अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya)
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अक्षय तृतीया (अक्षय तीज) व्रत पूजा विधि और कथा – Akshaya Tritiya Vrat Pooja Vidhi in Hindi

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya)

Akshaya Tritiya Vrat Pooja Vidhi in Hindi : अक्षय तृतीया हिन्दुओं के लिए एक पवित्र दिन है | इसे हिन्दू कैलेण्डर के मुताबिक बैशाख मास की तृतीया को मनाई जाती है | यह अमावस्या के बाद की वह अवधि होती हैं जिसमें चन्द्रमा बढ़ता है | यह तिथि हमेशा बैशाख मास के शुक्ल पक्ष में ही आती है | अक्षय तृतीया को आखा तीज और अक्षय तीज भी कहा जाता है | पौराणिक ग्रंथों के अनुसार ये मान्यता है कि इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता हैं | अक्षय तृतीया के दिन से ही सतयुग का प्रारम्भ भी माना जाता है |

अक्षय तृतीया का अर्थ, महत्व व व्रत पूजा विधि (Akshaya Tritiya – Meaning, Importance, Vrat, Pooja Vidhi in Hindi)

अक्षय का मतलब होता है जिसका नाश न हो | इस दिन सुबह स्नान के बाद उपवास करने के संकल्प के साथ पंच देवों का पूजन, हवन और दान – पुण्य करने से सभी पापों का नाश होता है | और कभी न खत्म होने वाले शुभ फल की प्राप्ति होती है | इस दिन लड्डू और पंखियों को दक्षिणा के रूप में दान करना भी विशेष महत्व रखता है |

अक्षय तृतीया की पूजन विधि   

इस दिन धन की देवी लक्ष्मी तथा भगवान विष्णु की पूजा की जाती है | सूर्योदय स्नान के बाद माँ लक्ष्मी तथा भगवान विष्णु की आराधना कर निम्न मंत्र से व्रत रखने का संकल्प लें –

ममाखिलपापक्षयपूर्वक सकल शुभ फल प्राप्तये

भगवत्प्रीतिकामनया देवत्रयपूजनमहं करिष्ये |

संकल्प करने के बाद विष्णु भगवान को पंचामृत में तुलसी के पत्ते डालकर स्नान कराएं |  अक्षत, पुष्प (सफेद कमल या सफ़ेद गुलाब), नैवद्य में जौ या गेहूँ का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल को अर्पित करें | अंत में भक्तिपूर्वक माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती करें |

अक्षय तृतीया की कथा Akshaya Tritiya Ki Katha

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) की यह कथा महाभारत और भगवद् गीता में मिलती है | एक बार राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से इस पर्व के महात्म्य के बारे में पूछा, तो उन्होंने यह कथा सुनाई –

“ बहुत समय पहले की बात है | किसी गाँव में एक बनिया रहता था | उसकी जिह्वा पर सदा सरस्वती का वास रहता था और वह कभी भी झूठ नहीं बोलता था | उसका मन देवी, देवताओं के पूजा – पाठ में बहुत लगता था | परन्तु वह अपने परिवार के लिए हमेशा चिन्तिंत रहता था |

एक दिन उसने कही पर अक्षय तृतीया का महात्म्य सुना | उस महात्म्य को सुनकर उसके मन में यह उत्कंठा जगी कि मैं भी इस व्रत को करूँगा |

उसने व्रत रखा और अपने सामर्थ्य अनुसार दान भी दिया | इस व्रत के प्रभाव से ही मरने के उपरांत वह राजा के घर में पैदा हुआ | ऐसा माना जाता है कि तभी से Akshaya तृतीया पर्व हर साल मनाया जाने लगा |

अक्षय तृतीया पर्व को मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है 

यमदग्नि के पांच पुत्र थे | इनमे से पशुराम सभी भाईयों में कनिष्ठ थे | यमदग्नि के आश्रम में कामधेनू नाम की एक गाय थी | उसकी विशेषता थी कि यह सभी इच्छाओं की पूर्ति करती थी |

हैहय राजा अर्जुन एक बार शिकार खेलते रहे थे | जब वे यमदग्नि के आश्रम के पास पहुंचे तो आश्रम में उन्होंने एक गाय देखा | उनके मन में यह इच्छा हुई, यदि ये सुन्दर गाय हमारे महल में होती तो अच्छा होता |

