Teachers Day Speech in Hindi
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शिक्षक दिवस भाषण और निबंध : Essay & Speech on Teacher’s Day in Hindi…-Take Care

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शिक्षक दिवस पर संक्षिप्त एवं सरल भाषण – 5 September Teacher’s Day Speech in Hindi, Long and Short Speech on Teacher’s Day of India in Hindi, Teacher’s Day Speech in Hindi, 5 सितम्बर भाषण 2019

Teacher’s Day Speech In Hindi : यहाँ दिया भाषण एवं निबन्ध राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने वाले शिक्षकों को सपर्पित हैं। छात्र और छात्राएं इन Teachers Day Speech & Essay का उपयोग अपने इस शिक्षक दिवस पर अपने आदरणीय गुरुओं के सम्मान में बोलने के लिए कर सकते हैं। यह Teachers Day Speech In Hindi गुरु और छात्र के रिश्ते को और भी मधुर बनाएगा।

Teachers Day Speech In Hindi
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शिक्षक दिवस पर भाषण (Very Easy & Best Bhashan/Speech on Teachers Day In Hindi Language)

Teachers Day Speech in Hindi – इस सभागार में उपस्थित सभी गणमान्य अथिति, अध्यापकों और प्यारे साथियों को मेरा नमस्कार, इस समाज की सच्ची संपत्ति शिक्षक हैं। वह जनमन के नायक, राष्ट्र के उन्नायक हैं। शिक्षक समाज के प्राण होते हैं। उनका हमारे जीवन में बड़ा महत्व है, कहते है अगर शिष्य झुके गुरु के आगे तो इंसान बन जाता है |

यह बिल्कुल सच है | शिक्षक हमारे विशेष मित्र की तरह हैं। तभी तो वह सामाजिक जीवन में कभी सच्चे मार्गदर्शक बनकर अपना फर्ज निभाते हैं तो कभी माता-पिता बनकर सच्ची सलाह देते हैं। वे हमें हर तरह से मार्गदर्शन करते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि कैसे शांति में रहना है। और एक – दूसरें से प्यार करना है। वे हमें अच्छे मार्ग बताते हैं। जो हमारे जीवन को चमकाता है। इन शिक्षकों से नव संदेश पाकर हमारा जीवन हमेशा से प्रेरित होता रहा है। अगर इनका सम्बल न होता तो हम जीवन में ना तो स्फूर्ति भर सकते है और ना सफलता पा सकते हैं। वास्तव में शिक्षक निश्चित रूप से फूलों के बीच गुलाब की तरह है।

जैसा की आप सबको ज्ञात है, आज हम यहाँ पर यहाँ आदरणीय गुरुओं की महत्ता के सम्मान के उपलक्ष्य में राष्ट्र के आदरणीय शिक्षकों को नमन करने और उनको सम्मानित करने के उद्देश्य से एकत्रित हुए है। यह दिन पूर्णतया शिक्षकों को समर्पित हैं। इस दिन सच्ची मानवता की भावना विकसित करने वाले सभी गुरुओं का श्रद्धापूर्वक शीश झुकाकर सम्मान करते हैं ।

इस दिन को हर साल पूरा भारत राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के तौर पर मनाता  है। इस दिन का मतलब सिर्फ गुरुओं को सम्मानित करना या श्रद्धांजलि देना नहीं हैं, बल्कि एक कृतज्ञ हृदय से उनका आभार प्रकट करना भी हैं।

इस अवसर पर महान दार्शनिक डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का भी अभिनन्दन करते हैं जो की हमारे पूर्व राष्ट्रपति, शिक्षक एवं महान दार्शनिक भी रहे थे । और जिनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने के कारण इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता हैं । इस महामानव का इसी दिन जन्मदिन होता है, उनके जन्मदिन को टीचर्स डे के रूप में मनाना हम सब के लिए वाकई बड़े ही गर्व की बात है । इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में 1962 से मना रहें हैं।

दरअसल डा. साहब ने ही सर्वप्रथम अपने जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी । स्वतंत्रता के बाद डा. राजेंद्र प्रसाद के राष्ट्रपति बनने पर उपराष्ट्रपति के पद के लिये डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को चुना गया । इस दौरान उन्होंने अपनी योग्यता के बूते एक अध्यापक से लेकर देश के सर्वोच्च पद को सुशोभित किया ।

