उपभोक्ता दिवस
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उपभोक्ता दिवस: उपभोक्ता जागरूकता ही एकमात्र हथियार (Essay on Consumer Day in hindi)

विश्व उपभोक्ता दिवस पर निबन्ध – World Consumer Day Essay in hindi

Vishva Upbhokta Diwas 15 March / विश्व उपभोक्ता दिवस 15 मार्च / World Consumer Day 15 March : दोस्तों पिछले दिनों मैंने facebook पर बहुत ही interesting newspaper cutting पढ़ी जिसे मैं आप से share कर रही हूँ। उस newspaper cutting में लिखा था कि नोएडा में रहने वाले प्रवीण प्रजापति एक semi – government company में कार्यरत है। उन्होंने Religare Health Insurance से जब insurance policy ली थी तो उस समय company representative ने उनसे बड़े बड़े वादे किये थे।

उपभोक्ता दिवस और राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण कानून

एक दिन अचानक उनकी wife की तबियत बिगड़ गई और doctors ने chicken gunia + के लक्षण identify होने पर उन्हें hospital में भर्ती करा दिया। Hospital से wife के discharge होने के बाद प्रवीण जी ने इलाज में हुए खर्चों के लिए कंपनी से mediclaim reimbursement माँगा तो Health Insurance Company ने policy holder को hospital में admit होने के बावजूद भी mediclaim की राशि देने से मना कर दिया।

Doctors के सभी justifications प्रवीण जी ने company को submit किए थे लेकिन तब भी Health Insurance Company ने उनका claim reject कर दिया। उन्होंने कंपनी को कई बार customer – care number पर बात की, application लिखें तथा company के local office के चक्कर काटें लेकिन फिर भी उनकी बात नहीं सुनी गई।

प्रवीण ने इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखे थे। उसे लेकर वे स्थानीय जिला उपभोक्ता फोरम गए और शिकायत पत्र के साथ सभी दस्तावेज जमा कर दिए। उपभोक्ता फोरम में कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सुनवाई हुई। सभी दस्तावेजों को देखने के बाद फोरम ने कंपनी को सेवा की कमी का दोषी पाया।

प्रवीण को इलाज खर्च के पैसे न देने और टालमटोल करने के लिए फोरम ने कंपनी को एक लाख 60 हजार रूपए नौ फीसदी ब्याज की दर से एक माह के अन्दर भुगतान करने का फैसला सुनाया।

यह कहानी सिर्फ प्रवीण की नहीं है बल्कि प्रवीण जैसे बहुत से लोगों की है। यह सच है कि आज के भौतिकवादी परिवेश में उपभोक्ता बाजार के विकास के साथ ही उद्यमियों या व्यापारियों द्वारा अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए न केवल उपभोक्ता के हितों की अनदेखी की जाने लगी है बल्कि उसे ठगने का प्रयास भी किया जाने लगा है।

विश्व उपभोक्ता दिवस पर लेख / Hindi Essay on Vishwa Upbhokta Diwas

उपभोक्ता फोरम

ऐसे में नीति – निर्धारकों द्वारा उपभोक्ता के संरक्षण के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून का गठन किया गया। ताकि उद्यमियों या व्यापारियों द्वारा उपभोक्ता के हितों की अनदेखी न की जा सके | यह किसी एक देश में नहीं बल्कि संसार के अनेक देशों में लागू की गयी व्यवस्था है। उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो इसिलए प्रतिवर्ष 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता दिवस (Vishva Upbhokta Diwas) का आयोजन किया जाता है।

उपभोक्ता दिवस विशेष : उपभोक्ता संरक्षण कानून क्या है ?

