Ganesh chaturthi vrat pooja vidhi
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भाद्रपद गणेश चतुर्थी व्रत कथा का महत्व एवं पूजा विधि (Ganesh chaturthi vrat pooja vidhi in hindi)

गणेश / विनायक चतुर्थी का महत्व, व्रत कथा एवं पूजा विधि (Ganesh chaturthi vrat pooja vidhi in hindi

 सर्वप्रथम khayalrakhe.com के सभी पाठकों को गणेश चतुर्थी पर्व की अग्रिम शुभकामानाएं | दोस्तों गणेश चतुर्थी का त्यौहार सम्पूर्ण भारत वर्ष में प्रसिद्द है किन्तु हिन्दुओं में इसकी मान्यता सर्वाधिक है | हर साल अगस्त या सितंबर महीने में आने वाले इस पर्व को देश भर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | इस साल यानि २०१७ में गणेश या ढेला चतुर्थी 25 अगस्त  के शुभ दिन मनाया जायेगा | इस बार विघ्नहर्ता 10 दिन के लिए नहीं बल्कि 11 दिन के लिए पधार रहें हैं | यहाँ पर हम आपको इस लेख के द्वारा ganesh chaturthi ka mahatv in hindi /ganesh chaturthi vrat vidhi in hindi/ganesh chaturthi  pooja vidhi in hindi/bhadrapada ganesh chaturthi vrat pooja vidhi & katha हिंदी में उपलब्ध करा रही हूँ |
Ganesh chaturthi vrat pooja vidhi
Ganesh chaturthi vrat pooja vidhi in hindi

गणेश चतुर्थी व्रत पूजा विधि (Ganesh chaturthi vrat pooja vidhi in hindi) 

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता है | इसे “विनायक चतुर्थी” या “ढेला चतुर्थी” भी कहते है | इसी शुभ दिन में गणेश जी का जन्म हुआ था | इसलिए इस तिथि को गणेश उत्सव के रूप में पूरे देश में उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र में यह उत्सव राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है |

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गणेश चतुर्थी व्रत विधि (Ganesh chaturthi vrat vidhi)

इस व्रत को विधिपूर्वक एवं श्रद्धा – विश्वास के साथ करने से अभीष्ट की सिद्धि होती है | गणेश चतुर्थी की व्रत विधि इस प्रकार है :

महाफलदायी इस व्रत में विघ्नहर्ता की सभी मनपसंद वस्तुएं अर्पित की जाती है | ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी की तिथि श्रीगणेश भगवान की उत्त्पत्ति होने के कारण यह तिथि इन्हें अत्यंत प्रिय है | अगर आज के दिन इन्हें शुद्ध घी में बने मोदक का प्रसाद चढ़ाया जाएं तो इन्हें अत्यधिक प्रसन्नता होती है |

कही कही पर आज के दिन दही से भरे हुए कलश तथा फल हाथ में लेकर गाय के खुर के निशान में गाय के दूध में चन्द्रमा की परछाई का दर्शन करना शुभ माना जाता है |

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इस दिन को इक्कीस लड्डुओं का भोग लगाया जाता है जिसमें से पांच गणेश मूर्ति पर चढ़ाते है, पांच ब्राह्मण को देते है और शेष बचे लड्डू को प्रसाद के तौर पर परिवार के सभी सदस्यों को देते है | अगर कोई साधक पवित्रभाव से गणेश चतुर्थी का व्रत करता है तो उसकी बुद्धि एवं चित्तवृत्ति शुद्ध होती है | गणेश चतुर्थी के व्रत में गणेश मंत्र के जप से प्रभाव बहुगुणित हो जाता है |

गणेश चतुर्थी पूजा विधि (Ganesh chaturthi pooja vidhi)

गणेश चतुर्थी व्रत पूजा विधि
गणेश चतुर्थी व्रत पूजा विधि

गजानन बुद्धि और कर्म के देवता माने गए हैं | बिना इनकी कृपा से भवसागर पार नहीं किया जा सकता है | इसलिए किसी भी मांगलिक कार्य में सबसे पहले गणपति का ध्यान और प्रर्थना किया जाता है |

वक्रतुण्ड महाकाय, कोटिसुर्यसमप्रभ: |

निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा  ||

गणेश पूजन के संदर्भ में ऐसी मान्यता है कि यह इक्कीस दुःख विनाश का प्रतीक है | इसलिए गणेश चतुर्थी के व्रत में विनायक की पूजा प्रांत भेद से, सुपारी, मिट्टी, हल्दी की बुकनी, गोमय, दूर्वा आदि से आवह्नादी के द्वारा होती है | पूजा के अवसर पर दूर्वायुग्म अर्थात दो – दूर्वा तथा हवन के लिए तीन – दूर्वा का विधान तंत्रशास्त्र में मिलता है |

