Mahatma Gandhi in Hindi
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Mahatma Gandhi Biography in Hindi (महात्मा गांधी की जीवनी)

महात्मा गाँधी (Father of Nation) का जीवन परिचय – Mahatma Gandhi Biography in Hindi Language

राष्ट्रपिता - Mahatma Gandhi Image
राष्ट्रपिता – Mahatma Gandhi Image

हर वर्ष 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती मनाया जाता है। यह भारत का एक राष्ट्रीय त्यौहार है। इसे मोहनदास करमचन्द गाँधी के सम्मान में मनाया जाता है। इसी दिन 1869 में गुजरात के पोरबंदर क्षेत्र में गाँधी जी का जन्म हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अहम् भूमिका निभाने वाले एक राजनैतिक एवं अध्यात्मिक नेता थे। उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और सिद्धांतो को याद करने के लिए गांधी जयन्ती मनाई जाती है। इस दिन महात्मा गाँधी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी याद किया जाता है। इस दिन को विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है | 

महात्मा गांधी का संक्षिप्त में जीवन परिचय (Mahatma Gandhi Short Biography in Hindi) 

नाम               –       मोहनदास करमचन्द गांधी

पिता का नाम –       करमचन्द गांधी

माता का नाम –       पुतलीबाई

जन्म               –      दिनांक  2 अक्टूबर, 1869

जन्म स्थान      –      काठियावाड़ के पोरबन्दर क्षेत्र (गुजरात)

पत्नी का नाम  –     कस्तूरबा माखनजी (कस्तूरबा गांधी)

संतान            –       गांधीजी के चार पुत्र थे जिनका नाम थे क्रमशः हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास

मृत्यु            –          30 जनवरी 1948 (दिल्ली)

महात्मा गांधी का प्रारम्भिक जीवन परिचय : Initial Biography of Mahatma Gandhi in hindi 

2 अक्टूबर, सन 1869 ई. को पोरबन्दर (गुजरात) में बालक मोहनदास (महात्मा गांधी) का जन्म हुआ | गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गांधी था और इनके पिता का नाम करमचंद गांधी था जो किसी समय पोरबन्दर के दीवान थे, फिर बाद में राजकोट के दीवान रहे |

गांधी जी की माँ का नाम पुतलीबाई था, ये एक साध्वी स्त्री थी | सदैव पूजा – पाठ में व्यस्त रहती थी | वर्षा ऋतु के चार महीनों में वे चातुर्मास्य व्रत रखती, अस्वस्थ्य होने पर भी व्रत नहीं छोड़ती थी | वह अत्यंत धार्मिक विचारों वाली, कबीरपंथी, सहृदयी नारी थी | माता ने अपने पुत्र गांधी में आदर्शों की शिक्षा बचपन से ही कूट – कूट कर भरी थी |

गांधी जी का लालन – पालन बड़े ही वैभवपूर्ण, मानवतावादी, धार्मिक वातावरण में हुआ और जिस कारण सत्य और निष्ठा जैसे गुण इन्हें बचपन से ही मिले | इन्होंने बचपन में सत्य हरिश्चंद्र नाटक देखा और इनपर हरिश्चंद्र के गुणों का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा और ये उसी समय से परम सत्यवादी बन गए |

सात वर्ष की अवस्था में प्रारम्भिक शिक्षा हेतु इन्हें राजकोट की देहाती पाठशाला में दाखिला कराया गया, पाँच वर्ष तक ये वही पढ़ते रहे | जैसा कि इस बारे में गांधीजी ने स्वयं लिखा है | बालक मोहनदास में बचपन में कुछ दुर्गुण भी थे, बुद्धि भी इतनी तीव्र न थी | कौन जानता था भोला – भाला बालक एक दिन राष्ट्र को इतना सम्मान प्रदान कराएगा कि जनता उसे बापू कहने लगेगी | 