उपभोक्ता संरक्षण कानून जन हित का एक सार्थक प्रयास है। इसका निर्माण उपभोक्ताओं की हितों की रक्षा के लिए, उन्हें जागरूक करने के लिए और उन्हें न्याय दिलाने के लिए बनाया गया एक कानून है।

सुई से लेकर हवाई जहाज तक, होटल से लेकर हॉस्पिटल तक, गलत विज्ञापन या जनता को भ्रमित करने वाले विज्ञापन, इलेक्ट्रोनिक उपकरण व insurance sector सहित तमाम क्षेत्र उपभोक्ता फोरम की परिधि के में आते है। कोई भी व्यक्ति अगर उसके साथ गलत हुआ है तो उपभोक्ता फोरम में अपने साथ हुए ठगी की शिकायत कर सकता है। उपभोक्ता फोरम में किसी भी तरह के मुकदमे का निपटारा नियमत: 90 दिनों के अंदर करने का प्रावधान है।

उपभोक्ता संरक्षण दिवस : विश्व उपभोक्ता दिवस कब मनाया जाता है 

उपभोक्ता संरक्षण कानून की स्थापना सर्वप्रथम अमेरिका में हुआ था। वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति कैनेडी चाहते थे कि उपभोक्ता अपने हितों के प्रति जागरूक हो। इसके लिए 15 मार्च 1962 को उन्होंने उपभोक्ता अधिकारों को ‘बिल ऑफ राइट्स’ (Bill of Rights) में सम्मिलित करने की घोषणा की और ‘उपभोक्ता सुरक्षा आयोग’ का गठन किया। उपभोक्ताओं को यह अधिकार क्रमश: सुरक्षा, सूचना, चयन एवं सुनवाई के संबंध में दिए गए थे। तभी से प्रतिवर्ष 15 मार्च को ‘विश्व उपभोक्ता दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा।

अमेरिका के बाद ब्रिटेन ने भी 1973 में उचित व्यापार अधिनियम पारित किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने उपभोक्ता के अधिकारों में तीन अतिरिक्त अधिकार क्रमश: क्षतिपूर्ति का अधिकार, उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार, एवं स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार इस श्रृंखला में सम्मिलित कर दिया। उपभोक्ता के हितों की रक्षा के लिए यह एक और महत्वपूर्ण कदम था। फलस्वरूप संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ तथा कई अन्य विकसित देशों ने उपभोक्ता हितों के संरक्षण के लिए दिशा – निर्देश जारी किये।

विकसित राष्ट्रो ने उपभोक्ता संरक्षण कानून की स्थापना कर जागरूकता का परिचय दिया। इसी क्रम में विकासशील देशों ने भी उपभोक्ता के हितों के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून की व्यवस्था लागू की। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण है विश्व भर में प्रतिवर्ष 15 मार्च को ‘विश्व उपभोक्ता दिवस’ का आयोजन।

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस : भारत में उपभोक्ता संरक्षण कानून (Consumer Protection Act) की स्थापना

24 दिसम्बर 1986 में भारतीय संसद द्वारा ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ (Consumer Protection Act) पारित किया गया। यह कानून जम्मू और कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण देश में लागू किया गया। इसका उद्देश्य देश में उपभोक्ता के हितों को सुरक्षा एवं संरक्षा प्रदान करना है। चुकी 24 दिसम्बर को ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ पारित हुआ था इसलिए भारत सरकार ने 24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में घोषित किया।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत उपभोक्ता संरक्षण परिषदों का गठन किया गया। सबसे पहला राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद की स्थापना दिल्ली में की गयी।

भारत में बढ़ते बाजारवाद के दौर में बेशक उपभोक्ता संस्कृति में बढ़ोत्तरी हुई लेकिन अभी भी उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी है। वस्तुओं में मिलावट, दूसरों को धोखा देकर अपना उल्लू सीधा करना, व्यापारियों द्वारा अधिकाधिक मुनाफा कमाने के लिए अनैतिक तरीकों को अपना कर ठगना, तथा भ्रामक एवं मिथ्या विज्ञापनों के द्वारा लोगों को बेवकूफ बनाने की प्रवृत्ति बहुत बढ़ गई है।

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ऐसे में उपभोक्ता को अनेक दिक्कतों व परेशानियों का सामना करना पड़त रहा था। उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए ही 24 दिसम्बर 1986 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 लागू किया गया तथा अन्य राज्यों में भी इनकी इकाईयों का गठन किया गया।

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस : केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद की सदस्य संख्या तथा कार्य-काल

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्ररिषद के इकाईयों की सदस्य संख्या 150 होती है। ये सदस्य वित्त, राजनीति, व्यापार, उद्द्योग, कृषि, लेखांकन आदि क्षेत्रों से चयनित होते है और उपभोक्ता सम्बंधी मामलों के विशेषज्ञ होते है। परिषद का कार्य-काल 3 वर्ष का होता है।

