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गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं – Pregnancy Diet in Hindi

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को क्या खाना चाहिए क्या नहीं -Pregnancy Diet In Hindi

Pregnancy Diet In Hindi

Pregnancy Diet In Hindi – गर्भावस्था प्रत्येक स्त्री के लिए रहस्य और रोमांच से भरी अवस्था होती है । ये अवस्था स्त्री को मातृत्व का गौरव प्रदान करती है और हर दंपत्ति के जीवन की महत्वपूर्ण आकांक्षा और उपलब्धि होती है । लेकिन क्या आप जानते है कि गर्भावस्था में शिशु का शारीरिक स्वास्थ्य और वृद्धि गर्भवती स्त्री के आहार से प्रभावित होता है ? दरअसल गर्भवती जो भोजन खाती है उसी से गर्भस्थ शिशु अपनी खुराक पाता है । इस प्रकार गर्भावस्था केवल महिला के लिए ही नहीं गर्भस्थ शिशु के लिए भी अति महत्वपूर्ण अवस्था है । इसलिए गर्भवती स्त्री और गर्भस्थ शिशु दोनों के समुचित विकास के लिए गर्भावस्था की प्रारंभिक अवस्था से ही भली प्रकार से आहार आयोजन की जरुरत होती है ।

प्रेगनेंसी डाइट के संबंध में ये भ्रामक अवधारणा है कि यदि गर्भावस्था में कम से कम आहार खाना चाहिए, इससे भ्रूण छोटा होगा और प्रसव में कोई परेशानी नहीं होगी । किन्तु ये गलत है । इसके अलावा कुछ महिलायें गर्भावस्था में आवश्यकता से अधिक आहार खाने लगती है जिससे सुगर और मोटापा जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है और ये दोनों गर्भावस्था के समय बहुत हानिप्रद होता है । इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान आहार का चयन करते समय बहुत अधिक सावधानी की आवश्यकता होती है ।

गर्भवती महिलाओं के लिए गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार का चयन (Very Importance Balance food diet For pregnancy in Hindi)

Pregnancy Diet In Hindi
Pregnancy Diet In Hindi

गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था साधारण अवस्था की अपेक्षा आहार में पोषक तत्वों की अधिक आवश्यकता होती है | इसलिए ऐसी अवस्था में पोषक तत्वों की वृद्धि के लिए प्रतिदिन के हिसाब से प्रेगनेंसी डाइट इस प्रकार से होनी चाहिए –

गर्भावस्था के मुख्य आहार (Diet For Pregnancy In Hindi)

अनाज – 350 ग्राम

दालें –    50 – 75 ग्राम

घी, तेल – 30 – 40 ग्राम

दूध –   1 लीटर

शक्कर – 50 ग्राम

सब्जियां – 250 ग्राम

फल –  500 ग्राम

मांस – 50 ग्राम

अंडा – एक या दो

जब बच्चा गर्भ में 5 – 6 माह का हो जाता है तब उसकी वृद्धि बड़ी तीव्र गति से होती है |अत: उस समय गर्भवती को कुछ आहार निम्नलिखित अनुसार देने चाहिए –

प्रोटीन –  75 %

कैल्शियम –  70 %

खनिज लवण –  75 %

कैलोरी (Calorie)

गर्भावस्था में शरीर व वजन में वृद्धि होने के कारण कैलोरी की मांग में भी वृद्धि हो जाती है । पर गर्भावस्था के पहले, दूसरे महीने या फिर शुरुआती दिनों में गर्भ में पल रहा शिशु बहुत छोटा होता है इसलिए इन महीनों में महिला को उतनी कैलोरी की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन गर्भावस्था के तीसरे महीने के बाद से शिशु का वजन बढना आरम्भ हो जाता है और महिला की कैलोरी मांग में भी वृद्धि हो जाती है ।

गर्भावस्था में कलौरी की इन बढ़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए महिला को खाने में अतिरिक्त 300 किलो – कैलोरी की आवश्यकता होती है जो की उसना चावल, सम्पूर्ण गेहूँ का आटा, सूजी, सेब, केला, बादाम, पनीर दूध, दही, खोया, छैना, आलू , सोयाबीन, राजमा आदि को खाने से पूरा हो सकता है ।

प्रोटीन (Protein)

गर्भावस्था में अतिरिक्त प्रोटीन गर्भस्थ शिशु की कोशिकाओं के निर्माण व गर्भवती के शरीर की टूट – फूट की मरम्मत एवं नये तंतुओं के निर्माण हेतु अति आवश्यक होता है । एक साधारण महिला की अपेक्षा pregnant women को अपने diet में 15 ग्राम अतिरिक्त प्रोटीन लेना चाहिए क्योंकि उसे सम्पूर्ण प्रेगनेंसी में  900 – 950 ग्राम तक प्रोटीन की आश्यकता होती है ।