गाँधी जी का वैवाहिक जीवन 

गाँधी जी का विवाह 13 वर्ष की अल्पायु में कस्तूरबा माखनजी के साथ हुआ था | कस्तूरबा माखनजी उम्र में गाँधी जी से 1 साल बड़ी थी |

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इंग्लैंड में युवा गांधी की शिक्षा

गांधी जी माता-पिता के भक्त थे | 1885 ई. इनके पिता का स्वर्गवास हो गया | सन 1887 ई. में मैट्रिक परीक्षा पास की | 1888 में बैरिस्ट्री पढ़ने ये विलायत चले गए और 1891 में ये बैरिस्ट्री पास करके भारत लौट आए |

इन्होंने बम्बई (वर्तमान मुंबई) में वकालत प्रारम्भ की परन्तु विशेष सफलता नहीं मिली, जिसका मुख्य कारण था कि वकालत में झूठ बोलना पड़ता था और वे झूठ बोलना पाप समझते थे | उन्होंने हमेशा सत्य को अपने जीवन में मूल मंत्र के रूप में अपनाया |

इस बीच इनकी स्नेहमयी माँ का भी स्वर्गवास हो गया | वे अपनी जन्मभूमि राजकोट वापस लौट गये मगर कुछ दिन बाद उन्हें एक गुजराती व्यवसायी के मुक़दमे की पैरवी का भार उठाने की हांमी भरनी पड़ी जिसका मुकदमा अफ्रीका में चल रहा था | बतौर वकील उसमें गांधीजी अफ्रीका गए | सिर पर पगड़ी रखकर वे अदालत में गए, वहाँ इनसे पगड़ी उतारने को कहा गया, सच्चे भारतीय की भाँती गांधीजी ने अपने पगड़ी की रक्षा की, वे बाहर आ गए | रेल, घोड़ा – गाड़ी सभी जगह महात्मा गाँधी का अपमान किया गया, किन्तु वे अपने मिशन में लगे रहे |

अफ्रीका में कालो के प्रति गोरों का व्यवहार असंतोषजनक था | इसी प्रकार का व्यवहार वहाँ रहने वाले सभी भारतियों के साथ होता था | गाँधी जी को भी वहां काले – गोरे के भेदभाव का सामना करना पड़ा | वहां भारतियों को चाहे वे कोई भी काम क्यों न करते हो, वे किसी भी धर्म जाति के क्यों न हो, यूरोपीय उन्हें कुली कहकर ही बुलाते थे और बहुत जल्द वैरिस्टर एम. के. गांधी भी कुली वैरिस्टर के नाम से जाने जाने लगे |

इसी यात्रा के दौरान एम. के. गांधी के साथ एक दुखद घटना भी घटी | दरअसल हुआ ये कि मोहनदास को मुक़दमे की सुनवाई में प्रिटोरिया जाने के लिए अब्दुल्ला ने प्रथम दर्जे का टिकट खरीद कर दिया था लेकिन एक श्वेत यात्री द्वारा सामान्य डिब्बे में जाकर बैठने का आदेश दीए जाने के कारण इनकी झड़प हो गई जिसकी वजह से एक अंग्रेज़ ने कड़ाके की ठण्ड में गाँधी जी का सामान ट्रेन से फेककर उनके साथ दुर्व्यवहार किया | 

एम. के. गांधी को इस यात्रा के अनुभवों ने झकझोरकर रख दिया | यहाँ पर भारतीय होने के नाते इन्हें जो उपेक्षित-सा व्यवहार मिला, भारतवासियों की जो दुर्दशा दिखाई दी, उसने इनके जीवन में एक भूकंप ला दिया | आतएव अफ्रीका में रहने वाले भारतियों का पक्ष लेकर उन्होंने सत्याग्रह आंदोलन छेड़ा | आन्दोलन में सफलता मिली और गांधीजी को ही यह श्रेय प्राप्त हुआ कि वहाँ भारतियों के सम्मान की रक्षा होने लगी |

