Good Morning Poem in Hindi
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गुड मॉर्निंग पोएम्स इन हिन्दी – सुप्रभात पर दो बेहद प्रेरणादायक हिन्दी कविता (Poem on Morning in Hindi

सुप्रभात पर दो बेहद रोमांचक हिंदी कविता (Good Morning Poem In Hindi)

Morning Poem in Hindi
Morning Poem in Hindi

Good Morning Poem in Hindi : हर भोर में भावना होती है मानव – प्रेम की, कर्तव्य – बोध की एवं शाश्वत जीवन – मूल्यों प्रेरक और उद्बोध की | वेद में कही यह बात ‘उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत’ का पावन आदर्श इस सुबह की मूल आधार – भूमि है। सूर्य उदय के साथ आने वाली सुबह की बेला के महत्व से ओत – प्रोत दो प्रेरक और उद्बोधक कविता खास आपके लिए प्रस्तुत है –
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सवेरे की प्रेरक कविता “सुप्रभात की बेला”(Good Morning Poem on “Suprabhat Ki Bela” In Hindi) 

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क्यों मनुज सोया पड़ा है ,

जाग उठ, जग को जगा दे |

जाग उठ, स्वागत उषा का

कर, अरे अब मुस्करा दे ||

सो रहा है तू अभी तक,

हो रहा है भोर अब तो |

जाग उठ, सुन गीत कवि का,

तू जगत में भोर ला दे ||

– श्री रामरज शर्मा

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भोर पर कविता “उठो प्रभात हो गया” (Motivational Good Morning Poem on “Utho Prabhat Ho Gaya” in Hindi)

Poems on Morning in Hindi
Poems on Morning in Hindi

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दिगन्त में जगी प्रभा, उठो प्रभात हो गया |

व्यतीत यामिनी हुई, तमिश्र – तोम खो गया ||

उठो प्रमाद छोड़, स्फूर्ति का अमन्द स्त्रोत ले |

तरो जगत्पयोधि को, अजेय शौर्य-पोत ले ||

बढ़ो सपूत देश के, रुको न वीर केशरी |

चलो प्रगल्भ चाल शौर्य – स्वाभिमान से भरी ||

विशाल शैल – श्रंग भी, अबाध लांघते चलो |

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अनन्त अंतरिक्ष के, रहस्य आंकते चलो ||

असंख्य उग्र आंधियां, चलो समेट श्वास में |

ग्रसे रहो अराति को, प्रचण्ड नागपाश में ||

अजेय क्रांतिवीर हो, अमोघ क्रांति को वरो |

सरोष शंखनाद से, विदीर्ण व्योम को करो ||

पयोद की घटा बनो, अनीति – ज्वाल – जाल को |

चुनौतियां दिए चलो, सदा कराल काल को ||

बनो स्वयं – प्रकाश दिव्य ज्योति के प्रसार को |

करो स्व-रश्मि-राशी से, विदीर्ण अंधकार को ||

अमर्त्य लोक – बंधु ! लोक को नया विहान दो |

उठो विषण्ण विश्व को, नवीन सामगान दो ||

सुनो अमर्ष त्याग दिन- हीन की कराह को |

समीर दो स्वदेश के, विकास के प्रवाह को ||

स्वदेश के लिए जियो, स्वदेश के लिए मरो |

वरो सुकीर्ति – श्रेय जो, स्वदेश के लिए वरो ||

चुनौतियां दिए चलो, चुनौतियां लिए चलो |

स्वदेश की ध्वजा उदग्र, व्योम में किये चलो ||

– श्री रामरज शर्मा

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Babita Singh
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