Sheetala Ashtami
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शीतलाष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा एवं पूजा विधि Sheetala Ashtami Vrat Pooja Vidhi in Hindi

शीतलाष्टमी (चैत्र कृष्णा अष्टमी) व्रत पूजा Sheetala Ashtami in hindi

Sheetala Ashtami in hindi
Sheetala Ashtami in hindi

Sheetala Ashtami Vrat Pooja Vidhi in Hindi : हिन्दू धर्म में शीतला देवी का व्रत और पूजा शीतलाष्टमी के दिन किया जाता है यह व्रत परम मंगलमय और स्वास्थ्यवर्धक है | नाभिकमल और हृदयस्थल के बीच विराजमान शीतला देवी अपने वाहन गर्दभ (गधे) पर सवार रहती हैं जिसे गणेश जी की सर्वाधिक प्रिय दूब बहुत पसंद है,  स्कन्द पुराण में माता शीतला देवी का वर्णन इस प्रकार मिलता है, दिगम्बरा, गर्दभ (गधे) पर विराजमान जो सृष्टि में सबसे ज्यादा धैर्यवान है, सूप से अलंकृत मस्तक वाली, नीम के पत्तों को धारण किये हुए, जल से भरा कलश और हाथ में झाड़ू जिसका तात्पर्य है कि स्वच्छ रहने से सेहत बनती है | ये स्वच्छता की अधिष्ठाती देवी है | माता को वो लोग ही पसंद हैं, जो सफाई के प्रति जागरूक रहते है |

इनकी सात बहनें है जिनका नाम – घृर्णिका, महला, ऋणिका, मंगला, शीतला, सेठला, तथा दुर्गा हैं | चैत्र कृष्ण अष्ठमी से आषाढ़ कृष्णा अष्ठमी तक चलने वाले 90 दिन के व्रत को ही गौरी शीतला व्रत भी कहा जाता है | चैत्र, वैशाख, शीतला अष्टमी और आषाढ़ के कृष्ण पक्ष की अष्ठमी शीतला देवी की पूजा अर्चना के लिए समर्पित होती है | इस व्रत को करने से शीतला देवी प्रसन्न होती हैं |

शीतलाष्टमी व्रत में एक दिन पहले बनाया हुआ भोजन किया जाता है इसलिए इस व्रत को बसौड़ा, लसौडा या बसियौरा भी कहते है | यह व्रत चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी – अष्टमी को होता है | शास्त्रों के अनुसार इस पूजा का बहुत महत्व होता है |

स्कन्दपुराण के अनुसार बसौड़ा की पूजा माता शीतला को प्रसन्न करने के लिए की जाती है जिससे कुदाह, ज्वर, विस्फोटक, फोड़े – फुंसी, नेत्ररोग, शीतला के फुंसियों आदि रोग घर से सदा सर्वदा के लिए दूर रहता है | भारतीय सनातन परम्परा के अनुसार महिलाएं इसे अपने बच्चों की सलामती, आरोग्यता और घर में सुख शांति के लिए रंगपंचमी से अष्टमी तक माँ शीतला को बसौड़ा बनाकर पुजती हैं और माता का आशीर्वाद लेती है |

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बसौड़ा की पूजा कैसे करें अथवा माता शीतला का व्रत कैसे करें ?

रोगों से मुक्ति के लिए की जाने वाली शीतला अष्टमी की सही पूजा विधि इस प्रकार है –

शीतलाष्टमी की पूजा विधि 

यह पूजा होली के पश्चात आने वाले पहले सोमवार अथवा गुरुवार के दिन किया जाता है | इस दिन सुबह शीतल जल से स्नान करके यह संकल्प लेना चाहिए है –

“मम गेहे शीतला रोग जनितोपद्रव शमन पूर्वका युरोग्यैश्वर्याभिवृद्धिये शीतलाषष्ठि तं करिष्ये।”

इसके बाद शीतला माता का धुप बत्ती और फूलों से पूजन करे । नैवेद्य में पिछले दिन के बने शीतल पदार्थ माता को चढ़ानी चाहिए फिर शीतल पदार्थों का भोग लगाकर स्वयं भी उसी प्रसाद को ले | रात में जागरण और दीये अवश्य जलाने चाहिए | इसको विधिवत् करने से सुफल की प्राप्ति होती है | उसकी और उसके परिवार की काया निरोग बनी रहती है |

शीतला माता की पौराणिक कथा

एक गांव में एक सुशील स्त्री रहती थी | वह हर साल शीतला अष्टमी को बसौड़ा पूजती और तब भोजन करती | एक बार उस गाँव में भयानक आग लग लग गई जिससे पूरा गाँव प्रभावित हुआ पर उस स्त्री के घर पर तनिक आंच न आयी |

गाँव वाले जब उससे इस चमत्कार का कारण पूछे तो उसने बताया कि वह वर्षों से हर साल बसौड़ा के दिन शीतला माँ का पूजन करती है और ठंडा भोजन खाती है | शीतला माता के चमत्कार की कहानी सुनकर तब से बसौड़ा के दिन सारे गांव में शीतला माता का पूजन आरम्भ हो गया |

बसौड़ा पूजा के लाभ

चैत्र महीने से मौसम में बदलाव होता है | मौसम में यह बदलाव अपने साथ गर्मी के और नाना प्रकार की बीमारियाँ लाता है | शीतलाष्टमी का व्रत करने से शीतला जनित सारे दोष ठीक हो जाते है |

शीतला माता की आरती

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,

आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता |

जय शीतला माता……

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,

रिद्धि – सिद्धि चंवर ढूलावें, जगमग छवि छाता |

जय शीतला माता……

विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,

वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता |

जय शीतला माता……

इंद्र मृदंग बजावत चंद्र वीणा हाथा,

सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता |

जय शीतला माता……

घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,

करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता |

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जय शीतला माता……

ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,

भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता |

जय शीतला माता……

जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता,

सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता |

जय शीतला माता……

रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,

कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता |

जय शीतला माता……

बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता,

ताको भजै जो नहीं सिर धुनि पछिताता |

जय शीतला माता……

शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता,

उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता |

जय शीतला माता……

दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता,

भक्ति अपनी दीजे और न कुछ भाता |

जय शीतला माता……

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