सर्वप्रथम सत्याग्रह आंदोलन रूपी अहिंसात्मक अमोघ अस्त्र  गाँधी जी ने यही पर चलाया और अपने कर्ममय जीवन का आरंभ करते हुए वहीं रहकर ‘नेशनल इंडियन कांग्रेस’ नामक संस्था की स्थापना की | लगभग 8 वर्षों तक यह आन्दोलन चलता रहा | गांधी जी को इसमें काफी सफलता मिली | यही पर फोनिक्स आश्रम स्थापित करके ‘इडियन ओपीनियन’ नमक पत्र भी प्रकाशित किया |

गांधीजी के प्रयासों का ही नतीजा था कि वहां के जनरल स्मटस  को भारतियों के खिलाफ बनाया गया जाति और रंग – भेदी काला कानून 1914 ई. में रद्द करना पड़ा | इस प्रकार तक़रीबन 20 वर्षो के दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान गांधीजी ने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई जारी रखते हुए और अनेकविधि अत्याचार सहते हुए अंत में विजय प्राप्त की |

गांधी जी को फ़ुटबाल खेलना बहुत पसंद था | उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए डरबन, प्रिटोरिया और जोहांसबर्ग में फ़ुटबाल के तीन क्लब भी बनाये जिन्हें उन्होंने ‘पैसिव रेसिस्टर्स सांकार क्लब नाम दिया | 1915 ई. में  गांधीजी भारत वापस आ गये |

भारत में गांधी जी का सत्याग्रह आन्दोलन 

भारतवर्ष लौट कर यहाँ की राजनीति में गांधी जी ने भाग लेना आरम्भ किया | उस समय प्रथम विश्व महायुद्ध छिड़ चूका था | प्रथम विश्व युद्द (1914- 1918) में गांधीजी ने अंग्रेजों की सहायता की क्योंकि अंग्रेजों ने वचन दिया था कि युद्ध में विजयी होने पर हम भारत को स्वतंत्र कर देंगे, परन्तु वे अपनी बात से पलट गए | युद्ध में विजयी होने पर अंग्रेजों ने रौलट एक्ट तथा पंजाब की रोमांचकारी जलियांवाला बाग काण्ड की घटना पुरस्कार के रूप में प्रदान की | 

इसके पश्चात् 1917 और 1920 में गांधी जी ने आन्दोलन आरम्भ किया परिणामस्वरूप वे जेल गए | 1917 में गांधी जी को पहली सबसे बड़ी उपलब्धि चम्पारण सत्याग्रह आन्दोलन में मिली जिसमें इन्होंने निलहे खेतिहरों का दुःख दर्द मिटाने के लिए गोरों के अत्याचारों के विरुद्ध भैरव – हुँकार के साथ चम्पारन सत्याग्रह का नेतृत्व किया | चम्पारन सत्याग्रह के अन्तर्गत गांधीजी ने बिहार के चम्पारन जिले में नील की खेती करने वाले किसानों पर यूरोपीय मालिको द्वारा किये जा रहे अत्याचारों के खिलाफ आन्दोलन चलाया जो काफी सफल रहा |

इस आंदोलन में गांधीजी का सहयोग मजहरुल हक, आचार्य कृपलानी एवं महादेव देसाई ने किया | आंदोलन के इन्हीं दिनों में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सर्वप्रथम गांधीजी को ‘महात्मा’ की उपाधि दी तथा बापू की उपाधि जवाहरलाल नेहरू ने दी | 