वे एक ऊँचे दर्जे के इंसान थे । अध्ययन – अध्यापन से उन्हें गहरा लगाव था । शीर्ष पद पर पहुँचने पर भी ये अपने आप को अध्यापक ही मानते थे । उस दौरान इनके कुछ शिष्यों ने डा. साहब से अपनी इच्छा जाहिर की कि वे उनके जन्म तिथि 5 सितबंर को teachers day के तौर पर मनाना चाहते है । इन्होंने उनकी इच्छा को स्वीकृति प्रदान कर न केवल उन्हें अपितु समस्त शिक्षकगण को गौरवान्वित किया ।

डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अध्यापक वर्ग का सदैव मान बढाया । ये हमेशा से चाहते थे कि गुरु और शिष्य का रिश्ता सदैव मधुर हो, शिक्षक का समाज में गौरवपूर्ण स्थान हो क्योंकि शिक्षक ही देश के भावी कर्णधारों का निर्माता होता है । वह कई पीढीयों को जिम्मेदार बनाते है । इसीलिए हर साल इनके जन्म तिथि को टीचर्स डे मनाकर हम सब डा. साहब के शिक्षा के क्षेत्र में किये गए अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें याद कर सच्ची श्रद्धांजलि देते है । 

शिक्षक बनना इस दुनिया का सबसे महान कार्य है, इस कार्य से उत्तम अन्य कोई कार्य नहीं है । शिक्षक बनकर ही मानवीय मूल्यों को उजागर किया जा सकता है। प्रत्येक राष्ट्र और देश का महानायक एक सच्चा शिक्षक अथवा गुरु ही होता हैं । वह किसी पद या सम्मान का मोहताज नहीं होता है बल्कि पद और सम्मान उनके नाम से गरिमामय हो जाता हैं । शिक्षक ही देश के अनमोल रत्न हैं । एक शिक्षक की भूमिका समाज निर्माण में अक्षुण्ण और अतुलनीय है । वास्तव में इस समाज की सच्ची संपत्ति शिक्षक हैं। वह जनमन के नायक, राष्ट्र के उन्नायक होते हैं। शिक्षक देश और समाज का प्राण होते हैं।

व्यक्ति के जीवन की भांति ही समाज जीवन में श्री गुरु का महत्व है । कहते है अगर शिष्य झुके गुरु के आगे तो इंसान बन जाता है । इस संसार में गुरु और शिष्य से बहुमूल्य कोई रिश्ता नहीं हैं। विद्यार्थी जीवन में गुरु की भूमिका वही है जो एक कुम्हार की होती है। विद्यार्थी कच्ची मिट्टी का ढेला होता है,  गुरु जिसे जीवन लक्ष्य प्राप्ति की ओर प्रवृत्ति करता है।

गुरु ही है जो बच्चों को अच्छे रास्ते पर जाने की सीख देते हैं, यही नहीं गुरु भी यही चाहते है कि वह अपने शिष्य को अच्छे से पढ़ायें, शिक्षा दें । आजकल इस दुनिया में जितने भी डॉक्टर या इंजीनियर हुए है वो सब भी शिक्षक से ही शिक्षा प्राप्त कर इतने बड़े बने है ।

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कोई भी व्यक्ति बिना किसी शिक्षक के पढाये बड़ा नहीं बन सकता क्योंकि अगर हम चमन के फूल है तो शिक्षक बागवान है शिक्षक ही वह इंसान है जो दुनिया को सन्मार्ग दिखाता है

शिक्षक हमारे विशेष मित्र की तरह हैं। वह सामाजिक जीवन में कभी सच्चे मार्गदर्शक बनकर अपना फर्ज निभाते हैं तो कभी माता-पिता बनकर सच्ची सलाह देते हैं। वे हर तरह से मार्गदर्शन करते हैं। वे सिखाते हैं कि कैसे शांति में रहना है। और एक – दूसरें से प्यार करना है। वे अच्छे मार्ग बताते हैं जो हमारे जीवन को चमकाता है।

