बाल दिवस पर निबंध व भाषण
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बाल दिवस पर भाषण – Children’s Day Speech in Hindi Language

बाल दिवस के महत्व पर भाषण (Speech on Children’s Day in Hindi Language)

Children's Day Speech Hindi
Children’s Day Speech Hindi

Children’s Day Speech In Hindi : बच्चो को समर्पित इस विशेष “बाल दिवस उत्सव” में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथि, अध्यापकों और प्यारे साथियों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों हम लोग अपने जीवन में अकसर कई प्रकार के सामाजिक और राष्ट्रीय उत्सव मनाते रहते हैं। और इन उत्सवों की एक खास विशेषता होती है कि इन्हें अत्यन्त सुन्दर ढंग से मनाया जाता है जिसे देखने के लिए दुनियाभर के हर कोने से लोग आते हैं। गणतन्त्र दिवस की झाकी, स्वतंत्रता दिवस का परेड कितना आकर्षक और मनमोहक होता है।

ऐसा ही एक राष्ट्रीय पर्व बाल दिवस है जो भारत देश के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण अवसर है। इसका महत्व स्वतंत्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस से कम नहीं है। यदि यह कहा जाए तो यह अनुचित नहीं होगा। कारण स्पष्ट है। बाल दिवस का सम्बन्ध बच्चों से है। बच्चे ही राष्ट्र के निर्माता हैं। इसलिए ये दिन पूरी तरह बच्चों को समर्पित है। यह उत्सव हमें बच्चे के महत्व को बताता है। यह हमें याद दिलाता है कि हे मानव ! बच्चे देश का भविष्य है। वे अनमोल धन है। उनको सहेज कर रखना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। 

बच्चों के महत्व को पण्डित जवाहरलाल नेहरू भलीभांति समझते थे। नेहरू जयंती को बाल दिवस के रूप में मनाने की असली वजह यही है कि उन्होंने बच्चों के विकास पर बहुत ध्यान दिया। वे बच्चों से बहुत अधिक प्यार करते थे और उनके विकास में बहुत अधिक रूचि लेते थे। इसलिए पण्डित जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिन 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री होने के कारण उनके ऊपर जिम्मेदारियां भी कम न थी, बावजूद इसके अपनी व्यस्त दिनचर्या से बच्चों के लिए कुछ समय जरुर निकाल लेते और उस समय वे बालको के साथ खेलते थे, उनके मन को बहलाते थे, गरीब असहाय बच्चों की मदद करते थे। इतना ही नहीं बच्चे भी चाचा – चाचा करके उनसे मिलने को उत्सुक रहते, और उन्हें ‘चाचा नेहरू’ कहकर पुकारते थे एवं इस तरह वे ‘चाचा नेहरू’ के नाम से विश्व – विख्यात हो गये और इसी वजह से पंडित नेहरू के मृत्यु के बाद उनके जन्मदिवस को बाल दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

नेहरू जी प्रत्येक बच्चे में देश का भविष्य देखते थे और उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करवाना चाहते थे | वे कहते थे कि

“मैं हैरत में पड़ जाता हूँ जब देखता हूँ कि लोग किसी राष्ट्र का भविष्य जानने के लिए वहाँ के शहरों को देखते हैं, लेकिन जब मुझें हिंदुस्तान का भविष्य देखने की इच्छा होती है तो मैं केवल बच्चों की आँखों और उनके चेहरों को देखने की कोशिश करता हूँ क्योंकि वही मुझे आने वाले हिंदुस्तान की तस्वीर नजर आती है |”

बाल दिवस 1956 से चाचा नेहरू के जन्म दिवस के दिन मनाया जा रहा है और यह दिन पूरी तरह बच्चों को समर्पित एक महत्वपूर्ण दिन है। इसे देश के भावी कर्णधारों के बारे में सोचने, विचारने का एक दिन, या बच्चों की शिक्षा – दीक्षा, इनके भविष्य, इनकी वर्तमान दशा आदि के संबंध में चिंतन – मनन करने का एक अवसर कह सकते है। देश का पूरा का पूरा भविष्य बच्चों की उन्नति पर ही निर्भर है। अत: बाल दिवस हमें देश के बच्चों के बारे में विचार करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है।