अर्जुन ने यमदग्नि से आग्रह किया कि वह गाय उन्हें दे दे | लेकिन यमदग्नि ऋषि ने गाय देने से मना कर दिया | इस पर अर्जुन को बहुत क्रोध आया और उन्होंने यमदग्नि को मौत के घाट उतार दिया | जब यह घटना घटी उस वक्त उनके कनिष्ठ पुत्र परशुराम वहा नहीं थे |

जब परशुराम आए तो उनकी माँ ने सारा वृतांत बेटे को बताया | सुनते ही परशुराम क्रोध से भर उठे और उन्होंने यह प्रतिज्ञा ली कि अपने बल – पराक्रम से इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रिय हीन करूँगा और परमार्थ के लिए दान दक्षिणा दूंगा |

इस प्रकार परशुराम ने अपनी प्रतिज्ञा अनुसार राजा के साथ – साथ इक्कीस बार क्षत्रियों का ध्वंश किया |

ऐसा माना जाता है कि परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन होने के कारण, ब्राह्मणों को क्षत्रियों के अत्याचार से बचाने, इनके अद्भुत दानवीरता के कारण अक्षय तृतीय का पर्व मनाया जाता है | यह अक्षय तृतीय उस वीर के शौर्य की गाथा भी कहती है |

जैन धर्म में अक्षय तृतीया की कथा 

जैन धर्म में अक्षय तृतीया का बड़ा महत्व है | इस दिन अपनी छह मास की तपस्या पूरी करने के बाद पहले तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ ने गन्ने का रस पिया था | उस दिन की स्मृति में ही जैन धर्म में हर साल अक्षय तृतीया को इक्षु तृतीया के रूप में मनाया जाता है | अक्षय तृतीया के दिन मंदिरों में गन्ने के रस से अभिषेक किया जाता है और अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है |

अक्षय तृतीया के दिन क्या दान में देना चाहिए (Akshaya Tritiya Ke Din Kya Daan De)

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) इस पूजन विधि से पाए अत्यधिक फल

अपने सामर्थ्य के अनुसार घट, छाता, नमक, सत्तू, दही, चावल, गुड और नए वस्त्र दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है | इस दिन भंडारा से भी खूब पुण्य प्राप्त होता है | श्रीमद्भागवत में भी इस बात का उल्लेख है, औषधीयनामहं भाव:, अर्थात फसल कटने के बाद भी मेरा रूप उसमें विद्यमान है | इसलिए जो मनुष्य इस दिन दान करता है उसका घर हमेशा धन – धान्य से भरा रहता है | ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन जिन – जिन वस्तुओं का दान किया जाता है वह समस्त वस्तुए अगले जन्म में प्राप्त होती है |

अक्षय तृतीया का महत्व (Akshaya Tritiya Importance in Hindi)

ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन दान – पुण्य और सत्कर्म करने से अत्यधिक फल प्राप्त होता है | यह दिन सोना – चाँदी, सम्पत्ति खरीदने और गृह प्रवेश के लिए शुभ माना जाता है | यह दिन अबूझ सावे के रूप में भी माना जाता है, जिससे इस दिन शादियों की भी धूम रहती है |

किसानों के लिए भी अक्षय तृतीया का पर्व विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस महीने में जौ और गेहूँ की फसल कटकर घर में आ जाती है | इसकी खुशी में किसान व्रत रखते है व हर्षोल्लास से इस पर्व को मनाते है |

कहते है कि यह तिथि सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो किए गए दान, जप – तप का फल अत्यधिक बढ़ जाता है और इस बार तो 29 अप्रैल का अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) में रोहिणी नक्षत्र का योग है इस वजह से इस दिन अमृत योग बन रहा है | अत: इस दिन सत्कर्म, अच्छा आचरण और खूब दान – पूर्ण करें |

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12 thoughts on “अक्षय तृतीया (अक्षय तीज) व्रत पूजा विधि और कथा – Akshaya Tritiya Vrat Pooja Vidhi in Hindi”

  1. अक्षय तृतीया के बारे में बहुत ही अच्छी जानकारी share की है आपने। आध्यात्म से जुड़ा बहुत ही उम्दा लेख है। Share करने के लिए धन्यवाद। 🙂

  2. बबिता, अक्षय तृतिया तो सालों से मनाते आ रहे है लेकिन इसकी कहानी आज ही पढ़ी। शेयर करने के लिए धन्यवाद।

  3. नमस्ते
    बहुत अच्छी तरह से लिखा और दिलचस्प ब्लॉग साझा करने के लिए धन्यवाद !!

  4. Akshaya tritiya पर आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है पूजन बिधि को आपने बहुत ही सुन्दर तरिके से प्रस्तुत किया है इसके लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद बबिता जी

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