इस अवधि में ज्यादा प्रोटीन वाले आहार जैसे दाल, सूखे मेवे, मांस – मछली, अंडा, दूध, पनीर, दही तथा सोयाबीन आदि खाद्य पथार्थों को खाना चाहिए | सोयाबीन में सर्वाधिक प्रोटीन (42%) मिलता है । Vegetarian Mothers के लिए सोयाबीन का सेवन करना उत्तम विकल्प हो सकता है ।

कैल्शियम फ़ॉस्फोरस 

गर्भावस्था के चौथे माह में गर्भस्थ शिशु के दांत बनने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है । इसलिए शिशु के दांतों और हड्डियों के निर्माण के लिए गर्भवती को अतिरिक्त कैल्शियम और फ़ॉस्फोरस की भोजन में आवश्यकता होती है क्योंकि इनकी कमी होने पर शिशु इसे गर्भवती के शरीर में जमा कैल्शियम और फ़ॉस्फोरस से लेने लगता है जिसका प्रभाव गर्भवती के शरीर पर पड़ता है ।

अगर गर्भवती के शरीर में जमा कैल्शियम और फ़ॉस्फोरस कम हो जाता है तो दांत व अस्थियाँ कमजोर होने लगती है और ऐसे में गर्भवती महिला की Oesteomalacia रोग हो जाता है । इसलिए गर्भवती स्त्री को प्रतिदिन 1.0 ग्राम कैल्शियम जरुर लेना चाहिए ।

अतिरिक्त कैल्शियम और फ़ॉस्फोरस का उपभोग करने के लिए जरुरी है कि भोजन में दूध, पनीर, दही, छाछ, खीर, दूध से बने भोज्य – पदार्थ सम्मिलित हो | इसके अलावा सेम, शलजम, बंदगोभी, हरी पत्तेदार सब्जियां , अंडा , धनिया , पत्तागोभी , फूलगोभी आदि भी भोजन में शामिल करना चाहिए ।

लोहा (Iron)

प्रेगनेंसी में शरीर में रक्त और हिमोग्लोबिन के निर्माण के लिए लोहा (Iron) आवश्यक होता है । गर्भवती में इसकी कमी होने से रक्ताल्पता नामक बीमारी हो जाती है । आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जब बच्चा जन्म लेता है तो उसके शरीर में 6 माह तक के लिए लोहा (Iron) संग्रहित रहता है । वैज्ञानिक शोधों एवं अनुसंधानों के अनुसार एक शिशु जब जन्म लेता है तो उसके शरीर में 300 mg लोहा संग्रहित होता है | यह लोहा (Iron) बच्चा माँ से अवशोषित करके संग्रहित करता है ।

इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती को लौह – तत्वों से पूर्ण भोजन खाना करना चाहिए । अगर गर्भवती ने पूरक आहार के माध्यम से लोहा (Iron) ग्रहण नहीं किया तो रक्ताल्पता की शिकार हो जाती है ।गर्भवती माँ को गर्भावस्था की सम्पूर्ण अवधि में 540 mg अतिरिक्त लोहे (Iron) लेना चाहिए ।

गर्भवती महिलाओं को लोहा भोजन की कमी हरी पत्तेदार सब्जियां, शलजम, केला, यकृत, गुड, पालक, बथुआ, अंडे की जर्दी, हल्दी आदि भोज्य पदार्थों से पूरा करना चाहिए

विटामिन (Vitamins) 

गर्भवती महिला में विटामिन (Vitamins) की कमी के कारण रोग के कीटाणुओं से लड़ने की क्षमता लगभग नष्ट हो जाती है । इसलिए माँ और शिशु को रोगों से बचाने के लिए व शरीर की विभिन्न क्रियाओं को संपन्न करने के लिए अतिरिक्त विटामिन्स की आवश्यकता होती है । निम्न विटामिन गर्भवती महिला के लिए बेहद जरुरी होते है :

विटामिन ए (Vitamins A) – अन्य पौष्टिक तत्वों की तरह ही विटामिन ए शिशु माँ के शरीर से संग्रहित करता है अत: गर्भवती को आहार में प्रतिदिन 25 ug रेटिनॉल विटामिन ए सम्मिलित करना आवश्यक है क्योंकि इसकी कमी से रतौधी हो सकती है ।