बाल दिवस एक ऐसा पर्व है जो बच्चों के जीवन में नई आशा और उमंग का संचार करता है। यह उन बच्चों के बारे में सोचने का अवसर प्रदान करता है जो किसी कारणवश प्राथमिक शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। वे बच्चे जो बाल मजदूर हैं, वे बच्चे जो अनाथ हैं, वे बच्चे जो आतंक एवं भय के साए में जी रहे हैं, उनके लिए बाल दिवस का कोई खास महत्व नहीं रह जाता। विकलांग, एड्स से पीड़ित तथा झुग्गी – झोपड़ियों में दीन – हीन दशा में जीने वाले बच्चों के लिए बाल दिवस की क्या सार्थकता रह जाती है ! बाल दिवस के अवसर पर इन बच्चों के बारे में भी आत्म-मन्थन किया जाना चाहिए।

बच्चे मन के सच्चे होते है । घर, परिवार या स्कूल ये जहाँ भी रहते है अपनी मासूम आँखों, चंचल हरकतों और मनमोहक मुस्कान से सभी का दिल जीतते है। अब इसे भगवान् का आशीवार्द कहे या कुदरत का उपहार जो सम्भवतः सभी माता – पिता को बच्चे के रूप में मिलता है। 

बच्चे ईश्वर का दिया हुआ एक अनुपम वरदान होते है। देश का भविष्य होते हैं, पर यदि बच्चा असुरक्षित होगा, या वह बाल मजदूरी, बाल शोषण या अपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त होगा तो उसकी असफलता निश्चित है और उस देश का पतन भी निश्चित है।

बच्चा जब जन्म लेता है तो उस समय वह बड़ा मासूम होता हैं। देश का भविष्य इन्हीं बच्चों पर निर्भर होता हैं। इसलिए अभिभावकों, शिक्षकों और परिवार के अन्य सदस्यों से इनकी विशेष देख – रेख और सुरक्षा की आवश्यकता होती है क्योंकि जब ये बच्चे ही असुरक्षित रहंगे तो भला देश का भविष्य उज्ज्वल कैसे हो सकता है ? उनका आज, देश के आने वाले कल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 

ऐसे राष्ट्रीय पर्व सचमुच हमें याद दिलाते है कि उन्हें परिमार्जित और परिष्कृति कर एक बेहतर इन्सान बनाना हमारा कर्तव्य है। बच्चे देश के कर्णधार होते है। उन्हें परिमार्जित और परिष्कृति कर एक बेहतर इन्सान बनाना हर जन का कर्तव्य होता है, इसलिए बाल दिवस एक मौका या अवसर है की सभी लोग मिलकर इन गरीब, अनपढ़, असहाय बच्चों के लिए कुछ ऐसा करें जो उन्हें फलने फूलने का एक अच्छा माहौल दें।

बाल दिवस का सम्बन्ध बच्चों से है। बच्चे ही राष्ट्र के निर्माता हैं। इस अवसर पर हमें बच्चों के सामने आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए जिससे बच्चों को अपना चरित्र निर्माण करने की प्रेरणा मिले। यदि बचपन में ही उनमें देश भक्ति और चरित्र निर्माण की भावना पैदा हो जाएगी तो राष्ट्र का निर्माण स्वत: होता चलेगा। इस प्रकार बाल दिवस का आयोजन कर जहाँ बच्चों के चरित्र – निर्माण बढ़ावा दिया जा सकता है, वहाँ समाज को भी बच्चों के प्रति दायित्व का पता चल सकता है।

हम सभी के लिए यह प्रसन्नता की बात है कि बदलते वक्त के साथ आज भी महान शख्सियत चाचा नेहरू की वजह से उनके जन्मदिन के रूप में बाल दिवस के अवसर पर हमें बच्चे के महत्व को समझने का मौका मिला । बच्चों का संपूर्ण विकास हम सब के सहयोग के बिना संभव नहीं हो सकता । 

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