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इन शिक्षकों से नव संदेश पाकर हमारा जीवन हमेशा से प्रेरित होता रहा है। अगर इनका सम्बल न होता तो हम जीवन में ना तो स्फूर्ति भर सकते है और ना सफलता पा सकते हैं। वास्तव में शिक्षक निश्चित रूप से फूलों के बीच गुलाब की तरह है। वह आदर्श विद्यार्थी के रूप में समाज और राष्ट्र को ऐसी सम्पत्ति देते हैं जिसे पाकर समाज और राष्ट्र युगों – युगों तक शांति और आनन्द का उपभोग करता है।

इसलिए हमें अपने गुरु को मान-सम्मान देना चाहिए अगर हम इस दुनिया को रौशन करने के काबिल हुए है तो वह गुरु की कृपा से ही हुए है इसीलिए तो गुरु को साक्षात ईश्वर माना गया है –

गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वर: |

गुरु: साक्षात् परब्रह्मा, तस्मै श्रीगुरुवे नम: ||

कबीर दास जी ने भी गुरु को ईश्वर से उच्च स्थान दिया है –

गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लांगू पाँय |

बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय ||

शिक्षक दिवस का महत्व (Teachers Day Ka Mahatav)

हमारे धर्म में यह बतलाया गया है कि गुरु और परमात्मा के प्रति एक सी ही श्रद्धा रखनी चाहिए ‘यस्य देवे परा भक्तियर्था देवे तथागुरौ’ गुरु और परमात्मा की महत्ता ऐसी ही बताई गई है वास्तव में शिक्षक दिवस मनाने का उद्देश्य गुरुत्व की इस महत्ता में ही निहित है

यह दिन अध्यापक और विद्यार्थी का रिश्ता और भी मधुर बनाता है क्योंकि वह शिक्षक ही है जो खुद जलकर अपने विद्यार्थी को रौशन करता है अध्यापक विद्यार्थियों को सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहता अपितु उसका मकसद समाज की हर एक बात बताना होता है ताकि आगे चलकर विद्यार्थी ठोकर न खाए तथा भविष्य में वह इस बात को औरों को भी समझाए

अध्यापक और विद्यार्थी के रिश्ते को भले ही कोई नाम न दिया गया हो लेकिन यह सबसे अनमोल व कीमती रिश्ता है समाज के निर्माण में गुरु का महत्वपूर्ण योगदान रहा है शिक्षक समुदाय का सम्मान कर भारत ने एक समय विश्व गुरु होने का स्थान प्राप्त किया था हम सब को एक बार फिर शिक्षको को वैसा ही उत्कृष्ट सम्मान देना होगा ताकि भारत समस्त विश्व में ज्ञान का प्रकाश स्तम्भ बन सके

अध्यापक / शिक्षक दिवस पर निबन्ध – Best Essay on Teachers Day in Hindi

हमारे यहाँ के विशिष्ट दिन या तो ऐतिहासिक हैं अथवा धार्मिक, परन्तु कुछ ऐसे दिन होते है जो मानवीय मूल्यों को उजागर करते हैं। ऐसा ही एक विशेष दिन शिक्षक दिवस हैं। इसे शिक्षकों के सम्मान के उद्देश्य से हर वर्ष 5 सितम्बर को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के तौर पर मनाया जाता है।  वास्तव में इस समाज की सच्ची संपत्ति शिक्षक हैं। वह जनमानस के नायक, राष्ट्र के उन्नायक हैं।

शिक्षक का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है, कहते है अगर शिष्य झुके गुरु के आगे तो इंसान बन जाता है | यह बिल्कुल सच है | गुरु हमारे विशेष मित्र की तरह हैं। तभी तो वह सामाजिक जीवन में कभी सच्चे मार्गदर्शक बनकर अपना फर्ज निभाते हैं तो कभी माता-पिता बनकर सच्ची सलाह देते हैं। वे हमें हर तरह से मार्गदर्शन करते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि कैसे शांति में रहना है। और एक – दूसरें से प्यार करना है। वे हमें अच्छे मार्ग बताते हैं। जो हमारे जीवन को चमकाता है।