अब तक देश की आजादी के लिए गांधी जी ने अपने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए थे और जैसे ही खेड़ा में किसानों पर अधिक कर का बोझ सरकार द्वारा डाला गया तो गांधीजी ने यहाँ के किसानों का नेतृत्व किया | उन्होंने 1918 ई. में खेडा में ‘कर नहीं दो’ आन्दोलन चलाया साथ ही सत्याग्रह का प्रयोग किया जिसके परिणामस्वरुप उन्हें कर की दर कम करवाने में सफलता मिली | 1918 ई. में ही गांधीजी ने अहमदाबाद के मिल मजदूरों की वेतन वृद्धि के लिए आमरण अनशन किया | इस अनशन के चौथे दिन ही सरकार मजदूरों की मांग मानने के लिए विवश हो गई | इस प्रकार उनके कदम भारत को स्वतंत्र कराने, मानवता का दुःख दर्द हरने की दिशा में आगे ही आगे बढ़ते गए और तमाम देश -जन उनके समर्थक और अनुयायी बनते गए | इसी वर्ष इन्होंने साप्ताहिक पत्र ‘यंग इण्डिया’ तथा गुजराती साप्ताहिक ‘नवजीवन’ के सम्पादन का पद ग्रहण किया | 

1919 ई. में अंग्रेजी सरकार ने दमनात्मक रुख अपनाकर जब रोलेट एक्ट लागू करना चाहा, तब गांधी जी की प्रेरणा से सारे भारत में उसका विरोध होने लगा | इस प्रकार गांधी जी ने रौलेट एक्ट और खिलाफत आन्दोलन का नेतृत्व किया यहाँ उन्होंने अंग्रेजो को ‘शैतानी लोग’ कहा और भारत की राजनीति में पूरी तरह से पदार्पण कर लिया, नतीजतन गाँधी जी ने बिल के तहत भारतियों के आम अधिकारों के छिनने के विरोध में पहला अखिल भारतीय सत्याग्रह छेडने के साथ राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वाहन कर दिया | गांधी जी का यह सत्याग्रह पूरी तरह सफल रहा |

अब तक गांधीजी ब्रिटिश हुकूमत के सबसे बड़े असहयोग बन गए थे | उनके असहयोगी बनने के लिए उत्तरदायी कारकों में महत्वपूर्ण कारक थे – रौलट एक्ट, जलियावाला बाग हत्याकांड, खिलाफत समस्या आदि थी | 

गांधी ने अग्रेंजों के खिलाफ शस्त्र के रूप में 1920 से 1922  असहयोग आन्दोलन चलाया | इस असहयोग आन्दोलन के तहत बम्बई में विदेशी वस्त्रो की होली जलाई गई तथा व्यापक अवज्ञा आन्दोलन प्रारंभ किया गया जो ब्रिटिश हुकूमत पर कहर बनकर बरसा | खुद महात्मा गांधी ने अपना मेडल जो की उन्हें विश्व यूद्ध के दौरान सेवा के लिए मिला था, उसे उन्होंने वाईसराय को वापस लौटा दिया | 1920 में ही बेलगांव में हुए कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता की |

1922 में दुर्भाग्यवश चौरी – चौरा की हिंसक घटना के बाद असहयोग आन्दोलन जो कि अब जन आन्दोलन बन चुका था, उसे स्थगित करना पड़ा | गांधी जी को इस घटना का दोषी मानते हुए उनपर राजद्रोह का मुकदमा चला जिसमें उन्होंने स्वयं को जिम्मेदार स्वीकार किया | परिणामस्वरूप उन्हें 6 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई | जेल जाने पर गांधी जी सक्रिय राजनीति से भले ही दूर रहे लेकिन उन्होंने अग्रेंजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई जारी रखी | जेल में बीमार पड़ जाने के कारण दो वर्ष बाद आँतो के आपरेशन के लिए इन्हें रिहा कर दिया गया |

1930 में गांधीजी ने देशव्यापी नमक आन्दोलन का संचालन किया | ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ के अंतर्गत 6 अप्रैल, 1930 को 78 अनुयायियों के साथ देशव्यापी नमक कानून तोड़ने के लिए डांडी समुंद्र तट के लिए एतिहासिक यात्रा आरम्भ की | अंगरेजी हुकूमत इस यात्रा को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोक दी और 4 मई को गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया | परन्तु वे ज्यादा दिनों तक उन्हें जेल में नहीं रख पाये | 26 जनवरी, 1931 ई. को गांधीजी जेल से रिहा कर दिए गये | जेल से छूटने के बाद गांधी एवं इरविन के मध्य 5 मार्च, 1931 को एक संधि हुई, जिसे गांधी – इरविन समझौता कहा गया |

