायता कौन करने आवेगा ? अपनी सहायता आप करो।”

स्वामी विवेकानंद

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“हम जितने शान्तचित्त होंगे और हमारे स्नायु जितने संतुलित रहेंगे, हम जितने ही अधिक प्रेम-सम्पन्न होंगे – हमारा कार्य भी उतना ही अधिक उत्तम होगा।”

स्वामी विवेकानंद

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“हमें अनन्त शक्ति, अनन्त उत्साह, अनन्त साहस तथा अनन्त धैर्य चाहिए। केवल तभी महान कार्य सम्पन्न होंगे।”

स्वामी विवेकानंद

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“तुम विश्व से अलग हो, जब तुम अपने आप को शरीर समझते हो, तुम अनंत अग्नि के एक स्फुलिंग हो, जब तुम अपने आप को जीव समझते हो, तभी तुम विश्व हो , जब तुम अपने आप को आत्मस्वरूप मानते हो।”

स्वामी विवेकानंद

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“तुम बच्चे को सिखा नहीं सकते जैसे की तुम पौधे को उगा नहीं सकते। जो कुछ तुम कर सकते हो, वह केवल नकारात्मक पक्ष में है – तुम केवल सहायता दे सकते हो। वह तो एक आतंरिक अभिव्यंजना है, वह अपना स्वभाव स्वयं विकसित करता है – तुम केवल बाधाओं को दूर कर सकते हो।”

स्वामी विवेकानंद

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“भय दुर्बलता का चिन्ह है।”

स्वामी विवेकानंद

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“महान कर्म महान त्याग से ही सम्पन्न हो सकते है।”

स्वामी विवेकानंद

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“जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी।”

स्वामी विवेकानंद

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“हर किसी को अपने भीतर से ही विकास करना होता है। इसे कोई सीखा नहीं सकता, कोई अध्यात्मिक नहीं बना सकता। जो कोई सिखाने वाला है वह अंतरात्मा ही है।”

स्वामी विवेकानंद

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“आलसी होने पर कुछ भी आसान नहीं होता लेकिन जब आप व्यस्त होते है तो सबकुछ आसान लगता है।”

स्वामी विवेकानंद

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 “बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं ।”

स्वामी विवेकानंद

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“एक विचार ले; उसी विचार को अपना जीवन बनाओ – उसी का चिन्तन करो, उसी का स्वप्न देखो और उसी में जीवन बिताओ। तुम्हारा मस्तिष्क, स्नायु, शरीर के सर्वांग उसी विचार से पूर्ण रहें। दूसरे समस्त विचारों को त्याग दो। यही सिद्ध होने का उपाय है; और इसी प्रकार महान आध्यात्मिक व्यक्तित्व उत्पन्न हुए हैं।”

स्वामी विवेकानंद

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“मंदिर में भोग लगाना पुण्य नहीं पाप है, जब पडोसी भूखा मरता है।”

स्वामी विवेकानंद

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“ज्ञान प्राप्त करों, ज्ञान से ही अंधकार नाश होगा।”

स्वामी विवेकानंद

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“ज्यों ज्यों काल बीतता है, सत्य की जड़ दृढ़ होती जाती है।”

स्वामी विवेकानंद

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“शरीरिक, बौद्धिक और अध्यात्मिक रूप से जो कुछ भी कमजोर बनाता है उसे जहर की तरह त्याग दो।”

स्वामी विवेकानंद

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