Shanivar Vrat in Hindi
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शनि देव और उनकी पूजा विधि – Shani Dev Vrat Pooja Vidhi in Hindi

शनि देव की पूजा कैसे करे – Shani Dev Vrat Pooja Vidhi in Hindi

Shani Dev in Hindi
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शनिवार व्रत में भगवान शनि महाराजा की पूजा व व्रत के सरल नियम (bhagavaan Shani dev Pooja Vidhi (Niyam) in Hindi

Shani Dev Vrat & Pooja Vidhi in Hindi : शनिपुराण में एक पुरुष देवता है, जिनकी प्रतिमा में तलवार ले कर एक भव्य अंधेरे वाला आकृति बनी हैं और जो भैंस या कौवा या गिद्ध पर बैठे हैं | इन्हें ही सूर्य पुत्र शनि देव कहते है | यह हिंदू धर्म में पूजे जाने वाले प्रमुख देवताओं में से एक हैं | प्रत्येक शनिवार को इनकी पूजा की जाती है और उपवास रखते है |

‘शनि भार्या स्तोत्र’ में यह विस्तार से मिलता है की अगर शनि देव की कृपा प्राप्त हो जाए तो जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है वही दूसरी ओर शनि देवता मनुष्य के किए पापों और बुरे कार्यों आदि की सजा देते है | जिन व्यक्तियों के बुरे कर्म होते है, चोरी, लूट, अनैतिक कार्यों से धन अर्जित करते है | उन्हें शनि के भयंकर प्रकोप का सामना करना पड़ता है | शनि का प्रकोप व्यक्ति पर बड़ा भारी पड़ता है | इसलिए इन्हें न्याय का देवता भी कहते है |

शनि प्रकोप से बचने के लिए राशि के अनुसार शनि देव की पूजा करने का नियम है | शनिवार को यदि सही विधि से आराधना और पूजा की जाये तो शनि देव की असीम कृपा भक्त पर होती है, शनि की कृपा प्राप्त होने से व्यक्ति पर से साढ़ेसाती, ढैया और कुंडली में मौजूद कमजोर शनि का प्रभाव समाप्त हो जाता है | कार्यों में आ रही बधाएं समाप्त होती है | व्यापार में तरक्की, नौकरी पेशा की पदोन्नति होती है | गृह क्लेश और दाम्पत्य जीवन में आ रही परेशानियाँ समाप्त हो जाती है | घर में सुख शांति का वास होता है | बिमारियों से परेशान लोगों को राहत मिलती है तथा आत्मा भी पुनीत होती है |

शनिदेव की कृपा के लिए आप किसी भी शनिवार से यह व्रत शुरू कर सकते है | अग्नि पुराण में इस व्रत का उल्लेख किया गया है कि शनिवार व्रत शनि ग्रह की मुक्ति के लिए “मूल नक्षत्र युक्त” शनिवार से पूजा शुरू होती है और सात शनिवार तक चलती है |

ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है | इस दिन शनि पूजन व्रत और शनि की वस्तुओ के दान और शनि के मंत्र जैसे ‘ऊं शं शनैश्चराय नम:’ के जाप से सूर्य पुत्र शनि देव प्रसन्न होते है |

शनि देव की पूजा कैसे करें ? (Lord Shani Dev Vrat Pooja Vidhi in Hindi)

शनिवार के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त हो शनि देव का व्रत और पूजा शुरू करनी चाहिए | पूजा शनि देव मंदिर में भी जाकर की जा सकती है | पूजा काला तिल, काला वस्त्र, लोहा, तेल और काली मूंग से ही करना चाहिए | शनि स्त्रोत का पाठ करके इन्हीं वस्तुओ का दान भी करना चाहिए | ये चीजे शनिदेव को विशेष रूप से प्रिय है |

शनि की महादशा, साढ़ेसाती और ढैया के कालखंड में आने वाली कठिनाइयों से बचने तथा शनि देव के प्रकोप से बचने का सबसे सरल उपाय शनि भर्या स्तोत्र है |  इसकी साधना किसी भी शनिवार से शुरू की जा सकती है |

जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो या पीड़ित हो, तो उन्हें शनि को प्रसन्न करने के लिए पीपल के वृक्ष की पूजा, दिन दुखियों, गरीबों और मजदूरों की सेवा और सहायता, काली गाय, काला कुत्ता, कौवे की सेवा करने से, सरसों का तेल, कच्चा कोयला, लोहे के वर्तन, काला वस्त्र, काला छाता, काले तिल काली उड़द आदि के दान करने से शनि शुभ फल देते है | भगवान शिव और हनुमान जी की उपासना से भी शनि कष्ट नहीं देते है |

इन्हें भी करें  :

-> इस शुभ दिन पर शनिदेव के नाम पर सरसों का तेल चढ़ाएं |

-> पूजा पाठ की समाप्ति पर हर व्रती का धर्म है कि वह अपने अनजाने में किये गए पापों का क्षमा मांगे |

-> शनि महाराज की पूजा के पश्चात राहु और केतु की पूजा करें |

-> आज के दिन, काले कुत्ते को तेल की चुपड़ी रोटी और कौवे को काला जामुन खिलाये तो ये व्रत अतिफलदायी हो जाता है |

-> असीम कृपा की प्राप्ति हेतु, ये पूरा दिन भगवान् शनि देव के मंत्र जाप, सेवा और आराधना में बिताये |

श्री शनिदेव पूजा के मंत्र (Shani Dev Mantra in Hindi)

आमतौर शनि की पूजा लोग शनि भगवान के प्रकोप से बचने के लिए करते हैं लेकिन इसमें पूरी सच्चाई नहीं है। शनि न्याय प्रिय देवता हैं। जब किसी व्यक्ति के कर्तव्य बुरे होते हैं तथा वह दूसरों को नुकसान पहुँचाते है तब शनि देव उसे सजा देते हैं | वैसे तो मानवों ने भगवान शनि को खुश करने के अनेक मंत्र ढूढ़ निकाले हैं, ये मंत्रों जहां शनि के प्रकोप से बचने में लाभ देता हैं वही उन्हें खुश कर असीम कृपा का पात्र भी बनता है | इन मन्त्रों के उपाय से आप भी शनि देव को खुश कर सकते है, शनि देव के मंत्र –

शनि देव की पूजा के समय निम्न मंत्रों का प्रयोग करना चाहिए:
भो शनिदेवः चन्दनं दिव्यं गन्धादय सुमनोहरम् |
विलेपन छायात्मजः चन्दनं प्रति गृहयन्ताम् ||

भगवान शनि की पूजा में निम्न मंत्र का जाप करते हुए उन्हें अर्घ्य समर्पण करना चाहिए-
ॐ शनिदेव नमस्तेस्तु गृहाण करूणा कर |
अर्घ्यं च फ़लं सन्युक्तं गन्धमाल्याक्षतै युतम् ||

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श्री शनिदेव को इस मंत्र का जप करते हुए प्रज्वलीत दीप समर्पण करना चाहिए-
साज्यं च वर्तिसन्युक्तं वह्निना योजितं मया |
दीपं गृहाण देवेशं त्रेलोक्य तिमिरा पहम्. भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने ||

शनि देव को निम्न मंत्र जप से यज्ञोपवित समर्पण करना चाहिए और उनके मस्तक पर काला चन्दन (काजल अथवा यज्ञ भस्म) लगाना चाहिए-
परमेश्वरः नर्वाभस्तन्तु भिर्युक्तं त्रिगुनं देवता मयम् |
उप वीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान श्री शनिदेव को पुष्पमाला समर्पण करना चाहिए-

नील कमल सुगन्धीनि माल्यादीनि वै प्रभो |
मयाहृतानि पुष्पाणि गृहयन्तां पूजनाय भो ||

भगवान शनि देव की पूजा करते समय इस मंत्रोच्चारण के साथ उन्हें वस्त्र समर्पण करना चाहिए-
शनिदेवः शीतवातोष्ण संत्राणं लज्जायां रक्षणं परम् |
देवलंकारणम् वस्त्र भत: शान्ति प्रयच्छ में ||

शनि देव की पूजा करते समय इस मंत्रोच्चार द्वारा उन्हें सरसों के तेल से स्नान करते है :
भो शनिदेवः सरसों तैल वासित स्निगधता |
हेतु तुभ्यं-प्रतिगृहयन्ताम् ||