नवंबर 1931 में गांधीजी को लंदन में हुए द्वितीय गोलमेज सम्मलेन में आमंत्रित किया गया | गांधीजी विलायत गये और बड़ी विद्वता से भारत के पक्ष का समर्थन किया |

1932 ई. में उन्होंने दलितों के पृथक निर्वाचन प्रणाली के विरोध में जेल में आमरण अनशन किया जिसके फलस्वरूप सरकार को एक बार फिर झुकना पड़ा | 7 अप्रैल 1934 को  गांधीजी ने ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ को स्थगित कर दिया |

1938 में भारत सरकार ने कांग्रेसियों को अपने-अपने प्रान्तों में मंत्रीमंडल बनाने की आज्ञा दे दी | गाँधी जी की सहमती से सभी प्रान्तों में मंत्रिमंडल बने | 1939 में अंग्रेजों ने भारतीयों की बिना राय लिए हुए ही भारत को महायुद्ध में सम्मिलित राष्ट्र घोषित कर दिया | प्रथम महायुद्ध में गाँधी जी ने अंग्रेजों की दिल खोल कर सहायता की थी इस आश्वासन के ऊपर कि भारत को स्वतंत्र कर देंगे, परन्तु उसका प्रतिफल बड़ा भयानक हुआ था | अत: इस बार गाँधी जी ने सहायता के विषय में स्पष्ट मना कर दिया कि तब तक अपनी सहायता न करेंगे, जब तक कि आप हमें पूर्ण स्वतंत्र न कर दें, इस प्रकार महायुद्ध में अंग्रेजों की कोई सहायता नहीं की गई |

भारत छोड़ों आन्दोलन 9 अगस्त 1942

Mahatma Gandhi Biography In Hindi
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भारतवर्ष में 1942 के “भारत छोड़ो” आन्दोलन तथा आजाद हिन्द के बलिदान के कारण राजनैतिक जागृति हो गई थी | 1942 का आन्दोलन साधारण आन्दोलन नहीं था | गाँधी जी तथा समस्त नेताओं को जेल में बंदी बना देने के फलस्वरूप देश की समस्त जनता ने भयंकर रूप धारण कर लिया | अंग्रेजी शासन व्यवस्था की नींव डगमगा उठी | विदेशी समझ अब भारतियों पर शासन करना आसान खेल नहीं, उन्होंने भारत को छोड़ जाने में ही अपना कल्याण समझा | 15 अगस्त को, 1947 को भारतवर्ष को स्वाधीन राष्ट्र घोषित कर दिया गया |

इससे पहले जुलाई 1944 को सुभाषचंद्र बोस देश से बाहर होने की वजह से रेडियों के माध्यम से गांधीजी को संबोधित करते हुए भाषण दिया और भाषण में उन्होंने जापान से सहायता और आजाद हिन्द फ़ौज के गठन का उद्देश्य बताया |  इसी भाषण में उन्होंने गांधीजी को पहली बार राष्ट्रपिता कहकर आशीर्वाद मांगा और तभी से महात्मा गांधी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहे जाने लगे |

देश की आजादी के बाद इन्होंने कोई भी पद लेने से इंकार कर दिया और देश की नि:स्वार्थ सेवा में सदैव तत्पर रहे | महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के प्रतीक थे | इस महान और पूज्य इंसान ने कदम – कदम पर खुद को गढ़ा और अपना सम्पूर्ण जीवन देश हित में लगा दिया | उन्होंने अपना समस्त सुख देश के लिए बलिदान कर दिया |