शिक्षकों से नव संदेश पाकर हमारा जीवन हमेशा से प्रेरित होता रहा है।  अगर इनका सम्बल न होता तो हम जीवन में ना तो स्फूर्ति भर सकते है और ना सफलता पा सकते हैं। वास्तव में शिक्षक निश्चित रूप से फूलों के बीच गुलाब की तरह है। शिक्षक दिवस मनाने का मतलब गुरुओं को सम्मानित करना और कृतज्ञ हृदय से उनका आभार प्रकट करना है | 

अध्यापक अथवा गुरु का अर्थ

कुछ गुरु कहते हैं कुछ उन्हें अध्यापक कहते हैं और कुछ शिक्षक कहते हैं। लोगों ने अपनी अपनी श्रद्धा, निष्ठां और समर्पण के आधार पर आदरणीय गुरुओं को अनेक नाम दिए हैं । शास्त्रों में गुरु के अर्थ के बारे में बताया गया है कि ‘गू’ का अर्थ होता है अंधकार अथवा अज्ञान और ‘रू’ का अर्थ होता है प्रकाश (ज्ञान) अर्थात गुरु व्यक्ति को अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाता है। इसीलिए गुरु को साक्षात् ईश्वर माना गया है |

राष्ट्र निर्माण में अध्यापक / शिक्षक का महत्व

जिस प्रकार शब्द से अर्थ को और अर्थ से शब्द को, शरीर से प्राण को और प्राण से शरीर को पृथक नहीं किया जा सकता उसी प्रकार हम राष्ट्र को भी शिक्षक से पृथक नहीं कर सकते और न शिक्षक को राष्ट्र से।

जिस प्रकार शरीर और प्राण अन्योन्याश्रित हैं, बिना शरीर के प्राण का अस्तित्व नहीं और बिना प्राणों के शरीर का महत्व नहीं ठीक उसी प्रकार शिक्षक प्राण है और राष्ट्र उसका शरीर। जिस प्रकार निर्जीव शरीर का कोई मूल्य नहीं होता उसी प्रकार शिक्षक विहीन राष्ट्र का कोई मूल्य नहीं।

यदि शिक्षक योग्य हैं, चरित्रवान है तो राष्ट्र भी योग्य होगा, चरित्रवान होगा और यदि शिक्षक का अभाव है, तो राष्ट्र का जीवित रहना भी दुर्लभ है। आज नहीं तो कल उसकी संस्कृति, उसकी सभ्यता निश्चित ही नष्ट हो जायेगी। निर्जीव राष्ट्र चिरस्थायी नहीं रह सकता।

शिक्षक और समाज का सम्बन्ध

शिक्षक और समाज का आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है। उसका स्थान समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वह समाज और राष्ट्र का वास्तव में सच्चा गुरु होता है। 

समाज और देश की उन्नति एवं अवनति बहुत कुछ शिक्षकों पर ही निर्भर करती है। वह देश और समाज बहुत सौभाग्यशाली है जिसमें योग्य और चरित्रवान शिक्षकों की अधिकता है। समाज और राष्ट्र का हित योग्य शिक्षकों पर ही निर्भर करता है। इसलिए अध्यापक का कार्य ऐसे शिक्षकों को सौंपा जाता है जो योग्य और चरित्रवान होते हैं। पाश्चात्य देशों में अध्यापकों के निर्माण में बड़ी सतर्कता एवं सावधानी बरती जाती है।

एक सम्मानित या आदर्श शिक्षक किसे कहेगे ?

आदर्श अध्यापक/ शिक्षक का क्षेत्र बहुत विस्तृत है | जब भी एक आदर्श शिक्षक की बात होती हैं तो जो छवि सबसे पहले मन में उभरती है वह सादा जीवन उच्च विचार वाले अध्यापक की होती हैं। वास्तव में एक आदर्श शिक्षक “जो सतत अध्यापन करता हैं, उसे कहते हैं” शिक्षक की परिभाषा देखने में तो छोटी है, परन्तु इसमें भी समाज और देश के कल्याण की भावना अंतर्निहित है। शिक्षक वास्तव में देश और समाज का प्राण है। समाज और देश के भावी निर्माण का भार शिक्षक के कन्धों पर ही है। हमारे प्राचीन गुरु/शिक्षक संसार के अन्य किसी गुरु की अपेक्षा अधिक समृद्ध थे। हमारे देश को विश्व के लोग जगद्गुरु कहते है। हमारी संस्कृति में गुरु को माता-पिता तथा ईश्वर से भी अधिक सम्मान दिया गया है। कबीरदास जी ने तो गुरु को ईश्वर से बड़ा बताकर कहा है कि यदि गुरु और ईश्वर दोनों खड़े हों तो मैं पहले ईश्वर के नहीं गुरु के चरणों का ही स्पर्श करूँगा क्योंकि गुरु ने ही मुझे ईश्वर की पहचान कराई है।