विटामिन डी (Vitamins D) – विटामिन डी कैल्शियम तथा फास्फोरस के लिए अति आवश्यक है ।विटामिन डी की पूर्ति सूरज की पराबैगनी किरणों से होती है लेकिन घर में रहने वाली महिलाओं को इनकी मांग को आहार जैसे दूध का पाउडर, अंडे की जर्दी, मांस, यकृत, वसायुक्त  मछलियाँ, कॉड लीवर ऑयल, से पूरा करना चाहिए ।

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विटामिन सी (Vitamins C) – गर्भवती महिलाओं को आहार में विटामिन C को जरुर खाना चाहिए क्योंकि गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए विटामिन सी बहुत महत्वपूर्ण है । यह शरीर में कोलेजन का निर्माण करता है और कोलेजन शरीर के ऊतको तथा कोशिकाओं को जोड़ने का काम करता है जैसे दांत, अस्थि आदि ।

थायमिन (Thiamine)

यह विटामिन गर्भवती को बेरी – बेरी रोग से सुरक्षा प्रदान करता है । यह साबुत अनाज में पाया जाता है । शुष्क खमीर में भी यह सर्वाधिक मात्रा में पाया जाता है ।

Pregnancy Diet In Hindi
Pregnancy Diet In Hindi

इसकी प्राप्ति के लिए गर्भवती महिला को भोजन में दाल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, सूखे मेवे, मांस, मछली, यकृत, मूंगफली, साबुत मोठ आदि को भी पर्याप्त मात्रा में खाना चाहिए है ।

राइबोफ्लेविन (Riboflavin) 

गर्भवती महिला के शरीर में इस विटामिन की कमी से ए राइबोफ्लेविनोसिस (A Riboflavinosis) रोग होता है । A Riboflavinosis का लक्षण होठो के किनारे की त्वचा का फटना, मुँह में छाले पड़ना, नाक के पास दाने उभरना, आँखों से पानी गिरना, आँखों में जलन एवं खुजली होना आदि है ।

राइबोफ्लेविन (Riboflavin) के लिए गर्भवती महिला को आहार में चोकर सहित गेहूं का आटा, खमीर, दूध, पनीर, यकृत, अंडा, पॉलिश रहित चावल, , बाजरा, सोयाबीन, चना, सूखे मटर, नारियल, आलू, अंकुरित चना, आदि खाना चाहिए  है ।

फोलिक अम्ल (Folic Acid)

गर्भावस्था में फोलिक अम्ल खाना जरुरी है क्योंकि यह विटामिन मेगालोब्लास्टिका रक्ताल्पता (Megaloblastic Anaemia) से सुरक्षा करता है फोलिक एसिड हरे पत्तेदार सब्जियों, यकृत, गुर्दे, गेहूँ की मिंगी, खमीर, साबुत अनाज, मूंगफली तिल, भिंडी आदि भोज्य – पदार्थों में फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है

नियासिन (Niacin)

नियासिन की गर्भवस्था में अत्यन्त आवश्यकता होती है | यह गर्भस्थ शिशु के वृद्धि एवं विकास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । प्रेगनेंसी में इसकी कमी होने से पाचन सम्बन्धी, त्वचा सम्बन्धी तथा नाडी सम्बन्धी विकार उत्पन्न होने लगते है ।

विटामिन बी12 (Vitamin B12)

गर्भावस्था में Pernicious Anaemia से बचाव के लिए Vitamin B12 अत्यन्त आवश्यक होता है ।गर्भवती महिला में इसकी कमी होने से रक्त में लाल रक्त कणिकाओं (RBC) की मात्रा सामान्य से कम होने की सम्भावना बढ़ काफी जाती है ।

विटामिन बी12 की कमी न हो इसके लिए आहार में दूध, दही, अंडा, मांस, मछली, यकृत, पनीर, छाछ आदि को शामिल करें । ध्यान रहें विटामिन बी12 केवल प्राणिज भोज्य – पदार्थों में ही पाया जाता है ।भेड़ व बकरी के यकृत में सबसे अधिक विटामिन बी12 (Vitamin B12) उपस्थित रहता है ।

रफेज (Rouhage) 

प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज की शिकायत आम बात है लेकिन आहार में रफेज (Rouhage) युक्त भोज्य – पदार्थ को शामिल कर इस समस्या को दूर किया जा सकता है | रफेज (Rouhage) की पूर्ति के लिए छिलकेदार दाल, चोकर सहित आटा, अंकुरित चना, हरी पत्तेदार सब्जियों, छिलके सहित फल प्रचुर मात्रा में खाने चाहिए ।

जल एवं तरल पदार्थ (Water and Liquids)

पौष्टिक आहार के साथ – साथ प्रेगनेंसी में तरल पदार्थों की भी आवश्यकता होती है । दिन – भर में कम से कम 7 – 8 गिलास पानी पीना चाहिए | यदि गर्मी का मौसम हो तो जल की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए ।