24 दिसम्बर : राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस  

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को उपभोक्ता के लिए और अधिक सरल तथा सुगम बनाने के लिए 1993 व 2002 में महत्वपूर्ण संसोधन किए गए। इस संसोधित अधिनियम को 15 मार्च 2003 से लागू कर दिया गया। क्योंकि भारत के राष्ट्रपति ने  24 दिसम्बर 1986 के दिन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को स्वीकार था इसलिए भारत 24 दिसम्बर 2000 से राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में मनाया जाना लगा।

उपभोक्ता संरक्षण परिषद की विशेषता

–> उपभोक्ता संरक्षण परिषद का मूल उद्देश्य उपभोक्ता के अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सरकार को समय – समय पर परामर्श देना है।

–> उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम तीन स्तरों पर अर्धंन्यायिक अभिकरणों के द्वारा जनता के हितों के लिए कार्य करता है। जिसमे पहला जिला मंच, दूसरा राज्य आयोग और तीसरा राष्ट्रीय आयोग है। इनका उद्देश्य उपभोक्ता के हित में त्वरित एवं सस्ता न्याय प्रदान करना।

–> इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे समय व पैसे दोनों की बचत होती है और उपभोक्ता को व्यर्थ में इधर – उधर भटकना नहीं पड़ता है।

–> जिला मंच का गठन राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर प्रत्येक राज्य में किया जाता है। जिले में इनकी सख्यां एक या एक से अधिक भी हो सकती है। जिला उपभोक्ता मंच 5 लाख रूपए तक की लागत वाली क्षति – पूर्ति के मामलों की सुनवाई करता है। यहाँ सुनवाई करने के लिए आपको किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होता है।

–> दूसरा अर्धंन्यायिक अभिकरण राज्य आयोग होता है। इसका अध्यक्ष उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होता है। न्यायाधीश के अतिरिक्त एक महिला सदस्य तथा दो अन्य सदस्यों की न्युक्ति की जाती है। राज्य उपभोक्ता आयोग 5 लाख से 20 लाख तक की लागत वाली सेवाओं तथा क्षति-पूर्ति के मामलों की सुनवाई कर सकता है।

–> तीसरा और अंतिम संस्था राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग है। इसका गठन केंद्रीय सरकार द्वारा नई दिल्ली में उच्चतम न्यायलय के किसी न्यायाधीश की अध्यक्षता में किया जाता है। इसके अंतर्गत 20 लाख रुपए से अधिक तक की लागत वाली सेवाओं तथा क्षति-पूर्ति के मामलों की सुनवाई की जाती है।

जागरूकता ही उपभोक्ता का हथियार

भारत में उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 के अंतर्गत सुई से लेकर हवाई जहाज तक सभी उपभोक्ता कानूनों की परिधि में आते है। जो उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है उन्हें जागों ग्राहक जागो का नारा न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे उपभोक्ता है जो यह अनुभव तो करते है कि उन्हें लूटा जा रहा है अथवा उनके अधिकारों का हनन हो रहा है लेकिन जानकारी के अभाव में आयोग तक पहुंचने से कतराते है।

कई लोगों को लगता है कि सामान्य मुकदमों की तरह ही यहाँ पर भी पैसे और समय की बर्बादी ही होगी तो यह सोच गलत है। ऐसी सोच रखने वालों के लिए ही विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस के आयोजन के द्वारा उपभोक्ता को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है।

अगर आप अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है तो आप को न्याय और हर्जाना दिलाने में उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) पूरी मदद करेगा है। यदि किसी उत्पाद को खरीदने के बाद आप उससे असंतुष्ट है और आप अपना मूल्य हर्जाने के तौर पर वसूलना चाहते है तो उपभोक्ता फोरम में शिकायत करके हर्जाने की मांग कर सकते है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए उपभोक्ता फोरम में शिकायत कर सकता है | इसके लिए बस आपको अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरुरत है।

विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस

उपभोक्ता के अधिकार एवं कर्त्तव्य

अगर जागरूक हो उपभोक्ता तो नहीं होगी कोई समस्या। इसलिए हर उपभोक्ता को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के बारे में जानना बहुत जरुरी है।

क्या है उपभोक्ता के अधिकार

  • आपको हर सामान की खरीद की रसीद लेने का अधिकार ।
  • चुनने का अधिकार : आपको अपनी सुविधा अनुसार सामान का चयन करने का अधिकार है ।
  • पैकिंग वाली वस्तुओं का मूल्य उस वस्तु पर printed होना चाहिए । यदि उस वस्तु पर अलग से अधिक मूल्य का स्टीकर लगाया गया है तो आपको इसकी शिकायत करने का अधिकार है ।
  • सामान अथवा सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, क्षमता, शुद्धता, स्तर और मूल्य की जानकारी रखने का अधिकार ।
  • सूचना पाने का अधिकार : आपको खरीदे गए सामान अथवा सेवाओं के संबंध में सूचना पाने का पूरा है अधिकार ।

उपभोक्ता फोरम में आप निम्न खाद्य पदार्थों में मिलावट की भी कर सकते हैं शिकायत

  • दूध से मलाई निकालकर बेचने पर ।
  • गलत विज्ञापनों के द्वारा गुमराह करने पर ।
  • मूल्य से अधिक एमआरपी का निर्धारण करने पर ।
  • गारंटी और वारंटी की शर्तो को पूरा न करने पर ।
  • त्रुटिपूर्ण सामग्री वाली वस्तुओं की आपूर्ति करने पर ।
  • पैकेट पर दी गई जानकारी से अलग वस्तु पैकेट के अन्दर होने पर ।

उपभोक्ता Helpline Number पर कर सकते है शिकायत

उपभोक्ताओं की मदद के लिए केंद्र एवं राज्य स्तर पर दो हेल्पलाइन संचालित की गयी है। आप अपनी समस्याओं की शिकायत इन हेल्पलाइन नंबरों के द्वारा भी कर सकते है । राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर है 1800 – 11 – 4000 । इस नंबर पर फोन करके आप कोई जानकारी, सुझाव या फिर अपनी शिकायत के लिए मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते है । साथ ही +918130009809 पर SMS भेज कर भी सहायता प्राप्त कर सकते है ।

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस

क्या है उपभोक्ता के कर्तव्य

  • किसी भी सामान की खरीदारी करते समय सावधानी बरतना आपका कर्तव्य है ।
  • विभिन्न आधारभूत पहलुओं जैसे वस्तु की MRP , Hallmark (हॉलमार्क), ISI mark (आइएसआइ का निशान), expiry date आदि के बारे में जानकारी रखना आपका कर्तव्य है ।
  • मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ आवाज उठाना आपका कर्तव्य है ।
  • सबसे अहम् और महत्वपूर्ण आपका अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना भी आपका कर्तव्य है ।

ख्याल रखें

ख्याल रखें वर्तमान में धोखा देकर अपना उल्लू सीधा करने वालों की कमी नहीं है । इसलिए आपको अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना बहुत जरुरी है । आपकी जागरूकता पर ही सबकुछ निर्भर करता है | कई बार लोग सामान तो खरीद लेते है पर दुकानदार से रसीद लेना जरुरी नहीं समझते है । बाद में इसकी वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । इसलिए जब भी आप कोई महत्वपूर्ण खरीदारी करें तो उसकी रसीद जरुर लें । अगर आप जागरूक होकर इन छोटी – छोटी बातों का ख्याल रखेंगे तो आप असुविधाओं से सुरक्षित रहेंगे ।

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33 thoughts on “उपभोक्ता दिवस: उपभोक्ता जागरूकता ही एकमात्र हथियार (Essay on Consumer Day in hindi)”

  1. बहूत ही अच्छा लेख मुबारक हो ऐसे ही लिखती रहे |

  2. विस्तृत और महत्वपूर्ण जानकारी … अपने देश में इस बात की जागरूकता इतनी नहीं है … पर प्रयास होते रहने से जागरूकता जरूर आएगी …

  3. बहुत महत्वपूर्ण जानकारी share की है हमें अपने अधिकारों के बारे में जरुर मालूम होना चाहिए .

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