दशहरा पर हिंदी निबंध
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Vijayadashami Essay In Hindi | विजयदशमी (दशहरा) पर निबंध

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 दशहरा पर निबंध हिंदी में : Short Essay on Vijayadashami (Dussehra) for Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 In Hindi Language 

Dussehra Essay In Hindi
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दशहरा / असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दशहरा 2019 – Dussehra Essay In Hindi

Vijayadashami/Dussehra/Essay Hindi Mai विजयदशमी नौ दिनों तक चलने वाला एक लंबा और महत्वपूर्ण उत्सव हैं। यह हिन्दुओं का बहुत प्रसिद्ध पर्व है । इसके नौ दिन लोग भक्तिपूर्वक देवी दुर्गा की पूजा और रामलीला करते है और इन नवरात्रों का नवा – दसवाँ दिन ही पवित्र विजयादशमी का पर्व होता है। हिंदू कलेंडर के अनुसार, यह प्रतिवर्ष क्वार सुदी दशमी को मनाया जाता है। इसलिए इसको दशहरा भी कहते है । 

विजयदशमी का पर्व भारत के सभी हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन उत्तरी भारत में यह बहुत ही उमंग व उल्लास के साथ मनाया जाता है । पश्चिम बंगाल में यह दुर्गापूजा के रूप में मनाया जाता है ।

मनाने का कारण : 

हमारे देश में विजयदशमी पर्व का इतिहास बहुत पुराना है । वास्तव में यह ऋतु-परिवर्तन की सूचना देने वाला पर्व है । यह पर्व बताता है कि वर्षा ऋतु बीत गई है और सुहावनी शरद ऋतु आ गई है । 

विजयदशमी पर्व के विषय में यह मान्यता है कि इसी तिथि को श्री रामचंद्र जी ने राक्षसराज रावण को पराजित करके उसका बध किया था । इस प्रकार एक बड़े अन्यायी से संसार को मुक्त करके उन्होंने धर्म और न्याय की प्रतिष्ठा की थी ।

वर्णन

विजयदशमी का सबसे बड़ा आकर्षण ‘रामलीला’ है । कोई भारतीय ऐसा नहीं होगा, जिसने कभी-न-कभी और कहीं-न-कहीं रामलीला न देखी हो । राम की कथा का प्रचार हमारे देश में ही नहीं अपितु बाहर के भी अनेक देशों में है । उन देशों में भी रामलीला के प्रदर्शन हर साल होते हैं । इस सिलसिले में इंडोनेशिया का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है ।

हमारे देश में रामलीला का इतना प्रचार है कि छोटे – बड़े शहरों, नगरों के अतिरिक्त गाँवों में भी लोग बड़े उत्साह से इसका आयोजन करते हैं । नगरों में कई स्थानों पर एक साथ रामलीला होती है । राम-जन्म, सीता-स्वयंवर, लक्षमण-परशुराम-संवाद, सीता-हरण, हनुमान द्वारा लंका-दहन, लक्षम-मेघनाद-युद्ध आदि के दिन तो दर्शकों को अपार भीड़ रामलीला-मंडप में दिखाई देती है । सचमुच रामलीला के दिनों की चहल-पहल देखने योग्य होती है । रातभर दर्शकों का ताँता लगा रहता है ।

रामलीला का मंचन प्राय: तुलसीदास जी के संसार-प्रसिद्ध ग्रंथ ‘रामचरितमानस’ के आधार पर होता है । मंच के एक ओर बैठे व्यास जी ‘मानस’ की पंक्तियाँ गाते जाते हैं और उन्हीं के अनुसार पात्र अभिनय करके कथा आगे बढ़ाते हैं ।

अंतिम दिन की रामलीला रंगमंच पर न होकर खुले मैदान में होती है । जहाँ राम-रावण युद्ध होता है और राम रावण का बध करते हैं । उसके तुरंत बाद रावण का पुतला जलाया जाता है । इस पुतले को बनाने में कई दिन लग जाते हैं ।

विजयदशमी के दूसरे दिन भरत-मिलाप का उत्सव मनाया जाता है । उस दिन का दृश्य बड़ा हृदयहारी होता है । नंगे पैरों भागते हुए भरत बड़े भाई राम के चरणों पर गिर पड़ते हैं । श्रीराम अपने भाई को बीच में ही रोकर उन्हें अपनी विशाल भुजाओं में ले लेते हैं । इस दृश्य को देखकर सभी की आँखे आँसुओं से भर जाती हैं । 

दशहरा का ऐतिहासिक जुड़ाव राम की कथा से हैं, लेकिन यह त्यौहार दुष्ट व भयंकर राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय का भी प्रतीक है । लोक कथा के मुताबिक भगवती महिषमर्दिनी ने विजयादशमी की पूण्यतिथि को महिषासुर के आसुरी दर्प का दलन किया था । इसी कारण से यह पर्व विजयदशमी कहलाया।

वही एक अन्य लोक कथा के मुताबिक जगदम्बा ने अपनी विभिन्न शक्तियों के साथ शारदीय नौवरात्रि के नौ दिनों तक शुम्भ – निशुंभ की आसुरी सेना से युद्ध किया और अंत में दशमी के दिन क्रमशः दोनों का बध करके देवशक्तियों का त्राण किया और तब से विजयादशमी को माता आदि शक्ति की उस विजय गाथा के प्रतीक रूप में तथा महापुण्यकरी पर्व के रूप में मानाते है । इसीलिए इस पर्व का नाम विजयदशमी पड़ा।

दशहरा का महत्व 

दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों – काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, हिंसा, और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है । भारत के अधिकतर हिन्दू परिवारों में इस दिन कोई भी अच्छा कार्य करना शुभ माना जाता है । केरल में इस दिन औपचारिक रूप से शिक्षा आरम्भ होती है । यह शस्त्र पूजन की भी तिथि है । यह तिथि उत्तम होने के कारण नये कार्य का आरम्भ करने के लिए भी अत्यन्त शुभ माना जाता है । 

इस त्यौहार का अनोखा सांस्कृतिक पहलू भी है । भारत कृषि प्रधान देश है । जब किसान अपने खेत में फसल उगाकर अनाज रूपी सम्पति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का पारावार नहीं रहता । इस प्रसन्नता को वह भगवान की कृपा मानता है और उसे प्रकट करने के लिए दशहरा पूजन करता है ।

इस दिन महिलाएं सोने जैसी पीली-पीली जौ की नवीन कपोलों को अपने – अपने कानों में खोसे हुए गाते – बजाते गांव की सीमाएं लाँघकर दुसरे गांव वालों को देने जाती है । बहने अपने भाइयों के कानों में नौरते रखकर उपहार पाती है । शुक्लपक्ष की रामनवमी तक रामलीला होती है । इस दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन शुभ माने जाते है ।

बहरहाल विजयदशमी का नाम व परम्परायें अलग हैं, किन्तु पुरे भारत में उल्लास की लहर एक-सी होती है । यह सुन्दर त्योहार हमें सिखाता है कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है । इस त्यौहार से जुड़े सभी प्रसंग हमें सिखाते है कि बुराई अधिक समय तक नहीं टिकती, जबकि अच्छाई हमेशा राज करती है । 

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14 thoughts on “Vijayadashami Essay In Hindi | विजयदशमी (दशहरा) पर निबंध”

  1. दशहरा के ऊपर बहुत ही बढ़िया article लिखा है आपने। Share करने के लिए धन्यवाद। 🙂

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