दूर्वा का अर्थ जीव होता है –  जीव पृथ्वी पर सुख और दुःख को भोगने के लिए जन्म लेता है | इस सुख – दुःख रूप द्वंद्व को दूर्वा – युग्म से सपर्पित किया जाता है | जिस प्रकार जीव जन्म – जन्मांतर में अर्जित पुण्य और पापों के फलस्वरूप बार – बार जन्म लेता है, उसी प्रकार दूर्वा अपनी अनेक जड़ों से जन्म लेती है |

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इस दिन पवित्रभाव से इनकी पूजा करने से सभी विघ्नों को हर लेते है | इसलिए इन्हें सिद्धिविनायक दुखहर्ता भी कहते है | तो आयिए जानते है गणेश चतुर्थी की पूजा कैसे करें –

  • प्रात:काल नित्यादी क्रियाओं से निवृति होने के बाद पूजन के लिए सोने, तांबे, मिट्टी, अथवा गौ के गोबर की गणेशजी की प्रतिमा बना लेनी चाहिए |
  • इसके बाद कोरे घड़े में जल भरना चाहिए | उस घड़े के मुख पर नया कपड़ा बिछाकर उस पर गणेशजी की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए |
  • सभी पूजन सामग्री (पुष्प, दूर्वा, धूप, दीप, कपूर, लाल मौली, रोली, चंदन, मोदक, शमी के पत्ते, सुपारी) आदि को व्यवस्थित कर लेना चाहिए |
  • तत्पश्चात शुद्ध आसन पर बैठकर गणेश भगवान का ध्यान कर लड्डू रखकर षोडशोपचार से विधिवत् पूजन करना चाहिए |
  • इसके बाद गडाधिप, उमापुत्र, अघनाशक, विनायक, ईशपुत्र, सर्वसिद्धप्रद, एकदंत, इभवक्म, मूषकवाहन तथा कुमारगुरु नाम बारी – बारी से लेकर सिद्धिविनायक का आह्वान करना चाहिए |
  • अब आसन, पाद्य, अर्घ, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध और पुष्पादि से पूजन कर के पुनः अंग पूजा करनी चाहिए तथा धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन, पान और दक्षिणा के बाद आरती उतारनी चाहिए तथा नमस्कार करना चाहिए |
  • चतुर्थी के मध्यान्ह में सोलह लड्डू और दक्षिणा सहित ब्राह्मणों को देने चाहिए |
  • रात्रि में जब चंद्रोदय हो जाए, तब चन्द्रमा का यथाविधि पूजन करके अर्घ प्रदान करना चाहिए |
  • आखिर में ब्राह्मणों को भोजन कराकर और स्वयं मौन रहकर गणेशजी के आगे रखें पांच लड्डुओं का भोजन करना चाहिए |

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गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा (Ganesh chaturthi vrat katha in hindi)

गणेश चतुर्थी का प्रतीकार्थ गणेश जन्म की एक कथा में निहित है | वह कथा इस प्रकार है :

एक बार भाद्रपद मास शुक्ला चतुर्थी को शिवजी स्नान करने के लिए कैलाश पर्वत से भोगावतीपुरी गए | पीछे से अभ्यंग स्नान करते हुए पार्वती ने अपनी देह के मल से एक पुतला बनाया और जल में डालकर उसमें प्राण डाल दिए | तत्पश्चात उसे आदेश दिया कि तुम मुद्गर लेकर द्वार पर बैठ जाओ और किसी भी पुरुष को अन्दर न आने दो | इस पुतले ने वैसा ही किया |

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जब भोगावतीपुरी से स्नान करके शिवजी वापस लौटे और पार्वती जी के पास भीतर जाने लगे तब उस पुतले ने उन्हें रोक दिया | इससे शिव जी क्रोध में भर गए और उन्होंने तत्काल उसका सर धड़ से अलग कर दिया तथा अन्दर चले गए |

पति का तमतमाता हुआ चेहरा देखकर पार्वती ने समझा कि भोजन में विलम्ब हो जाने के कारण ही इन्हें क्रोध चढ़ आया है | इसलिए उन्होंने तत्काल आहार तैयार करके दो थालों में परोस दिया | उन्हें देखकर शिवजी ने पूछा दूसरी थाली किसके लिए है |