Diet For Pregnancy In Hindi
Diet For Pregnancy In Hindi

जल के अलावा फलों के रस सब्जियों के सूप, शर्बत, छाछ, आदि को भी अपने दैनिक आहार में सम्मिलित करना चाहिए ।

गर्भवती महिला के आहार का चुनाव करते समय कुछ बातों को ध्यान में रखना भी अत्यंत आवश्यक होता है –

–>गर्भावस्था के दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन्स, खनिज लवण युक्त पदार्थों को कार्बोहाइड्रेट और वसा की अपेक्षा अधिक महत्व देना चाहिए । ये गर्भवती और शिशु दोनों के स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है ।

–> जहाँ तक संभव हो, प्रेगनेंसी के दौरान खाने में विभिन्नता और परिवर्तन का ध्यान रखना चाहिए ।

–> ध्यान रखे भोजन पकाने में पोषक तत्वों की न्यूनतम क्षति हो ।

–>  भोजन करते समय मानसिक स्थिति चिन्तारहित तथा प्रसन्नचित हो ।

–> रात्री को सोने से दो – तीन घंटे पूर्व भोजन कर लेना चाहिए ।

हर गर्भवती महिला कि यह इच्छा होती है कि वह एक तंदुरुस्त बच्चे को जन्म दें । कई स्त्रियां ऐसी भी है जिन्हें लगता है कि प्रेगनेंसी के दिनों में कुछ विशेष आहार या फ्रूट को खानपान में शामिल करने से बच्चा गोरा पैदा होता है ।

लेकिन सच तो यही है कि ऐसा कोई आहार नहीं जिसे खाने से बच्चा गोरा पैदा हो । इसलिए एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए प्रत्येक pregnant women के लिए आहार में जितना जरुरी इस बात की जानकरी होना है कि प्रेगनेंसी में क्या खाए उतना ही जरुरी यह जानना भी है कि प्रेगनेंसी में क्या नही  खाना चाहिए ।

प्रेगनेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए (Grrbhavastha me kya nahi khana chahiye)

–> गर्भवती महिला को बासी एवं अधिक मिर्च – मसालेदार खाना खाने से परहेज करना चाहिए

–> बाजार के खुले में बिक रहें खाने से परहेज करें । यह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है ।

–> खाना खाते समय अधिक मात्रा में पानी नहीं पीना चाहिए | पानी खाना खाने के एक घंटे के बाद ही पीना चाहिए ।

–> अधिक पके हुए फल भी नहीं खाने चाहिए ।

–> कठिनता से पचने वाले आहार नहीं खाना चाहिए

–> गेहूं का छना आटा नहीं खाना चाहिए

–> मशीन से कुटे चावल खाने से परहेज करना चाहिए

–> गर्भवती महिलाओं को चाक, मिट्टी, बालू, ईट का चूरा आदि खाने का मन करता है लेकिन इन्हें हरगिज न खाए यह आपके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है

गर्भवती महिला को एक सामान्य स्त्री की तुलना में अधिक पौष्टिक खाना खाने की जरुरत होती है । यदि उसे पौष्टिक खाना नही मिलता है तो निम्न समस्याएँ पैदा हो सकती है –

–> शिशु का वजन जरूरत से ज्यादा कम होना ।

–> समय से पूर्व ही प्रसव हो जाना ।

–> माँ और बच्चे दोनों के जीवन पर संकट होना ।

–> अस्वस्थ शिशु का जन्म होना ।

आपने यह तो सुना ही होगा कि अभिमन्यु ने कैसे चक्रव्यूह की रचना व उसे तोड़ना सुभद्रा के गर्भ में ही सिख लिया था

इसलिए स्वस्थ रहकर एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म देने के लिए आपको प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए की जानकारी के साथ समय – समय पर डॉक्टर के परामर्श अनुसार सेहत की सही देखभाल करनी चाहिए ताकि आप और आप का बच्चा दोनों स्वस्थ रहें ।

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18 thoughts on “गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं – Pregnancy Diet in Hindi”

    1. धन्यवाद Kumar जी । गर्भावस्था मे महिलाओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है । जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ जाती है ।

  1. गर्भावस्था में मॉ और बच्चे दोनों का सही तरीक़े से देखभाल होना चाहिए,क्यों कि सही देखभाल से ही एक स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है ,जो सभी लोगों के लिए बहुत ही ज़रूरी होता है, बबिता जी आपने गर्भावस्था में क्या खान चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए यह बहुत ही अच्छे से समझाया है ,जो सभी गर्भवती मॉ के लिए उपयोगी है।

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