शिक्षक और विद्यार्थी का रिश्ता

विद्यार्थी जीवन में गुरु की भूमिका वही है जो एक कुम्हार की होती है। विद्यार्थी कच्ची मिट्टी का ढेला होता है,  गुरु जिसे जीवन लक्ष्य प्राप्ति की ओर प्रवृत्ति करता है। अपने व्यापक अर्थों में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में मार्गदर्शन करने वाले को आदरणीय गुरु की प्रतिष्ठा दी गई हैं।

शिक्षक विद्यार्थी के लिए पिता, भाई और मित्र के समान होता है। शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते से सच्चा और मधुर कोई रिश्ता नहीं होता है। इस समाज ने हर रिश्ते को नाम दिया, किन्तु विद्यार्थी और शिक्षक के रिश्ते का कोई नाम नहीं दिया।

शिक्षक तो वह दिया है जो खुद जलकर अपने छात्रों को योग्य एवं चरित्रवान बनाता है। शिक्षक विद्यार्थी को सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहता अपितु उनका मकसद समाज की हर एक बात बताना है। ताकि आगे चलकर विद्यार्थी ठोकर न खाए तथा भविष्य में वह इस बात को औरों को भी समझाए।

सच में एक शिक्षक उस देवता के समान होता है जो निस्वार्थ भावना से रात – दिन छात्र-हित में ही कार्य करता है। शिक्षक का जीवन तपोमय होता है। उसका हृदय नवनीत सा कोमल और स्वच्छ होता है। उसके चरित्र में दृढ़ता और हृदय विशाल होता है। समाज के सर्वश्रेष्ठ गुण ही शिक्षक में केन्द्रित होकर उसे ‘आदर्श’ शब्द से विभूषित करते हैं।

एक विद्वान शिक्षक का सभी विषयों पर समान अधिकार होता है। पाठ्य विषयों को छात्रों के सामने किस प्रकार प्रस्तुत करना चाहिए और किस तरह समझाना चाहिए, शिक्षक इस कला में अत्यंत ही कुशल होता है। वह विषय के प्रत्येक अंश पर सरलता के साथ प्रकाश डालता है। उसकी सम्पूर्ण चेष्टा केवल इसी बात की ओर रहती है कि वह जिस विषय को पढ़ा रहा है वह छात्रों के हृदयपट पर सही तरह से अंकित हो जाए। वह छात्रों के ज्ञान और विकास में अपनी महान सफलता देखता है। वह अपने समय को व्यर्थ नष्ट नहीं करता है।

प्रेम से ओतप्रोत शिक्षक अपने छात्रों को अनुशासन में रखता है, पर उसके अनुशासन में दृढ़ता होती है कठोरता नहीं। सच्चा शिक्षक कभी भी किसी परिस्तिथि में असत्य भाषण नहीं करता। वह सदैव ईश्वर के प्रति समर्पित रहता है।

सच्चा गुरु आदर्श विद्यार्थियों के रूप में समाज और राष्ट्र को जीवन और जागृत का दान प्रदान करता है। वह समाज और राष्ट्र को ऐसी सम्पत्ति देता है जिसे पाकर समाज और राष्ट्र युगों -युगों तक शान्ति और आनन्द का उपभोग करता है।

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16 thoughts on “शिक्षक दिवस भाषण और निबंध : Essay & Speech on Teacher’s Day in Hindi…-Take Care”

  1. शिक्षक दिवस पर बहुत ही सुन्दर लेख लिखा है आपने ,एक शिक्षक ही अपने ज्ञान से बच्चों को उत्तम ज्ञान से लाभान्वित करता है ,और बच्चों को एक सही दिशा देता है ,शिक्षक दिवस पर बहुत ही अच्छा लेख लिखा गया है इसके लिए आप सभी को शिक्षक दिवस की बधाई हो

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