दुर्भाग्यवश 30 जनवरी 1948 की शाम को 6 बजे जब गांधीजी अपनी प्रार्थना सभा में जा रहे थे तब नाथूराम गोडसे नामक एक व्यक्ति ने पिस्तौल की तीन गोलियाँ चलाकर उनकी हत्या कर दी | सारा देश शोकाकुल हो उठा | जिधर देखिए उधर लोग रेडियों पर कान लगाए बैठे थे और आँखों से आंसू बहा रहे थे | लोगों ने ऐसा अनुभव किया कि मानो उनके घर के किसी मनुष्य की मृत्यु हो गई हो |

मृत्यु के कुछ ही क्षणों के बाद रेडियों पर पण्डित नेहरू ने बड़े दुःख से भरे गद्गद् कंठ से भाषण दिया | भाषण सुनकर जनता के आंसू और भी अधिक बहने लगे | पण्डित नेहरू का स्वयं का ह्रदय भी भरा हुआ था | संसार के समस्त झण्डे झुका दिये गये | श्रद्धान्जलियाँ अर्पित की गई | लाखों व्यक्ति श्मशान यात्रा में सम्मिलित हुए | गाँधी जी के अन्तिम दर्शन के लिए देश के सभी भागों से जो जैसा बैठा था वैसे ही दिल्ली के लिए चल दिया |

गाँधी जी भारतवर्ष के महान नेता थे, स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने भारतीय जनता का नेतृत्व किया। भारत माता की परतंत्रता की बेड़ियों को काटने के लिए उन्होंने जीवन भर यातनायें सही, परन्तु पैर पीछे न हटाया। साथ ही साथ वे उत्तम विचारक और श्रेष्ठ समाज सुधारक भी थे। वे समाज की बहुत-सी छिपी हुई कमियों को समाज के सामने लाये तथा उन्हें दूर करने का ‘पूर्ण प्रयत्न किया।

अपनी बुद्धि एवं राजनैतिक कुशलता के बल पर महात्मा गांधी ने भारतवर्ष की स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए जीवन भर प्रयत्न किये, और उन्होंने भारत को आजादी दिलाई तथा एक समाज सुधारक के रूप में छुआछूत को समाप्त करने का प्रयास किया। महात्मा गांधी का नाम आज भी पूरे भारत में आदर और सम्मान से लिया जाता है | सम्पूर्ण भारतवासी उन्हें “राष्ट्रपिता” या “बापू” कहकर पुकारते हैं |

आधुनिक भारतीय इतिहास में इनका योगदान अपूर्व और अतुलनीय है | इन्होंने भारतीय के प्रत्येक अंग को स्पर्श किया और इन्हें सारा विश्व एक महानतम नेता के रूप में जानता है | 2 अक्टूबर गांधी जयंती इसी महानेता के सम्मान में मनाया जाने वाला एक राष्ट्रीय त्यौहार है |

गांधीजी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे और सबसे महत्वपूर्ण बात वह ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के निदेशक थे | इन्होंने मानवता के विकास के लिए जो मार्ग – दर्शन किया विशेषत: इस युग में सब देशों को और लोगों को नई प्रेरणा देने वाली है | देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ते हुए इन्हें कईयों बार जेल के शिकंजो को भी तोड़ना पड़ा तथा अपार कष्टों और लाठियों की मार भी सहनी पड़ी |

महात्मा गांधी ने देश और दुनिया के लिए जो महत्वपूर्ण रचनात्मक कार्य किये उसे कभी नहीं भुलाया जा सकता है | वे ना केवल स्वतंत्रता चाहते थे अपितु जनता की आर्थिक, सामाजिक और आत्मिक उन्नति भी चाहते थे | इस भावना से उन्होंने ‘ग्राम उद्द्योग संघ’, ‘तालीम संघ’ एवं ‘गो रक्षा संघ’ की स्थापना की |