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पार्वती ने गणेश का नाम बतलाया | इतना सुनते ही शिव जी कह उठे, “मैंने तो तुम्हारें गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया है |” इतना सुनते ही पार्वती व्याकुल हो उठी और उन्हें जीवित करने के लिए शिव जी से अनुरोध करने लगी |

शिव जी ने पार्वती को प्रसन्न करने के लिए हाथी के नवजात शिशु का सिर काटकर गणेश के धड़ से लगा दिया और उसमें प्राण फूंक दिए | पार्वती गणेश को जीवित देखकर अति प्रसन्न हुई |

गणेश चतुर्थी का अध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्त्व

गणेश चतुर्थी का बड़ा अध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्त्व है | विघ्नहर्ता गणेश जी को विनायक भी कहते है | विनायक शब्द का अर्थ है – विशिष्ट नायक | जिसका नायक – नियंता विगत है अथवा विशेष रूप से ले जाने वाला | वैदिक मतानुसार सभी कार्यों के आरंभ में जिस देवता का पूजन होता है- वह विनायक है |

विनायक भगवान भुतत्त्वरूपी माने जाते हैं | ‘महोमूलाधार’ इस प्रमाण से मूलाधार भुतत्त्व है | अर्थात मूलाधार में भुतत्त्वरूपी गणेश विराजमान हैं | गणपति के ‘ग्लीं’ बीज का विचार करने पर पता चलता है – इस सृष्टि क्रम के अनुसार ‘गकार’ खबीज और ‘लकार’ भूबीज – इनके योग से पंचभूतात्मक गणेश हैं | अत: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के पूजन के लिए प्राचीनकाल में मिट्टी से गणपति की मूर्ति बनाकर पूजन किया जाता था |

विनायक चतुर्थी व्रत सिंहस्थ, सूर्य, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी और हस्त नक्षत्र के योग में होता है | यह योग बुद्धवार को पड़ जाए तो इसका विशेष महत्व माना जाता है |आज के दिन गणपति की सुन्दर – सुन्दर प्रतिमाएं बनाकर उनका पूजन और व्रत किया जाता है | इस दिन अनेक विशिष्ट प्रयोग संपन्न किए जाते है एवं आज के दिन को प्रत्येक नए कार्य को आरम्भ करने और विद्द्याध्ययन के आरम्भ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है |

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महाराष्ट्र में श्री गणेश उत्सव को महत्वपूर्ण बनाने का श्रेय लोकमान्य बालगंगाधर तिलक दिया जाता है | उन्होंने  “गणपतिबप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया” की गूंज से सभी को एक सूत्र में बांध दिया | उत्सव में लोग भजन, कीर्तन एवं प्रवचन के द्वारा दिलों में एकता, भाईचारा एवं देशभक्ति की भावना जगाने लगे |

वर्षो पूर्व बालगङ्गाधर तिलक ने गणेश उत्सव की जिस महत्वपूर्ण परम्परा की धूम – धाम से शुरुआत की थी आज भी यह उत्सव उतनी ही धूम – धाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | घर – घर में लोग गणपति की मूर्ति लाकर उसकी पूजा करते है | यह मूर्ति घर में कितने दिन रखी जाये, यह उस घर की परम्परा पर निर्भर करती है | कही – कही पर सार्वजनिक गणपति की भी स्थापना की जाती है |

गणेश या विनायक चतुर्थी की सबसे बड़ी विशेषता यह है की पूरा राष्ट्र इसे गणेश उत्सव के रूप में मनाता है और परम्परानुसार अनंत चतुर्थी के दिन जुलूस के रूप में गणेश जी की प्रतिमा को नदी या तालाब के पानी में अगले वर्ष जल्दी आने के लिए कहकर विसर्जित करता है |

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12 thoughts on “भाद्रपद गणेश चतुर्थी व्रत कथा का महत्व एवं पूजा विधि (Ganesh chaturthi vrat pooja vidhi in hindi)”

  1. विघ्नहर्ता गणेश जी के प्रमुख पर्व ” गणेश चतुर्थी ” की पूजा विधि , महात्म व् महत्व आदि की विस्तृत जानकारी उपलब्द्ध करने के लिए शुक्रिया |

  2. गणेश चतुर्थी की पूजा विधि और गणेश जी के जन्म से जुडी कहानी को बहुत अच्छी तरह से प्रस्तुत किया आपने. थैंक्स फॉर शेयरिंग बबीता जी…..

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