सूर्यदेव के पुत्र भगवान श्री शनिदेव की पूजा करते समय इस मंत्र के जाप से ‘पाद्य जल अर्पण’ करना चाहिए-
ॐ सर्वतीर्थ समूदभूतं पाद्यं गन्धदिभिर्युतम् |
अनिष्ट हर्त्ता गृहाणेदं भगवन शनि देवताः ||

श्री शनिदेव की पूजा में इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें आसन समर्पण करना चाहिए-
ॐ विचित्र रत्न खचित दिव्यास्तरण संयुक्तम् |
स्वर्ण सिंहासन चारू गृहीष्व शनिदेव पूजितः ||

इस मंत्र के द्वारा भगवान श्री शनिदेव का आवाहन करना चाहिए-
नीलाम्बरः शूलधरः किरीटी गृध्रस्थित स्त्रस्करो धनुष्टमान् |
चतुर्भुजः सूर्य सुतः प्रशान्तः सदास्तु मह्यां वरदोल्पगामी |

शनि देव का वैदिक मंत्र
ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये।

शनि देवता का एकक्षारी मंत्र
ऊँ शं शनैश्चाराय नमः।

शनि देव का गायत्री मंत्र
ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।।

शनि देवता का तांत्रिक मंत्र
ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

साढ़ेसाती से बचने के शनि देव मंत्र
साढ़ेसाती से बचने के ये मंत्र भगवान शनि के प्रकोपों को दूर रखने में अत्यधिक प्रभावी है –
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम |
उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षयी मामृताम |
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।
ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌।छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।

क्षमा के लिए शनि मंत्र
इन मंत्रों से जाप कर शनि देव से अपने गलतियों की क्षमा माँगे।
अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेहर्निशं मया।
दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।
गतं पापं गतं दु: खं गतं दारिद्रय मेव च।
आगता: सुख-संपत्ति पुण्योहं तव मंत्रों

अच्छे स्वास्थ्य के लिए शनि मंत्र
शनि के किसी भी प्रकार के ग्रह को शांत करने तथा रोग को दूर करने के लिए शनि देव के इन मन्त्रों का जाप करना चाहिए:
ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिहा।
कंकटी कलही चाउथ तुरंगी महिषी अजा।।
शनैर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्।दुःखानि नाश्येन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखमं।।

शनि देवता के अन्य मंत्र
ऊँ श्रां श्रीं श्रूं शनैश्चाराय नमः।
ऊँ हलृशं शनिदेवाय नमः।
ऊँ एं हलृ श्रीं शनैश्चाराय नमः।
ऊँ मन्दाय नमः।।
ऊँ सूर्य पुत्राय नमः।।

शनिवार पूजा (शनि देव) की कथा

रानी रूक्मिणी की ‘अनुजा’ बड़ी कर्कशा और कु-प्रवृति स्वभाव की थी | इसी कारण कोई भी युवराज उसके साथ विवाह करने के लिए तैयार नहीं हो रहा था | एक दिन रूक्मिणी ने योगिराज श्रीकृष्ण से अपनी अनुजा के विवाह के लिए प्रार्थना की | योगिराज श्रीकृष्ण ने उस कु-लक्ष्मी का विवाह एक मुनि के साथ करा दिया | वह मुनि ज्ञानी ध्यानी महात्मा था |

मुनि का समय अधिकांशत: जप और तप करने में बीतता था और इस कारण कुलक्ष्मी को अपने पति से झगड़ा करने का मौका नहीं मिलता था | वह हर समय ऐसे मौके के तलाश में रहती थी, कि वह अपने पति से झगड़ा करें | उसे एक उक्ति सूझी | पति संध्या और सवेरे ईश आराधना के बाद जैसे ही शंख बजाते वह धहाड़ मारकर रोना शुरू कर देती | इस बात से पति को बड़ा दुःख होता था |

एक दिन मुनि ने कुलक्ष्मी से पूछा, “ देवि ! तुम्हे क्या अच्छा लगता है ? कहों ! मैं उसी का प्रबंध कर दूँ |”