गांधीजी ने समाज में व्याप्त शोषण की नीति को खत्म करने के लिए भूमि एवं पूंजी का समाजीकरण न करते हुए आर्थिक क्षेत्र में विकेंद्रीकरण को महत्व दिया | उन्होंने लघु एवं कुटीर उद्द्योगों को भारी उद्द्योगों से अधिक महत्व दिया | खादी को गांधी ने अपना मुख्य कार्यक्रम बनाया |

गांधीजी समाज में फैली हुई कुरीतियों एवं असमानताओं के प्रति भी जीवन भर संघर्षरत रहे | उन्होंने अछूतों को ‘हरिजन’ की संज्ञा दी |  इन्हें अन्य हिन्दुओं के साथ समानता प्राप्त करवाने के लिए गांधी ने ‘मन्दिर प्रवेश’ कार्यक्रम को सर्वाधिक प्राथमिकता दी | स्त्रियों की स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने दहेज़ प्रथा उन्मूलन के लिए अथक प्रयत्न किया | वे बाल विवाह और पर्दा प्रथा के भी कटु आलोचक थे | वे विधवा पुनर्विवाह के समर्थक और शराब बंदी लागू करने के बहुत इच्छुक थे |

राजनीति को नैतिकता पर आधारित करना उनकी सबसे बड़ी देन है| अहिंसात्मक असहयोग तथा सविनय अवज्ञा आन्दोलन की उनकी नीति भारतीय परिस्थितियों के अधिक अनुकूल थी | इनकी नजर में स्वराज्य तो केवल दासता से मुक्ति थी और बेहतर जिंदगी का साधन मात्र थी | उन्होंने बारम्बार यह बात कही कि उनके लिए इस आजादी का तब तक कोई मूल्य नहीं जब तक कि सबसे पीड़ित और सबसे कमजोर को शोषण और अन्याय से मुक्ति न मिले |

गांधी जी कहते थे कि “न सिर्फ भारत की बल्कि सारी दुनिया की अर्थरचना ऐसी होनी चाहिए कि किसी को भी अन्न और वस्त्र के अभाव की तकलीफ न सहनी पड़े |

दूसरे शब्दों में “हर एक को इतना काम अवश्य मिल जाना चाहिए कि वह अपने खाने – पहनने की जरूरते पूरी कर सके और यह आदर्श निरपवाद रूप से तभी कार्यान्वित किया जा सकता है, जब जीवन की प्राथमिक आवश्यकताओं के उत्पाद के साधन जनता के हाथ में रहे |”

सचमुच महात्मा गांधी भारतीय राजनीति और राष्ट्र के महान स्रोत थे जिन्होंने अंग्रेजी साम्राज्य की जड़े हिला दी तथा समाज में मौलिक परिवर्तन कर दिया | बापू एवं राष्ट्रपिता की उपाधियों से सम्मानित महात्मा गांधी आधुनिक भारत ही नहीं, बल्कि आधुनिक विश्व का नव – निर्माण करने वाले गिने – चुने उन चंद लोगों में से एक है जो अपने सत्य,अहिंसा एवं सत्याग्रह के साधनों से भारतीय राजनैतिक मंच पर 1919 से 1948 तक छाए रहा | गांधी जी के इस कार्यकाल को गांधी युग के नाम से जाना जाता है | 

गांधीजी ने समाज की बहुमुखी सेवा की | निःसंदेह भारतवर्ष उनका ऋणी है और चीर ऋणी रहेगा |

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6 thoughts on “Mahatma Gandhi Biography in Hindi (महात्मा गांधी की जीवनी)”

  1. महात्मा गाँधी के जीवन पर अद्भुत प्रकाश डाला आपने, उनके जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी से युक्त एक उम्दा लेख…धन्यवाद बबीता जी…

  2. महात्मा गाँधी के बारे में सविस्तर जानकारी देने के लिए धन्यवाद।

  3. राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी अपने जीवन में किये गए कामों व् अपने विचारों के कारण सदा याद किये जाते रहेंगे | उनके बारे में विस्तार से जानकारी देने के लिए शुक्रिया |

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