कुलक्ष्मी ने कहा “ स्वामी ! मुझे तुम्हारे सभी कामों से घृणा है | देवार्चन, पितृ पूजा, दान पुण्य, होम – जप और यज्ञादि कर्मों में मेरी तनिक भी रूचि नहीं है | मुझे तो हर समय का क्लेश अच्छा लगता है | जीवों को उत्पीडित व संतप्त देख कर मुझे अत्यंत हर्ष होता है |”

पत्नी की बात सुनकर मुनि ने कहा “अच्छा, तुम मेरे साथ चलो | मैं तुम्हें ऐसी ही जगह पर पहुँचा देता हूँ जहाँ पर तुम्हारा जी लग जाएगा |”

कुलक्ष्मी ख़ुशी – ख़ुशी अपने पति के साथ चली गयी | मुनि उसे लेकर सघन वन में पहुंचा और वहां सबसे ऊंचा पीपल का पेड़ देखकर कुलक्ष्मी को उसकी शाखा पर बैठा दिया और स्वयं आश्रम को लौट गया |

अर्द्ध रात्रि को कु-लक्ष्मी रोने लग गई | रूक्मिणी ने अपनि बहन का रोना सुनकर, पति को उलाहना देते हुए कहा “ क्या आपने कुलक्ष्मी की अच्छी जगह शादी करायी है ? वह मुनि उसे कहाँ जंगल में छोड़ आया है | सुनिए , बेचारी कैसे विलाप कर रही है |”

योगीराज श्रीकृष्ण बोले “देवी ! तुम्हारी बहन पूरी तरह कंकाली है | वह अपने पति के भजन – पूजन में विघ्न डालती होगी, इसी से तंग आकर उसके पति ने उसे निकाल दिया होगा | इस जगत में भले के साथी तो सब होते है पर बुरे का साथी कोई नहीं होता है |”

तब रूक्मिणी  ने फिर प्रार्थना की “ अब उसका ‘निर्वाह’ कैसे हो, इसका तो कोई उपाय कीजिए प्रभु |”

रूक्मिणी  की बात सुनकर श्रीकृष्ण उसी समय उस स्थान पर गए जहाँ पर कुलक्ष्मी पीपल के पेड़ पर बैठी लगातार रो रही थी | वहां पहुँचकर उन्होंने पूछा “तुम यहाँ बैठकर क्यों रो रही हो ?”

कुलक्ष्मी ने कहा “मुनि देव मुझे बैठाकर चले गए है | यहां अकेली बैठे बैठे जी घबड़ा रहा है | इसलिए विलाप कर रही हूँ |”

सुनकर श्रीकृष्ण बोले! मुनी के ‘जप तप’ में बाधा डालने के कारण ही उन्होंने तुम्हारा त्याग किया है, मैं अब मुनी को दबा नहीं सकता हूँ, लेकिन इस बात के लिए तैयार हो जाओ कि आप भविष्य में अपने पति का प्रतिकूल नहीं व्यवहार करोगी, तो कुछ सोचू |

सुनकर कुलक्ष्मी बोली “ मुझे आपकी सब बातें स्वीकार है, पर मैं अपनी प्रकृति से विवश हूँ |”

इस पर श्रीकृष्ण बोले “ ऐसी कलहकारिणी के लिए एकांतवास से अच्छा और कोई उपाय नहीं हो सकता है | इसलिए मेरी आज्ञा है कि अब तुम हमेशा इसी पीपल पर वास करो | इसमें सम्पूर्ण देवताओं का वास है | मेरी अर्धांगिनी लक्ष्मी का भी इसी में वास है | शनिवार के दिन सर्वोदय से पूर्व जो कोई पीपल के वृक्ष की पूजा करेगा वह लक्ष्मी जी को पहुंचेगा किन्तु जो सूर्योदय के बाद पीपल का पूजन करेगा वह पूजन तुम्हे अर्पित होगा | पुन: जिनकी पूजा तुम्हे मिलेगी उन्ही के घर में तुम्हारा वास होगा |” इतना कहकर श्रीकृष्ण लौट गए |

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One thought on “शनि देव और उनकी पूजा विधि – Shani Dev Vrat Pooja Vidhi in Hindi”

  1. भगवान शनिदेव कि कथा ,व्रत और पुजा पर सुन्दर लेख लिखा गया है,

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